विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
सौर तंतुओं में एक साथ होने वाले दोलनों से उनके गुणधर्मों के बारे में नए सुराग मिले
प्रविष्टि तिथि:
17 APR 2026 5:05PM by PIB Delhi
खगोलविदों द्वारा किए गए एक नए अध्ययन ने सौर तंतुओं के दोलनों का विश्लेषण करके उनके छिपे हुए भौतिक गुणधर्मों का अनुमान लगाने की एक शक्तिशाली विधि का पता लगाया है, जिससे सूर्य की चुंबकीय संरचना के बारे में गहरी जानकारी मिलती है।
सूर्य के वायुमंडल में निलंबित ठंडे प्लाज्मा के विशाल बादल, जिन्हें सौर तंतु कहा जाता है, चुंबकीय क्षेत्रों द्वारा स्थिर रहते हैं। चुंबकीय क्षेत्र की शक्ति, आकार और आंतरिक संरचना जैसे उनके गुणों को समझना सौर विस्फोटों तथा अंतरिक्ष मौसम के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार प्रणालियों और बिजली ग्रिडों को प्रभावित कर सकते हैं।
यद्यपि, इन गुणधर्मों को प्रत्यक्ष रूप से मापना अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। वैज्ञानिक इसके बजाय सौर तंतुओं में होने वाले दोलनों की व्याख्या करने वाली प्रोमिनेंस सीस्मोलॉजी नामक एक तकनीक पर निर्भर करते हैं, ताकि उनकी आंतरिक स्थितियों का अनुमान लगाया जा सके, ठीक उसी तरह जैसे भूकंपों का उपयोग पृथ्वी के आंतरिक भाग के अध्ययन के लिए किया जाता है। आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (एआरआईईएस) के शोधकर्ताओं ने दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और स्पेन के इंस्टीट्यूट डी एस्ट्रोफिसिका डी कैनारियास के सहयोगियों के साथ मिलकर इस दृष्टिकोण को एक कदम आगे बढ़ाया है।
उपासना बावेजा, वैभव पंत, इनीगो अरेगुई और एम. सलीम खान की टीम ने उन दुर्लभ मामलों का अध्ययन किया जहां सौर तंतुओं में एक साथ देशांतरीय और अनुप्रस्थ दोलन प्रदर्शित होते हैं। ये दोहरे दोलन तंतु के भौतिक मापदंडों को सटीक रूप से निर्धारित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं।
बेयसियन विश्लेषण नामक उन्नत सांख्यिकीय विधियों का उपयोग करते हुए, टीम ने इन तंतुओं के प्रमुख गुणों का अनुमान लगाने के लिए अवलोकन डेटा को सैद्धांतिक मॉडल के साथ संयोजित किया।


चित्र: सौर तंतुओं के दोलनों के बायेसियन विश्लेषण से प्राप्त सीमांत संभाव्यता वितरण। पैनल [ए] चुंबकीय क्षेत्र की प्रबलता का प्रायिकता वितरण दर्शाता है, जबकि पैनल [बी] फ्लक्स ट्यूब की लंबाई का संभाव्यता वितरण दर्शाता है। वक्र विभिन्न पूर्व मान्यताओं, एकसमान (डेश डौटेड), गाऊसी (डौटेड) और गामा (डैश्ड) के अनुरूप हैं, जो अनुमानित भौतिक मापदंडों पर पूर्व ज्ञान के प्रभाव को दर्शाते हैं।
उनके विश्लेषण से पता चला कि प्लाज्मा घनत्व की सीमित जानकारी के साथ भी तंतुओं को धारण करने वाले चुंबकीय क्षेत्र की संभावित सीमा का मज़बूती से अनुमान लगाया जा सकता है। इसके अलावा, तंतुओं को सहारा देने वाली चुंबकीय प्रवाह नलिकाएं लगभग 100 से 1000 मेगामीटर तक बहुत लंबी हो सकती हैं। ये दर्शाती हैं कि शांत ज्वालाएं सूर्य के वायुमंडल के बड़े क्षेत्रों को कवर करती हैं और चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं में घुमाव आमतौर पर कम होता है। यह सामान्यतः तीन घुमावों से कम होता है, जो अपेक्षाकृत स्थिर चुंबकीय विन्यास का संकेत देता है।
इसे प्राप्त करने के लिए, अध्ययन में पहले प्रेक्षित देशांतरीय दोलनों से चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का अनुमान लगाया गया और फिर इस जानकारी का उपयोग अनुप्रस्थ दोलनों से सहायक फ्लक्स ट्यूबों की लंबाई और संरचना निर्धारित करने के लिए किया गया। इस संयुक्त दृष्टिकोण ने अनुमानित मापदंडों की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार किया।
एस्ट्रोफिज़िक्स पत्रिका में प्रकाशित यह शोध सौर चुंबकीय क्षेत्रों और सौर वायुमंडल में विद्यमान चुंबकीय विशेषताओं के गुणों की समझ को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ा सकता है। इस प्रकार की अंतर्दृष्टि सौर विस्फोटों के मॉडल को बेहतर बनाने और अंतरिक्ष मौसम की घटनाओं की भविष्यवाणी करने की हमारी क्षमता को बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रकाशन लिंक: https://arxiv.org/abs/2601.01730
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पीके/केसी/एसकेजे/एसवी
(रिलीज़ आईडी: 2253065)
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