विद्युत मंत्रालय
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नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण के लिए ट्रांसमिशन अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना

प्रविष्टि तिथि: 23 MAR 2026 4:52PM by PIB Delhi

सरकार ने ऐसी योजना एवं कार्यान्वयन पद्धति अपनाई है जो देश में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विकास के अभिन्न घटकों के रूप में ग्रिड की तैयारी, ट्रांसमिशन विस्तार एवं ऊर्जा भंडारण को प्राथमिकता देती है। ऊर्जा परिवर्तन के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार करते हुए ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। इसका समर्थन करने के लिए कई उपाय शुरू किए गए हैं, जिनमें ट्रांसमिशन अवसंरचना एवं ग्रिड संचालन को मजबूत करना, स्मार्ट ग्रिड तकनीकों को लागू करना, आपूर्ति में अनियमितता को समाप्त करना और 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विस्तार करना शामिल है। इन उपायों का विवरण निम्नलिखित है:

i. ट्रांसमिशन अवसंरचना एवं ग्रिड संचालन को सुदृढ़ बनाना:

ए. नवीकरणीय ऊर्जा के निकासी के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली (आईएसटीएस) और राज्यान्तर्गत  ट्रांसमिशन प्रणाली (आईएनएसटीएस) का विकास। 2030 तक 500 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के एकीकरण के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली योजना बनाई गई है।

बी. राष्ट्रीय विद्युत योजना (खंड-II ट्रांसमिशन) के अनुसार, ट्रांसमिशन नेटवर्क को फरवरी 2026 तक लगभग 5.04 लाख सर्किट किलोमीटर से बढ़ाकर 2032 तक 6.48 लाख सर्किट किलोमीटर करने और रूपांतरण क्षमता को लगभग 1429 जीवीए से बढ़ाकर 2345 जीवीए करने की योजना है। अंतर-क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता को भी फरवरी 2026 तक 120 गीगावाट से बढ़ाकर 2027 तक 143 गीगावाट और 2032 तक 168 गीगावाट करने की योजना है।

सी. नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु सहित 10 राज्यों में राज्यान्तर्गत ट्रांसमिशन परियोजना के रूप में हरित उर्जा कॉरिडोर (जीईसी) को दो चरणों में, यानी जीईसी-I और जीईसी-II में लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य 44 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी करना है।

डी. समर्पित उच्च वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) ट्रांसमिशन लिंक, जिनमें द्वि-मार्गीय विद्युत प्रवाह क्षमता होती है, की परिकल्पना नवीकरणीय ऊर्जा के लंबी दूरी के थोक स्थानांतरण को सक्षम बनाने एवं ग्रिड नियंत्रण क्षमता में सुधार लाने के लिए की गई है।

ई. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली (तीसरा संशोधन) विनियम, 2025 के लिए कनेक्टिविटी और सामान्य नेटवर्क पहुंच के माध्यम से सौर-घंटे और गैर-सौर-घंटे कनेक्टिविटी शुरू की है, जिससे ट्रांसमिशन अवसंरचना का इष्टतम उपयोग संभव हो सके और सौर, पवन एवं बीईएस को मिलाकर हाइब्रिड नवीकरणीय परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा सके।

एफ. केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (ग्रिड से कनेक्टिविटी के लिए तकनीकी मानक) नियमों को अधिसूचित किया गया है ताकि ग्रिड के सुरक्षित, संरक्षित एवं विश्वसनीय संचालन को सुनिश्चित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा उत्पन्न करने वाले संयंत्रों के लिए न्यूनतम तकनीकी आवश्यकताओं को निर्धारित किया जा सके।  

जी. नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तनशीलता से निपटने के लिए तापीय ऊर्जा उत्पादन को लचीला बनाना अनिवार्य है।

एच. सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के बेहतर पूर्वानुमान एवं रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए 13 नवीकरणीय ऊर्जा प्रबंधन केंद्र (आरईएमसी) स्थापित किए हैं। राष्ट्रीय मध्यम श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनसीएमआरडब्ल्यूएफ), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के समन्वय से, प्रणाली ऑपरेटरों और अन्य हितधारकों को उन्नत मौसम संबंधी जानकारी प्रदान करता है, जिसका उपयोग नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन एवं मांग पूर्वानुमान के लिए किया जाता है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तनशीलता के प्रभावी प्रबंधन में सहायता मिलती है।

आई. नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में परिवर्तनशीलता को कम करने तथा ग्रिड को पर्याप्त आवृत्ति सहायता प्रदान करने के लिए हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएसई) और पंप भंडारण परियोजना (पीएसपी) जैसी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

(ii) स्मार्ट ग्रिड तकनीकों की तैनाती:

ए. उन्नत ग्रिड समर्थन तकनीकें जैसे कि स्टैटिक सिंक्रोनस कम्पेनसेटर्स, सिंक्रोनस कंडेंसर्स और अन्य फ्लेक्सिबल एसी ट्रांसमिशन सिस्टम उपकरणों को वोल्टेज स्थिरता बढ़ाने, प्रणाली की मजबूती में सुधार लाने और नवीकरणीय ऊर्जा के विश्वसनीय एकीकरण का समर्थन करने के लिए योजनाबद्ध किया गया है।

बी. आवृत्ति विनियमन एवं संतुलन के लिए स्वचालित उत्पादन नियंत्रण और सहायक सेवाएं लागू की गई हैं।

सी. पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत, 455 शहरों को कवर करने वाली वितरण प्रणाली के लिए पर्यवेक्षी नियंत्रण एवं डेटा अधिग्रहण (एससीएडीए) कार्यों को मंजूरी प्रदान की गई है।

(iii) ऊर्जा भंडारण प्रणालियों का विकास:

ए. विद्युत प्रणाली के भाग के रूप में ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ईएसएस) को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 2 के खंड (50) के अंतर्गत परिभाषित किया गया है।

बी. लगभग 43.8 गीगावॉटर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के विकास के लिए दो व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजनाओं का कार्यान्वयन किया गया है।

सी. ईएसएस को प्रोत्साहित करने के लिए, जून 2028 तक चालू होने वाली सह-स्थित बीईएस परियोजनाओं और जून 2028 तक निर्माण कार्य आवंटित किए जाने वाले हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज प्लांट्स (पीएसपी) के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन प्रणाली (आईएसटीएस) शुल्क में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की गई है।

डी. विद्युत मंत्रालय ने मानकीकृत एवं पारदर्शी बोली प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए हाइड्रो पीएसपी, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली और फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (एफडीआरई) से भंडारण क्षमता और संग्रहित ऊर्जा की खरीद के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) दिशानिर्देश जारी किए हैं।

ई. भारी उद्योग मंत्रालय 18,100 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 50 गीगावाट घंटे की उन्नत रसायन विज्ञान सेल विनिर्माण क्षमता स्थापित करने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना लागू कर रहा है, जिसमें से 10 गीगावाट घंटे ग्रिड-स्तरीय भंडारण के लिए निर्धारित हैं।

एफ. पूंजीगत व्यय की मात्रा की परवाह किए बिना, ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप पंप्ड स्टोरेज योजनाओं को सीईए द्वारा सहमति की आवश्यकता से छूट प्रदान की गई है।

जी. नवंबर 2025 में, सीईए ने पंप स्टोरेज योजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने हेतु संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें यह निर्धारित किया गया है कि पीएसपी के लिए अंतर-राज्यीय पहलुओं की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है।

एच. सरकार हाइड्रो पीएसपी के विकास के लिए सहायक अवसंरचनाओं (सड़कें; बिजली घर से निकटतम पूलिंग पॉइंट तक ट्रांसमिशन लाइन, जिसमें राज्य या केंद्रीय ट्रांसमिशन यूटिलिटी के पूलिंग सबस्टेशनों का उन्नयन शामिल है; रेलवे साइडिंग; रोपवे; संचार अवसंरचना) के लिए बजटीय सहायता प्रदान कर रही है।

यह जानकारी केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपद नाइक ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एके/एसएस  


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