विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
संसदीय प्रश्न: इंस्पायर योजना
प्रविष्टि तिथि:
01 APR 2026 3:35PM by PIB Delhi
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की इनोवेशन इन साइंस परस्यूट फॉर इंस्पायर्ड रिसर्च (इंस्पायर) योजना एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य मेधावी युवाओं को स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर बुनियादी और प्राकृतिक विज्ञान के अध्ययन के लिए आकर्षित करना और इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि एवं पशु चिकित्सा विज्ञान जैसे क्षेत्रों सहित बुनियादी और व्यावहारिक अनुसंधान दोनों में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना का अंतिम उद्देश्य देश के अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) आधार को मजबूत करना और उसका विस्तार करना है।
यह योजना शिक्षा के विभिन्न चरणों में वैज्ञानिक प्रतिभा को निखारने के लिए डिज़ाइन किए गए कई घटकों के माध्यम से कार्यान्वित की जाती है। इंस्पायर-मानक (मिलियन माइंड्स ऑगमेंटिंग नेशनल एस्पिरेशन एंड नॉलेज) घटक कक्षा 6 से 12 में पढ़ने वाले 10-17 वर्ष की आयु के छात्रों को लक्षित करता है। इसका उद्देश्य छात्रों को मौलिक विचार विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करके वैज्ञानिक जिज्ञासा और नवाचार को बढ़ावा देना है। स्कूल ई-एमआईएएस पोर्टल के माध्यम से प्रतिवर्ष पांच छात्रों तक को नामांकित कर सकते हैं। चयनित छात्रों को अपने प्रोजेक्ट विकसित करने और जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से 10,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। उच्च शिक्षा के लिए इंस्पायर स्कॉलरशिप (एसएचई) घटक 17-22 वर्ष की आयु के उन प्रतिभाशाली छात्रों को सहायता प्रदान करता है जो बुनियादी और प्राकृतिक विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर अध्ययन करना चाहते हैं। प्रतिवर्ष कुल 12,000 छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं, जिनमें से प्रत्येक का मूल्य 80,000 रुपये प्रति वर्ष है, साथ ही इसमें मेंटरिंग सहायता भी दी जाती है। इंस्पायर फेलोशिप घटक विज्ञान और संबंधित क्षेत्रों में पीएचडी कार्यक्रमों में लगे उत्कृष्ट छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह फेलोशिप पांच साल तक के लिए दी जाती है और यह सीएसआईआर-यूजीसी नेट फेलोशिप के समकक्ष है, जिसमें जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के रूप में 37,000 रुपये प्रति माह और सीनियर रिसर्च फेलोशिप (एसआरएफ) के रूप में 42,000 रुपये प्रति माह के साथ-साथ मकान किराया भत्ता (एचआरए) और 20,000 रुपये प्रति वर्ष का आकस्मिक अनुदान दिया जाता है। इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप घटक 27-32 वर्ष की आयु के शुरुआती करियर वाले शोधकर्ताओं के लिए है। यह 1,25,000 रुपये के मासिक पारिश्रमिक, वार्षिक वेतन वृद्धि और 35 लाख रुपये के शोध अनुदान के साथ पांच साल की फेलोशिप प्रदान करता है। इसका उद्देश्य पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ताओं को बुनियादी और व्यावहारिक विज्ञान दोनों में स्वतंत्र अनुसंधान करियर स्थापित करने में सहायता करना है। ये घटक मिलकर एक निरंतर पाइपलाइन बनाते हैं जो स्कूली स्तर से लेकर उन्नत अनुसंधान तक वैज्ञानिक प्रतिभा को पोषित करते हैं, जिससे देश में एक मजबूत और टिकाऊ वैज्ञानिक कार्यबल के विकास में योगदान मिलता है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों सहित इंस्पायर योजना के विभिन्न घटकों के तहत लाभान्वित छात्रों की संख्या का विवरण इस प्रकार है:
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इंस्पायर घटक
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2023-24
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2024-25
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2025-26
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इंस्पायर-मानक
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46926
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50009
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49805
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इंस्पायर (एसएचई)
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7976
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9494
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9046
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इंस्पायर फैलोशिप
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796
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305
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923
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इंस्पायर फैकल्टी फैलोशिप
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100
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58
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171
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पिछले तीन वर्षों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के तहत कवर किए गए इंस्पायर-मानक और इंस्पायर-एसएचई छात्रों की संख्या नीचे दी गई है:
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वित्तीय वर्ष
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इंस्पायर-मानक
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इंस्पायर-एसएचई
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आच्छादित छात्रों की संख्या
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ग्राणीण क्षेत्रों से आच्छादित छात्रों की संख्या
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आच्छादित छात्रों की संख्या
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ग्राणीण क्षेत्रों से आच्छादित छात्रों की संख्या
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2023-24
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854553
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697116
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7976
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6256
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2024-25
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1013229
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847849
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9494
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6645
|
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2025-26
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1147343
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967897
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9046
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4648
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सरकार ने देश भर में ग्रामीण क्षेत्रों सहित छात्रों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (स्टेम) शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए पहुंच, नवाचार, परामर्श और बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए व्यापक उपाय किए हैं। इंस्पायर योजना के तहत कई लक्षित पहल लागू की गई हैं। इंस्पायर-मानक कार्यक्रम कक्षा VI से XII के छात्रों को, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र भी शामिल हैं, नवीन विचार और वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। चयनित छात्रों को अपने विचारों को प्रोजेक्ट और मॉडल में बदलने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे व्यावहारिक शिक्षा और रचनात्मकता को बढ़ावा मिलता है।
शिक्षक इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें छात्रों के बीच नवीन विचारों की पहचान करने और उन्हें निखारने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। आईराइज जैसे कार्यक्रमों, विशेष रूप से इसके शिक्षक विकास खंड के माध्यम से उनकी क्षमता को और बढ़ाया जाता है, जो शिक्षार्थी-केंद्रित और नवाचार-संचालित शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देता है। स्टेम में उच्च शिक्षा का समर्थन करने के लिए, इंस्पायर स्कॉलरशिप फॉर हायर एजुकेशन (एसएचई) अनुभवी वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में ग्रीष्मकालीन परियोजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता, परामर्श और अनुसंधान का अनुभव प्रदान करती है। स्कॉलर्स को परामर्श अनुदान और अग्रणी प्रयोगशालाओं एवं संस्थानों में काम करने के अवसर भी मिलते हैं, जिससे ग्रामीण छात्रों और उन्नत अनुसंधान परिवेश के बीच के अंतर को पाटने में मदद मिलती है। आईराइज के तहत 'अर्ली करियर रिसर्चर डेवलपमेंट स्ट्रैंड' अनुसंधान कौशल को और मजबूत करता है और युवा शोधकर्ताओं को उद्योग का अनुभव प्रदान करता है।
सरकार ने बुनियादी ढांचे और प्रयोगशाला सुविधाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए कोष (फिस्ट) और विश्वविद्यालय अनुसंधान एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता का संवर्धन (पर्स) जैसी योजनाएं विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को प्रयोगशालाओं और अनुसंधान उपकरणों के उन्नयन में सहायता करती हैं। सोफिस्टिकेटेड एनालिटिकल इंस्ट्रूमेंट फैसिलिटीज (एसएआईएफ) और सोफिस्टिकेटेड एनालिटिकल एंड टेक्निकल हेल्प इंस्टीट्यूट्स (साथी) जैसी राष्ट्रीय सुविधाएं उन्नत वैज्ञानिक उपकरणों तक साझा पहुंच प्रदान करती हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के उन संस्थानों को लाभ होता है जिनके पास ऐसे संसाधनों की कमी है।
डिजिटल पहुंच में सुधार के लिए इंस्पायर-मानक पोर्टल को बेहतर बनाया गया है, जिसमें मार्गदर्शन के लिए चैटबॉट की शुरुआत, वरिष्ठ कक्षाओं के लिए उन्नत ई-एमआईएएस पहुंच, बेहतर यू-डाइस डेटा सिंक्रोनाइज़ेशन और नामांकन के लिए अधिक सुविधाजनक इंटरफेस शामिल है। इन उपायों ने विशेष रूप से ग्रामीण छात्रों और स्कूलों के लिए सुलभता, पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि की है।
इंस्पायर योजना के तहत आउटरीच कार्यक्रमों में स्कूली, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञान प्रदर्शनियां, प्रतियोगिताएं और विज्ञान मेले शामिल हैं, जो भागीदारी को प्रोत्साहित करते हैं और छात्रों के नवाचारों को प्रदर्शित करते हैं। छात्रों को आईआईटी, एनआईटी और एम्स जैसे प्रमुख संस्थानों का दौरा करने का अवसर भी दिया जाता है, जहां वे स्टेम के वास्तविक अनुप्रयोगों से परिचित होते हैं। परामर्श पहल के माध्यम से छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और संकायों से जोड़ा जाता है, जो उन्हें मार्गदर्शन और प्रेरणा प्रदान करते हैं। विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग जगत के हितधारकों के साथ साझेदारी छात्रों को प्रयोगशालाओं, इंटर्नशिप और व्यावहारिक सीखने के अनुभव प्रदान करके उनके अवसरों को और बढ़ाती है। कोडिंग सत्र, टिंकरिंग लैब, शैक्षणिक सहायता कक्षाएं और शिक्षण संसाधनों का वितरण जैसी गतिविधियां वैज्ञानिक अभिरुचि को मजबूत करने में मदद करती हैं।
कुल मिलाकर, शिक्षक प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल पहुंच, प्रयोगशाला सहायता, आउटरीच गतिविधियों, प्रतियोगिताओं, परामर्श और संस्थागत साझेदारी तक फैले इन एकीकृत प्रयासों ने एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र बनाया है जो छात्रों को स्टेम शिक्षा और करियर में सक्रिय रूप से भाग लेने और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित एवं समर्थित करता है।
इंस्पायर योजना और स्टेम प्रोत्साहन के अन्य प्रयासों के प्रभाव का आकलन एक बहुस्तरीय मूल्यांकन और निगरानी ढांचे के माध्यम से किया जाता है। योजना की गतिविधियों की समय-समय पर एक स्थायी समिति द्वारा और देश भर में आयोजित वार्षिक समूह निगरानी बैठकों के माध्यम से समीक्षा की जाती है। शैक्षणिक प्रदर्शन और ग्रामीण छात्रों सहित स्टेम शिक्षा में उच्च नामांकन का आकलन करने के लिए छात्रों की ट्रैकिंग एक मुख्य घटक है। योजना के अगले चरणों में जारी रहने के समय विशेषज्ञ समितियों द्वारा इसका समय-समय पर स्वतंत्र मूल्यांकन किया गया है, जिन्होंने वैज्ञानिक प्रतिभा की पाइपलाइन को मजबूत करने में इसकी प्रभावशीलता की समीक्षा की है। व्यक्तिगत शोधार्थियों की निगरानी उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, पढ़ाई को जारी रखने और प्रमाणित शोध रिपोर्ट जमा करने के माध्यम से की जाती है, और वित्तीय सहायता इन्हीं परिणामों से जुड़ी होती है। फेलोशिप के लिए वार्षिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है और वैज्ञानिक प्रगति का आकलन करने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा इनका मूल्यांकन किया जाता है। संकाय स्तर पर, मध्यावधि और अंतिम सहकर्मी समीक्षाएं अनुसंधान आउटपुट, रोजगार के परिणामों और प्रकाशनों, पेटेंट एवं पेशेवर पहचान जैसे योगदानों को मापती हैं। कुल मिलाकर, यह निरंतर मूल्यांकन प्रणाली नामांकन, प्रदर्शन और करियर की प्रगति पर नज़र रखती है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करती है और विशेष रूप से ग्रामीण छात्रों के बीच स्टेम में भागीदारी और करियर अपनाने को बढ़ावा देने में योजना की प्रभावशीलता का आकलन करने में मदद करती है।
सरकार देश के अनुसंधान और विकास आधार को मजबूत करने के लिए विशेष रूप से बुनियादी और व्यावहारिक अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करते हुए विज्ञान ज्योति और इंस्पायर जैसी मौजूदा एस एंड टी योजनाओं/कार्यक्रमों को जारी रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों सहित स्टेम शिक्षा के अवसरों के लिए एक विस्तारित और मजबूत ढांचे की परिकल्पना करती है।
यह जानकारी आज लोकसभा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।
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पीके/केसी/एसके/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2248023)
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