विद्युत मंत्रालय
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नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग का ग्रिड स्थिरता पर प्रभाव

प्रविष्टि तिथि: 30 MAR 2026 4:14PM by PIB Delhi

सरकार ने सौर और पवन ऊर्जा से जुड़ी अनिश्चितता को ध्यान में रखते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के बढ़ते उपयोग की ग्रिड स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक आकलन किया है। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में तेजी से वृद्धि के साथ, पारेषण को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा पूर्वानुमान, ग्रिड संचालन सुधार और ऊर्जा भंडारण एकीकरण के संयोजन के माध्यम से ग्रिड की तत्‍परता, लचीलापन और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

इस संबंध में निम्नलिखित उपाय किए गए हैं:

  1. नवीकरणीय ऊर्जा पूर्वानुमान और तत्‍क्षण ग्रिड प्रबंधन के लिए क्षेत्रीय ऊर्जा प्रबंधन केंद्रों (आरईएमसी) की स्थापना।
  1. आवृत्ति विनियमन और संतुलन के लिए स्वचालित उत्पादन नियंत्रण (एजीसी) और सहायक सेवाओं (एसआरएएस/टीआरएएस) का कार्यान्वयन।

(iii) वोल्टेज स्थिरता और गतिशील प्रतिक्रिया के लिए स्टैटिक सिंक्रोनस कम्पेनसेटर और सिंक्रोनस कंडेंसर जैसी उन्नत ग्रिड समर्थन प्रौद्योगिकियों को पारेषण नियोजन में शामिल किया गया है और वे कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।

  • (iv) पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत, 455 शहरों के लिए पर्यवेक्षी नियंत्रण और डेटा अधिग्रहण (एससीएडीए) को मंजूरी दी गई है।
  1. राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ) द्वारा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) के समन्वय से उन्नत मौसम पूर्वानुमान, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन और मांग पूर्वानुमान में सुधार लाने में सहायक होता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तनशीलता के प्रभावी प्रबंधन में मदद मिलती है।
  • (vi) केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) (ग्रिड से कनेक्टिविटी के लिए तकनीकी मानक) विनियमों में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन संयंत्रों के लिए न्यूनतम तकनीकी आवश्यकताएं निर्धारित की गई हैं ताकि ग्रिड का सुरक्षित, सुगम और विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित किया जा सके। राष्ट्रीय ग्रिड से कनेक्टिविटी/इंटरकनेक्शन प्रदान करने से पहले, केंद्रीय पारेषण उपयोगिता (सीटीयूआईएल) और ग्रिड-इंडिया/रिजनल लोड डिस्पैच सेंटर (आरएलडीसी) द्वारा प्रासंगिक प्रणाल‍ियों के अध्ययनों के आधार पर नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों द्वारा उक्त विनियमों के अनुपालन का संयुक्त रूप से सत्यापन किया जाता है।
  1. भारतीय विद्युत ग्रिड संहिता के अनुसार, नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों का आपात स्थिति में प्राथमिक और द्वितीयक आवृत्ति नियंत्रण में शामिल होना अनिवार्य है। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तनशीलता को कम करने और ग्रिड को पर्याप्त आवृत्ति सहायता प्रदान करने के लिए हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों बीईएसएसएस और पीएसपी को बढ़ावा दिया जाता है।
  1. वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की स्थिति में ग्रिड की स्थिरता जनरेटरों से मिलने वाली पर्याप्त प्रतिक्रियाशील शक्ति पर निर्भर करती है। जनरेटरों से मिलने वाली प्रतिक्रियाशील शक्ति की आवश्यकताओं को सीईए (ग्रिड से कनेक्टिविटी के लिए तकनीकी मानक) विनियमों में शामिल किया गया है।
  • (ix) नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की परिवर्तनशीलता को दूर करने के लिए तापीय उत्पादन का लचीलापन अनिवार्य है।

नवीकरणीय ऊर्जा के परिवहन के लिए पारेषण अवसंरचना के विस्तार हेतु सरकार ने निम्नलिखित उपाय किए हैं:

  1. सरकार ने वर्ष 2024 में राष्ट्रीय विद्युत योजना (खंड-II पारेषण) प्रकाशित की है, जिसमें विद्युत की अनुमानित मांग को पूरा करने के लिए अनुमानित उत्पादन क्षमता वृद्धि के अनुरूप वर्ष 2023 से 2032 की अवधि के लिए पारेषण प्रणाली की आवश्यकताओं की रूपरेखा दी गई है।
  1. वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन उत्पादन क्षमता के एकीकरण के लिए पारेषण प्रणाली की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने मार्च 2026 में वर्ष 2035-36 तक 900 गीगावाट से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के एकीकरण के लिए एक व्यापक पारेषण योजना जारी की है।
  • (iii) नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित दस राज्यों में हरित ऊर्जा गलियारा (जीईसी) योजना लागू कर रहा है। 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के परिवहन के लिए स्वीकृत 17,686 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनों और 47,177 एमवीए सबस्टेशनों में से, जीईसी योजना के तहत कुल 9856 सीकेएम ट्रांसमिशन लाइनें और 24,300 एमवीए सबस्टेशन चालू किए जा चुके हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं से जुड़ी पारेषण योजनाओं को नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि के अनुरूप चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) के तहत 230 गीगावाट की पारेषण प्रणाली विकसित करने की परिकल्पना की गई थी। इसके लिए, आईएसटीएस के तहत लगभग 260 गीगावाट की पारेषण प्रणाली के लिए पहले ही काम किया जा चुका है, 54 गीगावाट की पारेषण प्रणाली चालू हो चुकी है, 173 गीगावाट की पारेषण क्षमता निर्माणाधीन है और 33 गीगावाट की पारेषण परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है।

सीटीयूआईएल को 500 गीगावाट से अधिक की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। हालांकि, ऐसे आवेदनों के लिए कनेक्टिविटी प्रदान करने पर लोड-जेनरेशन संतुलन, लोड केंद्रों की पहचान और संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ सीईए द्वारा किए गए संसाधन पर्याप्तता अध्ययनों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है।

सरकार बिजली आपूर्ति में अनियमितता को दूर करने और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ईएसएस) के एकीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किए गए हैं:

  1. विद्युत मंत्रालय लगभग 43.8 गीगावॉट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास में सहयोग हेतु मार्च 2024 और जून 2025 में शुरू की गई दो व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण योजनाओं का कार्यन्‍वयन कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा की अधिक मात्रा को एकीकृत करने के लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की मदद लेना है।

 

  1. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (तीसरा संशोधन) विनियम, 2025 में सोलर आवर और नॉन-सोलर आवर एक्सेस की शुरुआत की गई है, जिसके तहत सौर परियोजनाओं को सोलर आवर के अनुसार समायोजित किया गया है, जबकि पवन ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को चौबीसों घंटे उपयोग की अनुमति है। यह ढांचा पारेषण क्षमता के इष्टतम उपयोग को बढ़ावा देता है और सौर, पवन और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विभिन्न संयोजनों वाली हाइब्रिड परियोजनाओं को प्रोत्साहित करता है ताकि अधिक विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
  • (iii) वर्ष 2025-26 से वर्ष 2035-36 के दौरान 100 गीगावाट तक के पंप स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) के विकास में सहयोग हेतु पारेषण प्रणालियों की योजना बनाना।
  • (iv) हाइड्रो पीएसपी के विकास के लिए सहायक अवसंरचना (सड़कें, पारेषण लाइनें आदि) के लिए बजटीय सहायता प्रदान करना।
  1. समग्र परियोजना व्यवहार्यता में सुधार के लिए अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्क की छूट को जून 2028 तक चालू होने वाली सह-स्थित बीएसईएस परियोजनाओं और जून 2028 तक निर्माण कार्य आवंटित होने वाली पंप स्टोरेज परियोजनाओं (पीएसपी) के लिए बढ़ा दिया गया है
  • (vi) 18,100 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली उत्पादन लिंक प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना ग्रिड-स्केल स्टोरेज सहित 50 गीगावॉट एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल विनिर्माण क्षमता की स्थापना का समर्थन करती है।
  1. स्थिर और शीघ्र बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भंडारण क्षमता सहित नवीकरणीय ऊर्जा की खरीद के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

विद्युत राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने आज राज्यसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/जेके/एम


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