सहकारिता मंत्रालय
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मत्स्य क्षेत्र में “सहकार से समृद्धि” के दृष्टिकोण को सशक्त बनाने हेतु हैदराबाद में मत्स्य सहकारी संस्थाओं पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

देशभर में सहकारी आधारित मत्स्य पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार तथा “सहकारिता में सहकार” को बढ़ावा देने हेतु क्षेत्रीय कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की जा रही है

सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने मत्स्य सहकारी संस्थाओं के लिए सुदृढ़ संस्थागत ढांचे, तकनीकी एकीकरण एवं बाजार संपर्क की आवश्यकता पर बल दिया

केंद्रीय मत्स्य सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने नवाचार, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, आधुनिक मत्स्य अवसंरचना एवं मछुआरा समुदायों के समावेशी विकास पर जोर दिया

राष्ट्रीय कार्यशाला में नई मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन, मौजूदा संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, संस्थागत ऋण संपर्क एवं PMMSY आधारित विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई

जलाशय मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल खेती, खुले समुद्र में केज कल्चर, मत्स्य बीमा, डिजिटल प्लेटफॉर्म एवं सहकारी गतिविधियों के विविधीकरण पर विस्तृत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए

प्रविष्टि तिथि: 15 MAY 2026 9:16PM by PIB Delhi

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी केसहकार से समृद्धिके दृष्टिकोण से प्रेरित, जिसे माननीय केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देशभर में क्रियान्वित किया जा रहा है, मत्स्य सहकारी संस्थाओं पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का आयोजन 15 मई, 2026 को हैदराबाद में किया गया। यह कार्यशाला देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित की जा रही क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय सहकारी परामर्श बैठकों की निरंतर श्रृंखला का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य मत्स्य सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना तथा मछुआरा समुदायों एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के समावेशी एवं सतत विकास हेतुसहकारिता में सहकारको बढ़ावा देना है। इससे पूर्व इसी पहल के अंतर्गत मिजोरम और जयपुर में भी कार्यशालाएँ आयोजित की जा चुकी हैं।

राष्ट्रीय कार्यशाला में विभिन्न राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं, सहकारी संगठनों, वित्तीय संस्थानों तथा विकास एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत सरकार के मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी वर्चुअल माध्यम से विचार-विमर्श में शामिल हुए। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) ने भी कार्यशाला की प्रक्रिया एवं तकनीकी चर्चाओं में सक्रिय भागीदारी निभाई। विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य राज्यों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना, मत्स्य क्षेत्र से संबंधित योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति देना तथा नियमित निगरानी, समस्याओं के समाधान एवं नीतिगत फीडबैक हेतु संस्थागत तंत्र विकसित करना था।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने, आय के अवसर बढ़ाने तथा समुदाय आधारित सतत आर्थिक प्रणालियों के निर्माण में मत्स्य सहकारी संस्थाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएँ विशेष रूप से मछुआरों, महिलाओं तथा मत्स्य मूल्य श्रृंखला से जुड़े ग्रामीण परिवारों के समावेशी विकास को सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी हैं। उन्होंने संस्थागत तंत्र को मजबूत करने, सुलभ वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने, सहकारी संरचनाओं के आधुनिकीकरण तथा बेहतर उत्पादन, प्रसंस्करण एवं विपणन परिणामों हेतु तकनीक आधारित प्रणालियों के एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

 

डॉ. भूटानी ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद से मत्स्य क्षेत्र के संतुलित एवं समावेशी विकास हेतु एक मजबूत संस्थागत ढांचा विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं, विकास एजेंसियों एवं वित्तीय प्रणालियों के समन्वित प्रयासों से एक सशक्त जमीनी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो रहा है, जो रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा तथा ग्रामीण आर्थिक सुदृढ़ीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने राज्यों के साथ नियमित त्रैमासिक कार्यशालाओं के आयोजन के महत्व पर भी प्रकाश डाला, ताकि योजनाओं की सतत निगरानी, नीतिगत फीडबैक तथा प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने भारत के मत्स्य क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए नवाचार आधारित एवं सहकारी संचालित विकास मॉडल के महत्व पर बल दिया। उन्होंने तेजी से विकसित हो रहे मत्स्य स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का उल्लेख करते हुए बेहतर बाजार संपर्क, डिजिटल एकीकरण, अवसंरचना विकास तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मत्स्य सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के मत्स्य क्षेत्र को उभरते वैश्विक मानकों एवं भविष्य की बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यशाला में मत्स्य सहकारी संस्थाओं के विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तृत तकनीकी एवं विषयगत सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में नई मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन, मौजूदा संस्थाओं के सुदृढ़ीकरण, वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के अंतर्गत संस्थाओं के सशक्तिकरण की रणनीतियों पर चर्चा हुई। सदस्यता विस्तार, DCCB ऋण संपर्क को मजबूत करने, निष्क्रिय मत्स्य सहकारी संस्थाओं के पुनर्जीवन तथा बोर्ड सदस्यों एवं संस्थाओं के सदस्यों के क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया गया।

NFDB, NCDC, NAFED, SFAC एवं NERAMAC सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने कार्यान्वयन रणनीतियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण मॉड्यूल, महिला सशक्तिकरण पहलों तथा सहकारी विकास मॉडलों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी अपने क्रियान्वयन अनुभव, सर्वोत्तम प्रथाएँ एवं भविष्य की कार्ययोजनाएँ साझा कीं।

सरकारी योजनाओं एवं कल्याणकारी पहलों पर आयोजित सत्र में PMMSY, PM-MKSSY, मत्स्य एवं एक्वाकल्चर अवसंरचना विकास निधि (FIDF), उद्यमिता मॉडल तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही मत्स्य सहकारी संस्थाओं एवं उनके सदस्यों के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना, एक्वाकल्चर बीमा एवं नौका बीमा जैसी बीमा सुविधाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

विशेष तकनीकी सत्रों में जलाशय मत्स्य पालन, सजावटी मत्स्य पालन, क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास तथा Bio-floc एवं Recirculatory Aquaculture System (RAS) जैसी उभरती तकनीकों को अपनाने पर चर्चा हुई। जलाशय लीज नीति में कानूनी एवं नीतिगत सुधारों तथा PMMSY Phase-II के अंतर्गत मत्स्य सहकारी संस्थाओं के लिए विशेष परियोजनाओं की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

कार्यशाला में संस्थागत ऋण सहायता के माध्यम से मत्स्य सहकारी संस्थाओं को सुदृढ़ करने, सहकारी बैंकों की भूमिका का विस्तार करने, NABARD एवं NCDC के सहयोग तंत्र को मजबूत बनाने तथा DCCBs के माध्यम से मत्स्य सहकारी संस्थाओं तक ऋण पहुँच बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

समुद्री मत्स्य सहकारी गतिविधियों के विविधीकरण पर आयोजित सत्र में खुले समुद्र में केज कल्चर, महिला सशक्तिकरण हेतु समुद्री शैवाल खेती, मछली अपशिष्ट से मूल्य संवर्धन, सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल, घरेलू उपभोग, निर्यात संभावनाएँ तथा डिजिटल विपणन प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। CMFRI, CIFT एवं MPEDA जैसी संस्थाओं ने बाजार संपर्कों को मजबूत करने तथा सहकारी आधारित मत्स्य गतिविधियों के विविधीकरण पर बल दिया।

कार्यशाला के दौरान सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना पर भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें PACS की पहचान, भंडारण अवसंरचना, कार्यान्वयन ढांचा, AMI वित्तपोषण, WDRA ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया तथा सहकारी भंडारण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त दो लाख नई बहुउद्देश्यीय PACS, डेयरी एवं मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन एवं सुदृढ़ीकरण, व्यवसाय विविधीकरण, कमजोर संस्थाओं के पुनर्जीवन, जमा संग्रहण एवं सदस्यता विस्तार की रणनीतियों पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि सहकारी संस्थाओं के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में परिवर्तन को गति दी जाएगी, नई मत्स्य सहकारी संस्थाओं के गठन को बढ़ावा दिया जाएगा तथा मछुआरा समुदायों के दीर्घकालिक आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित किया जाएगा।

 

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AK

 


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