आयुष
केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की
आयुष मंत्रालय की परामर्श समिति की बैठक में आयुष पद्धतियों की वैश्विक विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया गया
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 11:00PM by PIB Delhi
आज नई दिल्ली में आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव की अध्यक्षता में आयुष मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की तीसरी बैठक आयोजित की गई। बैठक में 'आयुष में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान' पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण और वैश्विक मान्यता को मजबूत करने के लिए मंत्रालय के निरंतर प्रयासों पर प्रकाश डाला गया।

लोकसभा और राज्यसभा के संसद सदस्यों ने बैठक में सक्रिय रूप से भाग लिया। संसदीय परामर्श समिति के सदस्यों में श्री शत्रुघ्न सिन्हा, श्री निलेश लंके, श्रीमती धर्मशिला गुप्ता, श्रीमती रेणुका चौधरी, स्वामी साक्षीजी महाराज, श्री घनश्याम तिवारी, श्री लवु श्रीकृष्ण देवरायलु, श्री बाबूभाई जेसंगभाई देसाई और श्री सदानंद म्हालू शेट तनावडे ने बैठक में भाग लिया।
सदस्यों का स्वागत करते हुए मंत्री जी ने उनकी निरंतर भागीदारी के लिए आभार व्यक्त किया और औषधीय पौधों पर पिछली बैठक में उनकी बहुमूल्य भागीदारी को याद किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयुष क्षेत्र एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। इसमें भारत के समृद्ध पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों के साथ जोड़ा जा रहा है।

श्री जाधव ने कहा कि साक्ष्य आधारित अनुसंधान पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मान्यता से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण सेतु है। उन्होंने कहा कि बजट आवंटन में वृद्धि से मंत्रालय को एक मजबूत अनुसंधान और विकास प्रणाली बनाने में मदद मिली है। पांच स्वायत्त अनुसंधान परिषदें इस प्रयास की रीढ़ हैं, जबकि आयुष विभाग के तहत उत्कृष्टता केंद्र अग्रणी संस्थानों के सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले नैदानिक अनुसंधान कर रहे हैं।
मंत्री ने समिति को सूचित किया कि टाटा मेमोरियल सेंटर, सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर जैसे प्रमुख संस्थान कैंसर देखभाल, जीनोमिक्स और सटीक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए आयुष संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान के साथ सहयोग से उच्च गुणवत्ता वाले एकीकृत स्वास्थ्य सेवा अनुसंधान को बढ़ावा मिल रहा है, जिसमें समर्पित आयुष विभागों की स्थापना भी शामिल है।

मंत्री ने आयुष संजीवनी ऐप की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसने कोविड-19 के दौरान 1.35 करोड़ से अधिक लोगों से वास्तविक डेटा जुटाया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित इन आंकड़ों से आयुष आधारित निवारक और चिकित्सीय उपायों की प्रभावशीलता का पता चलता है। उन्होंने यह भी बताया कि 150 से अधिक अध्ययन किए गए, जिनमें बिना लक्षण वाले और हल्के मामलों के प्रबंधन के लिए आयुष-64 का पुन: उपयोग करना भी शामिल है।
“एक राष्ट्र, एक स्वास्थ्य” की परिकल्पना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताते हुए मंत्री ने एम्स संस्थानों में एकीकृत स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए उन्नत केंद्र स्थापित करने हेतु भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के साथ सहयोग पर जोर दिया। वैश्विक प्रतिस्पर्धा और वैज्ञानिक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए मानकीकृत अनुसंधान दिशानिर्देश और नीतिपरक तंत्र विकसित किए जा रहे हैं।
मंत्री ने आयुष द्वारा समर्थित प्रमुख राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें किशोरों में एनीमिया का समाधान करना और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से तपेदिक पर अग्रणी नैदानिक अध्ययन करना शामिल है।
डिजिटल क्षेत्र को लेकर श्री जाधव ने इस बात पर जोर दिया कि आयुष ग्रिड और आयुष रिसर्च पोर्टल जैसे प्लैटफॉर्मों ने शोध प्रलेखन में क्रांति ला दी है और अब 43,000 से अधिक अध्ययन उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नमस्ते पोर्टल ने वैश्विक डब्ल्यूएचओ वर्गीकरण के अनुरूप आयुष पद्धतियों को सफलतापूर्वक मानकीकृत किया है।
उन्होंने डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना के साथ पारंपरिक चिकित्सा में भारत के नेतृत्व पर और जोर देते हुए कहा कि भारत न केवल एक भागीदार है बल्कि पारंपरिक और एकीकृत स्वास्थ्य देखभाल के भविष्य को आकार देने में एक वैश्विक लीडर भी है।
बैठक का समापन करते हुए श्री जाधव ने कहा कि मंत्रालय न केवल भारत की समृद्ध विरासत का संरक्षण कर रहा है, बल्कि एक ऐसे भविष्य का निर्माण भी कर रहा है जहां आयुष वैश्विक स्तर पर स्वीकृत, साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली बन जाए। उन्होंने अनुसंधान तंत्र को और मजबूत करने के लिए समिति के सदस्यों से सुझाव और मार्गदर्शन देने का आग्रह किया।
सार्थक चर्चा के साथ बैठक का समापन हुआ। इसमें सदस्यों ने बहुमूल्य सुझाव दिए और आयुष पद्धितयों के निरंतर विकास और वैश्विक विस्तार के लिए सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई।
पीके/केसी/आरकेजे
(रिलीज़ आईडी: 2245845)
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