पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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आईएमडी द्वारा अत्यंत-स्थानीय मौसम पूर्वानुमान प्रदान करने के लिए एआई-सक्षम प्रणालियां शुरु: डॉ. जितेंद्र सिंह


उन्नत पूर्वानुमान प्रणालियां 10 दिन पहले तक स्थानीय मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएंगी: डॉ. जितेंद्र सिंह

सरकार ने 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों के लिए एआई-सक्षम मानसून पूर्वानुमान प्लेटफार्म शुरू किया

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश के लिए एआई-आधारित मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली और 1-किमी रिज़ॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान का शुभारंभ किया

आईएमडी भारत के दैनिक गवर्नेंस और सार्वजनिक निर्णय-निर्माण एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है: डॉ. जितेंद्र सिंह

प्रविष्टि तिथि: 12 MAY 2026 4:03PM by PIB Delhi

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत विकसित दो उन्नत मौसम पूर्वानुमान उत्पादों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य देश भर में अत्यंत-स्थानीय, प्रभाव-आधारित और एआई-संचालित मौसम सेवाएं उपलब्ध कराना है।

आज शुभारंभ किए गए दो उत्पादों में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा पहली बार "देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की आगे बढ़ने का पूर्वानुमान" के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)- संचालित प्रणाली और एक पायलट सेवा के रूप में "उत्तर प्रदेश के लिए उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान" शामिल है। इन प्रणालियों को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), पुणे और राष्ट्रीय मीडियम रेंज मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमताओं में बड़ा बदलाव आया है। प्रौद्योगिकी, डेटा एकीकरण और उन्नत मॉडलिंग ने पूर्वानुमान की सटीकता और आईएमडी सेवाओं में जनता के विश्वास को काफी बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि आईएमडी आज गवर्नेंस, आपदा तैयारी, कृषि योजना और रोजमर्रा के सार्वजनिक निर्णय लेने का एक अभिन्न अंग बन गया है।

मंत्री महोदय ने कहा कि नवनिर्मित प्रणालियां पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान से हटकर प्रभाव-आधारित और निर्णय-सहायक पूर्वानुमान की ओर एक बड़े बदलाव का प्रतीक हैं। यह प्रणालियां किसानों, प्रशासकों, आपदा प्रबंधकों और नागरिकों को सटीक, स्थान-विशिष्ट और कार्रवाई योग्य जानकारी प्रदान करने में सक्षम हैं।

यह शुभारंभ कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के महिका हॉल में आयोजित किया गया। इसमें पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय मोहपात्रा, आईआईटीएम पुणे के निदेशक डॉ. सूर्यचंद्र राव, आईएमडी, आईआईटीएम और एनसीएमआरडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अधिकारी तथा प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

भारत के मौसम संबंधी बुनियादी ढांचे के तेजी से आधुनिकीकरण का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लगभग एक दशक पहले देश में मुश्किल से 16 से 17 डॉप्लर मौसम रडार थे, जबकि अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 50 हो गई है और मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाने की योजना है। उन्होंने कहा कि निगरानी नेटवर्क, स्वचालित मौसम स्टेशनों, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग प्रणालियों और डिजिटल प्रसार प्लेटफार्मों के इस विस्तार से पूरे देश में मौसम पूर्वानुमान क्षमता और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में काफी सुधार हुआ है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि एआई-आधारित मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली प्रत्येक बुधवार को मानसून की प्रगति का संभाव्य पूर्वानुमान चार सप्ताह पहले तक उपलब्ध कराएगी। यह प्रणाली कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के प्रसार ढांचे के माध्यम से 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों के किसानों को सहायता प्रदान करने के लिए बनाई गई है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली कृषि नियोजन और तैयारियों के लिए उपयोगी पूर्वानुमान प्रदान करने हेतु एआई-आधारित पूर्वानुमान मॉडल, विस्तारित रेंज पूर्वानुमान प्रणालियों और सांख्यिकीय तकनीकों को एकीकृत करती है।

मंत्री महोदय ने कहा कि दूसरा उत्पाद, ’’उत्तर प्रदेश के लिए उच्च स्थानिक रिज़ॉल्यूशन वर्षा पूर्वानुमान’’, पायलट सेवा के रूप में विकसित किया गया है। यह प्रणाली 1-किलोमीटर के स्थानिक रिज़ॉल्यूशन पर 10 दिन पहले तक वर्षा पूर्वानुमान उपलब्ध कराएगी। यह प्रणाली उन्नत एआई-आधारित डाउनस्केलिंग तकनीकों का उपयोग करती है और स्वचालित वर्षामापी (एआरजी), स्वचालित मौसम स्टेशनों (एडब्ल्यूएस), डॉप्लर मौसम रडार और उपग्रह-आधारित वर्षा डेटासेट से प्राप्त डेटा को एकीकृत करती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल कृषि, जल संसाधन, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी नियोजन, आपदा प्रबंधन और अवसंरचना क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी। उन्होंने कहा कि किसान अब बुवाई, सिंचाई, फसल संरक्षण और कटाई की योजना से संबंधित निर्णय कहीं अधिक स्थानीय सटीकता के साथ ले सकेंगे।

मंत्री महोदय ने कहा कि पिछले दशक की तुलना में हाल के दशक में भारत में भीषण मौसम संबंधी घटनाओं के पूर्वानुमान की सटीकता में लगभग 40 प्रतिशत सुधार हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि पिछले पांच वर्षों में चक्रवातों के मार्ग, तीव्रता और भूस्खलन के 72 घंटों के पूर्वानुमान में लगभग 30 से 35 प्रतिशत का सुधार हुआ है, जबकि मौसमी पूर्वानुमान त्रुटियों में उल्लेखनीय रूप से कमी आई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं के कारण सटीक और समय पर मौसम पूर्वानुमान पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। हाल ही में मौसम की अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को अब ऐसे पूर्वानुमान प्रणालियों की आवश्यकता है, जो न केवल वैज्ञानिक रूप से उन्नत हों, बल्कि वास्तविक समय में प्रशासनिक और सार्वजनिक निर्णय-निर्माण में भी सहायक हो।

मंत्री महोदय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने देश में मौसम पूर्वानुमान और जलवायु सेवाओं के आधुनिकीकरण के लिए कई परिवर्तनकारी पहलें शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि मिशन मौसम, रडार नेटवर्क का विस्तार, प्रेक्षण प्रणालियों को मजबूत करना, डेटा संचार अवसंरचना का आधुनिकीकरण और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाओं का विस्तार मिलकर अधिक मजबूत और प्रौद्योगिकी-संचालित पूर्वानुमान तंत्र तैयार कर रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मौसम संबंधी परामर्श और प्रारंभिक चेतावनी अब मोबाइल एप्लिकेशन, एसएमएस अलर्ट, व्हाट्सएप, किसान पोर्टल, टेलीविजन और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित कई माध्यमों से प्रसारित की जा रही हैं, ताकि व्यापक जनसंपर्क और अंतिम छोर तक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने आगे कहा कि चरम मौसम की घटनाओं के दौरान नुकसान को कम करने के लिए स्थानीय प्रशासन और हितधारकों द्वारा मौसम संबंधी सलाह का समय पर पालन करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि नवनिर्मित उत्पाद हितधारक-संचालित पूर्वानुमान प्रणालियां हैं जिन्हें संख्यात्मक मौसम पूर्वानुमान मॉडल और एआई-आधारित डेटा-संचालित दृष्टिकोणों के संयोजन से विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि कृषि और अन्य क्षेत्रों से अत्यंत-स्थानिक और उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाले मौसम पूर्वानुमानों की बढ़ती मांग के जवाब में इन प्रणालियों को विकसित किया गया है।

डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि मानसून की अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली अब जिला-स्तर तक मानसून की प्रगति का सूक्ष्म पूर्वानुमान उपलब्ध कराएगी, जबकि उत्तर प्रदेश पायलट परियोजना सघन प्रेक्षण नेटवर्क और एआई तकनीकों का उपयोग करके 1-किलोमीटर के रिज़ॉल्यूशन पर वर्षा पूर्वानुमान उत्पन्न करने की क्षमता को प्रदर्शित करती है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे प्रेक्षण संबंधी अवसंरचना का विस्तार होगा, वैसे-वैसे ऐसी सेवाओं को देश के अन्य भागों में भी धीरे-धीरे विस्तारित किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई पूर्वानुमान प्रणालियां जलवायु-सहिष्णु, डिजिटल रूप से सशक्त और नागरिक-केंद्रित मौसम सेवा तंत्र के निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है, जहां वैज्ञानिक प्रगति सीधे सामाजिक और आर्थिक लाभों में योगदान देती है।

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पीके/केसी/आईएम/एसएस


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