वित्त मंत्रालय
सरकार और आरबीआई के उपायों से ग्रामीण निर्बाध ऋण प्रवाह सुनिश्चित हुआ
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में निरंतर वृद्धि से कृषि, एमएसएमई और स्वयं सहायता समूहों को समर्थन मिला
प्रविष्टि तिथि:
30 MAR 2026 3:34PM by PIB Delhi
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त तरलता बनाए रखने का प्रयास करता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र सहित अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और बाजार दरों तक इसका लाभ मजबूती से पहुंच सके।
सरकार ने स्वयं सहायता समूहों सहित ग्रामीण विकास पहलों के लिए निर्बाध ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने हेतु विभिन्न कदम उठाए हैं, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बैंकों को जारी किए गए प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) दिशानिर्देश और सरकार द्वारा बैंकों के लिए निर्धारित जमीनी स्तर संबंधी कृषि ऋण (जीएलसी) लक्ष्य किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के दायरे को बढ़ाने तथा किसानों को संस्थागत ऋण सुदृढ़ करने के प्रमुख नीतिगत साधनों के रूप में कार्य करते हैं।
- आरबीआई द्वारा जारी पीएसएल दिशानिर्देशों के अनुसार वाणिज्य बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक तथा वे प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक (यूसीबी), जो वेतनभोगी बैंकों की श्रेणी में नहीं आते, उन्हें अपने समायोजित शुद्ध बैंक ऋण या ऑफ-बैलेंस शीट जोखिमों के ऋण समतुल्य, जो भी अधिक हो, का कम से कम 18 प्रतिशत कृषि क्षेत्र को आवंटित करना अनिवार्य है। इसमें से 10 प्रतिशत का उप-लक्ष्य लघु एवं सीमांत किसानों (एसएमएफ) के लिए निर्धारित है। साथ ही, प्राथमिकता क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम ऋण प्रवाह वाले जिलों (जिनमें कृषि एवं लघु/सीमांत किसानों को ऋण भी शामिल हैं) के लिए प्रोत्साहन ढांचा तथा अपेक्षाकृत ऋण प्रवाह जिलों के लिए निरूत्साहन ढांचा भी निर्धारित किया गया है, ताकि कृषि क्षेत्र में ऋण का अधिक संतुलित वितरण सुनिश्चित हो सके।
- भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 1 जनवरी, 2025 से संबद्ध गतिविधियों सहित संपार्श्विक मुक्त अल्पकालिक कृषि ऋण की सीमा 1.60 लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये प्रति उधारकर्ता कर दी गई है।
- पीएसएल की कमी से निर्मित विभिन्न निधियों जैसे अल्पकालिक सहकारी ग्रामीण ऋण निधि (एसटीसीआरसीएफ), अल्पकालिक आरआरबी क्रेडिट पुनर्वित्त निधि (एसटीआरआरबीएफ) और दीर्घकालिक ग्रामीण ऋण निधि (एलटीआरसीएफ) के माध्यम से पात्र ग्रामीण वित्तीय संस्थानों (आरएफआई) को रियायती पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है।
- नाबार्ड (एनएबीएआरडी) स्वयं सहायता समूहों की सहायता के लिए निम्नलिखित योजनाओं/कार्यक्रमों को लागू करता है :
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म/ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स/सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण सहायता।
"एम-सुविधा" के माध्यम से महिला नेतृत्व वाले सूक्ष्म उद्यमों के लिए कौशल उन्नयन।
नाबार्ड के वित्तीय समावेशन कोष (एफआईएफ) के माध्यम से सूक्ष्मवित्त ग्राहकों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए सहायता।
o जनजातीय विकास कार्यक्रम जिसके तहत एसएचजी गठन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता शिविर, सूक्ष्म उद्यम विकास पर प्रशिक्षण आदि गतिविधियों को सहायता दी जाती है।
केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने यह जानकारी आज लोकसभा में दी।
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पीके/केसी/आईएम/जीआरएस
(रिलीज़ आईडी: 2246945)
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