वस्त्र मंत्रालय
नई वस्त्र योजनाओं (बजट 2026-27) पर दक्षिण क्षेत्र परामर्श कार्यशाला बेंगलुरु में आयोजन हुई
प्रविष्टि तिथि:
21 APR 2026 4:01PM by PIB Delhi
केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने 21 अप्रैल, 2026 को बेंगलुरु में बजट घोषणाओं (2026-27) के अंतर्गत नई वस्त्र योजनाओं पर क्षेत्रीय (दक्षिण क्षेत्र) परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में मंत्रालय और उसके विभिन्न प्रभागों के अधिकारियों, दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ वस्त्र क्षेत्र के हितधारकों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित प्रमुख पहलों पर विचार-विमर्श किया।

सभा को संबोधित करते हुए वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव (आईएएस) ने इस बात पर जोर दिया कि वस्त्र क्षेत्र 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने मूल्य श्रृंखला में ‘फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज’ को मजबूत करने का आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें गुणवत्ता, मात्रा, आधुनिकीकरण, चक्रीय प्रक्रिया और उपभोक्ताओं की बदलती पसंद पर समान ध्यान दिया जाए। उन्होंने उपभोक्ता-पूर्व और उपभोक्ता-पश्चात वस्त्र अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना (आईएएस) ने रेखांकित किया कि केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित योजनाएं वस्त्र क्षेत्र को एकीकृत सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई हैं और इनसे शिल्पकारों, बुनकरों और अन्य हितधारकों को महत्वपूर्ण रूप से लाभ होगा।

वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती पद्मिनी सिंगला (आईएएस) ने नई योजनाओं पर राज्य विभागों के साथ परामर्श के दौरान प्रश्नों के उत्तर दिए और स्पष्टीकरण प्रदान किए। उन्होंने राज्यों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों का भी संज्ञान लिया और उन्हें प्रभावी ढंग से हल करने के लिए रणनीतियों और समाधानों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
वस्त्र मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती आरती कंवर (आईएएस) ने प्रमुख प्रोत्साहनों और नीतिगत समर्थन उपायों का विस्तार से उल्लेख किया, जिनमें आधुनिकीकरण हेतु अनुदान तथा स्वदेशी मशीनरी निर्माण को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन (ईएलआई), टॉप-अप अनुदान, वेतन सब्सिडी और कर्मचारी राज्य बीमा निगम तथा कर्मचारी भविष्य निधि के अंतर्गत कवरेज जैसे प्रावधानों को रेखांकित किया। साथ ही, उन्होंने क्लस्टर अवसंरचना सुदृढ़ीकरण, नवाचार और ब्रांडिंग को प्रोत्साहन, प्लग-एंड-प्ले वस्त्र पार्कों के विकास तथा वस्त्र उद्योग को समर्थन देने हेतु सेवा केंद्रों की स्थापना पर बल दिया।

वस्त्र मंत्रालय के उप महानिदेशक श्री अखिलेश कुमार ने इस बात पर प्रकाश डाला कि समर्थ 2.0 कौशल सशक्तिकरण पर केंद्रित है, जिसमें पारंपरिक और उद्योग-प्रासंगिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत, मोबाइल-आधारित प्रौद्योगिकियों का उपयोग, प्रशिक्षित कार्यबल का समूह तैयार करना तथा शैक्षणिक एवं कैरियर उन्नति के लिए द्वैध प्रमाणन की व्यवस्था शामिल है।
केंद्रीय रेशम बोर्ड के सदस्य सचिव श्री पी. शिवकुमार (आईएफएस) ने इस बात पर जोर दिया कि सभी पहलें हितधारक-केंद्रित हों और माननीय प्रधानमंत्री के "फार्म टू फॉरेन" के विजन के अनुरूप हों, ताकि इस क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
इस कार्यशाला में एकीकृत वस्त्र क्षेत्र कार्यक्रम, राष्ट्रीय फाइबर योजना (एनएफएस), वस्त्र विस्तार एवं रोजगार (टीईईएम) योजना, राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (एनएचएचपी), समर्थ 2.0, टेक्स-इको पहल, मेगा टेक्सटाइल पार्क और महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल (एमजीजीएसआई) जैसी प्रमुख योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन योजनाओं का उद्देश्य वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, सततता को बढ़ावा देना और रोजगार पैदा करना है।
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पीके/केसी/आईएम/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2254263)
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