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आंध्र प्रदेश में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) के कार्यान्वयन हेतु डीबीएन (डिजिटल भारत निधि) - दूरसंचार विभाग; आंध्र प्रदेश सरकार; एपीबीआईएल; बीएसएनएल एवं  एपीएसएफएल के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए


आंध्र प्रदेश में एबीपी के कार्यान्वयन हेतु 2,432 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई

आंध्र प्रदेश में एबीपी परियोजना 13,426 ग्राम पंचायतों को कवर करेगी और 3,942 गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी प्रदान करेगी

आंध्र प्रदेश में ग्रामीण दूरसंचार बुनियादी ढांचे को मजबूत एवं उन्नत बनाने हेतु साझेदारी

प्रविष्टि तिथि: 13 MAY 2026 7:36PM by PIB Delhi

आंध्र प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, दूरसंचार विभाग (डीओटी) के तहत डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) ने आज नई दिल्ली स्थित संचार भवन में राज्य के नेतृत्व वाले मॉडल के तहत राज्य में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) के कार्यान्वयन हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

आंध्र प्रदेश राज्य में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु दूरसंचार विभाग (डीओटी) के डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), आंध्र प्रदेश सरकार, आंध्र प्रदेश भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीबीआईएल), भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और आंध्र प्रदेश स्टेट फाइबरनेट लिमिटेड (एपीएसएफएल) के बीच इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

समझौते पर हस्ताक्षर समारोह डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के प्रशासक श्री श्याममल मिश्रा; दूरसंचार विभाग के महानिदेशक (दूरसंचार) श्री आनंद खरे; आंध्र प्रदेश भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीबीआईएल) की सीईओ सुश्री गीतांजलि शर्मा; भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के निदेशक (एंटरप्राइज बिजनेस - ईबी) श्री पापा सुधाकर राव; दूरसंचार विभाग  के डीडीजी (एबीपी कार्यान्वयन-I) श्री दिनेश कुमार गर्ग; डीओटी, डीबीएन और बीएसएनएल के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित किया गया।

इस समझौते पर हस्ताक्षर इस कार्यक्रम के त्वरित कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह ग्रामीण डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, अंतिम-छोर तक  कनेक्टिविटी को बढ़ाने तथा समावेशी डिजिटल विकास को बढ़ावा देने की केन्द्र सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य मौजूदा भारतनेट नेटवर्क को उन्नत, सुदृढ़ और विस्तारित करना था ताकि मांग के आधार पर सभी ग्राम पंचायतों एवं गांवों को मजबूत तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके।

आंध्र प्रदेश में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत, यह परियोजना आंध्र प्रदेश भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीबीआईएल) के जरिए कार्यान्वित की जाएगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 13,426 ग्राम पंचायतें शामिल होंगी, जिनमें नेटवर्क की मजबूती बढ़ाने के लिए प्रथम चरण की 1,692 ग्राम पंचायतों को लीनियर से रिंग टोपोलॉजी में उन्नत करना, द्वितीय चरण की 11,254 ग्राम पंचायतों को कवर करना और 480 नवगठित ग्राम पंचायतों का समावेश  करना शामिल है। इसके अलावा, अंतिम-छोर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने हेतु 3,942 गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।

भारत सरकार ने आंध्र प्रदेश में इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन हेतु कुल 2,432 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। इस पहल के तहत भारत सरकार की वित्तीय सहायता से पांच लाख से अधिक ग्रामीण क्षेत्र के घरों में फाइबर कनेक्शन स्थापित होने की उम्मीद है और राज्य के ग्रामीण एवं दूर-दराज के इलाकों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और नागरिक-केन्द्रित सेवाओं सहित डिजिटल सेवाओं की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार होगा।

आज हस्ताक्षर हुए समझौते से आंध्र प्रदेश में इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन में तेजी आने और डिजिटल रूप से सशक्त समाज तथा ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को और आगे बढ़ने की उम्मीद है।

डिजिटल भारत निधि के बारे में

डिजिटल भारत निधि (पूर्व में यूएसओएफ) की स्थापना भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 01.04.2002 से प्रभावी हुई थी। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अनुसार, सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष अब डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) बन गया है। डीबीएन का दायित्व ग्रामीण, दूरस्थ और शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं की उपलब्धता और आपूर्ति को बढ़ावा देकर सार्वभौमिक सेवा का समर्थन करना है। यह संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (डीओटी) का एक संबद्ध कार्यालय है।

डीबीएन के उद्देश्यों को हासिल करने हेतु, इसमें भारतनेट, 4जी संतृप्ति परियोजना, आकांक्षी जिलों, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, हिमालयी एवं सीमावर्ती क्षेत्रों, द्वीपों और पूर्वोत्तर क्षेत्र के मोबाइल सेवाओं से वंचित क्षेत्रों में मोबाइल सेवा के प्रावधान सहित विभिन्न योजनाएं और परियोजनाएं शामिल हैं।

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