विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
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संसद प्रश्न : फेलोशिप सहित क्वांटम अनुसंधान और उद्यमिता में महिलाओं की भागीदारी

प्रविष्टि तिथि: 18 MAR 2026 3:53PM by PIB Delhi

भारत सरकार क्वांटम प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान, विकास और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) चला रही है। इस मिशन को आठ वर्षों की अवधि के लिए 6003.65 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इस मिशन के तहत, वित्त वर्ष 2024-25 में चार विषयगत केंद्र (टी-हब) स्थापित किए गए हैं, जिनमें क्वांटम कंप्यूटिंग (आईआईएससी बेंगलुरु के नेतृत्व में), क्वांटम संचार (आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में), क्वांटम सेंसिंग (आईआईटी बॉम्बे के नेतृत्व में) और क्वांटम सामग्री (आईआईटी दिल्ली के नेतृत्व में) शामिल हैं। इन टी-हबों में 14 तकनीकी समूह हैं, जिनमें 17 परियोजना दल हैं। इनसे महाराष्ट्र सहित 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों से कुल 152 शोधकर्ता जुड़े हैं। ये केंद्र अब पूरी तरह से कार्यरत हैं और प्रौद्योगिकी विकास, मानव संसाधन विकास, उद्यमिता विकास और उद्योग सहयोग तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग सहित विभिन्न गतिविधियों में लगे हुए हैं।

इन तकनीकी केंद्रों में अग्रणी या भागीदार (सदस्य) संस्थानों के रूप में भाग लेने वाले महाराष्ट्र के संस्थानों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे, भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) पुणे और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) मुंबई शामिल हैं। आईआईटी बॉम्बे क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी हब का मेजबान संस्थान है, जबकि अन्य संस्थान विभिन्न तकनीकी समूहों में अग्रणी संस्थान और सदस्य संस्थान के रूप में भाग लेते हैं।

संस्थानों, स्वीकृत परियोजनाओं और वित्तपोषण का विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है:

संस्थान

स्वीकृत परियोजनाएं

कुल स्वीकृत राशि (मार्च 2031 तक  करोड़ रुपये)

जारी की गई राशि ( करोड़ रुपये)

उपयोग की गई राशि

(करोड़ रुपये)

आईआईएसईआर पुणे

  • उदासीन परमाणु क्यूबिट्स

बी. 2डी स्पिनट्रॉनिक सामग्री

30.61

18.14

4.71

आईआईटी बॉम्बे

  • क्यूमेट टेक फाउंडेशन (क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी के लिए टी-हब)

बी. स्पिन क्यूबिट्स

सी. 2डी स्पिनट्रॉनिक सामग्री;

डी. एनवी-सेंटर आधारित सेंसर;

  • सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स;

एफ. क्वांटम डॉट्स;

जी. 2डी फोटोनिक क्यूबिट्स;

एच. क्वांटम संवर्धित सेंसर

558.76

114.89

22.31

टीआईएफआर मुंबई

  • सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स;

बी. एनवी-सेंटर आधारित सेंसर;

सी. क्वांटम संवर्धित सेंसर

71.03

36.15

3.63

 

यह मिशन आठ वर्षों की अवधि चक चलेगा। हालांकि, इसके कार्यान्वयन के लिए मोटे तौर पर तीन समय सीमाएं निर्धारित की गई हैं, अर्थात् 3 वर्ष, 5 वर्ष और 8 वर्ष। इस मिशन के प्रमुख परिणाम निम्नलिखित होंगे:

  1. क्रमशः 3 वर्ष, 5 वर्ष और 8 वर्षों में 20-50 भौतिक क्यूबिट, 50-100 भौतिक क्यूबिट और 50-1000 भौतिक क्यूबिट वाले मध्यम स्तर के क्वांटम कंप्यूटर विकसित होंगे।
  2. देश के भीतर 2000 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दो जमीनी स्टेशनों के बीच उपग्रह आधारित सुरक्षित क्वांटम संचार विकसित किए जाएंगे, साथ ही अन्य देशों के साथ लंबी दूरी के सुरक्षित क्वांटम संचार स्थापित होंगे।
  3. मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर पर वेवलेंथ डिवीजन मल्टीप्लेक्सिंग का उपयोग करके विश्वसनीय नोड्स के साथ 2000 किमी से अधिक की अंतर-शहर क्वांटम कुंजी वितरण प्रणाली विकसित की जाएगी।
  4. प्रत्येक नोड पर क्वांटम मेमोरी, एंटैंगलमेंट स्वैपिंग और सिंक्रोनाइज्ड क्वांटम रिपीटर्स के साथ मल्टी-नोड क्वांटम नेटवर्क विकसित होंगे (2-3 नोड)।
  5. परमाणु प्रणालियों में 1 फेम्टो-टेस्ला/वर्ग हर्ट्ज़ (एचजेड) संवेदनशीलता और नाइट्रोजन रिक्ति-केंद्रों में 1 पिको-टेस्ला/वर्ग हर्ट्ज़ (एचजेड) से बेहतर संवेदनशीलता वाले मैग्नेटोमीटर विकसित किए जाएंगे; परमाणुओं का उपयोग करके 100 नैनोमीटर/सेकंड² से बेहतर संवेदनशीलता वाले गुरुत्वाकर्षण माप और सटीक समय, संचार तथा नेविगेशन के लिए 10⁻¹⁹ आंशिक अस्थिरता वाली परमाणु घड़ियां बनाई जाएंगी।
  6. क्वांटम कंप्यूटिंग और संचार के लिए क्वांटम उपकरणों के निर्माण हेतु सुपरकंडक्टर्स, नवीन सेमीकंडक्टर संरचनाओं और टोपोलॉजिकल सामग्रियों जैसे क्वांटम सामग्रियों का डिजाइन और संश्लेषण तैयार होंगे।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत, आईआईटी बॉम्बे, आईआईएसईआर पुणे और टीआईएफआर मुंबई सहित महाराष्ट्र के संस्थानों ने अनुसंधान, क्षमता निर्माण, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी विकास में योगदान दिया है। क्वांटम प्रौद्योगिकी में स्नातक शिक्षण प्रयोगशालाओं के लिए जारी आवेदन के तहत, क्वांटम प्रौद्योगिकी में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए वीएनआईटी नागपुर को देश भर के 23 संस्थानों में से चुना गया है। इसके अलावा, आईआईएसईआर पुणे, टीआईएफआर मुंबई और आईआईटी बॉम्बे को क्वांटम एल्गोरिदम पर तकनीकी समूहों के तहत चुना गया है। आईआईटी बॉम्बे के क्वांटम सेंसिंग एंड मेट्रोलॉजी हब ने पोर्टेबल मैग्नेटोमीटर, क्वांटम डायमंड माइक्रोस्कोप और नैनो-पोजिशनर नामक तीन प्रोटोटाइप विकसित किए हैं। महाराष्ट्र के अनुसंधान समूहों ने क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में लगभग 10 शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं और लगभग 500 प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया है। उद्यमिता और उद्योग सहयोग इस मिशन महत्वपूर्ण हिस्सा है। तदनुसार, टी-हब ने क्वांटम प्रौद्योगिकी में स्टार्टअप को मदद देने के लिए एक निरंतर आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। महाराष्ट्र के एक स्टार्टअप क्वप्रयोग प्राइवेट लिमिटेड को मदद दी गई है।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन एक अखिल भारतीय पहल है जिसे टी-हब, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप और उद्योग भागीदारों के सहयोगात्मक नेटवर्क के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों में अनुसंधान परियोजनाएं, फैलोशिप, प्रशिक्षण कार्यक्रम, स्टार्टअप सहायता और क्षमता निर्माण पहल शामिल हैं। यह पहल देश भर के शोधकर्ताओं, छात्रों और उद्यमियों के लिए खुली हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। इसके अलावा, आईआईटी बॉम्बे स्थित क्वांटम सेंसिंग एंड मेट्रोलॉजी हब के तहत, महाराष्ट्र की तीन महिलाओं सहित आठ महिला शोधकर्ताओं को फैलोशिप प्रदान की गई है, और विभिन्न प्रशिक्षण एवं कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से क्वांटम विज्ञान और प्रौद्योगिकी में लगभग 220 महिला प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया है।

एनक्यूएम के तहत, प्रौद्योगिकी विकास और कौशल विकास को टी-हब के माध्यम से संचालित किया जाता है, जिसमें शैक्षणिक संस्थान, अनुसंधान एवं विकास संस्थान, स्टार्टअप और उद्योग भागीदार शामिल होते हैं। ये हब उद्योग की सहभागिता और अंतःक्रियाओं को सुगम बनाते हैं, जो प्रौद्योगिकी रूपांतरण और उद्योग, विशेष रूप से एमएसएमई और स्टार्टअप को हस्तांतरण में सहायक होते हैं। इसके अतिरिक्त, आईआईएसईआर पुणे में क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्थापित प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र (टीआईएच) ने साई-कॉम सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से विकसित स्वदेशी आईक्वांट्रोल आर्बिट्ररी वेवफॉर्म जेनरेटर (एडब्ल्यूजी) के माध्यम से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को संभव बनाया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी ।

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पीके/केसी/एके/एनजे


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