गृह मंत्रालय
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बिहार के वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों में विकास

प्रविष्टि तिथि: 01 APR 2026 2:38PM by PIB Delhi
  • पुलिस और लोक प्रशासन के विषय, भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्य सरकारों के अधीन हैं। हालांकि, वामपंथी उग्रवाद (अल डब्ल्यू ई) से प्रभावित राज्यों के प्रयासों को भारत सरकार पूरक सहयोग प्रदान करती रही है। वामपंथी उग्रवाद को समूल नष्ट करने के लिए, वर्ष 2015 में “वामपंथी उग्रवाद से निपटने हेतु राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना” को स्वीकृति दी गई। इसमें सुरक्षा संबंधी उपायों के साथ-साथ विकास के लिए हस्तक्षेपों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों एवं मालिकाना हक सुनिश्चित करने आदि को सम्मिलित करते हुए एक बहुआयामी रणनीति की परिकल्पना की गई है।
  • सुरक्षा के मोर्चे पर, भारत सरकार राज्यों को हेलीकॉप्टर सहायता से लेकर सुरक्षा शिविर अवसंरचना को सुदृढ़ करने, प्रशिक्षण, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण हेतु धनराशि, उपकरण एवं हथियार, खुफिया जानकारी साझा करने, सभी सुविधाओं से सुसज्जित पुलिस थानों के निर्माण तथा भारतीय रिजर्व बटालियनों की स्वीकृति आदि भी प्रदान करती है।
  • वर्ष 2014-15 से, सुरक्षा संबंधी व्यय (एस आर ई) योजना के अंतर्गत राज्यों की क्षमता निर्माण हेतु एलडब्ल्यूई प्रभावित राज्यों को कुल 3756.38 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिनमें से 175.25 करोड़ बिहार को जारी किए गए हैं। इस राशि का उपयोग सुरक्षा बलों के परिचालन व्यय से लेकर प्रशिक्षण आवश्यकताओं, आत्मसमर्पण कर चुके एलडब्ल्यूई कैडर के पुनर्वास, एलडब्ल्यूई हिंसा में मारे गए नागरिकों के परिवारों / सुरक्षा बलों के शहीद कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि आदि हेतु किया जाता है। एलडब्ल्यूई प्रभावित राज्यों को इसी प्रकार, विशेष अवसंरचना योजना (एस आई एस) के अंतर्गत राज्य के विशेष बलों, राज्य खुफिया शाखाओं (एस आई बी), जिला पुलिस को सुदृढ़ करने तथा सुदृढ़ीकृत पुलिस थानों (एफ पी एस) के निर्माण के लिए एल डब्ल्यू ई प्रभावित राज्यों को 1761 करोड़ के कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 173.6 करोड़ बिहार को जारी किए गए हैं।
  • भारत सरकार और राज्य सरकारों ने समग्र आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीतियाँ तैयार की हैं। भारत सरकार सुरक्षा संबंधी व्यय (एस आर ई) योजना के अंतर्गत ‘आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास’ नीति के माध्यम से इस प्रयास में भी राज्यों को सहयोग प्रदान करती है। भारत सरकार, एस आर ई योजना के अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के पुनर्वास पर अल डब्ल्यू ई प्रभावित राज्यों द्वारा किए गए व्यय की प्रतिपूर्ति करती है। पुनर्वास पैकेज में अन्य बातों के साथ-साथ, उच्च श्रेणी के एल डब्ल्यू ई कैडर के लिए 5 लाख रुपये तथा अन्य एल डब्ल्यू ई कैडर के लिए 2.5 लाख रुपये की तत्काल अनुदान राशि शामिल है। इसके अतिरिक्त, योजना के अंतर्गत हथियारों / गोला-बारूद के आत्मसमर्पण पर प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान है। साथ ही, उनकी पसंद के व्यवसाय / कौशल प्रशिक्षण के लिए तीन वर्षों तक 10,000 प्रति माह की छात्रवृत्ति / मानदेय राशि देने का भी प्रावधान है। प्रभावित राज्यों ने अपनी आत्मसमर्पण-सह-पुनर्वास नीतियों को और अधिक आकर्षक तथा समकालीन बनाने के लिए उनमें समय-समय पर संशोधन भी किए हैं।
  • राज्यों द्वारा अपने पुलिस बलों को सुसज्जित और आधुनिक बनाने के प्रयासों को “पुलिस बलों के आधुनिकीकरण” योजना के अंतर्गत पूरक सहयोग प्रदान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों को हथियार, सूचना प्रौद्योगिकी हेतु उपकरण, संचार, प्रशिक्षण, पुलिस थानों के निर्माण, मोबिलिटी, पुलिस आवास तथा अन्य पुलिस अवसंरचना के निर्माण आदि के लिए केंद्रीय सहायता प्रदान की जाती है। इसकी उप-योजना अर्थात विशेष अवसंरचना योजना (एस आई एस) के अंतर्गत, राज्य के विशेष बलों, राज्य खुफिया शाखाओं (एस आई बी), जिला पुलिस को सुदृढ़ करने तथा सुदृढ़ीकृत पुलिस थानों (एफ पी एस) के निर्माण के लिए एल डब्ल्यू ई प्रभावित राज्यों हेतु 1761 करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। अब तक 660 सुदृढ़ीकृत पुलिस थानों का निर्माण किया जा चुका है, जिनमें से 112 थाने बिहार में निर्मित किए गए हैं।
  • वामपंथी उग्रवाद के उन्मूलन में भारत सरकार द्वारा सुरक्षा अवसंरचना पर विशेष ध्यान दिया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। पिछले सात वर्षों में एल डब्ल्यू ई के मुख्य प्रभावित क्षेत्रों में 406 नए सुरक्षा शिविर स्थापित किए गए हैं।
  • वामपंथी उग्रवाद प्रबंधन हेतु केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (ए सी ए एल डब्ल्यू ई एम एस) योजना के अंतर्गत शिविरों संबंधी बुनियादी ढांचे तथा एल डब्ल्यू ई के विरुद्ध अभियानों के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने हेतु सहायता प्रदान की जाती है। वर्ष 2014-15 से अब तक इस योजना के माध्यम से केंद्रीय एजेंसियों को 1267.02 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
  • भारत सरकार, राज्यों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उनकी परिचालन आवश्यकताओं के अनुसार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सी ए पी एफ) उपलब्ध कराती है। यह केन्द्रीय बल एक वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लिए एक ग्रिड बनाए रखते हैं तथा राज्य पुलिस बलों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियानों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित करते हैं। राज्य पुलिस के साथ मिलकर सी ए पी एफ ने नक्सलवाद के खतरे को काफी हद तक समाप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • वामपंथी उग्रवादियों (एल डब्ल्यू ई) के लिए होने वाली वित्तीय आपूर्ति को रोकने तथा सीपीआई (माओवादी) और उसको वित्त पोषित करने वालों के बीच संबंधों का पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अल डब्ल्यू ई को धनराशि और अन्य संसाधनों की आपूर्ति रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई के उद्देश्य से, राज्य पुलिस द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से विभिन्न माध्यमों से समन्वित कार्रवाई की जा रही है। अल डब्ल्यू ई कैडरों तक धन के प्रवाह की निगरानी के लिए वर्ष 2016 में गृह मंत्रालय में केंद्र और राज्य स्तर पर दो मल्टी डिसिपलनरी ग्रुप गठित किए गए थे
  • भारत सरकार की प्रमुख महत्वाकांक्षी विकास योजनाओं के अतिरिक्त, एल डब्ल्यू ई प्रभावित क्षेत्रों के लिए कई विशेष पहलें की गई हैं, जिनमें सड़क नेटवर्क के विस्तार, दूरसंचार संपर्क में सुधार, वित्तीय समावेशन, शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इनमें से कुछ का विवरण निम्नलिखित है—
  • सड़क नेटवर्क के विस्तार के लिए, एल डब्ल्यू ई विशिष्ट दो योजनाओं, अर्थात रोड रिक्वायरमेंट प्लान-I (आर आर पी -I) तथा एल डब्ल्यू ई प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (आर सी पी अल डब्ल्यू ई आ) के अंतर्गत 17,319 किलोमीटर सड़क को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसमें बिहार में 2,639 किलोमीटर सड़क शामिल है। इनमें से अब तक 15,068 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा चुका है, जिसमें बिहार में 2,497 किलोमीटर सड़क का निर्माण शामिल है।
  • एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 11,549 मोबाइल टावर लगाए जाने की योजना बनाई गई है। बिहार में 371 मोबाइल टावर लगाना शामिल हैं। इनमें से 9,627 टावर स्थापित और संचालित हो चुके हैं। बिहार में 366 मोबाइल टावर संचालित हो रहे हैं।
  • कौशल विकास के लिए 48 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आई टी आई) को स्वीकृति प्रदान की गई है। इनमें से 46 आई टी आई वर्तमान में कार्यरत हैं, जिनमें बिहार में 09 आई टी आई शामिल हैं।
  • जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 259 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ई एम आर एस) स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से वर्तमान में बिहार में 02 ई एम आर एस सहित 179 ई एम आर एस कार्यरत हैं।
  • वित्तीय समावेशन के लिए एल डब्ल्यू ई प्रभावित जिलों में बैंकिंग सेवाओं सहित 6,025 डाकघर खोले गए हैं, जिनमें बिहार में 264 डाकघर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, एल डब्ल्यू ई प्रभावित जिलों में 1,804 बैंक शाखाएँ (जिनमें बिहार में 215 बैंक शाखाएँ शामिल हैं), 1,321 एटीएम (जिनमें बिहार में 26 एटीएम शामिल हैं) तथा 74,720 बैंकिंग संवाददाता (जिनमें बिहार में 17,855 बैंकिंग संवाददाता शामिल हैं) को संचालित किया गया है।
  • विकास को और अधिक गति प्रदान करने के लिए, एल डब्ल्यू ई प्रभावित जिलों में सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एस सी ए) योजना के अंतर्गत धनराशि प्रदान की जाती है। वर्ष 2017 में योजना की शुरुआत से अब तक 4,175.10 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 462.57 करोड़ रुपये बिहार को जारी किए गए हैं।
  • ‘राष्ट्रीय नीति एवं कार्य योजना 2015’ के दृढ़ क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप हिंसा में लगातार कमी आई है तथा इसका भौगोलिक प्रभाव भी सिकुड़ा है। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए किसी समय एक गंभीर चुनौती रहा वामपंथी उग्रवाद हाल के समय में काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है और अब यह केवल कुछ सीमित क्षेत्रों तक सिमट गया है। एल डब्ल्यू ई प्रभावित जिलों की संख्या वर्ष 2013 में 126 थी जो मार्च, 2026 में घटकर केवल 02 रह गई है। 01 जिले को ‘संदिग्ध’ श्रेणी में रखा गया है, जहाँ एल डब्ल्यू ई की हिंसक गतिविधियों को नियंत्रण में लाया जा चुका है, किन्तु अभी भी कुछ संख्या में कैडर मौजूद हैं। ये जिले शीघ्र ही एल डब्ल्यू ई से पूर्णतः मुक्त होने की स्थिति में हैं। वर्तमान में 35 जिलों को ‘लीगेसी एंड थ्रस्ट’ जिलों की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है।
  • वर्तमान में 35 जिलों को ‘लीगेसी एंड थ्रस्ट’ जिलों की श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जो अब एल डब्ल्यू ई प्रभावित नहीं हैं, लेकिन स्थिति को और सुदृढ़ करने तथा कुछ और समय तक सुरक्षा एवं विकासात्मक उपायों के संबंध में निरंतर सहयोग प्रदान किए जाने की आवश्यकता है। बिहार के 04 जिले (औरंगाबाद, गया, जमुई, लखीसराय) को ‘लीगेसी एंड थ्रस्ट’ जिलों की श्रेणी में रखा गया है।
  • अल डब्ल्यू ई द्वारा की गई हिंसक घटनाओं की संख्या वर्ष 2010 में 1,936 के उच्च स्तर पर थी, जो वर्ष 2025 में घटकर 234 रह गई है। यह 88 प्रतिशत की कमी को दर्शाती है। इसके परिणामस्वरूप नागरिकों एवं सुरक्षा बलों की होने वाली मौतों की संख्या भी महत्वपूर्ण रूप से घटी है। वर्ष 2010 में जहां 1,005 मौतें हुई थीं वर्ष 2025 में घटकर 100 रही, जो 90 प्रतिशत की कमी है। वर्ष 2025 में, सुरक्षा बलों ने 364 नक्सलियों को निष्क्रिय किया, 1,022 को गिरफ्तार किया तथा 2,337 ने आत्मसमर्पण सुनिश्चित किए। एल डब्ल्यू ई संबंधी हिंसा की सूचना देने वाले पुलिस थानों की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से घटकर वर्ष 2010 के 465 थानों से वर्ष 2025 में 119 थानों तक आ गई है।
  • वर्ष 2021 से एलडब्ल्यूई द्वारा की गई हिंसक घटनाओं तथा उनसे हुई जन हानि का वर्ष अनुसार विवरण परिशिष्ट-I में दिया गया है। वर्ष 2021 से बिहार में एलडब्ल्यूई द्वारा की गई हिंसक घटनाओं तथा उनसे हुई जन हानि का वर्ष अनुसार विवरण परिशिष्ट-II में दिया गया है।
  • भारत सरकार देश से वामपंथी उग्रवाद के समूल उन्मूलन तथा वामपंथी उग्रवाद से मुक्त हो रहे क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

परिशिष्ट - I

देश में वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई ) द्वारा की गई हिंसक घटनाएँ

वर्ष

एलडब्ल्यूई उग्रवाद हिंसा

नागरिक जन हानि

सुरक्षा बलों की जन हानि 

एलडब्ल्यूई की मौतें

2021

361

97

50

126

2022

413

82

16

57

2023

486

106

32

50

2024

374

131

19

290

2025

234

64

36

364

2026 (मार्च 15)

26

5

1

52

कुल

1894

485

154

939

 

परिशिष्ट - II

बिहार में वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई ) द्वारा की गई हिंसक घटनाएँ

वर्ष

एलडब्ल्यूई उग्रवाद हिंसा

नागरिक जन हानि

सुरक्षा बलों की जन हानि 

एलडब्ल्यूई की मौतें

2021

20

7

0

6

2022

11

1

0

3

2023

4

0

0

0

2024

2

1

0

0

2025

3

0

0

1

2026 (मार्च 15)

0

0

0

0

कुल

40

9

0

10

 

यह जानकारी केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय द्वारा आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई।

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पीके/केसी/डीटी


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