पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
'भवसागर' रेफरल सेंटर को गहरे समुद्र में रहने वाले जीवों के लिए भारत के राष्ट्रीय भंडार के रूप में नामित किया गया
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 9:17PM by PIB Delhi
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) के अधीन केरल के कोच्चि स्थित समुद्री जीव संसाधन और पारिस्थितिकी केन्द्र (सीएमएलआरई) ने समुद्री संरक्षण में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने आधिकारिक तौर पर सीएमएलआरई के 'भवसागर' रेफरल सेंटर को गहरे समुद्र में रहने वाले जीवों के लिए भारत के राष्ट्रीय भंडार के रूप में नामित किया है।
जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत प्रदान की गई यह प्रतिष्ठित मान्यता भारत की विशाल गहरे समुद्र की जैविक विरासत के संरक्षण, अध्ययन और प्रलेखन के लिए इस केंद्र को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुविधा के रूप में स्थापित करती है।
'भवसागर' रेफरल सेंटर वर्तमान में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक केंद्र के रूप में कार्य करता है। इसमें 3,500 से अधिक वर्गीकरण के आधार पर पहचाने गए और भौगोलिक रूप से संदर्भित वाउचर (संरक्षित) नमूनों का एक व्यापक संग्रह है। इस संग्रह में समुद्री जीवन की विविधतापूर्ण शृंखला शामिल है। इसमें अकशेरुकी जीव - जिनमें निडेरियन, एनेलिड्स, मोलस्क, आर्थ्रोपोड्स और इकाइनोडर्म से लेकर कशेरुकी जीव जैसे कि एलास्मोब्रैंक और टेलीओस्टियन मछलियां शामिल हैं।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने इस प्रयोजन के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया:
'भवसागर' को राष्ट्रीय भंडार के रूप में मान्यता मिलना भारत की नीली अर्थव्यवस्था और समुद्री जैव विविधता ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। गहरे समुद्र से प्राप्त नमूनों और उनके आनुवंशिक आंकड़ों की सुरक्षा को केंद्रीकृत करके हम न केवल अपने प्राकृतिक इतिहास को संरक्षित कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को गहरे समुद्र के रहस्यों को उजागर करने के लिए एक मूलभूत संसाधन भी प्रदान कर रहे हैं।
जैविक विविधता अधिनियम के तहत इसे निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं:
- संरक्षण को सुरक्षित रखना : भविष्य के वैज्ञानिक संदर्भ के लिए महत्वपूर्ण संबंधित डेटा जैसे डीएनए अनुक्रमों के साथ प्रतिनिधिक जैविक नमूनों को प्रमाणिक (संरक्षित) नमूनों के रूप में संरक्षित करना।
- नमूने रखने का दायित्व: भारतीय जलक्षेत्र के गहरे समुद्र में खोजी गई किसी भी नई प्रजाति के आधिकारिक संरक्षक के रूप में कार्य करना।
- क्षमता निर्माण: संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास हेतु महासागर विज्ञान दशक (2021-2030) के लक्ष्यों के अनुरूप गहरे समुद्र के वर्गीकरण में विशेषज्ञता को बढ़ावा देना।
यह उपाधि भारत की गहरे समुद्र में अनुसंधान क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है। सीएमएलआरई शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और पर्यावरण हितधारकों को इस सुविधा का उपयोग करने और समुद्री जैव विविधता संरक्षण के लिए राष्ट्र के ढांचे को मजबूत करने में सहयोग करने के लिए आमंत्रित करता है।
सीएमएलआरई के बारे में: समुद्री जीव संसाधन और पारिस्थितिकी केन्द्र (सीएमएलआरई) भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख संस्थान है, जो भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) और उससे सटे गहरे समुद्रों में समुद्री जीव संसाधनों के अन्वेषण, प्रबंधन और संरक्षण के लिए समर्पित है।
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2247148)
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