भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक श्री के. संजय मूर्ति ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के 17वें वार्षिक दिवस समारोह को संबोधित किया
वित्तीय जवाबदेही और बाजार निष्पक्षता के बीच निरंतर तालमेल भारत की आर्थिक मजबूती और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बना रहेगा: श्री के संजय मूर्ति
तकनीकी बदलावों से प्रेरित बाजारों की बढ़ती जटिलता को देखते हुए, नियामकों को समय के साथ तालमेल, विकास और प्रगति करने की आवश्यकता है: सीसीआई अध्यक्ष, श्रीमती रवनीत कौर
प्रविष्टि तिथि:
20 MAY 2026 7:46PM by PIB Delhi
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक श्री के. संजय मूर्ति ने आज नई दिल्ली में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के 17वें वार्षिक दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि द्वारा सीसीआई की “एडवोकेसी बुकलेट 2026” का अंग्रेजी और हिंदी में विमोचन भी किया गया।
अपने संबोधन में, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने सीसीआई को उसके 17 वर्षों के सफल कामकाज के लिए बधाई दी और कहा कि प्रतिस्पर्धा बड़ी तेजी से भारत के आर्थिक भविष्य के केंद्र में आ गई है, जो विकास, नवाचार, निवेश और उपभोक्ता कल्याण का आधार है।
उन्होंने कहा कि भारत एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां फिनटेक, लॉजिस्टिक्स, हरित ऊर्जा, ई-कॉमर्स और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में व्यापक, तेज और ढांचागत बदलाव हो रहे हैं। इस बदलते परिदृश्य में, प्रतिस्पर्धा केवल कीमतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डेटा तक पहुंच, पारस्परिकता और नवाचार जैसे मुद्दे भी शामिल हैं।

श्री मूर्ति ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल युग में, बाजार शक्ति अक्सर उत्पादन के पारंपरिक पैमाने के बजाय डेटा और ईकोसिस्टम पर नियंत्रण से प्राप्त होती है, जो आर्थिक शासन के मूल तत्व के रूप में प्रतिस्पर्धा कानून के महत्व को रेखांकित करता है। दक्षता बढ़ाने में प्रतिस्पर्धी बाजारों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, मुख्य अतिथि ने 2009 से गुटबंदी और प्रभुत्व के दुरुपयोग को रोकने और प्रतिस्पर्धा की संस्कृति को बढ़ावा देने में सीसीआई की भूमिका की सराहना की। उन्होंने आगे कहा कि यह विकृतियों से मुक्त बाजारों में सार्वजनिक और निजी संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए विशेष नियामक निरीक्षण के महत्व का प्रमाण है।
श्री मूर्ति ने बोली में हेराफेरी जैसी प्रथाओं के कारण सार्वजनिक संसाधनों पर भारी लागत आने की बात कहते हुए, सरकारी बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा प्रवर्तन और लेखापरीक्षा को दो पूरक नियामक साधनों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने सार्वजनिक खरीद में संदिग्ध मामलों की पहचान करने के लिए सीसीआई द्वारा CAG रिपोर्टों पर भरोसा करने के पिछले उदाहरणों का उल्लेख करते हुए, दोनों नियामक निकायों के बीच तालमेल पर प्रकाश डाला।
सार्वजनिक खरीद प्रणालियों के बढ़ते डिजिटल विस्तार के संदर्भ में, उन्होंने कहा कि उन्नत विश्लेषण और AI का उपयोग प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों का पता लगाने और नियामक परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण रूप से सहायक हो सकता है। श्री मूर्ति ने संस्थागत क्षमता निर्माण और सार्वजनिक खरीद प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए चल रहे प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आगे चलकर वित्तीय जवाबदेही और बाजार निष्पक्षता के बीच निरंतर तालमेल भारत की आर्थिक मजबूती और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बना रहेगा।

अपने स्वागत भाषण में, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रवनीत कौर ने आयोग की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए पूर्ववर्ती एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम (MRTP) व्यवस्था से, जो आदेश और नियंत्रण पर आधारित थी, विश्वास-आधारित प्रतिस्पर्धा ढांचे में परिवर्तन का उल्लेख किया। उन्होंने उन कई महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों का भी जिक्र किया जिन्होंने वर्षों से आयोग के प्रवर्तन ढांचे को आकार दिया है।
सीसीआई की अध्यक्ष ने पिछले वित्तीय वर्ष में आयोग द्वारा की गई महत्वपूर्ण पहल की जानकारी दी। उत्पादन लागत विनियमों को 2009 के बाद पहली बार संशोधित किया गया, ताकि इसे बदलते बाजार की वास्तविकताओं, विधिशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाया जा सके। प्रतिस्पर्धा अधिनियम में संशोधन और उसके बाद विनियमों की अधिसूचना के बाद, आयोग ने एक प्रमुख डिजिटल बाजार मामले में अपना पहला समझौता स्वीकृत किया, जो प्रतिस्पर्धा संबंधी चिंताओं के त्वरित समाधान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मिले जुले प्रयासों के लिए हरित चैनल तंत्र को लगातार बढ़ावा मिल रहा है, जो अब कुल आवेदनों का 20 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने आगे बताया कि सीसीआई ने सितंबर 2024 में लागू किए गए संयोजनों के लिए सख्त समय-सीमाओं का लगातार पालन किया है।
तकनीकी बदलावों से प्रेरित बाज़ारों की बढ़ती जटिलता का उल्लेख करते हुए, सीसीआई अध्यक्ष ने नियामकों के लिए समय के साथ तालमेल, विकास और विस्तार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल बाज़ारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समावेश से आए बदलाव और हर क्षेत्र में AI के बढ़ते महत्व ने आयोग को AI और प्रतिस्पर्धा पर एक बाज़ार अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया है।
अध्ययन में यह बात सामने आई कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने से दक्षता, नवाचार और उपभोक्ता अनुभव में वृद्धि होती है, लेकिन इससे बाजार में एकाधिकार, ईकोसिस्टम में गतिरोध, स्व-वरीयता और एल्गोरिदम संबंधी मिलीभगत जैसी संभावित चिंताएं भी पैदा होती हैं। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों की अपारदर्शिता प्रवर्तन संबंधी अतिरिक्त चुनौतियां पेश करती है, जिससे प्रतिस्पर्धा-विरोधी आचरण का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। अध्ययन में प्रतिस्पर्धा मानदंडों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों और अनुप्रयोगों के विकास, तैनाती और निगरानी के विभिन्न चरणों में उद्यमों द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के स्व-ऑडिट के लिए एक दिशा-निर्देश प्रदान किया गया है।

हाल ही में हुए विधायी और नियामकीय परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए, अध्यक्ष ने कहा कि हितधारकों के बीच अनुपालन और जागरूकता को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देते हुए, सीसीआई की ‘एडवोकेसी बुकलेट 2026’ तैयार की गई है। प्रतिस्पर्धा प्रवर्तन की बढ़ती जटिलता को देखते हुए, अध्यक्ष ने सीसीआई के भीतर क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा कि कानूनी और आर्थिक विशेषज्ञता के अलावा, डिजिटल बाजारों में उभरती चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए डेटा साइंस और फोरेंसिक विश्लेषण के विशेषज्ञों की भी आवश्यकता है। उन्होंने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि सीसीआई अपने 18वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और यह प्रवर्तन में दृढ़, प्रक्रियाओं में निष्पक्ष और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
सीसीआई की सदस्य श्रीमती श्वेता कक्कड़ ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इस कार्यक्रम में सरकार, नियामक निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, उद्योग, शिक्षा जगत, वाणिज्य मंडलों और विधि जगत के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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पीके/केसी/जेएस
(रिलीज़ आईडी: 2263528)
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