सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
एमएसएमई मंत्रालय ने नागालैंड के डिमापुर में उद्यमी जागरूकता शिविर और विशेष विक्रेता विकास कार्यक्रम का आयोजन किया
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 7:45PM by PIB Delhi
भारत सरकार के लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने नागालैंड सरकार और नागा व्यापार संघ (बीएएन) के सहयोग से 30 मार्च 2026 को नागालैंड के डिमापुर, पुराना बाजार, सेडेन रिजू में उद्यमी जागरूकता शिविर और विशेष विक्रेता विकास कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत सरकार के विभिन्न पहलों, विशेष रूप से राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (एनएसएसएच) योजना के बारे में जागरूकता पैदा करना था। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) की मांग और एससी/एसटी उद्यमों की आपूर्ति क्षमताओं के बीच की खाई को पाटना था, जिसमें गुणवत्ता मानकों और आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस कार्यक्रम में उद्यमियों को उद्यम पंजीकरण भी प्राप्त करने का अवसर मिला। नागालैंड राज्य से 300 से अधिक आकांक्षी और मौजूदा उद्यमियों ने इस आयोजन में भाग लिया।

कार्यक्रम में भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री एस.सी.एल. दास विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मर्सी एपाव, नागा व्यापार संघ (बीएएन) के अध्यक्ष श्री एल. मॉंगकुम जामिर तथा केंद्रीय और राज्य सरकार के गरिमामय अधिकारी भी मौजूद थे।

एनएसआईसी के जोनल जनरल मैनेजर श्री राजेश मदन ने अपने उद्घाटन भाषण में कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी और भारत सरकार की सार्वजनिक खरीद नीति का वर्णन किया, जिसमें एससी/एसटी स्वामित्व वाले एमएसई से 4% और महिला एमएसई से 3% सार्वजनिक खरीद अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना पूरे देश में, नागालैंड सहित, समावेशी विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही है।

एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मर्सी एपाव ने अपने विस्तृत संबोधन में एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता, बुनियादी ढांचा सुविधाएं, कौशल विकास और बाजार संपर्क के बारे में बताया। उन्होंने जोर दिया कि एमएसएमई क्षेत्र कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है और यह भारत की जीडीपी में 31 प्रतिशत से अधिक, विनिर्माण उत्पादन में 35 प्रतिशत तथा निर्यात में 46 प्रतिशत का योगदान देता है। उन्होंने आगे बताया कि उद्यम पोर्टल पर 7.8 लाख से अधिक एमएसएमई पंजीकृत हैं, जो 34 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। उन्होंने पीएम विश्वकर्मा, पीएमईजीपी, एमएसई-सीडीपी, टूल रूम, जेड सर्टिफिकेशन, व्यापार सक्षमता और विपणन योजना, उद्यम पंजीकरण, खरीद और विपणन सहायता योजना आदि के प्रमुख लाभों के बारे में भी बताया।

भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री एस.सी.एल. दास ने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय की योजनाएं देश भर में उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि युवा, विशेष रूप से महिला उद्यमी उद्यम स्थापित कर रहे हैं और राज्य की अर्थव्यवस्था में सक्रिय योगदान दे रहे हैं, यह देखकर उन्हें खुशी हो रही है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया, जिन्हें युवा व्यवसाय अवसरों और रोजगार सृजन के लिए अनुकूलित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार एससी/एसटी उद्यमिता को समर्थन और प्रोत्साहन देने के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है तथा राज्य सरकार और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर कार्यान्वयन को मजबूत करने और पहुंच में सुधार के लिए निकट सहयोग कर रही है।

इस कार्यक्रम ने आकांक्षी और मौजूदा उद्यमियों को सीपीएसई, एमएसएमई-डीएफओ, वित्तीय संस्थानों आदि हितधारकों के साथ बातचीत का एक इंटरैक्टिव मंच प्रदान किया, जो देश भर में एमएसएमई का समर्थन कर रहे हैं। तकनीकी सत्र के दौरान एमएसएमई-डीएफओ, बैंकों के प्रतिनिधियों, सीपीएसई आदि ने प्रतिभागियों को वित्तीय सहायता, विक्रेता पैनल प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम एमएसएमई क्षेत्र का समर्थन करने वाले प्रमुख हितधारकों और उद्यमियों के बीच सार्थक संलग्नता को बढ़ावा देने के लिए एक मूल्यवान मंच के रूप में कार्य किया।
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पीके/ केसी /एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2247084)
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