कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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द्वैध प्रशिक्षण प्रणाली का संवर्धन

प्रविष्टि तिथि: 30 MAR 2026 4:04PM by PIB Delhi

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के अंतर्गत प्रशिक्षण महानिदेशालय देशभर के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के नेटवर्क के माध्यम से शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) का कार्यान्वयन करता है जिसके अंतर्गत 169 एनएसक्यूएफ अनुरूप पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं जो महाराष्ट्र राज्य सहित देश के युवाओं की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। प्रशिक्षुओं के लिए ई-कंटेंट, ई-पुस्तकें, वीडियो तथा अन्य डिजिटल शिक्षण सामग्री भारत स्किल्स पोर्टल तथा कौशल भारत डिजिटल हब (सिद्ध) प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।

सीटीएस के अंतर्गत अखिल भारतीय ट्रेड परीक्षा (एआईटीटी) की सैद्धांतिक परीक्षाएँ कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) मोड में आयोजित की जाती हैं जिससे आईटीआई प्रशिक्षुओं के ज्ञान तथा दक्षताओं का वस्तुनिष्ठ आकलन सुनिश्चित हो सके। परीक्षा की संपूर्ण प्रक्रिया, जैसे समय-सारणी निर्धारण, प्रवेश-पत्र का सृजन, मूल्यांकन, परिणाम घोषणा तथा ई-अंकपत्र और ई-प्रमाण-पत्र जारी करना, सिद्ध पोर्टल के माध्यम से सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जाता है।

प्रैक्टिकल परीक्षाओं हेतु राज्य कौशल विकास और उद्यमशीलता समिति (एसएसडीईसी) तथा संबंधित राज्य/संघ राज्य क्षेत्र निदेशालयों को प्रश्न-पत्र तैयार करने और आईटीआई स्तर पर आकलन कराने का अधिकार दिया गया है। प्रैक्टिकल परीक्षाओं की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है तथा अंक ऑनलाइन अपलोड किए जाते हैं, जिससे पारदर्शिता और मानकीकरण सुनिश्चित होता है।

दोहरी प्रशिक्षण प्रणाली (डीएसटी) को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि प्रशिक्षुओं में उद्योग संबंधी अनुभव, व्यावहारिक शिक्षण तथा रोजगारपरकता में वृद्धि हो सके। इस मॉडल के अंतर्गत संस्थागत प्रशिक्षण को उद्योग संरचित ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण (ओजेटी) के साथ एकीकृत किया जाता है तथा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत सभी ट्रेड्स डीएसटी मोड में संचालित किए जा रहे हैं। उद्योग–संस्थान सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु प्रशिक्षण महानिदेशालय द्वारा निम्नलिखित पहलें की गई हैं:

  1. आईटीआई के तृतीय पाली में प्रदान की जाने वाली सभी नई संबद्धताएँ केवल डीएसटी मोड में स्वीकृत की गई हैं जिससे इस मॉडल के व्यापक प्रसार तथा उद्योग के साथ सुदृढ़ समन्वय को बढ़ावा मिल सके।
  • ii. डेटा-आधारित ग्रेडिंग प्रणाली में डीएसटी के अंतर्गत नामांकन हेतु भारांक निर्धारित किया गया है, जिससे आईटीआई को इस मॉडल के अंतर्गत अधिकाधिक प्रशिक्षुओं को नामांकित करने हेतु प्रोत्साहन मिलता है।

राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण योजना (एनएटीएस) का उद्देश्य शिक्षुता अधिनियम, 1961 तथा शिक्षुता नियम, 1992 और समय-समय पर किए गए संशोधनों के अंतर्गत भारतीय युवाओं को ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण तथा कौशल प्रदान करना है। इसका कार्यान्वयन उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा मुंबई, कानपुर, चेन्नई एवं कोलकाता स्थित क्षेत्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण बोर्डों (बीओएटी/बीओपीटी) के माध्यम से किया जाता है।

कृत्रिम मेधा (एआई) क्षेत्र में बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए, मंत्रालय द्वारा एनटीएस के अंतर्गत एआई शिक्षुता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत डेटा साइंस, मशीन लर्निंग, एप्लिकेशन डेवलपमेंट, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग आदि क्षेत्रों में स्नातक एवं डिप्लोमा धारकों को सुव्यवस्थित तरीके से ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। वित्तीय-वर्ष 2025-26 में इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 74,486 प्रशिक्षुओं ने भाग लिया।

जुलाई, 2025 में ईएसडीपी लागू करने हेतु एआईसीटीई और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शिक्षुता सन्निहित डिग्री/डिप्लोमा कार्यक्रम (एईडीपी) एक शैक्षणिक पहल है, जिसके अंतर्गत स्नातक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्र अपने डिग्री/डिप्लोमा के अभिन्न अंग के रूप में शिक्षुता प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। उच्चतर शिक्षा संस्थानों और विश्वविद्यालयों के साथ 300 से अधिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं तथा 14,000 से अधिक छात्र वर्तमान में इस कार्यक्रम में नामांकित हैं।

राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) का उद्देश्य देशभर में शिक्षुता प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है। यह योजना अगस्त, 2016 में प्रारंभ की गई थी तथा वर्तमान में इसके द्वितीय चरण (एनएपीएस-2) का कार्यान्वयन किया जा रहा है। एनएओपीएस-2 के अंतर्गत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वजीफा का अधिकतम 25 प्रतिशत, प्रति प्रशिक्षु प्रति माह ₹1,500 की सीमा तक, आंशिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जो प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे प्रशिक्षुओं के खातों में अंतरित की जाती है।

शिक्षुता अधिनियम, 1961 और संबंधित नियमों के अनुसार, एमएसएमई सहित सभी प्रतिष्ठानों को शिक्षुओं के नियोजन हेतु विभिन्न प्रशासनिक कार्य करने होते हैं, जैसे—

(i) शिक्षुता पोर्टल पर पंजीकरण,
(ii)
उपयुक्त शिक्षुता पाठ्यक्रमों का चयन,
(iii)
अभ्यर्थियों का संघटन तथा चयन,
(iv)
पोर्टल के माध्यम से शिक्षुता अनुबंध जारी करना,
(v)
मूलभूत और ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण प्रदान करना,
(vi)
वजीफा भुगतान की प्रक्रिया,
(vii)
उपस्थिति तथा आकलन विवरण अपलोड करना, तथा
(viii) वैकल्पिक ट्रेडों के लिए पाठ्यक्रम अपलोड करना (जहाँ लागू हो)।

उपर्युक्त प्रशासनिक बिझ को कम करने हेतु मंत्रालय द्वारा तृतीय पक्ष एग्रीगेटर्स (टीपीए) को सूचीबद्ध किया गया है जिनकी सेवाओं का उपयोग कर प्रतिष्ठान, जिसमें एमएसएमई भी शामिल हैं, शिक्षुता प्रशिक्षण के सुचारु कार्यान्वयन को सुनिश्चित कर सकते हैं।

यह जानकारी आज लोक सभा में कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार), श्री जयन्‍त चौधरी द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।

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पीके/केसी/डीवी


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