सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय
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एनवीस्टेट्स इंडिया: पर्यावरण सांख्यिकी संबंधी अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न, 2026


हितधारकों की क्षमता बढ़ाने और पर्यावरणीय निर्णय प्रक्रिया सुदृढ़ बनाने हेतु संरचित विषयगत ज्ञान संसाधन

प्रविष्टि तिथि: 27 APR 2026 3:26PM by PIB Delhi

 

  • एनवीस्टेट्स इंडिया 2026 (पर्यावरण सांख्यिकी) सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी की जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट है, जिसमें भारत में पर्यावरण स्थितियों, संसाधनों और जलवायु परिवर्तन का आंकड़ा शामिल है। एफएक्यू 2026 एकीकृत सांख्यिकीय ढांचे के अंतर्गत पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन, प्राकृतिक पूंजी और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की व्यापक और संरचित समझ प्रदान करता है।
  • प्रकाशन में पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए) और राष्ट्रीय लेखा प्रणाली (एसएनए) 2025 के अनुरूप अद्यतन अवधारणाओं को शामिल किया गया है, जिससे पर्यावरण और आर्थिक आंकड़े एकीकृत किये गये हैं।
  • भारत की पर्यावरण लेखा प्रणाली में हाल में हुए विकास को दर्शाते हुए, वन लेखा और परागण सेवाओं (निषेचन के लिए आवश्यक प्राकृतिक या कृत्रिम प्रक्रियाएं) पर नए अनुभाग जोड़े गए हैं।
  • दस्तावेज़ में जैव विविधता, फसल और मिट्टी, वन, खनिज और ऊर्जा, महासागर, अवशेष और जल एवं मछली सहित कई क्षेत्र शामिल हैं, जो पर्यावरणीय आंकड़ों और खातों का समग्र व्यापकता प्रदान करता है।
  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न जटिल सांख्यिकीय ढांचों को स्पष्ट, संरचित और नीति-संबंधी व्याख्याओं में अनुवादित करके सुलभता बढ़ाते हैं।
  • यह पहल वैश्विक प्रयासों के अनुरूप है, जहां संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली ढांचा पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन की समझ और कार्यान्वयन में सहायता के लिए अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों पर आधारित ज्ञान संसाधन भी प्रदान करता है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 2018 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए) ढांचे को अपनाया, जो पर्यावरण आर्थिक खातों के संकलन के लिए आम सहमत अंतरराष्ट्रीय ढांचा है।

एनविस्टैट्स इंडिया: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 2026 प्रकाशन का उद्देश्य पर्यावरण लेखांकन की अवधारणात्मक स्पष्टता सुदृढ़ करना और इसके बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दस्तावेज़ पिछले संस्करणों पर आधारित है, जिसमें नए क्षेत्रों, अद्यतन कार्यप्रणालियों और उभरते नीति-संबंधी विषयों को शामिल किया गया है।

यह पहल वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं पर आधारित है तथा संयुक्त राष्ट्र, एसईईए ढांचे के तहत, जटिल लेखा प्रणालियों के सरलीकरण हेतु अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों पर आधारित ज्ञान मंचों का प्रसार भी करता है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप मंत्रालय का प्रयास इसे भारतीय सांख्यिकी और नीतिगत संदर्भ के अनुकूल बनाता है।                                   

यह प्रकाशन क्यों महत्वपूर्ण है

पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन पर्यावरण को बाहरी कारक के रूप में देखने के बजाय इसे प्राकृतिक पूंजी के रूप में मान्यता देने की दिशा में बदलाव दर्शाता है - जो मापन योग्य आर्थिक और सामाजिक लाभ उत्पन्न करते वाली संपत्ति है।

हालांकि, इस दृष्टिकोण के आधारभूत ढांचे – पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली, पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन, आपूर्ति-उपयोग सारणी, मूल्यांकन तकनीकें - स्वाभाविक रूप से तकनीकी हैं। सहज उठने वाले सवाल में इस चुनौती का समाधान स्तरित व्याख्याओं के माध्यम से किया गया है, जिससे बुनियादी अवधारणाओं से व्यावहारिक समझ तक आसानी से पहुंचा जा सके।

यह प्रकाशन न केवल सूचनात्मक है, बल्कि क्षमता निर्माण के लिए बुनियादी भी है, जो नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और सांख्यिकीविदों को आर्थिक विश्लेषण में पर्यावरणीय विचारों को एकीकृत करने में सहायता करता है।

एफएक्यू 2026 में क्या शामिल है

यह सामान्य प्रश्नोत्तर एक व्यापक विषयगत ज्ञान प्रणाली के रूप में संरचित है, जिसमें पर्यावरण-अर्थव्यवस्था के परस्पर संबंधों को शामिल किया गया है, जैसे कि:

पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए) ढांचा और वैचारिक आधार: इस लेख में पर्यावरण-आर्थिक लेखा प्रणाली (एसईईए) ढांचे में प्रयुक्त अवधारणाओं, सिद्धांतों और परिभाषाओं की व्याख्या प्रस्तुत की गई है। साथ ही, ढांचे का दायरा, अन्य वैश्विक ढांचों के साथ इसका संबंध और संयुक्त राष्ट्र द्वारा समय-समय पर किए गए इसके इतिहास और संशोधनों का भी वर्णन किया गया है।

  • लेखांकन और मॉडलिंग उपकरण (एआरआईईएस, आईएनवीईएसटी, ईएसटीआईएमएपी):

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के आकलन और मॉडलिंग के लिए विश्व स्तर पर उपलब्ध प्रमुख उपकरणों की व्याख्या की गई, जिनमें एआरआईईएस, आईएनवीईएसटी और ईएसटीआईएमएपी शामिल हैं।

  • पर्यावरण सांख्यिकी और पर्यावरण सांख्यिकी विकास ढांचा (एफडीईएस)

इस लेख में पर्यावरण सांख्यिकी विकास ढांचे (एफडीईएस) की संरचना, अवधारणाओं और परिभाषाएं प्रस्तुत की गयी हैं। साथ ही, इस ढांचे को अपनाने से पहले सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के कार्यों का भी उल्लेख किया गया है।

पर्यावरण लेखांकन विधियां: इसमें पर्यावरण खातों को संकलित करने के लिए उपयोग की जाने वाली विधियों का उल्लेख किया गया है, जिसमें भौतिक और मौद्रिक लेखांकन दोनों शामिल हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरणीय संपत्तियों में समय के साथ होने वाले बदलावों पर निगरानी के लिए डेटा को कैसे व्यवस्थित किया जाता है।

  • संवहनीयता और नीतिगत संबंध:

इसमें पर्यावरण लेखांकन किस प्रकार सतत विकास में सहायक होता है और सार्वजनिक नीति को दिशा प्रदान करता है, इस विषय पर चर्चा की गई है। इसमें आंकड़ों, निर्णय लेने की प्रक्रिया और सतत विकास लक्ष्यों जैसे ढांचों के बीच संबंध स्पष्ट किये गये हैं।

  • क्षेत्र विशेष लेखांकन (वन, महासागर, खनिज, जल, जैव विविधता):

इसमें वन, महासागर, खनिज, जल और जैव विविधता जैसे क्षेत्रों के लिए पर्यावरणीय लेखा-जोखा संकलित करने में प्रयुक्त अवधारणाओं, कार्यप्रणालियों और डेटा स्रोतों की व्याख्या की गई है।

  • परागण (वह प्रक्रिया है जिसमें परागकण फूल के नर भाग से वर्तिकाग्र तक स्थानांतरित होते हैं, जिससे बीज और फल बनते हैं) सहित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं:

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की अवधारणा, जिसमें प्रावधान, विनियमन और प्रदान की जाने वाली सौंदर्य और प्रेरणा सेवाएं शामिल हैं, को समझाया गया है।                                                                                                                                                       

प्रमुख वैचारिक योगदान

  • यह एसईईए को एक केंद्रीय एकीकृत ढांचे के रूप में स्थापित करता है, जो मानकीकृत अवधारणाओं, वर्गीकरणों और लेखा संरचनाओं के माध्यम से पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को जोड़ता है।
  • यह बुनियादी पर्यावरणीय डेटा लेखा नीति संकेतक के संक्रमण की व्याख्या करता है, और डेटा एकीकरण में लेखांकन ढांचों की भूमिका दर्शाता है।
  • यह अन्य वैश्विक ढांचों के साथ विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधनों को आर्थिक परिसंपत्तियों के रूप में मान्यता देने और स्थिरता को शामिल करने के संदर्भ में तालमेल बेहतर बनाता है।
  • इसमें पारिस्थितिकी तंत्र लेखांकन के दायरे को विस्तारित किया गया है, जिसमें भौतिक और मौद्रिक दोनों संदर्भों में पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार, स्थिति और सेवा शामिल हैं।
  • यह पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मॉडलिंग और मूल्यांकन में उन्नत उपकरणों और पद्धतियों को शामिल करता है, जो विश्लेषणात्मक अनुप्रयोगों के उपयुक्त हैं।

नीतिगत महत्व

यह सामान्य प्रश्नोत्तर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए पर्यावरणीय आंकड़ों और खातों के उपयोग सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्राकृतिक पूंजी, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं और संसाधन प्रवाह जैसी अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर, निम्नलिखित को सक्षम बनाता है:

  • संसाधन दक्षता और संवहनीयता का बेहतर मूल्यांकन
  • आर्थिक नियोजन में पर्यावरणीय पहलुओं का समावेश
  • विकास और संरक्षण के बीच संतुलन की बेहतर समझ
  • सतत विकास लक्ष्यों और जलवायु संबंधी संकेतकों की निगरानी मजबूत करना।

पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन को राष्ट्रीय खातों के साथ संरेखित करने से दीर्घकालिक आर्थिक कल्याण और संवहनीयता मूल्यांकन क्षमता बढ़ती है।

निष्कर्ष

एनविस्टैट्स इंडिया: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) 2026 का प्रकाशन पर्यावरण-आर्थिक ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जटिल सांख्यिकीय ढांचों को सुलभ और संरचित अंतर्दृष्टि द्वारा यह प्रकाशन नीति और योजना में प्राकृतिक पूंजी एकीकृत करने के आधार को सुदृढ़ बनाता है।

एसईईए ढांचे के तहत वैश्विक प्रचलन के अनुरूप, यह पहल पर्यावरण लेखांकन को आगे बढ़ाने और सतत तथा परिस्थिति अनुरूप ढल कर विकास की दिशा में बदलाव का समर्थन करने की भारत की मज़बूत प्रतिबद्धता दर्शाती है।

यह प्रकाशन मंत्रालय की वेबसाइट www.mospi.gov.in पर उपलब्ध है।

प्रकाशन तक पहुंचने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करें।

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पीके/केसी/एकेवी/एसके

 


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