कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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पीएमकेवीवाई की प्रगति

प्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 4:02PM by PIB Delhi

भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (एसआईएम) के अंतर्गत कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं जैसे कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा देश भर के समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। कौशल भारत मिशन का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है।

 

देश में कौशलोन्नयन पारितंत्र को बढ़ावा देने के लिए, उद्योग की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और कौशल प्रशिक्षण तक पहुंच बढ़ाने के लिए, एमएसडीई ने अन्य बातों के साथ साथ  निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण ( टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियम और मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है। एनसीवीईटी उद्योग निकायों को अवार्डिंग बोडीस (एबीज) और/या मूल्यांकन एजेंसियों (एएज) के रूप में मान्यता देता है।
  • अवार्डिंग बोडीस से यह अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार चिन्हित व्यवसायों के साथ संरेखित करें तथा उद्योग से मान्यता प्राप्त करें। एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 10209 योग्यताओं को मंजूरी दी है, जिनमें से 2975 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं तथा 7234 योग्यताएं संग्रहीत हैं।
  • एमएसडीई की विभिन्न योजनाओं के तहत, आवश्यक गुणवत्ता वाले प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं या अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए कार्यरत हैं। दिनांक 30.06.2026 तक पीएमकेवीवाई के तहत 13633 प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं या कार्यरत हैं और जेएसएस योजना के तहत 294 प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) के तत्वावधान में देश भर में 13856 आईटीआई और 33 एनएसटीआई हैं।
  • इसके अतिरिक्त, देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाने के लिए उन्नत आईटीआई के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल विकास एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन (पीएम सेतु) योजना शुरू की गई है। इस स्कीम का उद्देश्य हब और स्पोक मॉडल के तहत 1,000 सरकारी आईटीआई (200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई) का उन्नयन करना है, जिसमें स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल सामग्री और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसका उद्देश्य भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित पांच राष्ट्रीय आईटीआई की क्षमता बढ़ाना भी है, जिसमें कौशलीकरण के लिए क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना शामिल है, जिसमें वैश्विक साझेदारी के साथ प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
  • डीजीटी, आईटीआई के छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए उद्योगों के सहयोग से फ्लेक्सी एमओयू योजना और दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है।
  • राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए डीजीटी ने आईटी टेक और आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट, ऑटोडेस्क, एडब्ल्यूएस, शेल आदि जैसी अन्य कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। ये साझेदारियां आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक होंगी।
  • उद्योग के लिए तैयार कार्यबल को उभरते आर्थिक अवसरों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड में अहमदाबाद और मुंबई में दो (02) भारतीय कौशल संस्थान (आईआईएस) स्थापित किए गए हैं।
  • संबंधित क्षेत्रों के उद्योग जगत के नेताओं के नेतृत्व में 36 क्षेत्रीय कौशल परिषदों (एसएससी) की स्थापना की गई है, जिन्हें संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करने का दायित्व सौंपा गया है।
  • इसके अलावा, मंत्रालय द्वारा प्रमाणित उम्मीदवारों को देश भर में रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कौशल महोत्सव और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय शिक्षुता मेले (पीएमएनएएम) का आयोजन किया गया है।
  • एमएसडीई ने स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) लॉन्च किया है, जो एक एकीकृत मंच है और कौशलीकरण, शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता परितंत्र को आपस में जोड़कर जीवनभर चलने वाली सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है। स्किल इंडिया डिजिटल हब के माध्यम से, उम्मीदवार कौशल प्रशिक्षण, रोजगार और शिक्षुता के अवसरों तक पहुंच सकते हैं। प्रशिक्षित उम्मीदवारों का ब्यौरा सिद्ध पोर्टल पर उपलब्ध है, जिसके माध्यम से वे संभावित नियोक्ताओं से जुड़ सकते हैं।

 

सरकार कौशल भारत मिशन के अंतर्गत कौशलीकरण पहलों की समय-समय पर समीक्षा करती है, जिसमें नामांकन, प्रमाणन, नियुक्ति, स्वरोजगार के परिणाम और नियोक्ताओं की प्रतिक्रिया का आकलन करके रोजगार क्षमता और भविष्य के कौशल को मजबूत करने में उनकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाता है। ये समीक्षाएँ पाठ्यक्रम के निरंतर अद्यतन, उद्योग सहयोग और कार्यान्वयन पद्धतियों में सुधार का समर्थन करती हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कौशल विकास कार्यक्रम विकसित हो रही प्रौद्योगिकी प्रवृत्तियों और श्रम बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बने रहें। व्यापक कौशलीकरण योजनाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन एमआईएस-आधारित निगरानी, ​​तृतीय-पक्ष आकलन और लाभार्थियों की प्रतिक्रिया के माध्यम से भी किया जाता है।

 

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के एक स्वायत्त संस्थान, अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एजेएनआईएफएम) द्वारा पीएमकेवीवाई 4.0 का एक स्वतंत्र तृतीय-पक्षीय प्रभाव मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण ने अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) उम्मीदवारों के रोजगार परिणामों में उल्लेखनीय सुधार लाने में योगदान दिया है। प्रशिक्षण से पहले कार्यरत और स्व-रोजगार प्राप्त एसटीटी  प्रतिभागियों का संयुक्त हिस्सा 26.6% था, जो पीएमकेवीवाई प्रशिक्षण के बाद बढ़कर 45.4% हो गया, जो 18.8 प्रतिशत अंकों की वृद्धि दर्शाता है। आय संबंधी परिणाम भी सकारात्मक हैं, जिसमें 41.4% एसटीटी उम्मीदवारों और 48.9% पूर्व शिक्षा मान्यता (आरपीएल) उम्मीदवारों ने प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद आय में वृद्धि दर्ज की है। कुल मिलाकर, पीएमकेवीवाई 4.0 ने औपचारिक कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन तक पहुंच को काफी हद तक बढ़ाया है और लाभार्थियों के एक बड़े हिस्से के लिए कौशल आत्मविश्वास, रोजगार भागीदारी और आय परिणामों में उल्लेखनीय सुधार किया है।

 

पीएमकेवीवाई 4.0  कैरियर प्रगति, रोजगार क्षमता और रोजगार सृजन के लिए संरचित मार्ग प्रदान करता है। यह योजना प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के लिए एक सुदृढ़ निगरानी ढांचा, मान्यता प्राप्त और संबद्ध प्रशिक्षण केंद्र, मानकीकृत मूल्यांकन और प्रमाणन प्रक्रियाएं, तथा प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण (टीओटी) और मूल्यांकनकर्ताओं के प्रशिक्षण (टीओए) के अनिवार्य कार्यक्रम अपनाती है। इस योजना में प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी तंत्र भी शामिल हैं, जिनमें आधार/चेहरे के प्रमाणीकरण पर आधारित उपस्थिति, डिजिटल जॉब प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण और कौशल अंतराल का आकलन करने के लिए आवधिक अध्ययन और हितधारक परामर्श शामिल हैं। ये उपाय कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणाम ट्रैकिंग को बढ़ाते हैं। कुल मिलाकर, पीएमकेवीवाई 4.0 एक गुणवत्ता-उन्मुख, प्रौद्योगिकी-आधारित और बाजार से जुड़ा कौशल विकास तंत्र बन गया है, जो प्रशिक्षण परिणामों और कार्यबल की तैयारी में सुधार पर केंद्रित है।

 

यह जानकारी आज राज्यसभा में कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री जयन्‍त चौधरी द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।

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