जनजातीय कार्य मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

ओडिशा में जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहन

प्रविष्टि तिथि: 02 APR 2026 4:11PM by PIB Delhi

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोकसभा में बताया कि 'जनजातीय अनुसंधान संस्थान को सहायता' योजना के तहत 2019 से ओडिशा में कोई जनजातीय संग्रहालय स्थापित नहीं किया गया है। हालांकि, मंत्रालय ओडिशा राज्य जनजातीय संग्रहालय के रखरखाव और प्रबंधन के लिए ओडिशा के जनजातीय समुदाय द्वारा उठाई गई ज़रुरतों के मुताबिक समय-समय पर ''जनजातीय अनुसंधान संस्थान को सहायता' योजना के तहत ओडिशा के 'टीआरआई को वित्तीय सहायता प्रदान करता रहा है। ओडिशा में स्थित यह जनजातीय संग्रहालय वर्ष 2001 से सीआरपीएफ स्क्वायर, भुवनेश्वर में कार्यरत है। स्वीकृत परियोजनाओं/गतिविधियों और ओडिशा के 'टीआरआई को जारी की गई धनराशि का विवरण https://tribal.nic.in/Display_Apex_Minutes.aspx पर देखा जा सकता है।

यह उल्लेख करना ज़रुरी है कि जनजातीय मामलों के मंत्रालय का जनजातीय अनुसंधान एवं मीडिया प्रभाग, केंद्र प्रायोजित योजना ‘जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को सहायता’ का संचालन करता है। इस योजना के तहत मंत्रालय राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 29 जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिनमें ओडिशा टीआरआई भी शामिल है। यह सहायता राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत वार्षिक कार्य योजना के आधार पर दी जाती है, जिसे जनजातीय मामलों के मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च समिति द्वारा अनुमोदित किया जाना ज़रुरी है। इस सहायता का मकसद जनजातीय संग्रहालय/स्मारकों (आभासी संग्रहालयों सहित) की स्थापना, अनुसंधान एवं प्रलेखन गतिविधियों, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय त्योहारों और यात्राओं का आयोजन, जनजातियों के आदान-प्रदान दौरों का आयोजन आदि करना है, ताकि जनजातीय संस्कृति, प्रथाओं, भाषाओं और रीति-रिवाजों का संरक्षण एवं प्रसार हो सके। ‘टीआरआई को सहायता’ योजना मांग आधारित योजना है, जिसमें राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के टीआरआई अपनी आवश्यकता के अनुसार मंत्रालय को परियोजनाएं/प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं। ‘जनजातीय अनुसंधान संस्थान मुख्यतः राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के प्रशासनिक नियंत्रण में आने वाले संस्थान होते हैं। जनजातीय अनुसंधान संस्थान मुख्य रूप से राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन संस्थान हैं।

ओडिशा राज्य जनजातीय संग्रहालय/व्याख्या केंद्रों के लिए पिछले पांच वर्षों के दौरान टीआरआई, ओडिशा से प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार स्वीकृत, जारी और उपयोग किए गए निधि का विवरण अनुलग्नक-I में दिया गया है।

एससीएसटीआरटीआई (टीआरआई, ओडिशा) ओडिशा की जनजातियों के सांस्कृतिक पहलुओं पर विभिन्न अनुभव आधारित शोध, नृवंशविज्ञान अध्ययन और क्रियात्मक शोध करता है। एससीएसटीआरटीआई ऑडियो-वीडियो प्रलेखन के ज़रिए ओडिशा की जनजातियों के सांस्कृतिक पहलुओं को भी प्रदर्शित करता है। एससीएसटीआरटीआई परिसर में स्थित ओडिशा राज्य जनजातीय संग्रहालय (ओएसटीएम) जनजातीय संस्कृति और रीति-रिवाजों के विभिन्न पहलुओं का संरक्षण और प्रचार करता है। इसके अलावा, संस्थान समय-समय पर जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जैसे राष्ट्रीय जनजातीय शिल्प मेला, राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य मेला, संग्रहालय के भीतर जनजातीय कारीगरों द्वारा जनजातीय कला और शिल्प का सजीव प्रदर्शन, जनजातीय छात्रों के बीच राज्य स्तरीय कला प्रतियोगिता, जनजातीय स्कूली बच्चों के बीच जनजातीय जीवन और संस्कृति पर निबंध प्रतियोगिता, जनजातीय चित्रकला पर कार्यशाला-सह-प्रदर्शनी और राज्य स्तरीय जनजातीय कवि सम्मेलन आदि।

इसके अलावा, ओडिशा सरकार ने 2017 में विशेष विकास परिषद (एसडीसी) की स्थापना की। एसडीसी ओडिशा के 172 ब्लॉकों में फैले 23 जिलों में जनजातीय समुदायों की संस्कृति और विरासत की रक्षा और संवर्धन के लिए कार्यरत है। परिषद ने ओडिशा में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए निम्नलिखित पहलें की हैं:

  1. जनजातीय सांस्कृतिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए सांस्कृतिक पहलुओं के जीर्णोद्धार, संरक्षण और विकास के ज़रिए विकास उद्देश्यों के अनुरूप जनजातीय संस्कृति का संरक्षण करना, जिसमें मंदिर शिल्प, पवित्र उपवन, संगीत, कला, खेल आदि शामिल हैं।
  2. जनजातियों की स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को मान्यता देना और जनजातीय संस्कृति के संरक्षण में सहायता के लिए इसका संवर्धन करना।
  3. मूर्त और अमूर्त जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और प्रथाओं का दस्तावेजीकरण करना।
  4. जनजातीय संसाधनों की पहचान करना और स्वदेशी ज्ञान/अद्वितीय संस्कृति को आजीविका का साधन बनाना।
  5. जनजातियों को सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विकासात्मक महत्व के विभिन्न स्थानों की यात्राएं कराना।
  6. द्विभाषी शब्दकोशों और त्रिभाषी प्रवीणता मॉड्यूल के प्रकाशन के ज़रिए विकासात्मक संचार के लिए जनजातीय भाषाओं और बोलियों का संवर्धन करना।

इसके अलावा, ओडिशा सरकार ने भुवनेश्वर में जनजातीय भाषा एवं संस्कृति अकादमी (एटीएलसी) की स्थापना की है, जो ओडिशा में जनजातीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के केंद्र के रूप में कार्य कर रही है। यह ओडिशा सरकार के अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में एक स्वायत्त निकाय है। एटीएलसी ओडिशा में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निम्नलिखित पहल करती है:

  1. जनजातीय संस्कृति के संवर्धन के लिए वार्षिक आदिवासी मेले का आयोजन।
  2. जनजातीय लोककथाओं पर आवधिक शोध।
  3. जनजातीय भाषा एवं संस्कृति पर पुस्तकें प्रकाशित करना। ओडिशा की 21 जनजातीय भाषाओं में द्विभाषी शब्दकोश और त्रिभाषी प्रवीणता मॉड्यूल प्रकाशित करना।
  4. भाषा, साहित्य, संस्कृति, कला, खेल, सामाजिक सेवा, पारंपरिक चिकित्सा, नृत्य, संगीत और नाटक आदि विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाली जनजातीय प्रतिभाओं को सम्मानित करता है।
  5. जनजातीय त्योहारों और नृत्यों पर ऑडियो-वीडियो वृत्तचित्र विकसित किए हैं।
  6. जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन और निरंतरता के लिए विभिन्न राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तरीय उत्सवों/महोत्सवों में जनजातीय नृत्य प्रस्तुत करने के लिए जनजातीय नृत्य मंडलियों को प्रायोजित किया है।

अनुलग्नक- I

वित्तीय वर्ष

परियोजना

स्वीकृत निधि

(लाख में)

जारी की गई निधि

(लाख में)

उपयोग की गई निधि

(लाख में)

2025-26

शून्य

शून्य

शून्य

शून्य

2024-25

ओडिशा के लांजियासाओरा युवाओं के लिए लांजियासाओरा पेंटिंग (इडिटल) पर कार्यशाला-सह-क्षमता निर्माण प्रशिक्षण

9.29

9.29

9.29

2023-24

संग्रहालय परिसर में जनजातीय कलाकारों द्वारा जनजातीय कला और शिल्प का लाइव प्रदर्शन

45.00

45.00

15.96

जनजातीय संग्रहालय की कलाकृतियों और उपकरणों का वार्षिक बीमा

3.00

3.00

0.21

2022-23

संग्रहालय में जनजातीय शिल्प और कला का लाइव प्रदर्शन परिसर

40.00

40.00

40.00

ओडिशा के चुनिंदा सांस्कृतिक रूप से जीवंत समुदायों की जनजातीय संस्कृति पर ऑडियो-वीडियो सामग्री का विकास, जिसे संग्रहालय के कियोस्क में वर्चुअल मोड में प्रदर्शित किया जाएगा।

80.00

80.00

80.00

संग्रहालय का रखरखाव, जिसमें इंटरेक्टिव उपकरणों का उन्नयन और प्रतिस्थापन शामिल है।

30.00

30.00

17.27

2021-22

शून्य

 

शून्य

शून्य

शून्य

 

***

पीके/केसी/एनएस/ डीए


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