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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
भविष्योन्मुखी कौशल प्रशिक्षण
प्रविष्टि तिथि:
23 MAR 2026 4:48PM by PIB Delhi
भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) के तहत कौशल विकास केन्द्रों/संस्थानों आदि के एक व्यापक नेटवर्क के माध्यम से और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के जरिए बिहार सहित देशभर में समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल एवं कौशल उन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। सिम का उद्देश्य भारत के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना और उन्हें होटल, आतिथ्य, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य क्षेत्र, ऑटोमोबाइल, चमड़ा, कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, आईटी, वस्त्र, पेट्रोकेमिकल्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और हरित प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करना है।
भविष्योन्मुखी कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए कोई अलग से बजट आवंटित नहीं किया गया है। पीएमकेवीवाई के तहत धनराशि कार्यान्वयन एजेंसियों को निर्धारित मानदंडों के अनुसार प्रशिक्षण लागत को पूरा करने के लिए जारी की जाती है। जेएसएस योजना के तहत धनराशि सीधे गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को जारी की जाती है। एनएपीएस के तहत, शिक्षुओं को प्रतिमाह 1500 रुपये तक का वजीफा डीबीटी के माध्यम से जारी किया जाता है, न कि इसके अंतर्गत आने वाले संस्थानों को। आईटीआई से संबंधित दैनिक प्रशासन और वित्तीय नियंत्रण संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के पास होता है। एमएसडीई की प्रमुख योजनाओं के तहत प्रशिक्षित उम्मीदवारों की राज्य/संघ राज्य क्षेत्रवार संख्या (बिहार के रोहतास और कैमूर जिलों सहित) अनुबंध में दी गई है।
विकेंद्रीकृत, जमीनी स्तर पर कौशल नियोजन के लिए जिला कौशल विकास योजनाएँ (डीएसडीपी) तैयार करने हेतु सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में जिला कौशल समितियाँ (डीएससी) स्थापित की गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में कौशल की कमियों को दूर करना, स्थानीय रोजगार के अवसरों, कौशल की मांग और प्रशिक्षण अवसंरचना का मानचित्रण करना है ताकि सरकारी कौशल कार्यक्रमों को दिशा दी जा सके। इसी पहल के एक भाग के अंतर्गत, बिहार के रोहतास और कैमूर जिलों के लिए डीएसडीपी तैयार की गई हैं, जिनमें जिले-विशिष्ट जॉब रोल्स और प्रशिक्षण अवसंरचना की आवश्यकताओं की पहचान की गई है।
भावी कार्यबल की कौशलीकरण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, कौशलीकरण की गुणवत्ता में सुधार करने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाजार की जरूरतों के अनुरूप बनाने और प्रशिक्षुओं की रोजगार क्षमता में सुधार करने के लिए, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) द्वारा निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:
- उद्योग विशेषज्ञों के नेतृत्व में सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) कौशल अंतर का अध्ययन करती हैं और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप योग्यता मानक निर्धारित करती हैं। इसके अलावा, संकल्प योजना के तहत, एनसीएईआर द्वारा किया गया राष्ट्रीय कौशल अंतर अध्ययन उच्च विकास वाले क्षेत्रों में कौशल अंतर का मानकीकृत, डेटा-आधारित मूल्यांकन प्रदान करता है, जिससे एमएसडीई को भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं के अनुरूप कौशलीकरण पहलों को संरेखित करने में सहायता मिलती है।
- एमएसडीई की योजनाओं के तहत प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम बाजार की मांगों को ध्यान में रखते हुए उद्योगों के सहयोग से विकसित किए जाते हैं।
- उद्योग 4.0 और ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स आदि जैसे उभरते क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले भविष्य के लिए तैयार जॉब रोल्स को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) 4.0 के तहत प्राथमिकता दी गई है। साथ ही, आईटीआई में शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के तहत, उभरती प्रौद्योगिकियों में भविष्योन्मुखीजॉब रोल्स की मांग को पूरा करने के लिए नए युग के पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं।
- राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विनियम और मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक नियामक निकाय के रूप में की गई है। एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बोडीएस को उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करनी होती हैं और उद्योग से मान्यता प्राप्त करनी होती है।
- प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) फ्लेक्सी एमओयू योजना और प्रशिक्षण की दोहरी प्रणाली के माध्यम से आईटीआई छात्रों के लिए उद्योग-संबंधित प्रशिक्षण कोसशक्त बना रहा है, और सीएसआर पहलों के तहत आईबीएम, सिस्को, फ्यूचर स्किल राइट्स नेटवर्क, एडब्ल्यूएस और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अग्रणी तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रहा है ताकि उद्योग के संपर्क और प्रासंगिक कौशल विकास को बढ़ाया जा सके।
- राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप पाठ्यक्रमों में नौकरी के दौरान प्रशिक्षण (ओजेटी) और नियोजनीयता कौशलों के घटक भी शामिल होते हैं।
- एनएपीएस के तहत, शिक्षुता प्रशिक्षण और शिक्षुता कार्यक्रमों को शुरू करने के लिए औद्योगिक प्रतिष्ठानों के साथ जुड़ाव बढ़ाने को बढ़ावा दिया जाता है।
- राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) और प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीओटी) के माध्यम से प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण।
- स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) पोर्टल को कौशलीकरणप्रमाणन, रोजगार संपर्क और उद्यमशीलता इकोसिस्टम के लिए एक एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में स्थापित किया गया है, जो राष्ट्रीय करियर सेवा के माध्यम से प्रशिक्षण नामांकन, डिजिटल प्रमाणन और जॉब मैचिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत करता है।
- मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफोरमेशन थ्रू अपग्रेडिड आईटीआईएस (पीएम-सेतु) योजना को भी अनुमोदन प्रदान कर दिया है, जिसमें हब (200)-स्पोक (800) मॉडल के माध्यम से 1,000 आईटीआई के उन्नयन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
- एमएसडीई की स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस (एसओएआर) पहल के तहत, शिक्षार्थियों और युवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मूलभूत जागरूकता और अनुप्रयोग-उन्मुख समझ विकसित करने के लिए लघु, मॉड्यूलर एआई अधिगम पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, एसओएआर पाठ्यक्रम एचसीएल टेक, माइक्रोसॉफ्ट और नैसकॉम जैसे उद्योग भागीदारों के सहयोग से विकसित और संचालित किए गए हैं, जो उद्योग-प्रासंगिक शिक्षण सामग्री और स्किल इंडिया डिजिटलहब (सिद्ध) के माध्यम से राष्ट्रव्यापी पहुंच सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा, वर्तमान में, ऑटोमेशन एंडरोबिटिक प्रोसेसिंग से संबंधित 54 पाठ्यक्रम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता/मशीन लर्निंग से संबंधित 116 पाठ्यक्रम एनएसक्यूएफ के अनुरूप हैं और राष्ट्रीय कौशल योग्यता समिति (एनएसक्यूसी) द्वारा अनुमोदित हैं, जो एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बॉडीज द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
अनुबंध
दिनांक 23.03.2026 को उत्तरार्थ लोकसभाअतारांकितप्रश्नसंख्या 4862 केभाग (क) से (घ) केउत्तरसे संबंधित अनुबंध
वर्ष 2022-23 से 2025-26 के दौरान (दिनांक 31.12.2025 तक) एमएसडीई की प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत भविष्य के कौशल आधारित जॉब रोल्स में प्रशिक्षित/उन्मुख उम्मीदवारों की राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार संख्या:
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क्र.सं.
|
राज्य/संघ राज्य क्षेत्र
|
प्रशिक्षित/अभिविन्यस्त उम्मीदवार
|
|
पीएमकेवाई
|
एनएपीएस (नियुक्त शिक्षु)
|
सीटीएस
(नामांकित उम्मीदवार)
|
|
1
|
अंडमानव निकोबार द्वीप समूह
|
30
|
-
|
112
|
|
2
|
आंध्रप्रदेश
|
8,596
|
14
|
5
|
|
3
|
अरुणाचलप्रदेश
|
1,441
|
-
|
21
|
|
4
|
असम
|
6,879
|
-
|
305
|
|
5
|
बिहार
|
30,317
|
24
|
1,335
|
|
6
|
चंडीगढ़
|
19
|
3
|
116
|
|
7
|
छत्तीसगढ
|
3,088
|
-
|
379
|
|
8
|
दिल्ली
|
2,107
|
90
|
509
|
|
9
|
गोवा
|
-
|
6
|
148
|
|
10
|
गुजरात
|
7,072
|
1870
|
863
|
|
11
|
हरियाणा
|
15,352
|
260
|
396
|
|
12
|
हिमाचलप्रदेश
|
5,424
|
31
|
605
|
|
13
|
जम्मूऔरकश्मीर
|
14,567
|
2
|
609
|
|
14
|
झारखंड
|
3,727
|
6
|
1,460
|
|
15
|
कर्नाटक
|
29,147
|
774
|
22,219
|
|
16
|
केरल
|
4,251
|
18
|
1,008
|
|
17
|
लद्दाख
|
-
|
-
|
77
|
|
18
|
मध्यप्रदेश
|
75,338
|
640
|
790
|
|
19
|
महाराष्ट्र
|
17,860
|
7213
|
4,939
|
|
20
|
मणिपुर
|
183
|
-
|
20
|
|
21
|
मेघालय
|
607
|
-
|
47
|
|
22
|
मिजोरम
|
1,097
|
-
|
-
|
|
23
|
नागालैंड
|
526
|
-
|
-
|
|
24
|
ओडिशा
|
5,507
|
28
|
5,569
|
|
25
|
पुदुचेरी
|
719
|
-
|
27
|
|
26
|
पंजाब
|
26,098
|
28
|
197
|
|
27
|
राजस्थान
|
87,957
|
724
|
1,035
|
|
28
|
सिक्किम
|
642
|
2
|
-
|
|
29
|
तमिलनाडु
|
32,316
|
291
|
21,826
|
|
30
|
तेलंगाना
|
15,412
|
942
|
16,810
|
|
31
|
दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव
|
309
|
1
|
24
|
|
32
|
त्रिपुरा
|
2,136
|
12
|
66
|
|
33
|
उत्तर प्रदेश
|
97,478
|
703
|
16,398
|
|
34
|
उत्तराखंड
|
8,640
|
37
|
257
|
|
35
|
पश्चिम बंगाल
|
5,890
|
19
|
2,459
|
|
कुल
|
5,10,732
|
13,738
|
1,00,631
|
|
क्र.सं.
|
बिहार के जिले
|
प्रशिक्षित/अभिविन्यस्त उम्मीदवार
|
|
पीएमकेवाई
|
सीटीएस(नामांकित उम्मीदवार)
|
|
1
|
रोहतास
|
459
|
84
|
|
2
|
कैमुर
|
319
|
-
|
यह जानकारी कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
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पीके/ केसी/ केजे
(रिलीज़ आईडी: 2244142)
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