पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

संसद  प्रश्न: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन

प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 6:49PM by PIB Delhi

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (एसपीसीबी) / प्रदूषण नियंत्रण समितियों (पीसीसी) द्वारा सीपीसीबी को प्रदान की गई जानकारी के आधार पर, प्लास्टिक कचरे की मात्रा नीचे दी गई है:

वित्तीय वर्ष

प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन (टीपीए)

2020-21

41,26,808

2021-22

39,01,802

2022-23

41,36,188

प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के कार्यान्वयन पर वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए दिल्ली में अनुमानित प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन क्रमशः लगभग 3,45,000 टन प्रति वर्ष और 3,77,596 टन प्रति वर्ष है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 1 जुलाई 2022 से कम उपयोगिता और अधिक प्रदूषण फैलाने की क्षमता वाले कुछ चिन्हित एकल-उपयोग प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियमित रूप से प्रवर्तन अभियान चलाने के लिए कहा गया है ताकि चिन्हित एकल-उपयोग प्लास्टिक उत्पादों और 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक के थैलों पर प्रतिबंध को लागू किया जा सके। इन क्षेत्रों में फल और सब्जी बाजार, थोक बाजार, स्थानीय बाजार, फूल विक्रेता, प्लास्टिक के थैले बनाने वाली इकाइयां आदि शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों द्वारा उल्लंघनों पर कार्रवाई की गई है इसमें प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक उत्पादों की ज़ब्ती और जुर्माना लगाना शामिल है। एसपीसीबी/पीसीसी द्वारा प्रदान किए गए विवरण और एसयूपी अनुपालन निगरानी पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुलाई 2022 से अब तक कुल 8,61,908 निरीक्षण किए गए हैं और 1989 टन ​​प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक उत्पाद जब्त किए गए हैं तथा कुल 19.83 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

इसके अतिरिक्त पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 16 फरवरी, 2022 को प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 के माध्यम से प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) संबंधी दिशानिर्देश अधिसूचित किए हैं। इन दिशानिर्देशों में ईपीआर, प्लास्टिक पैकेजिंग अपशिष्ट के पुनर्चक्रण, कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग के पुन: उपयोग और पुनर्चक्रित प्लास्टिक सामग्री के उपयोग के लिए अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। प्लास्टिक पैकेजिंग पर केंद्रीकृत ऑनलाइन विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व पोर्टल के अनुसार, पोर्टल पर 60,128 पंजीकृत उत्पादक, आयातक और ब्रांड स्वामी तथा 3012 पंजीकृत प्लास्टिक अपशिष्ट संसाधक मौजूद हैं। ईपीआर दिशानिर्देशों के 2022 में लागू होने के बाद से लगभग 207 लाख टन प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे का पुनर्चक्रण किया गया है। ईपीआर दायित्वों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत पंजीकृत उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को ईपीआर लक्ष्यों की पूर्ति न करने और वित्तीय वर्ष 2022-23 और वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए वार्षिक रिटर्न जमा न करने के लिए 25.11.2024, 30.12.2024 और 11.03.2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 5 जून, 2025 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में विश्व पर्यावरण दिवस 2025 को 'एक राष्ट्र, एक मिशन: प्लास्टिक प्रदूषण का अंत' नारे के साथ मनाया। विश्व पर्यावरण दिवस 2025 से पूर्व एक महीने तक चले अभियान के तहत, देश भर में लगभग 69,000 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें लगभग 21 लाख लोगों ने भाग लिया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और प्रदूषण नियंत्रण समितियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक वस्तुओं के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के निर्माताओं/विक्रेताओं का एक संकलन तैयार किया, जिसे विश्व पर्यावरण दिवस 2025 पर जारी किया गया। इस संकलन में देश भर में फैली लगभग 1000 इकाइयों का विवरण दिया गया है। व्यापक प्रसार और उपयोग के लिए यह संकलन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की वेबसाइट पर उपलब्ध है। पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों के विकास को ध्यान में रखते हुए, भारतीय मानक ब्यूरो ने पहले कृषि उप-उत्पादों से बने खाद्य परोसने वाले बर्तनों के लिए भारतीय मानक आईएस 18267 अधिसूचित किया था।

प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने पर सरकार के फोकस को ध्यान में रखते हुए, प्रतिबंधित एकल-उपयोग प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर एक राष्ट्रीय प्रदर्शनी का आयोजन डब्ल्यूईडी - 2025 के दौरान किया गया था। इस प्रदर्शनी में भारत भर से 150 स्टार्टअप, रिसाइक्लर और स्थानीय निकायों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और एकल-उपयोग प्लास्टिक और प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर नवीन तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रदर्शन किया।

राष्ट्रीय प्लास्टिक प्रदूषण निवारण अभियान (एनपीपीआरसी) भी 5 जून से 31 अक्टूबर 2025 की अवधि के लिए शुरू किया गया था। इस अभियान में स्वच्छता ही सेवा कार्यक्रम के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए गतिविधियां शामिल थीं। इन गतिविधियों में सरकारी कार्यालयों में, विशेष रूप से अभियान 5.0 के दौरान, अनावश्यक एकल-उपयोग प्लास्टिक के उपयोग को कम करने पर विशेष ध्यान दिया गया। एनपीपीआरसी के तहत केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एकल-उपयोग प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर एक हैकाथॉन का भी आयोजन किया गया था।

यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

*****

वीएम/जीएस/एसके


(रिलीज़ आईडी: 2244148) आगंतुक पटल : 219
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu