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दीर्घकालिक स्वास्थ्य सेवा पर ध्यान केंद्रित करते हुए विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 का समापन नई दिल्ली में हुआ


विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 की चर्चाओं में नैदानिक प्रमाण और नवाचार प्रमुख रूप से उभरकर सामने आए

आयुष मंत्रालय ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन में होम्योपैथी के लिए भविष्य की रूपरेखा तैयार की

प्रविष्टि तिथि: 11 APR 2026 9:43PM by PIB Delhi

विश्व होम्योपैथी दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय समारोह आज नई दिल्ली में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें सतत और समेकित स्वास्थ्य सेवा को आगे बढ़ाने में होम्योपैथी के बढ़ते महत्व पर एक बार फिर से प्रकाश डाला गया। इस कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रमुख होम्योपैथिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह आयोजन नैदानिक प्रगति, नीतिगत ढांचे, अनुसंधान प्राथमिकताओं और होम्योपैथी के भविष्य की रूपरेखा पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।

समापन समारोह में आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव, सुश्री अलारमेलमंगई डी. मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने सरकार की उस प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसके तहत होम्योपैथी को व्यापक स्वास्थ्य सेवा ढांचे में प्रोत्साहित और समेकित किया जा रहा है। उन्होंने सुलभ, सतत और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणालियों को आगे बढ़ाने में इसकी बढ़ती भूमिका पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच) के उप महानिदेशक डॉ. सुनील एस. रामटेके के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान(एनआईएच) के निदेशक डॉ. प्रलय शर्मा; केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच) के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक; तथा राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने इस दो दिवसीय सम्मेलन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख विचार-विमर्श, वैज्ञानिक चर्चाओं और नीतिगत दृष्टिकोणों पर प्रकाश डाला गया।

इस समारोह में होम्योपैथी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी सम्मानित किया गया। आयुष चेयर डॉ. नंदिनी कुमार, पद्मश्री डॉ. वी.के. गुप्ता और पद्मश्री डॉ. कल्याण बनर्जी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए स्मृति-चिन्ह प्रदान किए गए। इस कार्यक्रम में चिकित्सकों की अगली पीढ़ी का भी उत्साहवर्धन किया गया, जिसके अंतर्गत एसटीएसएच और एमडी पुरस्कार विजेताओं सहित लगभग 90 विद्यार्थियों के साथ एक सामूहिक फ़ोटो-सत्र आयोजित किया गया।

यह सम्मेलन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 10 और 11 अप्रैल को "सतत स्वास्थ्य के लिए होम्योपैथी" विषय और “अनंत संभावनाएं” के विजन के तहत आयोजित किया गया, यह एक ऐसे व्यापक मंच के रूप में सामने आया, जिसने पारंपरिक सिद्धांतों और आधुनिक वैज्ञानिक नवाचारों के मेल को गहराई से समझने का अवसर प्रदान किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न सभागारों में छह अलग-अलग सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें विविध विषयों पर चर्चा हुई।

पहला दिन: नैतिकता, नैदानिक उत्कृष्टता और उभरते आयाम

उद्घाटन दिवस ने होम्योपैथी में पेशेवर ईमानदारी और विविध नैदानिक प्रगति पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक मजबूत आधार स्थापित किया।

  • पेशेवर मानक: इस कार्यक्रम की शुरुआत नैतिकता एवं आचरण पर एक पूर्ण सत्र के साथ हुई, जिसमें राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) विनियम, 2022 पर प्रकाश डाला गया और नैतिक चिकित्सा पद्धति के महत्व को रेखांकित किया गया।
  • नैदानिक अनुसंधान: राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान(एनआईएच) ने जटिल रोग स्थितियों—जैसे ब्रेन ट्यूमर, ऑटोइम्यून विकार और एंडोमेट्रिओटिक सिस्ट—पर साक्ष्य-आधारित केस प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी नैदानिक नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया।
  • विशेष सत्र: विशेषज्ञों द्वारा संचालित सत्रों में बाल चिकित्सा होम्योपैथी, कैसिया फिसतुला(Cassia fistula) जैसी नई दवाओं की चिकित्सीय क्षमता, और कृषि कार्यों में एग्रो-होम्योपैथी के उभरते क्षेत्र पर चर्चा की गई।
  • समेकित देखभाल: एक बहु-विषयक सत्र में पल्मोनोलॉजिस्ट, ऑन्कोलॉजिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट एक साथ आए, जहाँ पारंपरिक चिकित्सा के साथ होम्योपैथी की भूमिका पर चर्चा की गई और रोगी की सहयोगात्मक देखभाल पर विशेष ज़ोर दिया गया।

दूसरा दिन: नीतियां, वैश्विक रणनीति और भविष्य की रूपरेखा

दूसरे दिन का ज़ोर प्रणालीगत विकास, जन स्वास्थ्य के एकीकरण और दीर्घकालिक स्थिरता पर रहा।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं प्रणाली: प्रमुख चर्चाओं में सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और पारदर्शिता तथा पेशेवर जवाबदेही को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया गया।
  • नियामक एवं सुरक्षा: सत्रों में औषधियों के मानकीकरण और मजबूत फार्माकोविजिलेंस प्रणालियों पर जोर दिया गया, जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाया जा सके।
  • वैश्विक एवं आधुनिक दृष्टिकोण: विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) की पारंपरिक चिकित्सा रणनीति के अंतर्गत होम्योपैथी की भूमिका का विश्लेषण किया गया, जिसमें वैश्विक अवसरों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया। चर्चा का मुख्य केंद्र वैज्ञानिक नवाचारों के माध्यम से चिकित्सा पद्धतियों का आधुनिकीकरण करना और दवा प्रतिरोध जैसी समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान केंद्रित करना रहा। 
  • विशिष्ट चिकित्सा: होम्योपैथी का दायरा पशु चिकित्सा विज्ञान तक विस्तारित किया गया, और इसने पशुओं की देखभाल के लिए साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
  • संस्थागत रूपरेखा: आयुष मंत्रालय और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच) के नेतृत्व में आयोजित एक उच्च-स्तरीय सत्र में, इस क्षेत्र में अनुसंधान की रणनीतिक प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को रेखांकित किया गया।

इस कार्यक्रम का समापन निरंतर सहयोग, क्षमता निर्माण और अनुसंधान में प्रगति के माध्यम से होम्योपैथी क्षेत्र को मज़बूत बनाने की एक नई प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इसने आयुष मंत्रालय की उस विजन को और मजबूती प्रदान की, जिसके तहत होम्योपैथी को समेकित और सतत स्वास्थ्य सेवा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है; और इस प्रयास को केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद(सीसीआरएच), राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान(एनआईएच), राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग(एनसीएच) तथा अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का सहयोग प्राप्त है।


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