कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) और राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) ने ग्लोबल डिजिटल कैपेसिटी बिल्डिंग एलायंस के तहत श्रीलंका के 40 सिविल सेवकों के लिए क्षमतावर्द्धन के लिए सहयोग किया


मिशन कर्मयोगी को शासन में बदलाव और भविष्योन्मुखी सार्वजनिक संस्थानों के रूप में विश्व स्तर पर अनुकूलनीय मॉडल के तौर पर प्रदर्शित किया गया

क्षमता विकास आयोग माननीय प्रधानमंत्री के एआई-सक्षम शासन दृष्टिकोण के अनुरूप एआई-निहित सार्वजनिक अधिकारी तैयार करने के लिए वैश्विक गठबंधन व्यापक बना रहा है

प्रविष्टि तिथि: 08 MAY 2026 11:59AM by PIB Delhi

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में माननीय प्रधानमंत्री ने भविष्य में शासन के लिए निर्णायक राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया था कि भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सक्षम सार्वजनिक सेवाओं के "कुशल और न्यायसंगत शासन के तौर पर वैश्विक मानक के रूप में अध्ययन किया जाएगा।" उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि प्रत्येक नागरिक को कृत्रिम बुद्दिमत्ता को अवसर उत्पन्न करने वाला, क्षमता कई गुना बढ़ाने वाला और मानवीय गरिमा प्रदान करने के उपाय के रूप में समझना चाहिए।

इसी दृष्टिकोण के अनुरूप, क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने शिखर सम्मेलन में वैश्विक डिजिटल क्षमता निर्माण गठबंधन (जीडीसीबीए) का ढांचा प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, कर्मयोगी भारत के अध्यक्ष श्री एस. रामदोराई और क्षमता विकास आयोग की अध्यक्ष श्रीमती राधा चौहान उपस्थित थे। बहुहितधारक साझेदारी – पेटल्ड पार्टनरशिप दृष्टिकोण पर आधारित जीडीसीबीए, सरकारों, बहुपक्षीय संगठनों, उद्योग, शिक्षा जगत, नागरिक समाज और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) पारिस्थितिकी तंत्र के भागीदारों को साथ लाता है ताकि डिजिटल युग के लिए संस्थागत क्षमताओं को सामूहिक रूप से सुदृढ़ बनाया जा सके। गठबंधन कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल सार्वजनिक संसाधन युग में क्षमता निर्माण को साझा वैश्विक विकास अनिवार्यता और वैश्विक सार्वजनिक हित के रूप में विकसित किये जाने का समर्थक है।

इस दृष्टिकोण के अंतर्गत, क्षमता विकास आयोग ने राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) के सहयोग से, आपदा प्रबंधन पर 19वें क्षमता निर्माण कार्यक्रम में भाग लेने वाले श्रीलंका के 40 वरिष्ठ सिविल सेवकों के प्रतिनिधिमंडल के लिए "भविष्य अनुरूप सार्वजनिक संस्थानों का निर्माण" विषय पर रणनीतिक सत्र आयोजित किया।

यह सत्र वैश्विक स्तर पर शासन प्रणालियों को आकार देने वाले तेजी से विकसित हो रहे मुद्दों पर संवाद मंच के रूप में आयोजित हुआ - जिसमें डिजिटल परिवर्तन, नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाएं, संस्थागत स्थिति अनुरूपता, अनुकूल नीति निर्माण और सार्वजनिक प्रशासन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दायित्वपूर्ण उपयोग शामिल रहा।

मिशन कर्मयोगी अभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 1.65 करोड़ से अधिक सरकारी अधिकारियों के लिए अभूतपूर्व स्तर पर क्षमतावर्द्धन सक्षम बना रहा है। मिशन कर्मयोगी के तहत भारत के परिवर्तनकारी शासन सुधारों से प्रेरित, क्षमता विकास आयोग की सलाहकार डॉ. वशिमा शुभा के नेतृत्व वाली टीम ने सार्वजनिक क्षेत्र ज्ञान पुनर्कल्पना के लिए भारत का समग्र सरकारी दृष्टिकोण (विभिन्न सरकारी मंत्रालयों, विभागों और एजेंसियों का समन्वित काम करना, ताकि किसी जटिल समस्या का एकीकृत समाधान हो) प्रस्तुत किया, जो खंडित और छिटपुट प्रशिक्षण मॉडलों से हटकर सतत, योग्यता-आधारित व्यापक क्षमता निर्माण है।

चर्चा में इस बात को रेखांकित किया गया कि भारत छह परस्पर जुड़े स्तंभों के माध्यम से नागरिक-केंद्रित, डिजिटल सक्षम और भविष्योन्मुखी सिविल सेवा पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित कर रहा है। ये स्तंभ निम्नलिखित हैः

  • नीति और शासन
  • प्रौद्योगिकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म
  • सामग्री की गुणवत्ता और आश्वासन
  • कार्यक्रम वितरण
  • मापन और परिणाम
  • वैश्विक भागीदारी और पारिस्थितिकी तंत्र विकास

संरचित विचार-विमर्श में श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल ने उभरती शासन संबंधी चुनौतियों से निपटने में सक्षम, तत्पर और स्थिति अनुरूप सिविल सेवाओं के लिए आवश्यक क्षमता पर विचार-विमर्श किया। चर्चा में मिशन कर्मयोगी के कई तत्वों को वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और विभिन्न शासन संदर्भों के अनुकूल बताया गया, जिनमें योग्यता-आधारित क्षमता निर्माण, डिजिटल शिक्षण पारितंत्र, व्यक्तिगत शिक्षण मार्ग, डेटा-आधारित क्षमता मूल्यांकन और समग्र सरकारी सुधार दृष्टिकोण शामिल हैं। संवाद में भारत में सुशासन बदलाव के बढ़ते चरण के प्रति अंतरराष्ट्रीय रुचि और संस्थागत सुधार एवं भविष्य अनुरूप लोक प्रशासन के अनुकूल मॉडल के रूप में मिशन कर्मयोगी की उभरती प्रासंगिकता भी परिलक्षित हुई।

सत्र में वैश्विक डिजिटल क्षमता निर्माण गठबंधन द्वारा मिशन कर्मयोगी की संस्थागत संरचना और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को साझेदार देशों तक पहुंचाने के भारत के व्यापक प्रयासों को भी प्रदर्शित किया गया। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत-मॉरीशस उन्नत रणनीतिक साझेदारी के तहत मॉरीशस के सरकारी अधिकारियों के लिए आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ किया जाना है।

इस पहल ने "वसुधैव कुटुंबकम" (सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है) के दर्शन की भारत की प्रतिबद्धता पुनः स्थापित की, जिसमें भारतीय शासन संबंधी नवाचारों को "भारत में निर्मित, विश्व के लिए निर्मित" वैश्विक समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया। मिशन कर्मयोगी और क्षमता विकास आयोग के नेतृत्व द्वारा भारत स्थिति अनुरूप नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक संस्थानों के निर्माण पर वैश्विक चर्चा को आकार देना जारी रखे हुए है।

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पीके/केसी/एकेवी/एसके


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