पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय
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कांडला बंदरगाह ने मेथनॉल बंकरिंग को बढ़ावा दिया, हरित समुद्री परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम


भारत नेट-जीरो समुद्री क्षेत्र की दिशा में और करीब, कांडला ने मेथनॉल बंकरिंग में अग्रणी भूमिका निभाई:” श्री सरबानंदा सोनोवाल

प्रविष्टि तिथि: 09 APR 2026 7:32PM by PIB Delhi

समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (कांडला बंदरगाह) ने अपनी मेथनॉल बंकरिंग क्षमताओं को उन्नत किया है, जिससे वह भारत के ऊर्जा संक्रमण प्रयासों तथा वैश्विक हरित शिपिंग कॉरिडोर में एक प्रमुख भागीदार के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के समुद्री क्षेत्र के लक्ष्य के अनुरूप, यह पहल शिपिंग में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की तीव्रता को कम करने हेतु ई-मेथनॉल एवं ई-अमोनिया जैसे कम-कार्बन वैकल्पिक ईंधनों को अपनाने पर केंद्रित है।

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग (एमओपीएसडब्ल्यू) मंत्री श्री सरबानंदा सोनोवाल ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सतत समुद्री विकास के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

“कांडला बंदरगाह पर यह उपलब्धि हरित शिपिंग की दिशा में वैश्विक परिवर्तन का नेतृत्व करने के भारत के संकल्प को प्रदर्शित करती है। मेथनॉल जैसे स्वच्छ ईंधनों को अपनाकर तथा भविष्य के लिए तैयार अवसंरचना विकसित कर हम अपने समुद्री क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप बना रहे हैं, साथ ही दक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता को भी सुदृढ़ कर रहे हैं। यह विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में हमें विश्व के अग्रणी समुद्री देशों में शामिल करने की यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम है,” श्री सरबानंदा सोनोवाल ने कहा।

भारत के पश्चिमी तट पर स्थित कांडला बंदरगाह लंबे समय से कार्गो के रूप में ग्रे मेथनॉल का प्रबंधन करता रहा है और इसके पास पहले से ही अनुकूल अवसंरचना उपलब्ध है, जिसमें टैंक भंडारण, पाइपलाइन और जेट्टी शामिल हैं। इसी आधार पर अब बंदरगाह समर्पित मेथनॉल बंकरिंग क्षमताओं के विकास की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

तैयारी का आकलन करने के लिए कांडला बंदरगाह ने डीएनवी मैरीटाइम एडवाइजरी सर्विसेज को मौजूदा अवसंरचना तथा विनियामक एवं सुरक्षा ढांचे की पर्याप्तता का मूल्यांकन करने हेतु नियुक्त किया। मूल्यांकन के पश्चात बंदरगाह को मेथनॉल बंकरिंग के लिए इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ पोर्ट्स एंड हार्बर्स (आईएपीएच) पोर्ट रेडीनेस लेवल (पीआरएल) पैमाने पर स्तर 6 का दर्जा दिया गया।

2 अप्रैल 2026 को कांडला बंदरगाह ने अवसंरचना एवं परिचालन प्रक्रियाओं के सत्यापन के लिए सफलतापूर्वक शोर-टू-शिप मेथनॉल बंकरिंग का परीक्षण संचालन किया। यह अभ्यास स्टोल्ट टैंकर्स, जे. एम. बक्सी, एजिस वोपाक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड तथा दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण सहित उद्योग भागीदारों के सहयोग से किया गया। इस परीक्षण में बंकर ट्रांसफर प्रक्रियाओं, सुरक्षा प्रणालियों तथा विनियामक अनुपालन जैसे प्रमुख पहलुओं का सत्यापन किया गया। डीएनवी टीम ने स्थल पर सत्यापन करते हुए इसे मेथनॉल बंकरिंग के वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप पाया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह विकास उभरते वैश्विक व्यापार कॉरिडोर में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करेगा तथा दीर्घकालिक आर्थिक विकास को समर्थन देगा।

“हमारे बंदरगाह नवाचार और सततता के केंद्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। मेथनॉल बंकरिंग जैसी पहलें न केवल उत्सर्जन को कम करती हैं, बल्कि निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और रोजगार सृजन के नए अवसर भी प्रदान करती हैं, जिससे उभरते वैश्विक समुद्री क्षेत्र में भारत का योगदान और सशक्त होता है। यह 2050 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने के प्रयासों को भी सुदृढ़ करता है, जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण है,” श्री सरबानंदा सोनोवाल ने कहा।

बंदरगाह अब वर्ष 2028-29 तक लगभग 500 केटीपीए नॉन-बायोलॉजिकल ऑरिजिन के नवीकरणीय ईंधन (आरएफएनबीओ) अनुरूप ई-मेथनॉल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। यह आपूर्ति एशिया-यूरोप व्यापार कॉरिडोर पर संचालित गहरे समुद्री, द्वि-ईंधन पोतों को समर्थन प्रदान करेगी।

सफल शोर-टू-शिप परीक्षण के बाद कांडला बंदरगाह अगले चरण में शिप-टू-शिप मेथनॉल बंकरिंग शुरू करने की योजना बना रहा है, जिससे उसकी परिचालन क्षमताओं को और सुदृढ़ किया जाएगा। कांडला बंदरगाह की यह प्रगति भारत को उभरते हरित शिपिंग कॉरिडोर में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा एक स्वच्छ, अधिक सुदृढ़ और भविष्य के लिए तैयार समुद्री इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान देगी।

 

 

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पीके/केसी/एके / डीए


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