आयुष
मरुस्थलीय औषधीय पौधों का संवर्धन
सरकार ने रेगिस्तानी औषधीय पौधों की खेती के लिए सहायता बढ़ाया
प्रविष्टि तिथि:
20 MAR 2026 5:43PM by PIB Delhi
आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) देश भर के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित अपने क्षेत्रीय सह-सुविधा केंद्रों (आरसीएफसी) के माध्यम से आयुष आधारित मूल्य श्रृंखला विकास और खेती की पहलों द्वारा गुग्गुल (कॉमिफोरा वाइटी (आर्न.) भंडारी) और एलोवेरा (एलो बारबाडेंसिस मिलर) जैसे मरुस्थलीय औषधीय पौधों को बढ़ावा देता है। यह काम आयुष-आधारित वैल्यू चेन डेवलपमेंट और खेती की पहलों के ज़रिए किया जाता है। इसके तहत किसानों को खेती के लिए अच्छी क्वालिटी का प्लांटिंग मटीरियल (क्यूपीएम) दिया जाता है, जिसमें इन औषधीय पौधों की खेती के अच्छे तरीकों (जीएपी) और वैल्यू एडिशन पर ट्रेनिंग प्रोग्राम भी शामिल होते हैं। इसके अतिरिक्त, एनएमपीबी ने अपनी "औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन पर केंद्रीय क्षेत्र योजना" के तहत गुजरात, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे मरुस्थलीय, शुष्क और अर्ध-शुष्क राज्यों के राज्य वन विभागों को औषधीय पौधों के प्राकृतिक आवासों में उनके अंतर्देशीय संरक्षण के लिए परियोजना आधारित सहायता प्रदान की है। इसके तहत औषधीय पादप संरक्षण और विकास क्षेत्र (एमपीसीडीए) स्थापित किए गए हैं और वन क्षेत्रों में औषधीय पौधों की प्रजातियों का अंतर्देशीय संसाधन संवर्धन/पौधारोपण किया गया है। इस संबंध में राज्य वन विभाग को दी जाने वाली वित्तीय सहायता योजना के दिशा-निर्देशों के प्रावधानों के लागत मानदंडों के अनुसार प्रदान की जाती है।
- भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) देश भर में औषधीय पादपों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन पर केंद्रीय क्षेत्र योजना को लागू कर औषधीय पादपों की खेती को बढ़ावा दे रहा है, जिसके तहत निम्नलिखित गतिविधियों को समर्थन दिया जा रहा है:
- i. सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियाँ जैसे प्रशिक्षण/कार्यशालाएँ/संगोष्ठियाँ/सम्मेलन आदि
- औषधीय पौधों की आपूर्ति श्रृंखला में अग्रिम एवं पश्चवर्ती कड़ियाँ (एकीकृत घटक)
- इन-सीटू संरक्षण / एक्स-सीटू संरक्षण
- संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (जेएफएमसी) / पंचायतों / वन पंचायतों / जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) / स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के साथ आजीविका संबंधी संबंध
- औषधीय पौधों से प्राप्त उत्पादों का प्रचार, विपणन और व्यापार
इसके अतिरिक्त, औषधीय पौधों के व्यापार के लिए एक मंच प्रदान करने और बाजार तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए, एनएमपीबी ने औषधीय पौधों/जड़ी-बूटियों के प्रचार और विपणन हेतु "ई-चरक" मोबाइल एप्लिकेशन और वेब पोर्टल लॉन्च किया है। "ई-चरक" एक ऐसा मंच है जो देश भर में औषधीय पौधों के क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों, मुख्य रूप से किसानों के बीच सूचना आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है। "ई-चरक" एप्लिकेशन विभिन्न स्थानीय भाषाओं को सहायता प्रदान करता है और यह भारत के 25 हर्बल बाजारों से 100 औषधीय पौधों का पाक्षिक बाजार मूल्य भी प्रदान करता है। वर्तमान में, ई-चरक मोबाइल के पंजीकृत उपयोगकर्ता 11,119 हैं; कुल आगंतुक 30565540 हैं; पोस्ट की गई वस्तुएं 7,588 हैं; और खरीदार-विक्रेता संपर्क 7114690 हैं।
(ग) केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत खेती-बाड़ी की गतिविधियों को सहायता प्रदान नहीं की जाती है। हालांकि, आयुष मंत्रालय के के एनएमबीपी ने वित्त वर्ष 2023-24 से मौजूदा केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत “औषधीय पौधों की आपूर्ति श्रृंखला में अग्रिम एवं पश्चवर्ती कड़ियाँ (एकीकृत घटक)” के अंतर्गत परियोजनाओं को सहायता प्रदान किया है। इसके तहत औषधीय पौधों की खेती हेतु गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री तैयार करने के लिए अवसंरचना, किसानों को जागरूक करने के लिए सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) गतिविधियां, फसल कटाई उपरांत प्रबंधन एवं विपणन के लिए अवसंरचना, उत्पाद का मूल्य संवर्धन कर बाजार क्षमता और लाभप्रदता बढ़ाने तथा हानि कम करने, साथ ही कच्चे माल की गुणवत्ता परीक्षण और प्रमाणन के लिए परियोजना आधारित सहायता दी जाती है।
अब तक आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने वित्त वर्ष 2023-24 से केंद्रीय क्षेत्र योजना के “औषधीय पौधों की आपूर्ति श्रृंखला में अग्रिम एवं पश्चवर्ती कड़ियाँ (एकीकृत घटक)” के तहत राजस्थान और गुजरात सहित विभिन्न राज्यों के लिए कुल 15 परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के माध्यम से किसानों को गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री उपलब्ध कराकर लगभग 2000 हेक्टेयर क्षेत्र में औषधीय पौधों की खेती को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। विस्तृत जानकारी अनुलग्नक-1 में दी गई है ।
इसके अतिरिक्त, एनएमपीबी इस योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण/कार्यशालाओं/संगोष्ठियों/सम्मेलनों आदि जैसी सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों को भी सहयोग प्रदान करता है और वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान देश भर में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम/संगोष्ठियों/कार्यशालाओं के आयोजन हेतु 138 परियोजनाओं को 1171.94 लाख रुपये की राशि से सहायता प्रदान की है। विस्तृत जानकारी अनुलग्नक-2 में दी गई है।
अनुलग्नक-1
औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन हेतु केंद्रीय क्षेत्र योजना के एकीकृत घटक के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण
|
क्र. सं.
|
वित्तीय वर्ष
|
राज्य
|
कुल स्वीकृत राशि (लाख में)
|
|
1
|
2023-24
|
आंध्र प्रदेश
|
120.00
|
|
2
|
2023-24
|
जम्मू और कश्मीर
|
82.50
|
|
3
|
2023-24
|
मिजोरम
|
120.00
|
|
4
|
2023-24
|
उत्तराखंड
|
120.00
|
|
5
|
2024-25
|
कर्नाटक
|
120.00
|
|
6
|
2024-25
|
तमिलनाडु
|
95.00
|
|
7
|
2024-25
|
केरल
|
120.00
|
|
8.
|
2024-25
|
मध्य प्रदेश
|
119.95
|
|
9.
|
2024-25
|
गुजरात
|
120.00
|
|
10.
|
2025-26
|
राजस्थान
|
120.00
|
|
11।
|
2025-26
|
राजस्थान
|
120.00
|
|
12.
|
2025-26
|
उत्तर प्रदेश
|
120.00
|
|
13.
|
2025-26
|
उत्तर प्रदेश
|
100.00
|
|
14.
|
2025-26
|
गुजरात
|
120.00
|
|
15.
|
2025-26
|
हरियाणा
|
120.00
|
अनुलग्नक-2
पिछले पांच वर्षों के दौरान देश में औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास और सतत प्रबंधन के लिए केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाओं [सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी)] का राज्य/केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण
|
क्र. सं.
|
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश
|
वित्तीय वर्ष
|
स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या
|
स्वीकृत राशि
(रुपये लाख में)
|
|
2020-21
|
2021-22
|
2022-23
|
2023-24
|
2024-25
|
|
1.
|
आंध्र प्रदेश
|
01
|
01
|
01
|
0
|
02
|
05
|
42.00
|
|
2.
|
अरुणाचल प्रदेश
|
0
|
0
|
01
|
0
|
0
|
01
|
14.2
|
|
3.
|
असम
|
01
|
02
|
03
|
02
|
0
|
08
|
151.14
|
|
4.
|
चंडीगढ़
|
0
|
0
|
0
|
0
|
01
|
01
|
5.00
|
|
5.
|
छत्तीसगढ
|
0
|
0
|
01
|
0
|
00
|
01
|
29.50
|
|
6.
|
दिल्ली
|
02
|
05
|
06
|
01
|
03
|
17
|
151.53
|
|
7.
|
गुजरात
|
0
|
0
|
0
|
01
|
01
|
02
|
22.00
|
|
8.
|
हरियाणा
|
01
|
0
|
01
|
01
|
01
|
04
|
14.00
|
|
9.
|
हिमाचल प्रदेश
|
0
|
0
|
0
|
01
|
01
|
02
|
26.57
|
|
10.
|
जम्मू और कश्मीर
|
0
|
0
|
0
|
04
|
0
|
04
|
36.91
|
|
11।
|
झारखंड
|
0
|
0
|
03
|
0
|
0
|
03
|
11.80
|
|
12.
|
कर्नाटक
|
0
|
03
|
02
|
0
|
03
|
08
|
114.87
|
|
13.
|
केरल
|
01
|
0
|
02
|
02
|
0
|
05
|
25.50
|
|
14.
|
लद्दाख
|
0
|
0
|
02
|
0
|
01
|
03
|
15.00
|
|
15.
|
मध्य प्रदेश
|
0
|
04
|
03
|
0
|
01
|
08
|
72.40
|
|
16.
|
महाराष्ट्र
|
02
|
0
|
02
|
01
|
01
|
06
|
58.62
|
|
17.
|
मणिपुर
|
0
|
0
|
01
|
0
|
0
|
01
|
10.00
|
|
18.
|
मेघालय
|
0
|
0
|
0
|
0
|
01
|
01
|
2.00
|
|
19.
|
मिजोरम
|
0
|
0
|
01
|
0
|
0
|
01
|
5.00
|
|
20.
|
ओडिशा
|
03
|
03
|
01
|
02
|
0
|
09
|
23.25
|
|
21.
|
पंजाब
|
01
|
01
|
01
|
02
|
0
|
05
|
35.00
|
|
22.
|
राजस्थान
|
01
|
0
|
0
|
01
|
03
|
05
|
29.85
|
|
23.
|
तमिलनाडु
|
0
|
03
|
09
|
04
|
05
|
21
|
98.85
|
|
24.
|
तेलंगाना
|
0
|
0
|
0
|
01
|
0
|
01
|
10.00
|
|
25.
|
उत्तर प्रदेश
|
0
|
02
|
01
|
03
|
0
|
06
|
72.80
|
|
26.
|
उत्तराखंड
|
0
|
0
|
01
|
03
|
0
|
04
|
30.00
|
|
27.
|
पश्चिम बंगाल
|
01
|
01
|
03
|
0
|
01
|
06
|
64.15
|
|
कुल
|
14
|
25
|
45
|
29
|
25
|
138
|
1171.94
|
यह जानकारी आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रताप राव जाधव ने 20 मार्च 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
***
पीके/केसी/जीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2243150)
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