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प्रधानमंत्री की संयुक्‍त अरब अमीरात की यात्रा


ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाना

प्रविष्टि तिथि: 15 MAY 2026 8:31PM by PIB Delhi

ऐतिहासिक संबंधों से व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक

भारत और संयुक्‍त अरब अमीरात के बीच रिश्‍ते लंबे समय से चले आ रहे हैं, जिन्‍होंने व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और अरब सागर के पार मजबूत सामुदायिक संबंधों से आकार लिया है। सदियों से मोती, खजूर, मसालों, वस्त्र और मत्स्य उत्पादों का व्यापार पश्चिमी भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ता रहा है। दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध 1972 में स्थापित हुए, जिसके बाद अबू धाबी और नई दिल्ली में दूतावास खोले गए।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की वर्ष 2015 की यूएई की यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंधों को नई गति मिली। यह 34 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यूएई यात्रा थी। वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सात बार यूएई की यात्रा की है, जबकि यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने पाँच बार भारत की यात्रा की है। इस अवधि में, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, रक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है। यूएई अब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है, वह प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता तथा अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा में महत्वपूर्ण निवेशक भी है।

व्यापार और निवेश संबंध: दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तु व्यापार पहली बार 100 बिलियन डॉलर का आँकड़ा पार करते हुए वित्त वर्ष 2025–26 में 101.25 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। दोनों पक्षों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 200 बिलियन डॉलर तक ले जाने की प्रतिबद्धता जताई है।

निवेश भी इस द्विपक्षीय संबंध का एक महत्वपूर्ण घटक बन चुका है। दोनों देशों ने फरवरी 2024 में द्विपक्षीय निवेश संधि पर हस्ताक्षर किए, जो 31 अगस्त 2024 से प्रभावी हुई। अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक यूएई से भारत में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 25.19 बिलियन डॉलर रहा, जिससे यूएई भारत में सातवाँ सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बन गया। यूएई के निवेश रियल एस्टेट, अवसंरचना, ऊर्जा, निजी इक्विटी और वित्तीय सेवाओं जैसे विविध क्षेत्रों में केंद्रित हैं। यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स (एसडब्ल्यूएफ) की भारत में मजबूत उपस्थिति है। भारत और यूएई के बीच स्थानीय मुद्रा निपटान (एलसीएस) प्रणाली लागू है, इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और धन प्रेषण भारतीय रुपये और दिरहम  में किया जा सकता है, जिससे डॉलर पर निर्भरता और लेन-देन की लागत कम होती है।

ऊर्जा व्यापार: भारत और यूएई के बीच विशेषकर हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में घनिष्ठ और मजबूत साझेदारी है। वित्त वर्ष 2024–25 में यूएई कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत, एलएनजी का तीसरा सबसे बड़ा स्रोत, एलपीजी  का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता और भारत के तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के दूसरे सबसे बड़े निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा। वर्तमान में, यूएई एकमात्र ऐसा देश है, जो भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम में भाग ले रहा है।

द्विपक्षीय संपर्क : ऊर्जा और व्यापार के अलावा, कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स सहयोग भी द्विपक्षीय साझेदारी के महत्वपूर्ण स्तंभों के रूप में उभर रहे हैं। दोनों देश समुद्री संपर्क को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं।

रक्षा सहयोग: भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, आपसी सहयोग के अन्य क्षेत्रों के अनुरूप, लगातार सुदृढ़ होता जा रहा है। यह सहयोग मंत्रालय स्तर पर संयुक्त रक्षा सहयोग समिति (जेडीसीसी) के माध्यम से संचालित होता है, जिसकी स्थापना जून 2003 में रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। सर्विस या सेना मुख्यालय स्तर पर, सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच प्रतिवर्ष सर्विस स्टाफ टॉक्स आयोजित की जाती हैं, जिनमें सुरक्षा और रक्षा सहयोग के विभिन्न अवसरों के बारे में चर्चा की जाती है।

लोगों के बीच पारस्‍परिक संबंध: यूएई में प्रवासी भारतीय सबसे बड़ा विदेशी समुदाय हैं। वे यूएई की अर्थव्यवस्था और समाज की रीढ़ के रूप में कार्य करते हैं। उनका कल्याण दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के बावजूद, यह प्रवासी समुदाय लगातार भारत को धन प्रेषण का एक स्थिर स्रोत बना हुआ है, जिसका देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

15 मई 2026 : प्रधानमंत्री की यूएई की यात्रा  

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने 15 मई 2026 को संयुक्‍त अरब अमीरात की यात्रा की और वहाँ यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ वार्ता की। इस यात्रा से द्विपक्षीय रणनीतिक  साझेदारी में मज़बूत रफ़्तार की पुष्टि हुई। दोनों देश रणनीतिक, आर्थिक, प्रौद्योगिकीय और सामाजिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चर्चाओं में मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं, दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग तथा क्षेत्रीय और वैश्विक प्राथमिकताओं के संबंध में बढ़ते सामंजस्य पर विशेष जोर दिया गया।  

मुख्य परिणाम और उनका रणनीतिक महत्व

प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत-यूएई की बढ़ती द्विपक्षीय साझेदारी में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसके परिणाम महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक फैले हैं, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक सामंजस्य को दर्शाते हैं। ये दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती, प्रौद्योगिकीय सहयोग और क्षेत्रीय संपर्क को और सुदृढ़ करेंगे।

 

परिणाम 1: इंडियन स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड (आईएसपीआरएल) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के बीच रणनीतिक सहयोग पर समझौता ज्ञापन

यह समझौता हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में गहन सहयोग के माध्यम से भारत  की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती प्रदान  करेगा। यह महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों तक विश्वसनीय पहुँच सुनिश्चित करेगा। यह साझेदारी भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार ढाँचे को भी सुदृढ़ करेगी। जिससे वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता से निपटने की देश की क्षमता में वृद्धि होगी।

यह समझौता तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की भंडारण अवसंरचना में नए अवसर उत्पन्न करेगा। यह भारत  के ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और भंडारण क्षमता के विस्तार के प्रयासों में सहायता देगा। यह साझेदारी सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख ऊर्जा इकोसिस्‍टम के निर्माण में भी सहायता करेगी।

परिणाम 2 : इंडियन ऑयल लिमिटेड (आईओसीएल) कंपनी और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के बीच द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति पर रणनीतिक सहयोग समझौता

यह सहयोग भारत की दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह घरेलू मांग के लिए स्थिर और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत सुनिश्चित करेगा। यह पहल दोनों देशों के बीच रणनीतिक ऊर्जा सहयोग को और बढ़ाएगी। इससे भारत के सबसे विश्वसनीय ऊर्जा साझेदारों के रूप में यूएई की स्थिति और सुदृढ़ होगी।

परिणाम 3: रणनीतिक रक्षा साझेदारी के लिए फ्रेमवर्क

यह ढाँचा दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करेगा। यह संयुक्त साझेदारियों, सह-विकास और उद्योगों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा। यह समझौता रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार और प्रौद्योगिकी साझा करने को भी बढ़ावा देगा। इससे उन्नत रक्षा विनिर्माण और क्षमताओं में सहयोग को समर्थन मिलेगा। व्यापक स्तर पर, इस साझेदारी से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ने की संभावना है।

परिणाम 4:  कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) और ड्राईडॉक्स वर्ल्ड (डीडीडब्ल्यू) के बीच वाडिनार  में जहाज मरम्मत क्लस्टर स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन

 

यह पहल शिपिंग, बंदरगाह और तटीय अवसंरचना के विकास को बढ़ावा देगी। यह बढ़ते समुद्री और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी। यह सहयोग समुद्री लॉजिस्टिक्स इकोसिस्‍टम को भी बेहतर बनाएगा। यह जहाज मरम्मत तथा संबंधित औद्योगिक क्षमताओं को सुदृढ़ करेगा। इससे कुशल व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा । यह साझेदारी ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी आगे बढ़ाएगी, जिससे घरेलू विनिर्माण, अवसंरचना विकास और स्वदेशी समुद्री क्षमताओं को प्रोत्साहन मिलेगा।

परिणाम 5:  कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), ड्राईडॉक्स वर्ल्ड (डीडीडब्ल्यू) और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मैरीटाइम एंड शिपबिल्डिंग (सीईएमएस) के बीच जहाज मरम्मत में कौशल विकास पर समझौता ज्ञापन (एमओयू)

यह व्यवस्था भारतीय समुद्री कार्यबल की क्षमताओं को मजबूत करेगी। यह जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत में विशेष प्रशिक्षण, तकनीकी कौशल उन्नयन और क्षमता निर्माण में सहायता देगी। यह पहल भारत को कुशल समुद्री पेशेवरों के वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने में भी सहायता करेगी। इससे उद्योग के लिए तैयार विशेषज्ञता मजबूत होगी और समुद्री क्षेत्र में अवसर बढ़ेंगे । यह सहयोग स्किल इंडिया मिशन के उद्देश्यों के भी अनुरूप है। यह विकसित हो रहे वैश्विक समुद्री उद्योग के लिए भविष्य-उन्मुख कार्यबल तैयार करने में मदद करेगा।

परिणाम 6:  सी-डैक, भारत और जी-42, यूएई  के बीच साझेदारी में 8 एक्साफ़्लॉप सुपर कंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने के लिए टर्म शीट

यह साझेदारी भारत की संप्रभु एआई और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमताओं को तेज़ी से विकसित करेगी। यह देश की सुपरकंप्यूटिंग अवसंरचना को और मजबूत बनाएगी। यह सहयोग इंडिया एआई मिशन को भी गति प्रदान करेगा। यह डिजिटल नवाचार, एआई अनुसंधान तथा अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकीय प्रगति को समर्थन देगा।

परिणाम 7: संयुक्त अरब अमीरात की ओर से भारत में निवेश

ये निवेश प्रतिबद्धताएँ दोनों देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय सहयोग को मजबूत करेंगी। ये भारत के बुनियादी ढाँचे और बैंकिंग क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देंगी। ये प्रतिबद्धताएँ दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह और निवेशक विश्वास को भी सुदृढ़ करेंगी। साथ ही, ये भारत के आर्थिक विकास और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के लक्ष्यों में सहायता प्रदान करेंगी।

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री की यात्रा के परिणाम द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य-उन्मुख रणनीतिक साझेदारी में रूपांतरण को दर्शाते हैं। यह सहयोग विश्वास, नवाचार और साझा समृद्धि पर आधारित है। ये समझौते ऊर्जा, व्यापार और रक्षा जैसे पारंपरिक क्षेत्रों में सहयोग को और बढ़ाते हैं। साथ ही, ये अग्रणी प्रौद्योगिकियों, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल अवसंरचना और उन्नत विनिर्माण जैसे नए क्षेत्रों में भी अवसरों का विस्तार करते हैं।

भविष्य के लिए तैयार भारत-यूएई साझेदारी की ओर

भारत और यूएई के बीच संबंध पारंपरिक व्यापारिक संपर्कों से विकसित होकर एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। निरंतर राजनीतिक सहभागिता और आर्थिक सहयोग ने इस परिवर्तन को गति दी है। आज यह साझेदारी ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और रक्षा सहयोग जैसे विविध क्षेत्रों तक व्‍याप्‍त है।  

प्रधानमंत्री की 2026 की यात्रा के परिणामों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया है। इससे उभरती प्रौद्योगिकियों, समुद्री अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रणनीतिक उद्योगों में सहयोग का विस्तार हुआ है। जैसे-जैसे दोनों देश अपनी आर्थिक और भू-राजनीतिक प्राथमिकताओं में सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं, उम्मीद है कि यह साझेदारी आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

संदर्भ:

  1. विदेश मंत्रालय
  1. पत्र सूचना कार्यालय

 

प्रधानमंत्री की संयुक्‍त अरब अमीरात की यात्रा

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