वस्‍त्र मंत्रालय
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एनएचडीपी के अंतर्गत कारीगरों एवं बुनकरों को सहायता

प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 2:55PM by PIB Delhi

वस्त्र मंत्रालय ने भारतीय वस्त्र निर्यात के लिए उच्च संभावनाशील वैश्विक गंतव्यों की पहचान करने के उद्देश्य से एक व्यापक एवं लक्षित देश-बाजार विविधीकरण रणनीति तैयार की है। इस रणनीति के अंतर्गत निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी), उद्योग प्रतिनिधिमंडलों तथा विदेश स्थित भारतीय मिशनों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से चिन्हित बाजारों में संरचित एवं लक्षित पहुँच सुनिश्चित करने का प्रावधान है, जिससे बाजार संकेंद्रण के जोखिम को कम किया जा सके तथा भारतीय वस्त्र उद्योग के लिए अधिक सुदृढ़, विविधीकृत एवं स्‍थायी वैश्विक उपस्थिति स्थापित की जा सके।

इस पहल के अंतर्गत, मंत्रालय के नोडल अधिकारियों को लक्षित देशों के लिए नियुक्त किया गया है, जिन्हें विभिन्न भौगोलिक समूहों में वर्गीकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के नोडल अधिकारियों को भी इस पहल से जोड़ा गया है, जिससे डिजाइन, उत्पाद अनुकूलन तथा बाजार-उन्मुख समर्थन प्रदान किया जा सके। मंत्रालय लक्षित देशों में भारतीय दूतावासों/मिशनों के साथ सक्रिय समन्वय कर रहा है, जिससे वस्त्र निर्यात के समर्थन में कूटनीतिक संवाद एवं व्यापार सुगमता प्रयासों को सुदृढ़ किया जा सके।

इस रणनीति के अंतर्गत, मंत्रालय ने चालू वर्ष के दौरान निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) तथा विदेश स्थित भारतीय मिशनों के समन्वय से भारतीय वस्त्र उत्पादों के प्रचार-प्रसार हेतु कई चिन्हित देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजे हैं। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत की पहुंच को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) के मार्केट एक्सेस सपोर्ट (एमएएस) घटक के अंतर्गत विदेशों में, जिनमें चिन्हित देश भी शामिल हैं, क्रेता-विक्रेता बैठकें (बीएसएम), व्यापार मेले, प्रदर्शनियाँ तथा अन्य संबंधित बाजार पहुंच पहलों के लिए संरचित सहायता प्रदान की जाती है।

इसके अतिरिक्त, भारत ने 16 मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए हैं, और चिन्हित फोकस देशों में से कई पहले से ही इन समझौतों के अंतर्गत आते हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, यूएई, जापान, कोरिया गणराज्य, श्रीलंका, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, स्विट्ज़रलैंड तथा यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। इसके अलावा, फोकस पहल के अंतर्गत आने वाले कई देश यूरोपीय संघ के सदस्य हैं, जिसके साथ भारत ने हाल ही में मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ताएं संपन्न की हैं।

वस्त्र मंत्रालय के तत्त्वावधान में विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) का कार्यालय देश भर में हस्तशिल्प क्षेत्र के समग्र विकास एवं संवर्धन के लिए दो योजनाएँ, अर्थात् राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) तथा समग्र हस्तशिल्प क्लस्टर विकास योजना (सीएचसीडीएस), का क्रियान्वयन करता है। राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के मार्केटिंग सपोर्ट एंड सर्विसेज (एमएसएस) घटक के अंतर्गत भारत एवं विदेशों में अंतर्राष्ट्रीय विपणन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके तथा वैश्विक ब्रांडिंग को सुदृढ़ किया जा सके। पात्र संगठनों को अंतर्राष्ट्रीय मेलों के आयोजन एवं उनमें भागीदारी, अंतर्राष्ट्रीय क्राफ्ट एक्सपोज़र कार्यक्रमों का संचालन, क्रेता-विक्रेता बैठकें एवं रिवर्स क्रेता-विक्रेता बैठकें, वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर मेले/प्रदर्शनियाँ/कार्यक्रम, रोड शो तथा भारतीय हस्तशिल्प के संवर्धन हेतु विदेशों में जागरूकता अभियानों के क्रियान्वयन के लिए सहायता प्रदान की जाती है।

इसके अतिरिक्त, पुरस्कार प्राप्त कारीगरों तथा हस्तशिल्प निर्यातकों को इन अंतर्राष्ट्रीय विपणन कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु नामांकित किया जाता है, जिससे उन्हें वैश्विक बाजारों तक प्रत्यक्ष पहुंच प्राप्त होती है, वे अपनी शिल्पकला का प्रदर्शन कर सकते हैं तथा अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के साथ संपर्क स्थापित कर सकते हैं। राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम (एनएचडीपी) के मार्केटिंग सपोर्ट एंड सर्विसेज (एमएसएस) घटक के अंतर्गत वित्तीय सहायता में भारत में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने वाले कारीगरों के लिए जगह का किराया, अवसंरचना सुविधाएं, कार्यक्रमों का प्रचार-प्रसार, यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता (टीए/डीए) तथा माल ढुलाई शुल्क का प्रावधान किया गया है। अंतर्राष्ट्रीय विपणन कार्यक्रमों में भाग लेने हेतु नामांकित कारीगरों को रहने तथा खाने का खर्च भी प्रदान किया जाता है।

वस्त्र मंत्रालय देश भर में हथकरघा बुनकरों को विशेष सहायता प्रदान करने हेतु राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम का संचालन कर रहा है। इस योजना के अंतर्गत पात्र हथकरघा एजेंसियों/कार्यकर्ताओं को उन्नत करघों एवं सहायक उपकरणों की खरीद, सौर प्रकाश इकाइयों की स्थापना, कार्यशाला (वर्कशेड) के निर्माण, उत्पाद विविधीकरण एवं डिजाइन नवाचार, तकनीकी एवं सामान्य अवसंरचना, ‘इंडिया हैंडलूम ब्रांड’ (आईएचबी), ‘हैंडलूम मार्क’ (एचएलएम) तथा जीआई टैग के माध्यम से प्रचार-प्रसार एवं ब्रांड विकास, ई-कॉमर्स सुविधाएं, घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में हथकरघा उत्पादों के विपणन, बुनकरों के लिए मुद्रा योजना के अंतर्गत रियायती ऋण तथा सामाजिक सुरक्षा आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

वर्तमान कपास सीज़न 2025–26 के दौरान, घरेलू वस्त्र उद्योग के लिए कपास की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार ने वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना सं. 35/2025-कस्टम्स दिनांक 18.08.2025 तथा अधिसूचना सं. 36/2025-कस्टम्स दिनांक 28.08.2025 के माध्यम से टैरिफ हैडिंग 5201 के अंतर्गत कपास के आयात पर सीमा शुल्क को 19.08.2025 से 31.12.2025 तक के लिए छूट प्रदान की थी, जिससे गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। 31.12.2025 के पश्चात आयात शुल्क (जिसमें 5% सीमा शुल्क, 5% एआईडीसी तथा 10% उपकर शामिल है) पुनः लागू हो गया है। इसके अतिरिक्त, पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं इनपुट लागत को कम करने के उद्देश्य से वस्त्र मंत्रालय द्वारा कच्चा माल आपूर्ति योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के द्वार तक सूत के परिवहन के लिए परिवहन सब्सिडी तथा कॉटन हैंक सूत आदि पर 15% मूल्य सब्सिडी प्रदान की जाती है।

यह जानकारी वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह द्वारा 20 मार्च 2026 को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में प्रदान की गई।

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पीके/केसी/पीके

(राज्‍य सभा अतारांकित प्रश्‍न 3356)


(रिलीज़ आईडी: 2246101) आगंतुक पटल : 56
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