स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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लक्ष्‍य योजना संबधी अपडेट


सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में लक्ष्‍य योजना के तहत कुल 1244 प्रसव कक्ष और 917 प्रसूति ऑपरेशन कक्ष प्रमाणित  

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में लक्ष्‍य योजना के तहत कुल 151 प्रसव कक्ष और 107 प्रसूति ऑपरेशन कक्ष का पुनः प्रमाणीकरण किया गया  

लक्ष्‍य प्रमाणन की कठोर तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया, 70 मानकों के तहत 200 से अधिक मापन योग्य अवयव शामिल

कार्यात्मक ऑपरेशन थिएटर, निर्बाध जल और बिजली आपूर्ति, महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण और मानव संसाधन सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सत्यापन के लिए प्रत्येक लक्ष्‍य प्रमाणित सुविधा का गुणवत्‍ता आकलन स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा

लक्ष्‍य सहित योजनाओं के कार्यान्वयन निगरानी के लिए नियमित सहायक पर्यवेक्षी दौरों  की प्रणाली लागू

प्रविष्टि तिथि: 27 MAR 2026 2:14PM by PIB Delhi

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि फरवरी 2026 तक, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में कुल 1244 प्रसव कक्ष (लेबर रूम) और 917 प्रसूति ऑपरेशन कक्ष  (मैटरनिटी ऑपरेशन थिएटर) लक्ष्य योजना के तहत प्रमाणित हैं लक्ष्य योजना स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई प्रसव कक्ष गुणवत्ता सुधार पहल है। इसका उद्देश्य अस्पतालों और प्रसूति केंद्रों में प्रसव के दौरान और तुरंत बाद देखभाल बेहतर बनाकर प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थिएटर में सम्मानजनक मातृत्व देखभाल सुनिश्चित करना है। लक्ष्य प्रमाणित सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण अनुलग्नक में प्रस्‍तुत है।

फरवरी 2026 तक, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में कुल 151 प्रसव कक्ष और 107 प्रसूति ऑपरेशन कक्ष  को लक्ष्य योजना के तहत पुन: प्रमाणित किया गया है।

लक्ष्य प्रमाणन के लिए कठोर तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिसमें 70 मानकों के अंतर्गत 200 से अधिक मापन योग्य अवयव शामिल हैं। इन मानकों को आठ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है: जिनमें सेवा प्रावधान, रोगी अधिकार, आगत, सहायक सेवाएं, नैदानिक ​​देखभाल, संक्रमण नियंत्रण, गुणवत्ता प्रबंधन और परिणाम शामिल हैं। लक्ष्य प्रमाणन प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य सुविधा को लेबर रूम और प्रसूति ऑपरेशन कक्ष  दोनों में कम से कम 70 प्रतिशत के समग्र प्रावधान मानदंड का कड़ाई से पालन करना होगा। प्रसव के दौरान देखभाल के तीन मुख्य मानकों, ग्राहक संतुष्टि तथा निजता, गोपनीयता  और गरिमा के तीन प्रमुख कारकों में न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त करने होंगे। लक्ष्‍य प्रमाणन के लिए प्रसूति केंद्र को  प्रत्येक संबंधित क्षेत्र के गुणवत्ता मानक में 50 प्रतिशत से अधिक का अंक प्राप्‍त करना भी आवश्यक है।

लक्ष्य द्वारा प्रमाणित प्रत्येक सुविधा केंद्र की गुणवत्‍ता का आकलन स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा किया जाता है ताकि कार्यात्मक ऑपरेशन थिएटर, निर्बाध जल और विद्युत आपूर्ति, आवश्‍यक चिकित्सा उपकरण और मानव संसाधन सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे की उपलब्धता सत्‍यापित  की जा सके। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और प्रशासनिक कार्यों, कर्मचारियों की नियुक्ति, भर्ती और मानव संसाधनों की तैनाती प्रबंधन संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के अधिकार क्षेत्र में आता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा इन प्रयासों में मदद करता है और भारतीय जन स्वास्थ्य मानक (आईपीएचएस 2022) के अनुरूप बुनियादी ढांचे और मानव संसाधनों में सुधार कर सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद करता है।

लक्ष्य सहित अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य योजना कार्यान्वयन की निगरानी के लिए नियमित रूप से सहायक पर्यवेक्षी दौरे की प्रणाली लागू है। बुनियादी ढांचे, कार्यबल, सेवा वितरण और कार्यक्रम कार्यान्वयन के आकलन के लिए समय-समय पर क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें, विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के क्षेत्र में दौरे और सामान्य समीक्षा मिशन आयोजित किए जाते हैं।

लक्ष्य पहल के तहत, यह सुनिश्चित करने की बहुआयामी नीति अपनाई गई है कि प्रसव कक्षों और प्रसूति ऑपरेशन थिएटरों में किसी भी कमी को अतिशीघ्र दूर की जाए, जिससे माताओं और नवजात शिशुओं को प्रदान की जाने वाली देखभाल गुणवत्ता में वास्तविक और स्थायी सुधार हो सके।

अनुलग्नक

फरवरी 2026 तक लाक्ष्या द्वारा प्रमाणित सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण।

क्रमांक

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

प्रसव कक्ष

प्रस‍ूति ऑपरेशन कक्ष

1

आंध्र प्रदेश

51

40

2

अरुणाचल प्रदेश

4

3

3

असम

38

20

4

बिहार

37

23

5

चंडीगढ़

5

5

6

छत्तीसगढ

29

26

7

दिल्ली

12

10

8

दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव 

5

3

9

गोवा

6

5

10

गुजरात

76

65

11

हरियाणा

23

17

12

हिमाचल प्रदेश

8

7

13

जम्मू-कश्मीर

13

12

14

झारखंड

12

9

15

कर्नाटक

130

124

16

केरल

16

15

17

मध्य प्रदेश

198

60

18

महाराष्ट्र

85

83

19

मणिपुर

4

3

20

मेघालय

6

5

21

मिजोरम

7

7

22

ओडिशा

30

26

23

पुद्दुचेरी

3

3

24

पंजाब

16

13

25

राजस्थान

94

50

26

सिक्किम

1

1

27

तमिलनाडु

130

125

28

तेलंगाना

49

39

29

त्रिपुरा

6

4

30

उत्‍तर प्रदेश

89

60

31

उत्तराखंड

16

10

32

पश्चिम बंगाल

45

44

 

कुल योग

1244

917

स्रोत: एनएचएसआरसी रिपोर्ट


पीके/केसी/एकेवी/एसके


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