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केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने 'वीव द फ्यूचर 4.0' प्रदर्शनी का अवलोकन किया और भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं व एक टिकाऊ भविष्य के निर्माण में उनकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया


चौथे संस्करण में 100 से अधिक ब्रांड, कारीगर, निर्माता, रीसायकलर्स, थ्रिफ्ट कलेक्टिव और अन्वेषक एक साथ जुट रहे हैं जो अपसाइक्लिंग, रीसाइकलिंग, मरम्मत, पुनः उपयोग और सर्कुलर डिज़ाइन से जुड़े समाधान प्रदर्शित कर रहे हैं

प्रविष्टि तिथि: 13 JUL 2026 8:13PM by PIB Delhi

केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने नई दिल्ली के दिल्ली हाट में आयोजित ‘वीव द फ्यूचर 4.0 – अपसाइक्लिंग एडिशन’ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी, टिकाऊ और सर्कुलर टेक्सटाइल की दिशा में भारत की यात्रा को प्रदर्शित करती है। इस अवलोकन में वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव; विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना; विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) सुश्री अमृत राज; यूरोपीय संघ के मिनिस्टर काउंसलर एंड सस्टेनेबल मॉडर्नाइज़ेशन के प्रमुख श्री थॉमस मैकक्लेनाघन; और वस्त्र मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

प्रदर्शनी में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा, "जैसे-जैसे वस्त्रों की खरीदारी बढ़ रही है, यह आवश्यक है कि हम चक्रीय अर्थव्यवस्था के तरीकों को मज़बूत करें, ज़िम्मेदारीपूर्ण उत्पादन को बढ़ावा दें और ऐसे नए समाधानों को बड़े पैमाने पर अपनाएं जो वस्त्रों के कचरे को कीमती संसाधनों में बदल सकें। 'वीव द फ्यूचर 4.0' जैसी पहल दर्शाती हैं कि कैसे उद्यमिता, नवाचार और स्थिरता मिलकर आर्थिक अवसर व पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकते हैं। साथ ही, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है कि इस क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले लाखों कामगारों को सम्मानजनक आजीविका और बेहतर आमदनी मिले। भारत टिकाऊ वस्त्रों के क्षेत्र में खुद को वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे न केवल देश के विकास में, बल्कि दुनिया को एक अधिक ज़िम्मेदारीपूर्ण और सुदृढ़ वस्त्र इकोसिस्टम की ओर ले जाने में भी मदद मिलेगी।"

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय की एक पहल, 'वीव द फ्यूचर 4.0 – अपसाइक्लिंग एडिशन' इस प्लेटफ़ॉर्म का चौथा संस्करण है। यह संस्करण मैटेरियल, समुदायों और पर्यावरण के बीच के संबंधों पर केंद्रित है। यह प्रदर्शनी इस बात को दर्शाती है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान, संसाधनों का ज़िम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल और नए-नए तरीके मिलकर रोज़मर्रा की ज़िंदगी के लिए टिकाऊ समाधान तैयार कर सकते हैं।

नई दिल्ली के आईएनए स्थित दिल्ली हाट में 17 जुलाई 2026 तक जनता के लिए खुली रहेगी। यह छह-दिवसीय प्रदर्शनी देश भर के 100 से अधिक ब्रांडों, कारीगरों, निर्माताओं, रीसायकलर्स, थ्रिफ्ट कलेक्टिव और इनोवेटर को एक मंच प्रदान करती है। इसमें अपसाइक्लिंग, रीसाइकलिंग, मरम्मत, पुनः उपयोग और सर्कुलर डिज़ाइन जैसे कई तरीके शामिल हैं, जो यह दर्शाते हैं कि रचनात्मकता और सोच-समझकर अपनाए गए तरीकों से चीज़ों को कैसे बदला जा सकता है।

वस्त्र मंत्रालय में विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने कहा, "'वीव द फ्यूचरएक राष्ट्रीय मंच बन गया है जो भारत की हथकरघा और शिल्प विरासत को टेक्सटाइल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नवाचार-आधारित समाधानों से जोड़ता है। यह संस्करण कारीगरों, छात्रों, स्टार्टअप्स, डिजाइनरों और रीसाइकलिंग उद्यमों को एक साथ लाता है ताकि वस्त्रों के कचरे की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए मिलकर काम करने के तरीकों को खोजा जा सके। इसमें अपसाइक्लिंग, मरम्मत, रीसाइकलिंग और सर्कुलर डिज़ाइन जैसे तरीके शामिल हैं, जिन्हें हम भारतीय पीढ़ियों से अपनाते आ रहे हैं। वीव द फ्यूचर 4.0 में युवा उद्यमियों की बड़ी भागीदारी टिकाऊ खपत और संसाधनों के कुशल उपयोग में बढ़ती रुचि को दिखाती है। यह ऐसे मंच (प्लेटफॉर्म) बनाने के महत्व पर भी जोर देता है जो व्यावहारिक और बड़े स्तर पर क्रियान्वयन किए जा सकने वाले समाधानों को बढ़ावा दें और साथ ही पूरी मूल्य श्रृंखला में आजीविका और उद्यमिता के अवसर पैदा करें।"

वीव द फ़्यूचर 4.0' में आगंतुक के लिए:

  • कारीगरों, डिज़ाइनरों, ब्रांडों और अन्वेषकों द्वारा निर्मित अपसाइकल और रीसाइकल उत्पाद
  • वस्त्रों के कचरे, मैटेरियल रिकवरी और सर्कुलैरिटी पर इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन
  • मरम्मत, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर प्रदर्शन
  • सस्टेनेबल डिज़ाइन और शिल्प-आधारित नवाचार पर वर्कशॉप और ज्ञान-साझाकरण सत्र
  • सर्कुलर फ़ैशन, समझदारी से खरीदारी और टिकाऊ भविष्य के बारे में बातचीत।

वीव द फ्यूचर के बारे में

'वीव द फ़्यूचरएक राष्ट्रीय मंच है जिसे भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय ने शुरू किया है। इसका उद्देश्य रोज़मर्रा की ज़िंदगी में टिकाऊ, सर्कुलर और शिल्प-आधारित तरीकों को खोजना और उन्हें बढ़ावा देना है। यह मंच कारीगरों, डिज़ाइनरों, ब्रांडों, इनोवेटर्स और समुदायों को एक साथ लाता है। इसका उद्देश्य ज़िम्मेदारीपूर्ण उत्पादन, खरीदारी और मैटेरियल के उपयोग पर बातचीत, कार्रवाई और समाधान तैयार करना है। साथ ही एक अधिक टिकाऊ भविष्य के निर्माण में भारत की शिल्प परंपराओं की भूमिका को प्रदर्शित करता है।

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पीके/केसी/एसके


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