इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लिए संसदीय परामर्श समिति की बैठक आयोजित की गई
बैठक का प्रमुख केंद्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं उभरती प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर निर्माण पर चर्चा रहा
प्रविष्टि तिथि:
25 MAR 2026 9:42PM by PIB Delhi
केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के एजेंडा का केंद्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं उभरती प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर निर्माण के मुद्दों पर चर्चा करना था। बैठक में इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद, परामर्श समिति के सदस्य, सचिव (इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) श्री एस. कृष्णन और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने एजेंडा विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें प्रमुख पहलों, उनकी प्रगति और भविष्य की रूपरेखा का विस्तार से वर्णन किया गया था।

अपने स्वागत भाषण में, श्री अश्विनी वैष्णव ने यह रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संबंधित उभरती प्रौद्योगिकियाँ आज दुनिया को बदल रही हैं और इसलिए समिति द्वारा उठाए जाने के लिए यह एक अत्यंत प्रासंगिक विषय है। उन्होंने समिति को यह भी बताया कि पिछले दशक में देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि जहां निर्माण 6 गुना बढ़ा है, वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 8 गुना बढ़ा है; इस क्षेत्र में देश में 25 लाख लोग रोजगार प्राप्त करते हैं।


समिति के समक्ष कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें एआई, मशीन लर्निंग, क्वांटम कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की आज की दुनिया को आकार देने में परिवर्तनकारी भूमिका को उजागर किया गया। समिति को एआई क्षेत्र में भारत की प्रगति, जिसमें वैश्विक रैंकिंग में सुधार शामिल है, की जानकारी दी गई। भारत अब ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी इंडेक्स में तीसरे स्थान पर है। समिति को बताया गया कि यह सरकार द्वारा नीतिगत समर्थन, देश में उपलब्ध प्रतिभा और इसके जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम द्वारा प्रेरित है। स्वास्थ्य सेवा, कृषि, न्यायपालिका और आपदा प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग के मामलों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने इंडिया एआई सोवरिन स्टैक का भी विवरण प्रस्तुत किया, जिसका उद्देश्य स्वदेशी मॉडल, कंप्यूटिंग अवसंरचना, डेटा सेट और कौशल विकास पहलों के माध्यम से डिजिटल आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के सफल आयोजन में परिलक्षित भारत की एआई नेतृत्व में बढ़ती प्रतिष्ठा को रेखांकित करते हुए, अधिकारियों ने समिति को बताया कि समिट की उपलब्धियों पर आवश्यक फॉलो-अप भी किया जा रहा है। श्री अश्विनी वैष्णव ने समिति को बताया कि किफायती जीपीयू की सुविधा प्रदान करने के रूप में सरकार द्वारा दिए जा रहे समर्थन ने एआई पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में एक प्रमुख बाधा को दूर करने में मदद की है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्यूफैक्चरिंग (ईएसडीएम) पर प्रस्तुतिकरण में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने को उजागर किया गया, जिसे मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक बुनियादी ढांचे, तेजी से विस्तार करती डिजिटल अर्थव्यवस्था और जीवंत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा संचालित किया जा रहा है। समिति को हाल के वर्षों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति और सरकार द्वारा प्रदान किए गए व्यापक नीतिगत समर्थन के माध्यम से इस क्षेत्र को सुदृढ़ करने का विवरण दिया गया, जिसमें पीएलआई, ईसीएमएस, ईएमसी और सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं। श्री अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि हाल के वर्षों में भारत के निर्यात बास्केट में एक बड़ा बदलाव आया है, जिसमें 2025 में मोबाइल फोन देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद बनकर उभरा है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भारत की बढ़ती शक्ति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में इसके मज़बूत एकीकरण में एक महत्वपूर्ण कीर्तिमान को दर्शाता है।
समिति को भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने के बारे में जानकारी देते हुए, श्री वैष्णव ने जोर देकर कहा कि अब वैश्विक चिप डिजाइन कार्य का बढ़ता हिस्सा भारतीय प्रतिभा द्वारा सम्पन्न किया जा रहा है। उन्होंने समिति को बताया कि सरकार ने विश्व स्तरीय चिप डिजाइन उपकरणों की पहुँच प्रदान करके भारत में 315 शैक्षणिक संस्थानों में चिप डिजाइन प्रशिक्षण क्षमताओं का विस्तार किया है। इस पहल ने देशभर के छात्रों को सेमीकंडक्टर चिप्स डिजाइन करने में सक्षम बनाया है और एक मजबूत प्रतिभा पाइपलाइन का निर्माण किया है।
समिति के सदस्यों ने चर्चा किए गए मुद्दों पर कई महत्वपूर्ण सुझाव और विचार साझा किए। इनमें सभी के लिए एआई शिक्षा का महत्व, एआई का रणनीतिक उपयोग, डेटा सेंटर्स का पर्यावरणीय प्रभाव, इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य संवर्धन, ई-अपशिष्ट के मुद्दे आदि शामिल थे। केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सदस्यों के प्रश्नों का उत्तर दिया; उन्होंने उनके मूल्यवान सुझावों के लिए धन्यवाद दिया और आश्वस्त किया कि उनके इनपुट पर उचित रूप से विचार किया जाएगा।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2245533)
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