कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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जेनरेटिव एआई कौशल कार्यक्रम

प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 4:45PM by PIB Delhi

इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत, “इंडिया एआई फ्यूचर स्किल्स” पिलर का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों में एआई साक्षरता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना है। “युवा एआई फॉर ऑल” जैसे कार्यक्रम व्यापक स्तर पर एआई जागरूकता और बुनियादी साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, टीयर 2 और टीयर 3 शहरों में स्थित राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) केंद्रों, आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों में इंडिया एआई डेटा और एआई प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य एआई और उभरती प्रौद्योगिकियों में मानकीकृत, सुलभ प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिसमें पायथन का उपयोग कर के डेटा एनोटेशन के मूल सिद्धांत और पायथन का उपयोग कर के डेटा क्यूरेशन के मूल सिद्धांत जैसे पाठ्यक्रम शामिल है।

स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) प्लेटफॉर्म पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जनरेटिव एआई से संबंधित कई डिजिटल पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। वर्तमान में प्लेटफॉर्म पर एआई से संबंधित 120 से अधिक डिजिटल पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, जिनमें से 11 पाठ्यक्रम विशेष रूप से जनरेटिव एआई आधारित हैं।

स्किलिंग फॉर एआई रेडिनेस (एसओएआर) को राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसएफ़क्यू) के अनुरूप एक समावेशी, राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है और इसे स्किल इंडिया डिजिटल हब (सिद्ध) के माध्यम से संचालित किया जाता है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रव्यापी पहुंच को बढ़ाना है। यह पहल कक्षा VI-XII के स्कूली छात्रों और शिक्षकों के लिए बुनियादी एआई जागरूकता से शुरू होकर व्यापक कार्यबल के लिए एआई-सक्षम कौशल तक विस्तारित संरचित शिक्षण मार्ग प्रदान कर के खंडित दृष्टिकोणों से आगे बढ़ने का प्रयास करती है। कार्यक्रम का विस्तार स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण, कृषि, पर्यटन, खुदरा और रचनात्मक उद्योगों जैसे क्षेत्रों में क्षेत्र-विशिष्ट एआई अनुप्रयोगों को शामिल करने के लिए किया गया है, जिससे एआई को वास्तविक दुनिया की जॉब रोलों में एकीकृत किया जा सके और उत्पादकता में वृद्धि हो सके। यह पहल एनसीवीईटी द्वारा मान्यताप्राप्त अवार्डिंग बॉडीज़ के माध्यम से उद्योग की भागीदारी के साथ कार्यान्वित की जाती है, जो मानकीकरण, विस्तारशीलता और सभी क्षेत्रों में प्रासंगिकता का समर्थन करती है।

इसके अलावा, सरकार उद्योग, शिक्षा जगत और राज्य सरकारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है कि कौशल विकास संबंधी हस्तक्षेप व्यापक और समावेशी हों, ताकि अलग-थलग प्रयासों के बजाय एक अधिक समग्र राष्ट्रीय पारिस्थितिकी तंत्र की ओर बढ़ा जा सके।

इंडियाएआई मिशन, एआई कौशल विकास के लिए चरणबद्ध और विस्तार योग्य दृष्टिकोण अपनाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में मूलभूत क्षमताओं का निर्माण करना है। इसमें देशभर में 570 डेटा और एआई प्रयोगशालाओं की स्थापना शामिल है, जिनमें एनआईईएलआईटी के सहयोग से स्थापित 27 प्रयोगशालाएं डेटा और एआई के मूलभूत पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करती हैं, और सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के आईटीआई/पॉलीटेक्निक संस्थानों में 543 प्रयोगशालाएं शामिल हैं, जो भारत की विविध विकास आवश्यकताओं के अनुरूप मूलभूत और क्षेत्रीय एआई पाठ्यक्रम प्रदान करती हैं। एआई और संबंधित क्षेत्रों के ये पाठ्यक्रम उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं, और प्रयोगशालाओं को व्यावहारिक शिक्षा और प्रयोगों को सक्षम बनाने के लिए उपयुक्त बुनियादी ढांचे से सुसज्जित किया जा रहा है, जिससे देशभर में व्यावहारिक एआई कौशल विकास को सुदृढ़ करने में सहायता मिलती है।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न कौशल स्तरों को ध्यान में रखते हुए मानकीकृत एआई पाठ्यक्रम विकसित किए जा रहे हैं। एआई के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मूलभूत दक्षताओं का निर्माण करने के लिए "युवा एआई फॉर ऑल" जैसे मूलभूत कार्यक्रम, साथ ही डेटा एनोटेशन, डेटा क्यूरेशन और डेटा साइंस के पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं।

इस कार्यान्वयन दृष्टिकोण में प्रशिक्षण संस्थानों, डिजिटल प्लेटफार्मों और उद्योग के हितधारकों के साथ साझेदारी शामिल है, जिसमें प्रशिक्षित शिक्षार्थियों, प्रदान किए गए पाठ्यक्रमों और समग्र क्षमता निर्माण के संदर्भ में मापने योग्य परिणामों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।  

इसके अतिरिक्त, एसओएआर फ्रेम वर्क का विस्तार किया गया है ताकि गैर-तकनीकी कर्मचारियों सहित शिक्षार्थियों को सुलभ, कम अवधि वाले और क्रेडिट-अनुरूप डिजिटल पाठ्यक्रमों के माध्यम से बड़े पैमाने पर शामिल किया जा सके। एसओएआर के अंतर्गत मूलभूत पाठ्यक्रम "एआई टु बी अवेयर" (15 घंटे, एनएसएफ़क्यू लेवल-2) में जनरेटिव एआई पर परिचयात्मक मॉड्यूल शामिल हैं, जो शिक्षार्थियों को उभरते उपकरणों, अनुप्रयोगों और वास्तविक दुनिया के संदर्भों में उनके जिम्मेदार उपयोग की व्यावहारिक समझ प्रदान करते हैं।

यह जानकारी कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/ केसी/ केजे


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