जनजातीय कार्य मंत्रालय
जनजातीय कार्य मंत्रालय की योजनाओं के अंतर्गत किए जा रहे कार्य
प्रविष्टि तिथि:
23 MAR 2026 2:14PM by PIB Delhi
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने आज लोक सभा को जानकारी दी कि अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित प्रमुख योजनाएं/कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान: माननीय प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान में 17 सूचीबद्ध मंत्रालयों द्वारा क्रियान्वित 25 हस्तक्षेप शामिल हैं तथा इसका उद्देश्य 63,843 गांवों में अवसंरचनात्मक कमियों को दूर करना, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी सुविधाओं तक पहुंच में सुधार करना तथा आजीविका के अवसर प्रदान करना है, जिससे 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों एवं 2,911 खंडों में 5 वर्षों में 5 करोड़ से अधिक की जनजातीय जनसंख्या लाभान्वित होगी। इस अभियान का कुल बजटीय परिव्यय ₹79,156 करोड़ है (केंद्रीय अंश: ₹56,333 करोड़ एवं राज्य का अंश: ₹22,823 करोड़)।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/dajgua/DAJGUAguidelines-30102024.pdf
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) की योजना के अंतर्गत, इस उद्देश्य हेतु अनुदानों पर विचार के लिए गठित परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा जनजातीय कल्याण विभाग के प्रधान सचिव के माध्यम से प्रस्तुत किए जाते हैं।
वित्तीय वर्ष के दौरान पीएसी द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं का राज्यवार विवरण इस मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है और नीचे दिए गए लिंक पर देखा जा सकता है: https://tribal.nic.in/display_PAC_DAJAGUAMinutes.aspx
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन): सरकार ने 15 नवम्बर 2023 को प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) का शुभारंभ किया, जिसे जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। लगभग 24,000 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान वाले इस मिशन का उद्देश्य 3 वर्षों की अवधि में समयबद्ध तरीके से पीवीटीजी परिवारों और बस्तियों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तक बेहतर पहुंच, सड़क और दूरसंचार संपर्क, बिना बिजली वाले घरों का विद्युतीकरण तथा सतत् आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाओं से संतृप्त करना है।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/PM-JANMAN/PM-JANMAN-OperationalGuidelines2024.pdf
पीएम-जनमन के अंतर्गत, बहुउद्देशीय केंद्रों (एमपीसी) के हस्तक्षेपों के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रस्तावों को राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा जनजाति कल्याण विभाग के प्रधान सचिव/सचिव के माध्यम से मंत्रालय में इन प्रस्तावों पर विचार हेतु गठित समिति (पीएसी) की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
समिति की मंजूरी का विवरण मंत्रालय की वेबसाइट (https://tribal.nic.in/PM-JANMAN.aspx) पर अपलोड किया जाता है।
प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम): जनजातीय कार्य मंत्रालय जनजातीय समुदायों में सतत् आजीविका और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम) को लागू कर रहा है। यह मिशन दो पूर्ववर्ती योजनाओं का विलय करके बनाया गया था, जो लघु वन उपज (एमएफपी) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और जनजातीय उत्पादों के विकास एवं विपणन से संबंधित थीं। योजना के अंतर्गत, चयनित एमएफपी के लिए एमएसपी घोषित किया जाता है और जब बाजार मूल्य एमएसपी से कम होता है तो नामित राज्य एजेंसियां इनका क्रय करती हैं। यह मिशन मूल्य संवर्धन, सतत् संग्रहण, अवसंरचना विकास और जनजातीय उत्पादों के लिए बाजार संपर्कों को मजबूत करने पर भी केंद्रित है। इसे त्रिफेड के माध्यम से लागू किया जाता है, जिसमें एमएफपी और अन्य जनजातीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और विपणन के केंद्र के रूप में वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) स्थापित करने के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/Livelihood/Guidelines/PMJVMGuidelines.pdf
योजना के अंतर्गत, राज्य सरकार अवसंरचना विकास/निर्माण से संबंधित प्रस्ताव वित्तीय सहायता के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के साथ त्रिफेड को प्रस्तुत करती है। त्रिफेड इन प्रस्तावों के मूल्यांकन और अनुमोदन के लिए एक परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) गठित करता है।
एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (ईएमआरएस): एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (ईएमआरएस) की शुरुआत वर्ष 2018-19 में जनजातीय बच्चों को उनके अपने वातावरण में नवोदय विद्यालय के समकक्ष गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए की गई थी। नई योजना के तहत, सरकार ने 440 ईएमआरएस स्थापित करने का निर्णय लिया, प्रत्येक ऐसे ब्लॉक में एक ईएमआरएस जहाँ अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 50% से अधिक हो और कम से कम 20,000 जनजातीय व्यक्ति हों (जनगणना 2011 के अनुसार)। प्रारंभ में 288 ईएमआरएस स्कूलों को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान द्वारा वित्तपोषित किया गया, जिन्हें नए मॉडल के अनुसार उन्नत किया जा रहा है। तदनुसार, मंत्रालय ने पूरे देश में लगभग 3.5 लाख अनुसूचित जनजाति छात्रों को लाभान्वित करने हेतु कुल 728 ईएमआरएस स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/EMRS/Guidelines/EMRS%20Guidelines%20November%202020.pdf
योजना के अंतर्गत, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश ईएमआरएस सोसाइटी से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स पात्रता की जांच करती है और मंत्रालय के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करती है। मंत्रालय वित्तीय वर्ष की शुरुआत में स्टेट सोसाइटी को निधि जारी करने के लिए नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स को राशि जारी करता है।
संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान: संविधान के अनुच्छेद 275(1) की उपधारा के तहत, अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन के स्तर को ऊँचा उठाने और जनजातीय लोगों के कल्याण के लिए उन राज्यों को अनुदान जारी किए जाते हैं जिनमें अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या है। यह एक विशेष क्षेत्रीय कार्यक्रम है और राज्यों को 100% अनुदान प्रदान किया जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका, पेयजल, स्वच्छता आदि क्षेत्रों में अवसंरचनाओं में मौज़ूद कमियों को दूर करने के लिए अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या की आवश्यकताओं के आधार पर राज्यों को निधि जारी की जाती है।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/Article275/Article275Guidelines2025.pdf
“संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान की उपधारा” कार्यक्रम के अंतर्गत, अधिसूचित अनुसूचित जनजातियों वाले राज्यों के लिए निधि राज्य सरकारों को प्रदान की जाती है, जो राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर होती है, जिसे राज्य की कार्यकारी समिति (मुख्य सचिव की अध्यक्षता में) द्वारा अनुमोदित किया जाता है और इस उद्देश्य के लिए इस मंत्रालय में गठित परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) द्वारा मूल्यांकन और अनुमोदन के बाद जारी किया जाता है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान पीएसी द्वारा अनुमोदित परियोजनाओं का राज्यवार विवरण इस मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है और इसे नीचे दिए गए लिंक पर देखा जा सकता है: https://tribal.gov.in/display_PAC_minutes.aspx
अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वयं-सेवी संगठनों को अनुदान: अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए कार्यरत स्वयं-सेवी संगठनों को अनुदान योजना के तहत, मंत्रालय शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में परियोजनाओं को वित्त पोषित करता है, जिसमें आवासीय स्कूल, गैर-आवासीय स्कूल, होस्टल, मोबाइल डिस्पेंसरी, दस या उससे अधिक शैय्याओं वाले अस्पताल, आजीविका आदि शामिल हैं।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/NGO/NGO-GIAtoVOsGuidelines.pdf
योजना के अंतर्गत, एनजीओ/स्वयं-सेवी संगठन निर्दिष्ट प्रारूप में आवश्यक दस्तावेजों के साथ एनजीओ अनुदान पोर्टल पर अपना आवेदन प्रस्तुत करते हैं। प्रस्तावों को भौतिक निरीक्षण के लिए जिला प्राधिकरण को अग्रेषित किया जाता है। जिला प्राधिकरण स्थल निरीक्षण करता है और यदि संतोषजनक पाया गया तो अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजता है। निरीक्षण रिपोर्ट और योजना के दिशा-निर्देशों के तहत पात्रता के आधार पर, राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन अपनी सिफारिशों के साथ प्रस्ताव को मंत्रालय को अग्रेषित करता है।
नई परियोजनाओं के मामले में, उपरोक्त आवेदन प्राप्त होने के बाद, जनजातीय कार्य मंत्रालय का एनजीओ विभाग इसका तृतीय पक्ष के ज़रिए मूल्यांकन कराता है और पात्र मामलों को विचार के लिए परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) के समक्ष प्रस्तुत करता है। समिति योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रस्ताव का मूल्यांकन करती है और वित्तीय सहायता के लिए उपयुक्त परियोजनाओं की सिफारिश करती है। पीएसी की सिफारिशों और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के आधार पर, मंजूर परियोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु मंत्रालय द्वारा अनुदान पर विचार किया जाता है, जिनकी बाद में रिपोर्ट, निरीक्षण और उपयोग प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के आधार पर निगरानी की जाती है।
एसटी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति: यह योजना उन छात्रों पर लागू होती है जो कक्षा IX–X में अध्ययनरत हैं। माता-पिता की सभी स्रोतों से सालाना आय 2.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। डे स्कॉलर (रोज़ाना घर से स्कूल जाने-आने वाले छात्र) के लिए प्रति माह 225 रुपये और छात्रावासी (होस्टल में रहने वाले छात्र) के लिए प्रति माह 525 रुपये की छात्रवृत्ति साल में 10 महीने के लिए दी जाती है। छात्रवृत्ति राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के माध्यम से वितरित की जाती है। वित्तपोषण अनुपात सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 75:25 है, सिवाय उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू एवं कश्मीर के, जहाँ यह 90:10 है। विधानमंडल रहित केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इस अनुपात में 100% केंद्रीय हिस्सा है।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/guidelines/pre-matric/guidelines-Pre-matric-17-Oct-2022.pdf
योजना के अंतर्गत निधियाँ योजना के दिशा-निर्देशों के अनुपालन और उपयोग के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की जाती हैं, और उसके पश्चात पात्र लाभार्थियों को वितरित की जाती हैं। यह एक लाभार्थी-केंद्रित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना है, जिसे राज्य स्तर पर सत्यापन और निगरानी प्रणाली के माध्यम से लागू किया जाता है।
एसटी छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति: इस योजना का उद्देश्य पोस्ट-मैट्रिक या पोस्ट-सेकेंडरी स्तर पर अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है, जिससे वे अपनी शिक्षा पूरी कर सकें। माता-पिता की सभी स्रोतों से सालाना आय 2.50 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों द्वारा वसूले जाने वाले अनिवार्य शुल्क संबंधित राज्य शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित सीमा के अनुसार वापस कर दिए जाते हैं और अध्ययन के पाठ्यक्रम के अनुसार प्रति माह 230 रुपये से 1200 रुपये तक की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। योजना को राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा लागू किया जाता है। वित्तपोषण अनुपात सभी राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 75:25 है, सिवाय उत्तर-पूर्व और पहाड़ी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू और कश्मीर के, जहाँ यह 90:10 है। विधानमंडल रहित केंद्र शासित प्रदेशों के लिए इस अनुपात में 100% केंद्रीय हिस्सा है।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/guidelines/post-matric/Post-matric-guidelines-15032023.pdf
योजना के अंतर्गत, निधियाँ योजना के दिशा-निर्देशों के अनुपालन और उपयोग के आधार पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की जाती हैं, और उसके बाद पात्र लाभार्थियों को वितरित की जाती हैं। यह एक लाभार्थी-केंद्रित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना है, जिसे राज्य स्तर पर सत्यापन और निगरानी प्रणाली के माध्यम से लागू किया जाता है।
एसटी उम्मीदवारों के लिए राष्ट्रीय विदेश छात्रवृत्ति: यह योजना चयनित छात्रों को विदेश में स्नातकोत्तर, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टोरल अध्ययन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। प्रत्येक वर्ष कुल 20 पुरस्कार दिए जाते हैं। इनमें से 17 पुरस्कार अनुसूचित जनजातियों के लिए और 3 पुरस्कार विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के छात्रों के लिए हैं। माता-पिता/परिवार की सभी स्रोतों से सालाना आय 6.00 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/guidelines/NOS/RevisedGuidelinesNOS07102022.pdf
योजना के अंतर्गत, आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आमंत्रित किए जाते हैं, और लाभार्थियों का चयन परिभाषित चयन प्रक्रिया के माध्यम से योग्यता के आधार पर किया जाता है, जिसमें शैक्षणिक प्रदर्शन का मूल्यांकन और जहाँ आवश्यक हो, विशेषज्ञ समिति द्वारा साक्षात्कार भी शामिल है। वित्तीय सहायता चयनित छात्रों और संस्थानों को निर्धारित तंत्रों के माध्यम से सीधे प्रदान की जाती है। यह एक केंद्रीकृत, लाभार्थी-केंद्रित छात्रवृत्ति योजना है, जो योग्यता के आधार पर चयन और प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता पर आधारित है।
एसटी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हेतु राष्ट्रीय फेलोशिप और छात्रवृत्ति: यह योजना अनुसूचित जनजाति के मेधावी छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। योजना के दो घटक हैं: स्नातकोत्तर के बाद एम.फिल/पीएचडी शोध के लिए राष्ट्रीय फेलोशिप और चयनित प्रतिष्ठित संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति। इसमें ट्यूशन फीस, स्टाइपेंड, पुस्तकें, कंप्यूटर सहायता और अन्य शैक्षणिक खर्चे शामिल होते हैं। चयन ऑनलाइन आवेदन और योग्यता-आधारित मूल्यांकन के माध्यम से किया जाता है, और निधियाँ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से पीएफएमएस द्वारा जारी की जाती हैं। इसका उद्देश्य गुणवत्ता पूर्ण उच्च शिक्षा और उन्नत शोध अवसरों तक एसटी छात्रों की पहुँच को बढ़ाना है।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/guidelines/NFS/GuidelinesFellowshipandScholarship2022.pdf
योजना के अंतर्गत, वित्तीय सहायता लाभार्थियों या संस्थानों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी)/पीएफएमएस तंत्र के माध्यम से सीधे वितरित की जाती है। यह एक केंद्रीकृत, लाभार्थी-केंद्रित छात्रवृत्ति योजना है, जो योग्यता के आधार पर चयन और प्रत्यक्ष निधि हस्तांतरण पर आधारित है।
जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को समर्थन: योजना के अंतर्गत, मंत्रालय राज्य सरकारों को जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) को उनकी अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं, अनुसंधान एवं दस्तावेज़ीकरण गतिविधियों, प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने, अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहरों के प्रचार के लिए जनजातीय त्योहारों और यात्राओं का आयोजन करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और जनजातियों के बीच आदान-प्रदान यात्राओं का आयोजन करने के लिए समर्थन प्रदान करता है, जिससे जनजातीय सांस्कृतिक प्रथाओं, भाषाओं और अनुष्ठानों का संरक्षण और प्रसार किया जा सके। इसके अलावा, यह योजना जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय की स्थापना के लिए भी है, जिससे उन जनजातीय लोगों के वीरता और देशभक्तिपूर्ण कार्यों को सम्मानित किया जा सके, जिन्होंने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष किया और अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित किया।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/TRI/Guidelines/TRI_Guidelines.pdf
योजना के अंतर्गत, टीआरआई विस्तृत प्रस्ताव और वार्षिक कार्य योजनाएँ तैयार करते हैं, जिन्हें राज्य सरकारों के माध्यम से विचार हेतु मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। इन प्रस्तावों का मूल्यांकन और अनुमोदन मंत्रालय द्वारा गठित शीर्ष स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है, और निधियाँ अनुमोदित गतिविधियों और आवश्यकताओं के आधार पर जारी की जाती हैं। अनुमोदित परियोजनाओं के कार्यान्वयन की नियमित रूप से मंत्रालय द्वारा निगरानी की जाती है।
उत्कृष्टता केंद्रों को वित्तीय सहायता: इस योजना के तहत, जनजातीय कार्य मंत्रालय प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और जनजातीय विकास के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में कार्य करने के लिए वित्तीय समर्थन प्रदान करता है। इस योजना का उद्देश्य जनजातीय मुद्दों पर गुणवत्तापूर्ण, नीति-उन्मुख अनुसंधान करने के लिए संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करना है, जिसमें सांस्कृतिक संरक्षण, सामाजिक-आर्थिक विकास और अधिकार आधारित अध्ययन शामिल हैं। चुने गए संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे दीर्घकालिक अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित करें, नीतिगत सिफारिशें विकसित करें और जनजातीय विकास कार्यक्रमों में जानकारी से प्रेरित निर्णय लेने के लिए ज्ञान सृजन में योगदान दें।
योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश यहां देखे जा सकते हैं: https://tribal.nic.in/downloads/TRI/Guidelines/CoE_Guidline.pdf
योजना के अंतर्गत, संस्थानों को मंत्रालय द्वारा गठित चयन समिति के ज़रिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में पहचान दी जाती है, जिसके पश्चात वे विचार के लिए विस्तृत अनुसंधान प्रस्ताव और कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। इन प्रस्तावों का मंत्रालय द्वारा योजना के दिशा-निर्देशों और अध्ययन की योग्यता के आधार पर मूल्यांकन और अनुमोदन किया जाता है, और धन राशि उसी के अनुसार जारी की जाती हैं।
संसद के माननीय सदस्यों से प्राप्त सिफारिशों की मंत्रालय द्वारा संबंधित योजनाओं के दिशा-निर्देशों में निर्दिष्ट प्रावधानों और प्रक्रियाओं के अनुसार उचित रूप से जांच की जाती है। ऐसे सुझावों पर विचार किया जाता है जब निर्धारित संस्थागत तंत्र के माध्यम से प्राप्त प्रस्तावों को संसाधित किया जाता है, जिसमें राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और सक्षम समितियों जैसे कि परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) द्वारा मूल्यांकित प्रस्ताव शामिल हैं, जहां लागू हो। परियोजनाओं की मंजूरी पात्रता मानदंड, योजना के उद्देश्यों, धन की उपलब्धता और संबंधित योजना दिशा-निर्देशों के पालन पर आधारित होती है।
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पीके/केसी/पीके
(रिलीज़ आईडी: 2244134)
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