आयुष
azadi ka amrit mahotsav

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में आयुष का एकीकरण

प्रविष्टि तिथि: 21 JUL 2026 3:55PM by PIB Delhi

आयुष का मुख्यधारा में समावेशन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत प्रमुख रणनीतियों में से एक है, जिसका उद्देश्य जनसंख्या को सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है।

देश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और स्वास्थ्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए, भारत सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के साथ आयुष पद्धतियों के एकीकरण की रणनीति अपनाई है, जिसके अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसीएस), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसीएस) और जिला अस्पतालों (डीएचएस) में आयुष सुविधाओं को सह-स्थापित किया गया है। यह दृष्टिकोण रोगियों को एकल खिड़की सेवा वितरण प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न चिकित्सा प्रणालियों में से चयन करने की सुविधा प्रदान करता है। आयुष चिकित्सकों/सहायक स्वास्थ्य कर्मियों की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है, जबकि आयुष अवसंरचना, उपकरण/फर्नीचर और औषधियों के लिए सहायता आयुष मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत साझा जिम्मेदारियों के रूप में प्रदान की जा रही है। 30.12.2025 तक (एमआईएस-एनएचएम), एनएचएम द्वारा 13,249 स्वास्थ्य सुविधाओं में आयुष सेवाओं का आवंटन करते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे पीएचसीएस (6,302), पीएचसीएस (3,191), डीएचएस (475) तथा अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं (3,281) में आयुष सेवाओं के सह-स्थान का समर्थन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, एनआरएचएम वित्तीय सहायता के अंतर्गत राज्यों/संघ राज्य क्षेत्र में कुल 25,322 आयुष चिकित्सकों और 5,666 आयुष सहायक स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई है।

इसके अतिरिक्त, आयुष मंत्रालय आधुनिक चिकित्सा के साथ उनके एकीकरण को सुगम बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक आयुष चिकित्सा पद्धति की अपनी-अपनी विशेषताओं के अनुसार उनके प्रचार-प्रसार और संस्थागत विस्तार के लिए अनेक पहलों के साथ एक तर्कसंगत दृष्टिकोण अपना रहा है। इनमें से कुछ प्रमुख पहलें निम्नलिखित हैं:

  1. आयुष मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएच एंड एफडब्ल्यू) द्वारा स्थापित स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत आयुष वर्टिकल, आयुष-विशिष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की योजना बनाने, निगरानी करने और पर्यवेक्षण के लिए एक समर्पित संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है। यह आयुष वर्टिकल सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य सेवाओं, आयुष शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए रणनीतियाँ विकसित करने में दोनों मंत्रालयों को तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
  2. आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएच एंड एफडब्ल्यू) ने समन्वित स्वास्थ्य देखभाल को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय सरकारी अस्पतालों में संयुक्त रूप से एकीकृत आयुष विभागों की स्थापना की है। इस पहल के अंतर्गत, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल तथा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली में एकीकृत चिकित्सा विभाग की स्थापना की गई है और यह कार्यरत है।
  3. भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) ने एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा में आयुष मॉड्यूल–इंटर्नशिप इलेक्टिव्स विकसित किए हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (स्नातक आयुर्वेद शिक्षा के न्यूनतम मानक) विनियम, 2022 के विनियम 10(7) के अंतर्गत, आधुनिक प्रगतियाँ आयुर्वेद शिक्षण पाठ्यक्रम का अधिकतम 40 प्रतिशत तक हिस्सा हो सकती हैं। राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) के अंतर्गत होम्योपैथी शिक्षा बोर्ड ने भी कई पहलें शुरू की हैं, जिनमें प्रारंभिक नैदानिक अनुभव, इलेक्टिव्स, संकाय विकास कार्यक्रम, फाउंडेशन प्रोग्राम, फिनिशिंग प्रोग्राम तथा औषध विज्ञान और मनोविज्ञान जैसे नए विषयों को शामिल करना सम्मिलित है।
  4. मंत्रालय के अंतर्गत अनुसंधान परिषद्‌ओं और राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा आयुष को समकालीन चिकित्सा पद्धति के साथ एकीकृत करने के लिए की गई पहलों का विवरण संलग्नक में दिया गया है।

आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएएस), केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएस), केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद् (सीसीआरएच), केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (सीसीआरवाईएन) तथा केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद् (सीसीआरयूएम) की स्थापना की है। ये संस्थान आयुष मंत्रालय के अंतर्गत क्रमशः आयुर्वेद, सिद्ध, होम्योपैथी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा तथा यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में अनुसंधान के लिए स्वायत्त संगठन हैं और देश के विभिन्न भागों में उपलब्ध अपने परिधीय संस्थानों के माध्यम से विभिन्न अनुसंधान गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं। ये संस्थान नैदानिक अनुसंधान, औषधि अनुसंधान, औषधीय पादप अनुसंधान, मौलिक अनुसंधान, साहित्यिक अनुसंधान एवं प्रलेखन, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा आयुष पद्धतियों के संवर्धन के माध्यम से संबंधित चिकित्सा पद्धतियों  का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा औषधि नियम, 1945 में आयुर्वेदिक, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी एवं होम्योपैथी (एएसएसयू एंड एच) औषधियों के लिए विशिष्ट नियामक प्रावधान हैं। निर्माताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे विनिर्माण इकाइयों एवं औषधियों के लाइसेंस हेतु निर्धारित आवश्यकताओं का पालन करें, जिसमें सुरक्षा एवं प्रभावशीलता का प्रमाण, एएसएसयू एवं एच औषधियों के लिए क्रमशः औषधि नियम, 1945 की अनुसूची न एवं अनुसूची ड-I के अनुसार उत्तम विनिर्माण उत्पादन (जीएमपी) का अनुपालन तथा संबंधित औषध विज्ञान (फार्माकोपिया) में निर्धारित औषधियों के गुणवत्ता मानकों का पालन करना शामिल है।

भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी भेषजसंहिता आयोग (पीसीआईएम एंड एच), आयुष मंत्रालय के अधीनस्थ एक संगठन है जो आयुर्वेदिक, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी एवं होम्योपैथी (एएसएसयू एंड एच) औषधियों के लिए फॉर्मूलरी विनिर्देश और फार्माकोपिया मानक निर्धारित करता है और आयुर्वेदिक, सिद्ध, सोवा-रिग्पा, यूनानी एवं होम्योपैथी (एएसएसयू एंड एच) औषधियों की गुणवत्ता (पहचान, शुद्धता और क्षमता) निर्धारित करने के लिए आधिकारिक संहिताओं के रूप में कार्य करता है। औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के अनुसार, इन गुणवत्ता मानकों का अनुपालन एएसएसयू एंड एच औषधियों के निर्माण के लिए अनिवार्य है। पीसीआईएम एवं एच, एएसएसयू एंड एच औषधियों के परीक्षण या विश्लेषण के लिए अपीलीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में भी कार्य करता है।

औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को एएसएसयू औषधियों की पहचान, शुद्धता, गुणवत्ता और शक्ति के ऐसे परीक्षण करने के लिए औषधि नियम, 1945 के नियम 160 क से ञ के अंतर्गत मान्यता प्रदान की जा रही है। वर्तमान तिथि तक, औषधि नियम, 1945 के प्रावधानों के अंतर्गत निर्माताओं के लिए 118 निजी प्रयोगशालाओं को अनुमोदित या लाइसेंस प्राप्त है। राज्य/संघ राज्य क्षेत्रों की 34 औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएँ कानूनी नमूनों के लिए आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी(एएसयू) औषधियाँ और कच्चे माल की गुणवत्ता का परीक्षण कर रही हैं।

आयुष मंत्रालय ने केंद्रीय क्षेत्रक योजना आयुष औषधि गुणवत्ता एवं उत्पादन संवर्धन योजना (एओजीयूएसवाई) लागू की है, जिसके अंतर्गत उच्चतर मानकों को प्राप्त करने के लिए आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन हेतु सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, इसके दूसरे घटक अर्थात् भ्रामक विज्ञापनों की निगरानी सहित एएसयू एंड एच औषधियों की भेषज सतर्कता के अंतर्गत, यह कार्यक्रम आयुष औषधियों पर निगरानी रखता है और भ्रामक विज्ञापनों की घटनाओं को कम करता है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में भेषज सतर्कता केंद्रों का त्रिस्तरीय नेटवर्क स्थापित किया गया है, जिसमें एक राष्ट्रीय भेषज सतर्कता समन्वय केंद्र (एनपीवीसीसी), 05 मध्यवर्ती भेषज सतर्कता केंद्र (आईपीवीसी) और 97 परिधीय भेषज सतर्कता केंद्र (पीपीवीसी) शामिल हैं।

आयुष औषधियों के लिए औषधि सतर्कता प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु, आयुष मंत्रालय ने 30 मई, 2025 को आईटी- इनेबल ऑनलाइन पोर्टल "आयुष सुरक्षा" का शुभारंभ किया। इसके अतिरिक्त, आयुष औषधियों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियामक उपायों को सुदृढ़ बनाने हेतु केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) में एक आयुष वर्टिकल का गठन किया गया है। साथ ही, ऐसे मानकों का अनुपालन करने वाली आयुष औषधियों के लिए सीडीएससीओ द्वारा विश्व स्वास्थ्य संगठन का फार्मास्यूटिकल उत्पाद प्रमाणपत्र (डब्ल्यूएचओसीओपीपी) जारी किया जाता है।

एएएम (आयुष) के परिचालन का मुख्य उद्देश्य आयुष के सिद्धांतों एवं पद्धतियों पर आधारित समग्र स्वास्थ्य मॉडल की स्थापना करना, जनसामान्य को स्व-देखभाल के लिए सशक्त बनाकर बीमारियों के बोझ तथा जेब से होने वाले स्वास्थ्य व्यय (ओओपीई) को कम करना तथा देश के ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों को सूचित विकल्प उपलब्ध कराना है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, औषधालयों को एएएम (आयुष) में परिवर्तित किए जाने के बाद लाभार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है, क्योंकि वहाँ प्रकृति की पहचान, योग, औषधीय पौधों का उपयोग, स्वस्थ जीवनशैली संबंधी व्यवहार, बुनियादी बाह्य रोगी विभाग सेवाएँ आदि जैसी विभिन्न गतिविधियाँ एवं सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के अंतर्गत राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों को देश के विभिन्न भागों, जिनमें ग्रामीण एवं सेवावंचित क्षेत्रों की संवेदनशील आबादी भी शामिल है जिसमें आठ संरचित आयुष जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए भी सहायता प्रदान की जा रही है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य आयुष स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों की निवारक, स्वास्थ्य संवर्धक, उपचारात्मक तथा पुनर्वास संबंधी सेवाएँ प्रदान करने की क्षमता के अनुरूप जनसामान्य की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान करना है, चाहे वे स्वतंत्र रूप से प्रदान की जाएँ अथवा पारंपरिक उपचार पद्धतियों के पूरक के रूप में।

आयुष मंत्रालय ने भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के विकास एवं एकीकरण के लिए एक कार्यनीति रूपरेखा के रूप में आयुष नीति रोडमैप तैयार किया है। व्यापक परामर्श तथा साक्ष्य-आधारित विचार-विमर्श के माध्यम से विकसित यह रोडमैप आयुष क्षेत्र को देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली तथा राष्ट्रीय विकास का अभिन्न अंग बनाने के उद्देश्य से प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है।

आयुष मंत्रालय स्वास्थ्य देखभाल, अनुसंधान, शिक्षा और उद्योग जैसे विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है, जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के प्रति राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर बढ़ती रुचि को दर्शाता है। इस बदलते परिदृश्य में, संरचित विकास और रणनीतिक योजना सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट एवं सुसंगत दृष्टिकोण आवश्यक है। इसी परिप्रेक्ष्य में आयुष नीतिरोडमैप की परिकल्पना एक महत्वपूर्ण रूपरेखा के रूप में की गई है, जो आयुष के भविष्य के मार्गदर्शन हेतु व्यवस्थित, साक्ष्य-आधारित और प्रभावोन्मुख तरीके से कार्य करने में सहायक होगी।

यह रोडमैप आयुष के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को समाहित करते हुए एक व्यापक रूपरेखा प्रस्तुत करता है, जिसमें अवसंरचना, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास, स्वास्थ्य सेवा प्रदायगी, अनुसंधान एवं विकास, विनिर्माण क्षेत्र एवं औषध विनियमन, औषधीय पौधों सहित गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं प्रचार-प्रसार, अर्थव्यवस्था में आयुष का योगदान तथा नीतिगत सुधार जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

संलग्नक

 

आयुष मंत्रालय द्वारा अपनी अनुसंधान परिषदों और राष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से की गई पहलों का विवरण

 

क्र.सं.

अनुसंधान परिषद्/राष्ट्रीय संस्थान

संस्थान द्वारा की गई पहलों का विवरण

 

1.

केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद्  (सीसीआरएएस)

सीसीआरएएस ने अनुसंधान अध्ययन जैसे ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटने) के प्रबंधन के लिए एक तृतीयक देखभाल अस्पताल (सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली) में आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ एकीकृत करने की व्यवहार्यता का पता लगाने के लिए परिचालन अध्ययन; हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी) स्तर पर राष्ट्रीय प्रजनन और बाल स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय चिकित्सा पद्धति (आयुर्वेद) को शुरू करने की व्यवहार्यता; कैंसर, मधुमेह, हृदय रोगों और स्ट्रोक की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीसीडीसीएस) में आयुष पद्धतियों का एकीकरण; और महाराष्ट्र के चयनित जिले (गढ़चिरौली) के पीएचसी में प्रजनन और बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) में आयुर्वेद उपचार शुरू करने की व्यवहार्यता (प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल स्तर पर प्रसवपूर्व देखभाल (गर्भिणी परिचर्या) के लिए आयुर्वेदिक उपचार की प्रभावशीलता: एक बहु-केंद्र परिचालन अध्ययन)। इसके अतिरिक्त, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् (आईसीएमआर) और सीसीआरएएस ने आईसीएमआर की एक्स्ट्रा बहिर्वती अनुसंधान योजना के तहत एकीकृत स्वास्थ्य सेवा देखभाल पर ध्यान केंद्रित करते हुए चिन्ह्ति क्षेत्रों में अनुसंधान हेतु एम्स में आयुष-आईसीएमआर एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान उन्नत केंद्र (एआई-एसीआईएचआर) स्थापित करने की पहल की है।

2.

केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद्  (सीसीआरयूएम)

 सीसीआरयूएम ने डॉ. आर.एम.एल. अस्पताल, डॉ. डीडीयू अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली तथा जे.जे. अस्पताल, मुंबई में चार पुनर्स्थापन केंद्र स्थापित किए हैं। यूनानी चिकित्सा के एकीकरण एवं संवर्धन के लिए परिषद्  द्वारा आधुनिक शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोगात्मक परियोजनाएँ भी शुरू की गई हैं।

3.

केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद्  (सीसीआरएच)

सीसीआरएच एकीकृत चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग और समन्वय के माध्यम से अनुसंधान करके होम्योपैथी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा के साथ एकीकृत करने की दिशा में काम कर रहा है। परिषद्  ने सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली, लेडी हार्डिंग चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल, नई दिल्ली, दिल्ली कंटोन्मेंट जनरल हॉस्पीटल, नई दिल्ली, बीआरडी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, गोरखपुर, उ. प्र. में स्थित नैदानिक परीक्षण इकाई, सिविल अस्पताल, आइजोल, मिजोरम और दीमापुर, नागालैंड के जिला अस्पताल में विभिन्न नैदानिक स्थितियों के लिए उपचार प्रदान करने हेतु एलोपैथिक अस्पतालों में होम्योपैथी उपचार केंद्रों की सह-स्थापना की है। परिषद्  ने होम्योपैथी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था से जोड़ने की पहलें भी की है, जिसके तहत विभिन्न जन स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जैसे होम्योपैथी एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम का एकीकरण, स्वास्थ्य रक्षा कार्यक्रम (एसआरपी), होम्योपैथी फॉर हेल्दी टीथिंग' कार्यक्रम, जो 'स्वस्थ बच्चों के लिए होम्योपैथी और अनुसूचित जाति (एससी) घटक योजना' का एक हिस्सा है।  

4.

केंद्रीय सिद्ध अनुसंधान परिषद्  (सीसीआरएस)

सीसीआरएस ने आधुनिक उपचारों के साथ आयुष उपचारों की प्रभावकारिता और सुरक्षा को मान्य करने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और नैदानिक परीक्षणों को प्रोत्साहित करके आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धति के साथ सिद्ध अभ्यासों को एकीकृत करने की पहल की है। अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान कैंपस में एकीकृत सिद्ध कैंसर ओपीडी कार्यशील है और सफदरजंग अस्पताल में सिद्ध कैंसर ओपीडी कार्यशील है, जो सीसीआरएस के तहत सफदरजंग, नई दिल्ली में स्थित सिद्ध नैदानिक अनुसंधान इकाई के माध्यम से सिद्ध पद्धति से कैंसर रोगियों की उपशामक देखभाल में सहायता कर रही है। सीसीआरएस ने कैंसर प्रबंधन, प्रजनन और शिशु देखभाल एवं पुनर्योजी चिकित्सा के लिए सहयोगी अनुसंधान गतिविधियों को शुरू करने हेतु एम्स, ऋषिकेश के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।

5.

केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद्  (सीसीआरवाईएन)

सीसीआरवाईएन देश भर में हृद्पात संबंधी बहु-केंद्रित अध्ययन परियोजना पर आईसीएमआर के कार्यबल का हिस्सा है।

6.

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए)

एआईआईए, नई दिल्ली में, एकीकृत आयुष चिकित्सा केंद्र (यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी), एकीकृत कैंसर चिकित्सा केंद्र, एकीकृत दंत चिकित्सा केंद्र, एकीकृत गहन देखभाल एवं आपातकालीन चिकित्सा केंद्र, एकीकृत अस्थि-रोग चिकित्सा केंद्र, एकीकृत आहारिकी एवं पोषण केंद्र और कैजएल्टी ओपीडी अनुभाग के अंतर्गत एकीकृत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं। एकीकृत सेवाएं सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली में स्थित एकीकृत चिकित्सा सेवा इकाई, एकीकृत चिकित्सा सेवा इकाई एम्स झज्जर और राष्ट्रीय कैंसर संस्थान - एम्स, झज्जर में एकीकृत कैंसर विज्ञान केंद्र में स्थापित अनुषंगी नैदानिक सेवा इकाइयों के माध्यम से भी प्रदान की जाती हैं। इसके अलावा, एआईआईए, नई दिल्ली में एआईआईए और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद्  (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीएर-आईसीएमआर) के संयुक्त उद्यम के रूप में एकीकृत कैंसर विज्ञान केंद्र (सीआईओ) की स्थापना की गई है। आयुष जर्नल ऑफ इंटीग्रेटिव ऑन्कोलॉजी (एजीआईओ) का प्रकाशन एआईआईए स्थित एकीकृत कैंसर विज्ञान केंद्र (सीआईओ) से किया जा रहा है। इस संस्थान में आयुर्वेद के वैश्विक प्रचार और अनुसंधान के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी केंद्र भी है।

7.

आयुर्वेद शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (आईटीआरए)

आईटीआरए आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ समन्वित अनुसंधान करता है।

8.

राष्ट्रीय सिद्ध संसथान (एनआईएस)

सिद्ध चिकित्सा प्रणाली में समन्वित अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा चेट्टिनाड अस्पताल एवं अनुसंधान संस्थान (सीएचआरआई) में आने वाले रोगियों को सिद्ध उपचार प्रदान करने के लिए, एनआईएस ने चेट्टिनाड अकादमी ऑफ रिसर्च एंड एजुकेशन (सीएआरई) के सहयोग से केलंबक्कम में उन्नत सिद्ध विशेषज्ञ ओपीडी का उद्घाटन किया। एनआईएस, सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन रिसर्च, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन (एमएएचई), मणिपाल, कर्नाटक में विशेषज्ञ समन्वित पारंपरिक सिद्ध चिकित्सा ओपीडी (एसआईएसएमओ) का संचालन कर रहा है। इसके अतिरिक्त, एनआईएस ने कैंसर रोगियों को समन्वित उपचार प्रदान करने के लिए सिद्ध समन्वित कैंसर देखभाल केंद्र (एस-आईसी केयर सेंटर) की शुरुआत की है।

9.

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई)

एमडीएनआईवाई वर्ष 2013 से लगातार चौथे कार्यकाल के लिए पारंपरिक चिकित्सा (योग) के लिए एक डब्ल्यूएचओ सहयोगी केंद्र है। एमडीएनआईवाई दिल्ली के सरकारी आधुनिक चिकित्सा अस्पतालों में 4 योग केंद्र और दिल्ली एनसीआर में 20 सीजीएचएस आरोग्य केंद्रो में योग की निवारक स्वास्थ्य देखभाल इकाई संचालित कर रहा है।

 

यह जानकारी केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी है।

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SR/SV/SG


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