पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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उभरते समुद्री जोखिमों के लिए नाविकों की सुरक्षा की रूपरेखा

प्रविष्टि तिथि: 21 JUL 2026 2:34PM by PIB Delhi

व्यापारी नौवहन कानून, 2025 15 मार्च 2026 से प्रभावी हो गया है। यह कानून समकालीन अंतरराष्ट्रीय समुद्री मानकों के अनुरूप भारत के समुद्री कानूनी ढाँचे का आधुनिकीकरण करता है और नाविकों की सुरक्षा, कल्याण तथा अधिकारों को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढाँचे को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करता है। इसमें परित्यक्त नाविकों के लिए वैधानिक सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, नाविकों की भर्ती और नियुक्ति सेवाओं के विनियमन एवं निगरानी को मजबूत किया गया है तथा विकसित हो रहे अंतरराष्ट्रीय समुद्री श्रम मानकों के कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचा प्रदान किया गया है।

इसके अतिरिक्त, संघर्ष-संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों के मद्देनजर पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन नियामक महानिदेशालय समुद्री प्रशासन ने परामर्श और परिपत्र जारी किए हैं। इसका विवरण अनुलग्नक में दिया गया है।

अनुलग्नक

इन परामर्शों में एहतियाती उपाय, बढ़ी हुई सुरक्षा सतर्कता, रिपोर्टिंग संबंधी आवश्यकताएँ, 24×7 आपातकालीन संपर्क तंत्र, विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के साथ समन्वय, चिन्हित संघर्ष क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की तैनाती पर प्रतिबंध, आपातकालीन तैयारी संबंधी मार्गदर्शन तथा नाविकों और हितधारकों को सुरक्षा संबंधी जानकारी का प्रसार शामिल है। विवरण इस प्रकार है:

डीजीएस परामर्श (14.01.2026): ईरान के संबंध में विदेश मंत्रालय के परामर्श के मद्देनजर भारतीय नाविकों और शिपिंग हितधारकों के लिए जारी परामर्श। इसमें शिपिंग कंपनियों को अगले आदेश तक भारतीय नाविकों को ईरान में तैनात न करने की सलाह दी गई है। साथ ही, क्षेत्र में भारतीय क्रू की करीबी निगरानी करने तथा नाविकों को भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय द्वारा जारी परामर्शों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।

डीजीएस परिपत्र 09, 2026 (28.02.2026): ईरान में बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर भारतीय नाविकों और शिपिंग हितधारकों के लिए जारी तत्काल परामर्श। इसमें ईरान में मौजूद भारतीय नाविकों को सतर्क रहने, भारतीय दूतावास में पंजीकरण कराने और जहाँ संभव हो, सुरक्षित प्रस्थान के लिए समन्वय करने की सलाह दी गई है। हितधारकों को प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नाविकों का विवरण तत्काल उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।

डीजीएस परिपत्र 10, 2026 (06.03.2026): फारस की खाड़ी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और आसपास के जलक्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नाविकों और शिपिंग हितधारकों के लिए सुरक्षा परामर्श। इसमें निरंतर सतर्कता, आईएसपीएस कोड के सुरक्षा उपायों का अनुपालन, 24×7 आपातकालीन संपर्क तंत्र की स्थापना, भारतीय मिशनों के साथ संपर्क एवं समन्वय, आपातकालीन तैयारी तथा आवश्यकता पड़ने पर नाविकों और उनके परिवारों के लिए मनोवैज्ञानिक परामर्श सहायता की सलाह दी गई है।

डीजीएस परिपत्र 11, 2026 (07.03.2026): समुद्री हितधारकों और नाविक समुदाय के लिए सोशल मीडिया संबंधी परामर्श। इसमें समुद्री हितधारकों को अप्रमाणित जानकारी, अफवाहें, फर्जी वीडियो या अटकलों पर आधारित रिपोर्ट प्रसारित करने से बचने तथा केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करने का निर्देश दिया गया है।

डीजीएस परिपत्र 21, 2026 (07.04.2026): ईरानी बंदरगाहों में तट पर मौजूद भारतीय नाविकों तथा ईरानी जलक्षेत्रों में या उनके आसपास परिचालन कर रहे जहाजों पर सवार भारतीय नाविकों के लिए सुरक्षा परामर्श। इसमें ईरान में मौजूद नाविकों को निर्धारित स्थानों पर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने, बढ़ी हुई सतर्कता बनाए रखने, दूतावास के परामर्शों का पालन करने और कंपनी के प्रतिनिधियों के संपर्क में रहने की सलाह दी गई है। साथ ही, 24×7 आपातकालीन सहायता के लिए संपर्क विवरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।

डीजीएस परिपत्र 31, 2026 (13.06.2026): खाड़ी क्षेत्र में बढ़ी हुई सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर भारतीय नाविकों के लिए एहतियाती उपाय। इसमें बढ़ी हुई सुरक्षा सतर्कता को दोहराया गया है तथा शिपिंग कंपनियों और आरपीएसएल कंपनियों को अगले आदेश तक संघर्ष क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की तैनाती प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, नाविकों की सहमति से आपातकालीन क्रू परिवर्तन को अपवाद के रूप में अनुमति दी गई है। इसके अलावा, निगरानी और रिपोर्टिंग संबंधी आवश्यकताओं तथा सत्यापित सुरक्षा संबंधी जानकारी के प्रसार पर भी जोर दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, नाविकों को सहायता प्रदान करने के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन स्थापित की गई है। हितधारकों को आपातकालीन संचार तंत्र स्थापित करने, भारतीय मिशनों और कंस्‍यूलर अधिकारियों के साथ संपर्क एवं समन्वय बनाए रखने, आधिकारिक परामर्शों की निगरानी करने, प्रभावित नाविकों को सहायता प्रदान करने तथा संकट की परिस्थितियों में उचित सहयोग उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।

यह जानकारी केन्‍द्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी


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