प्रविष्टि तिथि:
19 MAY 2026 9:25PM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ब्रह्मपुत्र को एक बहुआयामी आर्थिक गलियारे में बदलने के प्रयासों को तेज कर रही है, जिसमें केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (MoPSW) सर्बानंद सोनोवाल परिवहन, व्यापार, पर्यटन और नदी प्रबंधन को मिलाकर एक एकीकृत पहल का नेतृत्व कर रहे हैं।
आज असम के गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र बोर्ड के उच्चाधिकार समीक्षा बोर्ड (HPRB) की बैठक में इस पहल की समीक्षा की गई, जहां मंत्रियों, तकनीकी विशेषज्ञों और राज्य प्रतिनिधियों ने पूर्वोत्तर में वैज्ञानिक नदी बेसिन योजना, बाढ़ नियंत्रण और जल संसाधनों के सतत उपयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। बैठक में बेसिन राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और GIS, LiDAR और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर भी जोर दिया गया।
इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “इस रणनीति का मूल आधार ब्रह्मपुत्र को केवल एक नदी के रूप में नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर में संपर्क और आर्थिक विकास को गति देने में सक्षम एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपदा के रूप में मान्यता देना है। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) ब्रह्मपुत्र की वास्तविक क्षमता को साकार करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसे राष्ट्रीय जलमार्ग 2 (NW2) घोषित किया गया है। यह असम और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों को भारत-बांग्लादेश प्रोटोकॉल मार्ग (IBPR) के माध्यम से कोलकाता और हल्दिया बंदरगाहों से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण अंतरदेशीय परिवहन गलियारा प्रदान करता है, जिससे पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ, किफायती और कुशल परिवहन व्यवस्था को पुनर्जीवित किया जा रहा है।”
असम में, पांडू, धुबरी और जोगीघोपा में प्रमुख टर्मिनलों के साथ-साथ फ्लोटिंग जेट्टी और उन्नत तटीय सुविधाओं सहित लगभग 751 करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले ही पूरी हो चुकी हैं। 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से चल रहे कार्यों में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे जलमार्ग विकास, जहाज मरम्मत सुविधाएं, पर्यटक जेट्टी और डिब्रूगढ़ में एक क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना शामिल है।
सर्बानंद सोनोवाल ने आगे कहा कि उन्होंने राज्यों में सतत जल गवर्नेंस और सुधार पहल को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राज्य जल सुधार फ्रेमवर्क (SWRF) शुरू करने के कदम का स्वागत किया है।
बैठक में एकीकृत नदी विकास रणनीति की वकालत करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने तर्क दिया-
“ब्रह्मपुत्र का विकास एक ऐसे लचीले और टिकाऊ नदी ईकोसिस्टम के निर्माण से संबंधित है जो संपर्क, व्यापार और समुदायों का समर्थन करता है। बाढ़ प्रबंधन, कटाव नियंत्रण, गाद निकालने और अवसंरचना विकास को मिलाकर एकीकृत नदी बेसिन योजना बनाना पूरे वर्ष नौगम्यता और दीर्घकालिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है । GIS-आधारित योजना और डिजिटल निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर, हम अपने जलमार्गों को कुशल, हरित और भविष्य के लिए तैयार परिवहन गलियारों में बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं, साथ ही क्षेत्र के पारिस्थितिकीय संतुलन को भी संरक्षित कर रहे हैं, जैसा कि हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने परिकल्पना की है,”
सरकार पूर्वोत्तर में सामुदायिक घाट, मालवाहक पोत, ड्रेजर और क्रूज टर्मिनल सहित लगभग 4,800 करोड़ रुपये की भावी परियोजनाओं में भी निवेश कर रही है। इन पहल से अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने, रसद दक्षता में सुधार करने और नदी तटीय क्षेत्रों में रोजगार सृजित करने की उम्मीद है।
नीतिगत स्तर पर, ब्रह्मपुत्र बोर्ड को एक आधुनिक, प्रौद्योगिकी-आधारित नदी बेसिन संगठन के रूप में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। योजनाओं में डिजिटल शासन प्रणाली, डेटा-आधारित परियोजना निगरानी और पूर्वोत्तर जल एवं संबद्ध अनुसंधान संस्थान (NEHARI) जैसे अनुसंधान संस्थानों का पुनरुद्धार शामिल है।
सोनोवाल ने आगे कहा कि मोदी सरकार इस नदी को अपनी "एक्ट ईस्ट पॉलिसी" के लिए एक रणनीतिक साधन के रूप में देखती है, जो सीमा पार संपर्क और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा देती है। अंतरदेशीय जलमार्गों को सड़क और रेल परिवहन के किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में तेजी से स्थापित किया जा रहा है, जिससे भीड़भाड़, ईंधन की खपत और उत्सर्जन में कमी आती है।
2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के नेतृत्व में भारत में, विशेष रूप से पूर्वोत्तर में, अंतरदेशीय जल परिवहन में तीव्र वृद्धि देखी गई है। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2014 में 18 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 2025-26 में 218 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक हो गई है, जो रसद श्रृंखला में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।
आगामी अवधि में, पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतरदेशीय जलमार्ग क्षेत्र में 79 सामुदायिक जेट्टी का विकास, डिब्रूगढ़ में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (RCoE) और पांडू में जहाज मरम्मत सुविधा जैसी प्रमुख सुविधाओं का विस्तार, और रणनीतिक नदी बंदरगाहों पर सीमा शुल्क और आव्रजन के लिए सहायक बुनियादी ढांचे का निर्माण होने की संभावना है। योजना में ड्रेजर, सर्वेक्षण पोत और मालवाहक बेड़े की खरीद के साथ-साथ असम में शहरी जल परिवहन प्रणालियों और क्रूज टर्मिनलों की शुरुआत भी शामिल है। अधिकारियों ने कहा कि इन निवेशों का उद्देश्य नौगम्यता में सुधार, रसद दक्षता में वृद्धि और नदी आधारित परिवहन की आर्थिक क्षमता को उजागर करना है, जबकि भारी गाद, बदलते जलमार्ग और बार-बार आने वाली बाढ़ जैसी तकनीकी चुनौतियों के लिए एक वैज्ञानिक और एकीकृत नदी बेसिन प्रबंधन दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
HPRB की बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल; जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी; असम की पर्यटन मंत्री अजंता नियोग; अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री बियुराम वाहगे; मणिपुर के पर्यटन मंत्री खुरैजाम लोकेन सिंह; मेघालय के जल संसाधन मंत्री मेटबाह लिंगदोह; मिजोरम के IWRD मंत्री पी.सी. वनलालरुअता; सिक्किम के सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल संचयन मंत्री सोनम लामा; और त्रिपुरा के उद्योग मंत्री संताना चकमा भी उपस्थित थे। बैठक में सलाहकार और ब्रह्मपुत्र बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. रणबीर सिंह भी उपस्थित थे।




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