सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने प्रो. पी. सी. महालनोबिस की 133वीं जयंती के अवसर पर 20वाँ ‘सांख्यिकी दिवस’ आयोजित किया, जिसका विषय था—“प्रशासनिक आँकड़ों की संभावनाओं का दोहन”
सांख्यिकीय प्रणाली के आधुनिकीकरण में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के संयुक्त सहयोग और सांख्यिकीय शुद्धता और विश्वसनीयता बरकरार रखते हुए प्रशासनिक आँकड़ों के उपयोग के प्रोत्साहन को बल: प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव
एमओएसपीआई मंत्री : मंत्रालय के डेटा इकोसिस्टम के आधुनिकीकरण के लिए किए गए समर्पित आंतरिक प्रयासों तथा विभिन्न हितधारकों से प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों और सहयोग की सराहना
एमओएसपसीआई सचिव: पूरे आधुनिकीकरण अभियान का श्रेय मंत्रालय के अधिकारियों और क्षेत्र कर्मचारियों के निरंतर एवं समर्पित प्रयासों को, सामूहिक संस्थागत प्रतिबद्धता, साक्ष्य-आधारित और डेटा-संचालित सुशासन पर बल
एनएससी अध्यक्ष: अधिक सूक्ष्म, विश्वसनीय और सुरक्षित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए आधुनिक प्रशासनिक डेटासेट पारंपरिक सर्वेक्षणों के पूरक होने चाहिए
प्रविष्टि तिथि:
29 JUN 2026 7:18PM by PIB Delhi

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने 29 जून, 2026 को डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केन्द्र, नई दिल्ली में 20वां सांख्यिकी दिवस आयोजित किया। सांख्यिकी दिवस प्रत्येक वर्ष प्रोफेसर प्रशांत चन्द्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिन्हें भारत की आधुनिक सांख्यिकीय प्रणाली का निर्माता तथा आर्थिक नियोजन का अग्रदूत माना जाता है।
इस वर्ष के सांख्यिकी दिवस का विषय “प्रशासनिक आँकड़ों की संभावनाओं का दोहन” था, जो साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और सुशासन के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं से प्राप्त आँकड़ों के प्रभावी उपयोग के बढ़ते महत्व पर जोर देते हैं। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने की, जो इस अवसर पर मुख्य अतिथि भी थे। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय में केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री राव इंद्रजीत सिंह (स्वतंत्र प्रभार), एमओएसपीआई के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग तथा राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के अध्यक्ष डॉ. सैबल चट्टोपाध्याय भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

महानिदेशक (डेटा गवर्नेंस) श्री पी. आर. मेश्राम ने अपने स्वागत भाषण में प्रशासनिक आँकड़ों के सामंजस्य तथा उनकी क्षमता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय द्वारा उठाए जा रहे विभिन्न कदमों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी. के. मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि माननीय प्रधानमंत्री लगातार डेटा-संचालित निर्णय लेने पर विशेष बल देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20वें सांख्यिकी दिवस की विषय वस्तु "प्रशासनिक आँकड़ों की संभावनाओं का दोहन" भारत की सांख्यिकीय प्रणाली के विकास में एक महत्वपूर्ण क्षण का प्रतीक है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक सेवा वितरण प्रणालियों, नियामक संस्थाओं तथा विभिन्न क्षेत्रीय डेटाबेसों से उत्पन्न होने वाले विशाल डिजिटल आँकड़ों को केवल विभागीय उप-उत्पाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें एक एकीकृत, सुरक्षित और परस्पर-संगत राष्ट्रीय परिसंपत्ति के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि केन्द्र और राज्य स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद के माध्यम से ही डेटा सामंजस्य को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है। उन्होंने सांख्यिकीय प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए "सम्पूर्ण सरकार" का दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग, भारतीय रिज़र्व बैंक तथा भारतीय सांख्यिकी सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारियों सहित विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों ने सांख्यिकीय प्रणाली की चुनौतियों के समाधान और डेटा इकोसिस्टम को अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि "विकसित भारत" के लक्ष्य की प्रगति का निरंतर और व्यवस्थित मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है।

डॉ. मिश्रा ने सांख्यिकी समुदाय के समक्ष विचार-विमर्श के लिए कई महत्वपूर्ण संस्थागत लक्ष्य प्रस्तुत किए। उन्होंने डेटा गोपनीयता और जनता के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, पारंपरिक क्षेत्रीय सर्वेक्षणों से प्रशासनिक अभिलेखों की ओर बढ़ते रुझान के बीच सांख्यिकीय संस्थानों की स्वतंत्रता बनाए रखने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेखापरीक्षण-योग्यता, व्याख्येयता और डेटा की उत्पत्ति/स्रोत की प्रमाणिकता जैसे सुदृढ़ प्रशासनिक ढाँचों के साथ अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे ऐसे विश्लेषणात्मक ढाँचे विकसित किए जा सकेंगे, जो नीति-निर्माण में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने में सहायक होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा प्रणालियों के डिजाइन सिद्धांत ऐसे होने चाहिए, जो संचालन संबंधी प्राथमिकताओं और डेटा प्रणालियों की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखें।

एमओएसपीआई के स्वतंत्र प्रभार वाले केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री राव इंद्रजीत सिंह ने अपने संबोधन में डॉ. पी. के. मिश्रा की उपस्थिति का स्वागत करते हुए कहा कि सांख्यिकी दिवस के उद्घाटन सत्र में उनकी प्रेरणादायी उपस्थिति इस आयोजन के लिए एक दुर्लभ और अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा प्रस्तुत दूरदर्शी रूपरेखा, जिसमें प्रामाणिक, निष्पक्ष और बिना किसी छेड़छाड़ वाले आँकड़ों पर विशेष बल दिया गया है तथा सांख्यिकीय प्रणाली के भविष्य के विकास की स्पष्ट दिशा निर्धारित की गई है, सभी के लिए एक महत्वपूर्ण आह्वान है। उन्होंने डेटा इकोसिस्टम के आधुनिकीकरण के लिए मंत्रालय द्वारा किए गए समर्पित आंतरिक प्रयासों तथा विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों और सहयोग की सराहना की। उन्होंने दोहराया कि मुख्य अतिथि द्वारा वर्ष 2047 तक डेटा-संचालित ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए एक स्पष्ट मार्ग प्रशस्त किया गया है। साथ ही, उन्होंने सांख्यिकी और डेटा से जुड़े पेशेवर समुदाय से आग्रह किया कि वे इन विचारों और मार्गदर्शन को आगे बढ़ाते हुए माननीय प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में सक्रिय योगदान दें।

एमओएसपीआई के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने विषय की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए कहा कि सामंजस्यपूर्ण डेटा इकोसिस्टम, डेटा-संचालित निर्णय-निर्माण के व्यापक उद्देश्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि दिसम्बर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के पाँचवें राष्ट्रीय सम्मेलन के निर्देशों के अनुरूप, मंत्रालय ने सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में डेटा सामंजस्य के लिए एक सुदृढ़ रूपरेखा विकसित की है। यह रूपरेखा पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जिनमें मेटाडाटा का संकलन, डेटा गुणवत्ता का आकलन, एकरूप वर्गीकरण, विशिष्ट पहचानकर्ताओं का उपयोग तथा परिभाषाओं में असंगतियों का समाधान शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि "प्रैक्टिशनर्स हैंडबुक ऑन हार्मोनाइजेशन ऑफ डेटा सेट्स" का प्रकाशन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अपने संबोधन में डॉ. सौरभ गर्ग ने यह भी बताया कि एमओएसपीआई का एमसीपी सर्वर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) के माध्यम से डेटा को परस्पर संगत बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल है।

इस अवसर पर जारी किए गए अन्य विभिन्न प्रकाशनों ने नियमित रूप से सृजित होने वाले विशाल डेटा भंडार से मूल्य सृजन के प्रति सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर जोर किया। एमओएसपीआई के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने इस संपूर्ण आधुनिकीकरण अभियान का श्रेय मंत्रालय के अधिकारियों और क्षेत्र कर्मचारियों के निरंतर एवं समर्पित प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने साक्ष्य-आधारित और डेटा-संचालित सुशासन को पूरे देश में बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय की सामूहिक संस्थागत प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ किया है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) के अध्यक्ष डॉ. सैबल चट्टोपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का डिजिटल परिदृश्य नियमित रूप से उपलब्ध प्रशासनिक आँकड़ों को वास्तविक समय की राष्ट्रीय संपदा के रूप में उपयोग में लाने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देश अपनी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को सुदृढ़ बना रहा है, वैसे-वैसे आधुनिक प्रशासनिक डेटा को पारंपरिक सर्वेक्षणों का पूरक बनना चाहिए, ताकि आज के नीति-निर्माताओं को आवश्यक अत्यंत सूक्ष्म, विश्वसनीय और सुरक्षित जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जा सके।
इस कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित प्रकाशनों का विमोचन किया गया:
- लेबर मार्केट डायनेमिक्स इन मिलियन-प्लस सिटीज
- अर्बन अनइनकार्पोरेटेड एंटरप्राइज लैंडस्केप : इनसाइट्स फ्रॉम मिलियन-प्लस सिटीज
- सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स- नेशनल इंडीकेटर फ्रेमवर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट 2026
- डेटा स्नैपशॉट ऑन सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स- नेशनल इंडीकेटर फ्रेमवर्क प्रोग्रेस रिपोर्ट 2026
- सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स- नेशनल इंडीकेटर फ्रेमवर्क, 2026 एलोंग विद मेटाडेटा
- ट्रांसफोर्मिंग लाइव्स: इंडियाज एचीवमेंट्स अंडर द पीपल डायमेंशन ऑफ द एसडीजी
- एमओएसपीआईज विजन डॉक्यूमेंट 2026-2031
- हैंडबुक ऑन हारमोनाइजेशन ऑफ डेटासेट्स
इस अवसर पर, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, कोलकाता के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. अरूप बोस को वर्ष 2026 के लिए प्रतिष्ठित सुखातमे राष्ट्रीय सांख्यिकी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें सांख्यिकीय सिद्धांत, संभाव्यता, रैंडम मैट्रिक्स थ्योरी, हाई डायमेंशनल डेटा अनेलेसिस, रीसैंपलिंग मैथड्स तथा टाइम सीरीज अनेलेसिस के क्षेत्र में उनके अग्रणी और दीर्घकालिक योगदान के लिए प्रदान किया गया, जिसने आधुनिक सांख्यिकीय शोध और व्यवहार पर गहरा प्रभाव डाला है। अपने संबोधन में उन्होंने अपने शोध यात्रा में विभिन्न प्रकार के सहयोग प्रदान करने के लिए भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

उद्घाटन सत्र के पश्चात “प्रशासनिक आँकड़ों की संभावनाओं का दोहन” विषय पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। सत्र के पहले भाग का संचालन श्री पी. आर. मेश्राम, महानिदेशक (डेटा गवर्नेंस), एनएसओ, एमओएसपीआई द्वारा किया गया, जिसमें नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने के लिए प्रशासनिक आँकड़ों के उपयोग के विभिन्न उदाहरण प्रस्तुत किए गए। सत्र की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र के भारत स्थित रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर श्री स्टीफन प्राइज़नर के सारगर्भित उद्घाटन संबोधन से हुई। उन्होंने सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्रशासनिक आँकड़ों से जोड़ा और कहा कि इन्हें केवल डेटा के उप-उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासनिक आँकड़ों के संग्रह में विश्वास, डिज़ाइन द्वारा गोपनीयता तथा दुरुपयोग से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा उपायों पर भी बल दिया। सत्र में चार महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ शामिल थीं, जिन्होंने प्रशासनिक एवं क्षेत्रीय डेटा इकोसिस्टम के उपयोग के माध्यम से संचालन, अनुकूलन तथा नीति-निर्माण के लिए उपयोगी जानकारियां प्रस्तुत कीं।
सत्र की पहली प्रस्तुति श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अपर सचिव श्री अजय शर्मा ने भारत की सामाजिक सुरक्षा डेटा पूलिंग पहल पर दी। इसके बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अपर सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा ने एग्री स्टैक पर प्रस्तुति दी। उत्तर प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव (योजना) श्री आलोक कुमार ने फैमिली आईडी पर उत्तर प्रदेश के अनुभव को साझा किया, जिसमें बताया गया कि किस प्रकार प्रशासनिक आँकड़ों को सक्रिय कल्याण वितरण प्रणाली में बदला जा सकता है। अंतिम प्रस्तुति सुश्री मीनल करनवाल, परियोजना निदेशक, जलवायु अनुकूल कृषि परियोजना (पीओसीआरए), महाराष्ट्र सरकार द्वारा महाविस्तार पर दी गई, जिसमें महाराष्ट्र के किसानों को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग को प्रदर्शित किया गया।

सत्र के दूसरे भाग में “ फ्रॉम साइलोज़ टू सिनर्जी: एडवांसिंग एडमिन्सट्रेटिव डेटा हार्मोनाइजेशन” विषय पर एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसका संचालन सुश्री शालिनी कपूर, चीफ स्ट्रैटेजिस्ट (डेटा एवं एआई), एकस्टेप फाउंडेशन ने किया। इस पैनल में श्री नंद कुमारन (सीईओ, राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन), डॉ. मानसी केडि़या (सीनियर डिजिटल डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट, विश्व बैंक), श्री प्रशांत चंद्रमौलेश्वरन (हेड ऑफ पब्लिक फाइनेंस, ई-गव फाउंडेशन) तथा सुश्री अवनी कपूर (संस्थापक एवं निदेशक, फाउंडेशन फॉर रिस्पॉन्सिव गवर्नेंस – आरईएसजीओवी) शामिल थे। वक्ताओं ने तकनीकी ढाँचों के उपयोग, सहयोगात्मक शासन तथा मानकीकृत डेटा संरचनाओं के माध्यम से देशभर में प्रभावी सार्वजनिक नीति निर्माण और प्रभावी कल्याण वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने पर उपयोगी विचार साझा किए। पैनल ने सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला कि डेटा गवर्नेंस ही प्रशासनिक आँकड़ों की क्षमता को पूरी तरह से साकार करने की कुंजी है।
इस कार्यक्रम में लगभग 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें केन्द्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि, तथा संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों सहित अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि और अन्य प्रमुख हितधारक शामिल थे। कार्यक्रम में मंत्रालय की गतिविधियों पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। यह कार्यक्रम एमओएसपीआई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर लाइवस्ट्रीम किया गया और इसे https://www.youtube.com/live/toRvGiWq_I4?si=adqGn2_eRJOpvnGu. पर देखा जा सकता है।
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पीके/केसी/केपी
(रिलीज़ आईडी: 2279253)
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