इस्‍पात मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

एच.डी. कुमारस्वामी ने भारत के इस्पात क्षेत्र में नवाचार और औद्योगिक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए एसआरटीएमआई आर एंड डी कनेक्ट कार्यशाला का उद्घाटन किया

प्रविष्टि तिथि: 07 APR 2026 7:42PM by PIB Delhi

इस्पात मंत्रालय और प्रमुख भारतीय इस्पात उत्पादकों की  संयुक्त पहल इस्पात अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी मिशन ऑफ इंडिया (एसआरटीएमआई) ने 7 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में "एसआरटीएमआई आर एंड डी कनेक्ट: विचारों से औद्योगिक प्रभाव तक" शीर्षक से एक उच्च स्तरीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कार्यशाला का उद्घाटन किया और मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस आयोजन में कई हितधारकों ने हिस्सा लिया। इसमें प्रमुख सरकारी प्रतिनिधि और एसएआईएल, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू, एसआईएमए आदि जैसे प्रमुख उद्योगपति शामिल थे। आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी (बीएचयू), एनआईटी त्रिची, एनआईटी दुर्गापुर, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी इंदौर और आईएसएम धनबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने शैक्षणिक विशेषज्ञता का अच्छा प्रतिनिधित्व किया। औद्योगिक और शैक्षणिक क्षेत्र के अग्रणी लोगों के अलावा कार्यशाला में उभरते स्टार्टअप और सीएसआईआर-आईएमएमटी जैसे प्रतिष्ठित अनुसंधान संस्थानों ने भी भाग लिया। इन सभी प्रतिभागियों ने मिलकर रणनीतिक नवाचार और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से इस्पात क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया।

उच्च स्तरीय कार्यशाला के दौरान प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि विकसित भारत की  नींव रखते हुए इस्पात क्षेत्र को पारंपरिक विकास से हटकर एक चक्रीय अर्थव्यवस्था और हरित कार्बन उत्सर्जन को कम करने वाले भविष्य की ओर अग्रसर होना चाहिए। हमारा मिशन यह सुनिश्चित करना है कि नवाचार प्रयोगशाला से आगे बढ़कर विचारों को क्रियान्वयन में और अनुसंधान को परिणामों में परिवर्तित करे। अपने स्टार्टअप को सशक्त बनाकर और स्वदेशी प्रौद्योगिकी को प्राथमिकता देकर, हम केवल इस्पात का उत्पादन नहीं कर रहे हैं; हम एक आधुनिक, टिकाऊ और आत्मनिर्भर उद्योग का निर्माण कर रहे हैं जो उत्कृष्टता के लिए वैश्विक मानदंड स्थापित करता है।

इस्पात मंत्रालय के सचिव श्री संदीप पौंड्रिक ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि जहां वैश्विक इस्पात उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है वहीं भारत बढ़ती मांग और अभूतपूर्व गति के साथ विकास के एक जीवंत इंजन के रूप में उभरा है। यह अनूठी स्थिति हमारे लिए सबसे बड़ा अवसर और नवाचार के माध्यम से दुनिया का नेतृत्व करने का हमारा दायित्व है। आज अनुसंधान एवं विकास में साहसिक निवेश करके हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय इस्पात उद्योग आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और विश्व स्तरीय शक्ति बना रहे।

एसआरटीएमआई के अध्यक्ष और एसएआईएल के निदेशक (खान) श्री एमआर गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि हम मिशन-आधारित दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध हैं—जिसमें तीव्र तकनीकी विकास प्रायोगिक स्तर पर सत्यापन और त्वरित व्यावसायीकरण को प्राथमिकता दी गई है। हमारा लक्ष्य ऐसे समाधानों की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है जो उत्पादकता को सार्थक रूप से बढ़ाएं, लागत कम करें और भारतीय इस्पात क्षेत्र की स्थिरता को मजबूत करें।

इस अवसर पर इस्पात मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार श्री आशीष चटर्जी, इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अभिजीत नरेंद्र, कार्मिक निदेशक और एसएआईएल के सीएमडी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे श्री कृष्ण कुमार सिंह, इस्पात मंत्रालय और उद्योग जगत के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उपस्थित थे।

इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अभिजीत नरेंद्र ने कार्यशाला के प्रमुख  क्षेत्रों के महत्व पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान इस्पात मंत्री महोदय ने इस्पात मंत्रालय के सचिव और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न छात्रों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के साथ बातचीत की, जिन्होंने कार्यशाला के दौरान पोस्टर के माध्यम से अपने नवीन विचारों और कार्यों को प्रस्तुत किया था।

कार्यशाला की मुख्य विशेषताएं:

  • स्टार्टअप इकोसिस्टम: एक समर्पित स्टार्टअप पिच सत्र में प्रक्रिया दक्षता, डिजिटलीकरण, अपशिष्ट उपयोग और उन्नत सामग्रियों पर ध्यान केंद्रित करने वाले स्टार्टअप्स के अभिनव समाधानों को प्रदर्शित किया गया।
  • उद्योग-नेतृत्व वाला रोडमैप: एसएआईएल, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू, एसआईएमए और जयसवाल नेको इंडस्ट्रीज लिमिटेड सहित प्रमुख इस्पात कंपनियों ने संसाधन दक्षता, अपशिष्ट उपयोग और हरित इस्पात तथा डीकार्बोनाइजेशन प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए रणनीतिक समस्या विवरण प्रस्तुत किए, जिसमें अनुसंधान को वास्तविक दुनिया की औद्योगिक चुनौतियों के साथ संरेखित किया गया।
  • तकनीकी उत्कृष्टता: आईआईटी बॉम्बे, एनआईटी त्रिची, एनआईटी दुर्गापुर और सीओईपी तकनीकी विश्वविद्यालय, पुणे जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रख्यात शिक्षाविदों ने परिचालन उत्कृष्टता, चक्रीय अर्थव्यवस्था और डीकार्बोनाइजेशन पर तकनीकी प्रस्तुतियाँ दीं।
  • ज्ञान का आदान-प्रदान: कार्यशाला का समापन एक पोस्टर प्रस्तुति सत्र के साथ हुआ जिसमें छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के पेशेवरों द्वारा एसआरटीएमआई के प्रमुख क्षेत्रों के अनुरूप किए गए नवोन्मेषी कार्यों को प्रदर्शित किया गया।

यह आयोजन अभूतपूर्व अनुसंधान और कारखाने में इसके अनुप्रयोग के बीच की दूरी को कम करने के लिए एक रणनीतिक मंच के रूप में कार्य करता है, जिससे प्रौद्योगिकी संचालित वैश्विक इस्पात शक्ति बनने की भारत की प्रतिबद्धता को बल मिलता है।

इस कार्यशाला में उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप जगत के 180 से अधिक हितधारकों ने भाग लिया, जो इस्पात मंत्रालय के अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और एसआरटीएमआई को एक गतिशील सहयोगी मंच के रूप में स्थापित करने के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम का समापन भविष्य की साझेदारियों को बढ़ावा देने, प्रौद्योगिकी विकास में तेजी लाने और भारतीय इस्पात क्षेत्र को नवाचार-आधारित और सतत विकास की ओर अग्रसर करने में सहयोग देने की उम्मीद के साथ हुआ।

 

*****

पीके/केसी/एनकेएस/एसएस


(रिलीज़ आईडी: 2249870) आगंतुक पटल : 72
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu