संस्‍कृति मंत्रालय
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एशियाटिक सोसायटी में अवसंरचना और संरचनात्मक गिरावट

प्रविष्टि तिथि: 30 MAR 2026 1:09PM by PIB Delhi

एशियाटिक सोसायटी की धरोहर भवन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में है। इसकी मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक कदम भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण के माध्यम से उठाए जाते हैं। सोसायटी के संग्रहालय में, जहां पांडुलिपियां, दुर्लभ पुस्तकें और कलाकृतियां रखी हैं, तापमान और आर्द्रता नियंत्रण की उचित व्यवस्था है।

एशियाटिक सोसायटी, कोलकाता अपने संग्रह में मौजूद दुर्लभ पांडुलिपियों और कलाकृतियों की स्थिति की नियमित रूप से जांच करती है। यह जांच कैटलॉगर और अन्य अधिकारियों द्वारा क्यूरेटर के समग्र पर्यवेक्षण में नियमित अंतराल पर की जाती है। सोसायटी का अपना संरक्षण एवं बाइंडिंग अनुभाग है जो संरक्षण और बाइंडिंग का कार्य करता है। वर्ष 2022 में पांडुलिपि संरक्षण केंद्र की स्थापना के बाद से, सोसायटी द्वारा 35,624 पृष्ठों की पांडुलिपियों का निवारक संरक्षण और 4596 पृष्ठों की दुर्लभ पांडुलिपियों का उपचारात्मक संरक्षण किया जा चुका है। कैटलॉगिंग संग्रहालय एवं अभिलेखागार अनुभाग का नियमित कार्य है।

पुस्तकालयाध्यक्षों, अभिलेखपालों, संरक्षकों और शोध कर्मचारियों की श्रेणीवार स्वीकृत संख्या, कार्यरत संख्या और रिक्तियों का विवरण, साथ ही संविदा आधार पर कार्यरत कर्मियों की संख्या निम्नलिखित है:

क्र. सं.

पद

स्वीकृत संख्या

कार्य क्षमता

रिक्तियां

1

पुस्तकालयाध्यक्ष

1

1

0

2

सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष

4

1

3

3

क्यूरेटर

1

1

0

4

वरिष्ठ सूचीकार

2

0

2

5

सूचीकार

4

2

2

6

संरक्षण अधिकारी

1

0

1

7

संरक्षण सहायक

7

0

7

8

अनुसंधान अधिकारी

1

0

1

दो संरक्षण सहायक अस्थायी आधार पर काम कर रहे हैं।

सोसायटी ने 5,72,890 पृष्ठों वाली 11,528 पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया है। इसके अलावा, मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन के तहत संस्था को पांडुलिपि स्कैनिंग कार्य के लिए क्लस्टर केंद्र के रूप में नामित किया गया है। 23 मार्च, 2026 तक, इस पहल के तहत कुल 1,46,099 पृष्ठों वाली 2033 पांडुलिपियों को स्कैन किया जा चुका है।

इस मंत्रालय द्वारा एशियाटिक सोसायटी को प्रदान की जाने वाली अनुदान सहायता व्यापक रूप से इसके मूल कार्यों का समर्थन करती है, और इसके संग्रह के पैमाने और संरक्षण आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर आवश्यकताओं की समीक्षा की जाती है।

यह सोसायटी शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन करती है, जिनमें सेमिनार, व्याख्यान, कार्यशालाएं, प्रदर्शनियां, प्रकाशन और फेलोशिप कार्यक्रम शामिल हैं, ताकि शैक्षणिक उत्पादन को सुदृढ़ किया जा सके और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग का विस्तार किया जा सके। संस्था द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों का विवरण निम्नलिखित है:

वित्तीय वर्ष

अनुसंधान परियोजनाओं की संख्या

शोधार्थियों की संख्या

शैक्षणिक गतिविधियों की संख्या

2020-21

39

20

42

2021-22

28

13

42

2022-23

21

09

47

2023-24

21

14

54

2024-25

18

12

28

सोसायटी ने आपदा से निपटने के लिए बुनियादी उपाय किए हैं, जिनमें अग्नि सुरक्षा प्रणाली और मानक संचालन प्रक्रियाएं शामिल हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), पश्चिम बंगाल सरकार के अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग और स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ घनिष्ठ संपर्क बनाए रखा जाता है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एचएन/एचबी


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