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गुजरात में ब्रॉडबैंड अवसंरचना को मजबूत करने के लिए डिजिटल भारत निधि - दूरसंचार विभाग, गुजरात सरकार, जीएफजीएनएल और बीएसएनएल के बीच समझौते में परिशिष्ट जोड़ा गया


गुजरात में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को लागू करने के लिए ₹5,629 करोड़ की वित्तीय सहायता को स्वीकृति

गुजरात में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत 14,287 ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा और 3,895 गांवों को ऑन-डिमांड कनेक्टिविटी दी जाएगी

पूरे गुजरात में ग्रामीण दूरसंचार अवसंरचना को मजबूत और उन्नत करने के लिए साझेदारी

भारत सरकार की वित्तीय सहायता से पांच लाख से अधिक ग्रामीण घरों में फाइबर कनेक्शन की सुविधा के लिए साझेदारी

प्रविष्टि तिथि: 10 JUL 2026 8:16PM by PIB Delhi

ग्रामीण गुजरात में डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दूरसंचार विभाग के तहत डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) ने आज नई दिल्ली के संचार भवन में राज्य-संचालित मॉडल के तहत राज्य में संशोधित भारतनेट प्रोग्राम (एबीपी) को लागू करने के लिए पहले से हुए समझौते में परिशिष्ट पर हस्ताक्षर किए।

यह संशोधन डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), दूरसंचार विभाग; गुजरात सरकार; गुजरात फाइबर ग्रिड नेटवर्क लिमिटेड (जीएफजीएनएल) और भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के बीच गुजरात में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को लागू करने के लिए किया गया।

इस समझौते पर गुजरात सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव श्रीमती पी. भारती और दूरसंचार विभाग के उप महानिदेशक (एबीपी कार्यान्वयन-I) श्री दिनेश कुमार गर्ग ने हस्ताक्षर किए। यह हस्ताक्षर समारोह डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के प्रशासक श्री श्यामलाल मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस समारोह में दूरसंचार विभाग, डीबीएन और बीएसएनएल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इस परिशिष्ट पर हस्ताक्षर करना ग्रामीण डिजिटल ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को मज़बूत करने, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और समावेशी डिजिटल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंज़ूरी दी थी। इसका उद्देश्य मौजूदा भारतनेट नेटवर्क को अपग्रेड करना, उसे मज़बूत करना और उसका विस्तार करना था, ताकि सभी ग्राम पंचायतों और गांवों को मांग के आधार पर मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिल सके।

गुजरात में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत, यह परियोजना गुजरात फाइबर ग्रिड नेटवर्क लिमिटेड (जीएफजीएनएल) के ज़रिए लागू किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कुल 14,287 ग्राम पंचायतें शामिल होंगी। इसमें नेटवर्क की मज़बूती बढ़ाने के लिए पहले से मौजूद (फेज़-I और फेज़-II की) 14,264 ग्राम पंचायतों को लीनियर टोपोलॉजी से रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड करना और 23 नई बनी ग्राम पंचायतों को शामिल करना शामिल है। इसके अलावा, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए 3,895 गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी दी जाएगी।

भारत सरकार ने गुजरात में इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए पहले ही ₹5,629 करोड़ की वित्तीय सहायता को मंज़ूरी दे दी है। उम्मीद है कि भारत सरकार की वित्तीय सहायता से इस पहल के ज़रिए पांच लाख से ज़्यादा ग्रामीण घरों में फाइबर कनेक्शन लग सकेंगे। इसके साथ ही, इससे राज्य के ग्रामीण और दूर-दराज़ के क्षेत्रों में -गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल पेमेंट और नागरिकों से जुड़ी सेवाओं जैसी डिजिटल सेवाओं के वितरण में भी काफी सुधार होगा।

डिजिटल भारत निधि का परिचय

डिजिटल भारत निधि (पहले यूएसओएफ) की स्थापना भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 01.04.2002 से की गई थी। दूरसंचार अधिनियम, 2023' के अनुसार, सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि अब डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) बन गया है। डीबीएन का काम सेवा से वंचित ग्रामीण, दूर-दराज और शहरी इलाकों में दूरसंचार सेवाओं की पहुँच और वितरण को बढ़ावा देकर यूनिवर्सल सर्विस को समर्थन देना है। यह संचार मंत्रालय के दूरसंचार  विभाग का संबद्ध कार्यालय है।

डीबीएन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, इसमें भारतनेट, 4G सैचुरेशन प्रोजेक्ट, आकांक्षी जिलों के उन इलाकों में मोबाइल सर्विस देना जहाँ अभी तक सुविधा नहीं है, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में मोबाइल सर्विस, हिमालयी और सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल सर्विस, द्वीपों में मोबाइल सेवा और पूर्वोत्तर इलाकों में मोबाइल सेवा जैसी कई योजनाएँ और परियोजनाएं शामिल हैं।

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पीके/केसी/पीके


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