इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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मानवरहित विमान प्रणाली (यूएएस) में क्षमता निर्माण के लिए स्वयान परियोजना के तहत 32000 से अधिक लाभार्थियों को किया प्रशिक्षित


सरकार ने ड्रोन संचालन, रखरखाव और क्षमता निर्माण में एक कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए कई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।

प्रविष्टि तिथि: 25 MAR 2026 3:57PM by PIB Delhi

माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में, भारत ने ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य भारत को एक वैश्विक ड्रोन हब बनाना और एक मजबूत स्वदेशी इकोसिस्टम तैयार करना है।

रक्षा, कानून प्रवर्तन, लॉजिस्टिक्स, कृषि, आपदा प्रबंधन आदि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है। यह विकास ड्रोन से संबंधित विभिन्न भूमिकाओं के लिए कुशल जनशक्ति की बढ़ती मांग को प्रेरित कर रहा है।

भारत सरकार ने एक कुशल ड्रोन कार्यबल तैयार करने के लिए कई प्रशिक्षण पहल शुरू की हैं। ये कार्यक्रम ड्रोन संचालन, रखरखाव और समग्र क्षमता निर्माण को कवर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

इन पहलों में रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ), नमो ड्रोन दीदी योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0) और स्वयान - मानवरहित विमान प्रणाली (ड्रोन और संबंधित तकनीक) में मानव संसाधन विकास के लिए क्षमता निर्माण, आदि शामिल हैं।

रिमोट पायलट प्रशिक्षण:

डीजीसीए ने प्रशिक्षण देने और रिमोट पायलट प्रमाणपत्र (आरपीसी) जारी करने के लिए रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (आरपीटीओ) को अधिकार पत्र जारी किए हैं। अधिकृत रिमोट पायलट प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद देश में कहीं भी रोजगार पाने के लिए स्वतंत्र हैं।

वर्तमान में, भारत में 251 अधिकृत आरपीटीओ हैं और उन्होंने सामूहिक रूप से 42,412 रिमोट पायलटों को प्रशिक्षित किया है। इनमें मथुरा जिले के 53 रिमोट पायलट शामिल हैं।

नमो ड्रोन दीदी:

नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत, ड्रोन एक पैकेज के रूप में दिए जाते हैं, जिसमें स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की एक सदस्य को 15 दिनों का प्रशिक्षण देना शामिल है।

प्रशिक्षण में ड्रोन उड़ाना, ड्रोन नियमों के प्रावधान, पोषक तत्वों और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी), कृषि उद्देश्यों के लिए ड्रोन उड़ाने का अभ्यास और ड्रोन की मामूली मरम्मत व रखरखाव शामिल है।

नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत, 500 एसएचजी सदस्यों को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित और प्रमाणित किया गया है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0):

कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की पीएमकेवीवाई 4.0 योजना अल्पकालिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से ड्रोन सहित उभरती प्रौद्योगिकियों में उद्योग-अनुकूल कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने पर केंद्रित है।

31 दिसंबर 2025 तक पीएमकेवीवाई के तहत ड्रोन तकनीक से संबंधित जॉब रोल्स में 25,791 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है; जिनमें से 4,731 उम्मीदवारों को उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षित किया गया है।

स्वयानमानवरहित विमान प्रणाली (ड्रोन और संबंधित तकनीक) में मानव संसाधन विकास के लिए क्षमता निर्माण:

सरकार मानवरहित विमान प्रणाली (यूएएस) में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान में क्षमता निर्माण के माध्यम से मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देने के लिए 'स्वयान' परियोजना लागू कर रही है।

 

इसे 30 प्रमुख संस्थानों (आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी आदि) के नेटवर्क के 'हब-एंड-स्पोक' मॉडल के माध्यम से लागू किया गया है, जहाँ समर्पित ड्रोन प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं।

प्रशिक्षण और अनुसंधान को पांच मुख्य कार्य विषयों के आधार पर तैयार किया गया है, जो हैं: ड्रोन इलेक्ट्रॉनिक्स; जीएनसी (मार्गदर्शन, नेविगेशन और नियंत्रण) एल्गोरिदम; एरोमैकेनिक्स; ड्रोन अनुप्रयोग; और संबद्ध यूएएस तकनीकें।

यह यूएएस में छात्रों, संकाय, शोधकर्ताओं और पेशेवरों को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है, जिसमें यूएएस में एक नया एम.टेक (आईआईटी कानपुर में), माइनर डिग्री, प्रमाणन पाठ्यक्रम, बूटकैंप और कार्यशालाएं शामिल हैं।

यह भारत के ड्रोन इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अनुसंधान और विकास (आर एंड डी), विचारों, नवाचार और 'ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया' के माध्यम से आयोजित 'नेशनल इनोवेशन चैलेंज फॉर ड्रोन एप्लीकेशन एंड रिसर्च' (एनआईडीएआर) जैसी चुनौतियों को बढ़ावा देता है।

अधिक विवरण https://swayaan.meity.gov.in/ पर उपलब्ध हैं।

विभिन्न कार्यक्रम श्रेणियों में 900 से अधिक गतिविधियों के माध्यम से 32,000 से अधिक लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य में, मथुरा जिले के 75 लाभार्थियों सहित कुल 1,457 लाभार्थियों को प्रशिक्षित किया गया है।

एनआईडीएआर के तहत, पूरे भारत से 3,448 छात्रों ने पंजीकरण कराया और आपदा प्रतिक्रिया व सटीक कृषि में वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए स्वायत्त ड्रोन समाधान विकसित करने में भाग लिया।

पुष्पक- ड्रोन उत्कृष्टता की ओर ड्रोन प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय मिशन:

सरकार ने इस पहल को कंसोर्टियम मोड में [आईआईटी बॉम्बे, सीडैक-तिरुवनंतपुरम, सीडैक-बेंगलुरु, वीरमाता जीजाबाई टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (वीजेटीआई), आईआईटी-गांधीनगर और कलसालिंगम एकेडमी ऑफ रिसर्च एंड एजुकेशन (केएआरई), तमिलनाडु] के साथ शुरू किया है। इस परियोजना का उद्देश्य स्वायत्त ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र के लिए स्वदेशी तकनीकों का डिजाइन, विकास और प्रदर्शन करना है।

प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी):

डीजीटी ने 'ड्रोन तकनीशियन' सहित उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए 'क्राफ्ट्समेन ट्रेनिंग स्कीम' (सीटीएस) के तहत नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। सीटीएस के तहत, सत्र 2023 से 2025 तक 'ड्रोन पायलट (जूनियर)' और 'ड्रोन तकनीशियन' ट्रेडों में 1,423 उम्मीदवारों को नामांकित किया गया है।

ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए पीएलआई योजना:

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने ड्रोन और ड्रोन घटकों के लिए एक पीएलआई योजना (वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 के दौरान) लागू की है, जिसके परिणामस्वरूप 2,650 व्यक्तियों को रोजगार मिला है।

यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद द्वारा 25.03.2026 को लोकसभा में प्रस्तुत की गई थी।

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पीके/केसी/एसके


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