कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
कुशल श्रम बल
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 4:03PM by PIB Delhi
भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) के तहत, कौशल विकास केंद्रों/संस्थानों आदि के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के जरिए राजस्थान राज्य सहित देश भर के समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशल उन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। सिम का उद्देश्य भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना और उन्हें उद्योग-प्रासंगिक कौशल से सुसज्जित करना है।
अधिसूचना संख्या जीएसआर 936 (ई) दिनांक 30 दिसंबर, 2025 के माध्यम से प्रकाशित,वेतन संहिता (केंद्रीय) नियम, 2025 के अध्याय 1, पैरा 2(पी) के अनुसार, “कुशल व्यवसाय” से तात्पर्य ऐसे व्यवसाय से है जिसमें एक तकनीकी या व्यावसायिक संस्थान में कार्य अनुभव या शिक्षु के रूप में प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल और दक्षता प्राप्त करना शामिल है।
इसके अलावा, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (एनएसएस) द्वारा आयोजित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) वर्ष 2023-24 के नवीनतम आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, 15-59 वर्ष की आयु के 4.1 प्रतिशत व्यक्तियों ने औपचारिक व्यावसायिक/तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जबकि अन्य 30.6 प्रतिशत ने अनौपचारिक स्रोतों के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा दिनांक 31.07.2008 को स्थापित राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी), कंपनी अधिनियम, 1956 (कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के अनुरूप) के प्रावधानों के तहत संचालित एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी है। इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के माध्यम से एक अद्वितीय मॉडल के रूप में परिकल्पित किया गया था और वर्तमान में यह एमएसडीई के तत्वावधान में है। एनएसडीसी निजी क्षेत्र के साथ मिलकर उद्योग अनुरूप कौशल विकास इकोसिस्टम को बढ़ावा देने का काम करता है और आवश्यकतानुसार, भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं में कार्यान्वयन शाखा के रूप में भी कार्य करता है ताकि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कुशल कार्यबल तैयार करने के सरकार के जनादेश और दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया जा सके।
वेतन और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए सरकार की कुछ अतिरिक्त पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण की समग्र गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाने के लिए, प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लोयबिलिटी ट्रांसफॉरमेशन थ्रू अपग्रेडिड आईटीआई (पीएम सेतु) योजना का उद्देश्य हब और स्पोक मॉडल में 1,000 सरकारी आईटीआई (200 हब आईटीआई और 800 स्पोक आईटीआई) का उन्नयन करना है। इस उन्नयन में स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल सामग्री और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शामिल हैं। इसके अलावा, इसका उद्देश्य भुवनेश्वर, चेन्नई, हैदराबाद, कानपुर और लुधियाना में स्थित पांच राष्ट्रीय आईटीआई की क्षमता बढ़ाना है, जिसमें कौशलीकरण के लिए क्षेत्र-विशिष्ट राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करना भी शामिल है, जहां वैश्विक साझेदारी के साथ प्रशिक्षकों के उन्नत प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- ii. कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) अपने स्वायत्त संस्थानों, जैसे राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (निस्बड),नोएडा और भारतीय उद्यमिता संस्थान (आईआईई), गुवाहाटी के माध्यम से उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) और उद्यमिता कौशल विकास कार्यक्रम (ईएसडीपी) संचालित करता है, ताकि उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा सके। इसके अलावा, एमएसडीई ने नीति आयोग के महिला उद्यमिता मंच के सहयोग से फरवरी 2025 में उत्तर पूर्व राज्यों असम, मेघालय, मिजोरम और उत्तर प्रदेश एवं तेलंगाना में स्वावलंबिनी - एक महिला उद्यमिता कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उद्यमिता जागरूकता प्रशिक्षण (ईएपी) और उद्यमिता विकास कार्यक्रम (ईडीपी) के माध्यम से छात्राओं में उद्यमशीलता की मानसिकता विकसित करना है।
- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) देश भर में सूक्ष्म एवं लघु उद्यम - क्लस्टर विकास कार्यक्रम (एमएसई-सीडीपी) लागू कर रहा है। यह मांग आधारित और केंद्रीय क्षेत्रक योजना है। इस योजना के तहत राज्यसंघ राज्यक्षेत्र सरकारों से उनके राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में मौजूदा क्लस्टरों की साझा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रस्ताव प्राप्त किए जाते हैं। एमएसई-सीडीपी योजना के तहत, वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित चावल मिल क्लस्टर में साझा सुविधा केंद्र (सीएफसी) स्थापित करने के प्रस्ताव को कुल 15.00 करोड़ रुपये की परियोजना लागत परअनुमोदन दिया गया, जिसमें भारत सरकार का 12.0 करोड़ रुपये का अनुदान शामिल है।
- iv. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित कृषि-व्यापार इनक्यूबेशन केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की अगली पीढ़ी की इनक्यूबेशन योजना, नीति आयोग के अटल इनक्यूबेशन केंद्र, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के जैव प्रौद्योगिकी इनक्यूबेशन केंद्र, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की सूक्ष्म खाद्य उद्यमों की प्रधानमंत्री फोर्मूलेशन आदि जैसी विभिन्न पहलों/योजनाओं के माध्यम से स्टार्टअप/नए उद्यमों को सहायता प्रदान की जा रही है।
- इसके अतिरिक्त, सरकार प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई), दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (डीएवाई-एनयूएलएम), प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना आदि जैसी रोजगार सृजन योजनाओं/कार्यक्रमों को भी लागू कर रही है।
यह जानकारी आज लोक सभा में कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), श्री जयन्त चौधरी द्वारा एक लिखित उत्तर में दी गई।
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(रिलीज़ आईडी: 2246957)
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