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क्षमता विकास आयोग ने डीआईपीएएम के सहयोग से 'सीपीएसई अधिकारियों के नेतृत्व संचार कौशल को बढ़ाना' विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया


सीपीएसई के प्रदर्शन और निवेशक संबंधों को बेहतर बनाने में संचार की रणनीतिक भूमिका पर बल दिया गया

सीपीएसई की बाजार स्थिति को मजबूत करने के लिए अनुभवात्मक शिक्षण, अनुकरण और उद्योग की जानकारियों पर ध्यान केंद्रित किया गया

कर्मयोगी साधना सप्ताह 2026 के तहत आयोजित यह कार्यशाला मिशन कर्मयोगी और विजन विकसित भारत 2047 के अनुरूप रही

प्रविष्टि तिथि: 07 APR 2026 5:02PM by PIB Delhi

साधना सप्ताह के पांचवें दिन के हिस्से के रूप में और प्रौद्योगिकी, परंपरा तथा मूर्त परिणाम के तीन सूत्रों की भावना के अनुरूप क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने वित्त मंत्रालय में निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) के सहयोग से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (सीपीएसई) से जुड़े अधिकारियों का नेतृत्व संचार कौशल बढ़ाने पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में वरिष्ठ नीति निर्माता, सीपीएसई अधिकारी, बाजार विश्लेषक और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ एक साथ आए और संगठनात्मक प्रदर्शन तथा मूल्य सृजन के रणनीतिक चालक के रूप में निवेशक संचार को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। इस कार्यशाला के ज्ञान भागीदार ईवाई और इनिटियम प्रोडक्शंस थे।

इस कार्यशाला का उद्देश्य तेजी से बदलते वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में निवेशक संपर्कों को प्रभावी तरीके से साधने के लिए सीपीएसई के अधिकारियों का क्षमता विकास करना था। इसका लक्ष्य मिशन कर्मयोगी और विकसित भारत 2047 के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप, संचार रणनीतियों, हितधारकों की सहभागिता और बाजार की अपेक्षाओं पर प्रतिभागियों को व्यावहारिक उपकरण, रूपरेखा और समयोचित समझ प्रदान करना था।

उद्घाटन सत्र

स्वागत भाषण देते हुए क्षमता विकास आयोग की सदस्य (प्रशासन) डॉ. अलका मित्तल ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) में प्रभावी वित्तीय और व्यावसायिक संचार के महत्व पर जोर देते हुए दिन की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि निवेशक संचार एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में उभर रहा है जो प्रदर्शन और विकास दोनों को प्रभावित करता है, विशेष रूप से भारत के विकास पथ के संदर्भ में। उन्होंने कंपनी के संदेशों में स्पष्टता, विश्वसनीयता और निरंतरता के महत्व पर बल दिया और कहा कि प्रभावी संचार निवेशकों की धारणा और विश्वास को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

क्षमता विकास आयोग के पूर्व अध्यक्ष आदिल ज़ैनुलभाई ने अनुभवात्मक शिक्षण और सहभागिता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को इस कार्यशाला को "करके सीखने" के एक मंच के रूप में लेने के लिए प्रोत्साहित किया और बताया कि प्रभावी संचार कौशल विकसित करने के लिए व्यावहारिक अभ्यास, सहयोग और निरंतर संवाद आवश्यक हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ये क्षमताएं व्यावसायिक और व्यक्तिगत विकास दोनों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

अपने प्रारंभिक संबोधन में, वित्त मंत्रालय में डीआईपीएएम के सचिव अरुणिश चावला ने बदलते भू-आर्थिक परिदृश्यों और तेजी से जटिल होते बाजार संरचनाओं के संदर्भ में निवेशक संचार के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सीपीएसई को निवेशकों की अपेक्षाओं को प्रभावी ढंग से साधने और नियंत्रित करने में सक्षम होना चाहिए और पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दीर्घकालिक मूल्य सृजन को बढ़ाने के लिए मजबूत संचार ढांचा आवश्यक है।

तकनीकी सत्र और पैनल चर्चाएं

इस कार्यशाला में निवेशक एवं नेतृत्व संचार पर एक विस्तृत सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को निवेशक संचार की संरचना और प्रस्तुति की सुव्यवस्थित समझ प्रदान की गई। इस सत्र में प्रभावी संचार की संरचना, सर्वोत्तम अभ्यास और सामान्य त्रुटियां (क्या करें और क्या न करें), संकटकालीन संचार से निपटने की रणनीतियां और निवेशकों के साथ संचार को बेहतर बनाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की उभरती भूमिका जैसे प्रमुख तत्वों को शामिल किया गया। इस सत्र में संगठनात्मक संदेश और बाजार की अपेक्षाओं के बीच रणनीतिक तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया गया।

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का पुनर्जागरण : पुनर्मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन से ऊब, या इनके बीच की कोई स्थिति?” विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में वैश्विक निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के आठ अग्रणी विश्लेषकों ने भाग लिया। उन्होंने सीपीएसई के बारे में बाजार की धारणाओं, बदलते मूल्यांकन रुझानों और निवेशकों की भावनाओं को प्रभावित करने वाले कारकों पर अपने विचार साझा किए। इस चर्चा से वर्तमान बाजार परिदृश्य में सीपीएसई की स्थिति और उनके पुनर्मूल्यांकन से जुड़े अवसरों और चुनौतियों की गहरी समझ प्राप्त हुई।

इसके बाद सिमुलेशन-आधारित ब्रेकआउट सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य शिक्षण को व्यवहार में लाना था। इस सत्र में प्रतिभागियों को सीपीएसई अधिकारियों के छोटे-छोटे समूहों में विभाजित किया गया, जिससे पांच टीमें बनीं और उन्होंने संचार रणनीतियों को विकसित करने और प्रस्तुत करने पर केंद्रित संरचित अभ्यासों में भाग लिया।

इस सत्र में प्रस्तुतियों का पहला दौर शामिल था, जहां प्रत्येक समूह ने अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया और विशेषज्ञों तथा विश्लेषकों से लाइव, समयोचित प्रतिक्रिया प्राप्त की। इससे संचार रणनीतियों के पुनरावर्ती शिक्षण और परिष्करण को सक्षम बनाया जा सका।

दोपहर के भोजन के बाद के सत्र में, "अदृश्य स्कोरकार्ड: अपने पोर्टफोलियो में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को शामिल करने से पहले विश्लेषक वास्तव में क्या देखते हैं" विषय पर एक दूसरी पैनल चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा का संचालन दिवाकर पिंगले ने किया। इस सत्र में विश्लेषकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले अंतर्निहित मूल्यांकन मानदंडों की गहन जानकारी प्रदान की गई, निवेश निर्णयों को प्रभावित करने वाले गुणात्मक और मात्रात्मक मापदंडों पर प्रकाश डाला गया और पारदर्शिता, निरंतरता और रणनीतिक संदेश के महत्व पर जोर दिया गया।

'सबको एक साथ लाना' विषय पर सत्र

समापन तकनीकी सत्र में, प्रतिभागियों ने अरुणिश चावला (सचिव, डीआईपीएएम) के नेतृत्व वाले पैनल के समक्ष अपनी अंतिम संचार रणनीतियां प्रस्तुत कीं। इस पैनल में डॉ. अलका मित्तल (सदस्य, सीबीसी), डॉ. नलिन सिंघल (पूर्व अध्यक्ष, बीएचईएल) और अतुल सोबती (महानिदेशक, एससीओपीई) जैसे दिग्गज शामिल थे। इन प्रस्तुतियों में दिन भर के शिक्षण का सुदृढ़ीकरण झलका, जिनमें पिछले सत्रों से प्राप्त प्रतिक्रियाएं शामिल थीं और बेहतर स्पष्टता, संरचना और रणनीतिक संरेखण का प्रदर्शन हुआ।

समापन चिंतन के भाग के रूप में:

  • अरुणिश चावला ने अपने व्यापक अनुभव के आधार पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें डीआईपीएएम की चल रही बाजार गतिविधियों और अंतर्राष्ट्रीय बातचीत से प्राप्त अनुभव शामिल था। उन्होंने संचार दृष्टिकोण को और मजबूत करने के लिए व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
  • अतुल सोबती ने उदारीकरण के बाद (एलपीजी सुधारों के बाद) के दौर से लेकर वर्तमान तक भारत में निवेशक संचार के विकास का विश्लेषण करते हुए अपने व्यापक अनुभव के आधार पर बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और व्यावहारिक मार्गदर्शन साझा किया और आज के बाजार परिवेश में इसके बढ़ते रणनीतिक महत्व पर जोर दिया। उन्होंने निरंतर सीखने, अनुकूलनशीलता और हितधारकों के साथ सक्रिय जुड़ाव की जरूरत पर भी जोर दिया।
  • डॉ. नलिन सिंघल ने सभी प्रतिभागियों की सराहना की और क्षमता विकास आयोग तथा डीआईपीएएम को समयोचित और प्रासंगिक कार्यशाला के लिए बधाई दी। उन्होंने सीपीएसई को भविष्य के लिए तैयार करने में इसके महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सीपीएसई को संरचित संचार के माध्यम से निवेशकों को सक्रिय रूप से मार्गदर्शन करना चाहिए, जुड़ाव की आवृत्ति तथा निरंतरता सुनिश्चित करनी चाहिए और पारदर्शिता एवं निवेशक विश्वास बढ़ाने के लिए वित्तीय खुलासों के लिए मानकीकृत एकसमान प्रारूप अपनाने चाहिए।

निष्कर्ष

इस कार्यशाला ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के भीतर निवेशक संचार क्षमताओं को मजबूत करने और भारत के विकास में उनकी भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वैचारिक स्पष्टता को व्यावहारिक अनुप्रयोग के साथ जोड़ते हुए और उद्योग विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं से प्राप्त अंतर्दृष्टि का लाभ उठाते हुए यह पहल विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार, चुस्त और उच्च प्रदर्शन वाले सार्वजनिक क्षेत्र के परितंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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पीके/केसी/केके/एनजे


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