कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
औसत कृषि योग्य जोतने वाली भूमि में गिरावट के बावजूद खाद्य और बागवानी उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि
प्रविष्टि तिथि:
27 MAR 2026 5:57PM by PIB Delhi
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित कृषि जनगणना 2015-16 के अनुसार कृषि योग्य जोत का औसत आकार 1.08 हेक्टेयर है, जबकि 2010-11 में यह 1.15 हेक्टेयर था। हालांकि, अखिल भारतीय स्तर पर कुल खाद्यान्न उत्पादन 2013-14 में 265.0 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 357.7 मिलियन टन हो गया। इसी प्रकार अखिल भारतीय स्तर पर कुल बागवानी फसलों का उत्पादन 2013-14 में 277.4 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 369.1 मिलियन टन हो गया (तीसरा अग्रिम अनुमान)।
भूमि की उत्पादकता को सुनिश्चित करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, फसल पैदावार बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए कई उपक्रम लागू किए हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) और फसल विविधीकरण कार्यक्रम के तहत राज्यों को क्षेत्र-विशिष्ट उच्च मूल्य वाली फसलों, दालों, तिलहन और बागवानी फसलों को अपनाने के लिए सहायता प्रदान की जाती है। मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता (एसएचएंडएफ), बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन (एमआईडीएच), खाद्य तेलों के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमईओ)-पाम तेल, खाद्य तेलों के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमईओ)-तिलहन, दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए मिशन, जैविक और बेहतर खेती के लिए परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई), वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (आरएडी) जैसी योजनाएं किसानों को जलवायु-अनुकूल, उच्च मूल्य वाली और विविध फसलों को अपनाने के लिए और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए चलाई जा रही हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) भूमि की उत्पादकता और उपज बढ़ाने के लिए विशिष्ट स्थानों के अनुरूप किस्में विकसित करने हेतु अनुसंधान कार्यक्रम संचालित करती है और इसने कृषि क्षेत्र बढ़ाने के लिए कई तकनीकी उपाय शुरू किए हैं। इसमें वर्षा जल के बहाव के कारण होने वाले मृदा क्षरण को रोकने के लिए स्थान-विशिष्ट जैव-इंजीनियरिंग, रेत के टीलों का स्थिरीकरण और पवन क्षरण को रोकने के लिए आश्रय पट्टी प्रौद्योगिकी और देश में समस्याग्रस्त मिट्टी के लिए सुधार प्रौद्योगिकी शामिल है। आईसीएआर ने जिप्सम प्रौद्योगिकी पैकेज भी विकसित किया है, जिसमें भूमि समतलीकरण, बांध बनाना, जल निकासी, अतिरिक्त पानी की निकासी, अच्छी गुणवत्ता वाला सिंचाई जल, त्रुटियों को दूर करने, फसलों का चयन और कुशल पोषक तत्व प्रबंधन शामिल हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए आईसीएआर ने 2014-2024 के दौरान 2,900 फसल किस्मों को जारी किया है, जिनमें से 2,661 किस्में एक या एक से अधिक जैविक और/या अजैविक दबाव के प्रति सहनशील हैं।
भारत सरकार 2020 से 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के गठन और प्रोत्साहन के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना चला कर रही है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों सहित किसानों को सामूहिक रूप से संगठित करना और उन्हें अपनी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाने, अर्थव्यवस्थाओं का लाभ उठाने, उत्पादन लागत को कम करने और अपने कृषि उत्पादों के एकत्रीकरण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में सक्षम बनाना है।
इस योजना के तहत प्रत्येक एफपीओ को तीन साल की अवधि के लिए 18.00 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त, संस्थागत ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रति किसान सदस्य को 2,000 रुपये तक का समतुल्य अनुदान दिया जाता है, जिसकी सीमा प्रति एफपीओ 15.00 लाख रुपये तक है और प्रति एफपीओ परियोजना ऋण के लिए 2 करोड़ रुपये तक की ऋण गारंटी सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा प्रत्येक एफपीओ को पांच साल की अवधि के लिए सहायता प्रदान करने के लिए क्लस्टर आधारित व्यापार संगठनों (सीबीबीओ) को 25 लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं। वर्तमान में इस योजना के तहत 10,000 एफपीओ पंजीकृत किए गए हैं। इन उपक्रमों के जरिए लाखों छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक खेती, आवश्यक कच्चे माल की खरीद, मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार पहुंच को सक्षम बनाकर घटती भूमि की सीमाओं को दूर करने के लिए सशक्त बनाया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2246367)
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