राज्यसभा सचिवालय
वाणिज्य संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने नई दिल्ली में यूके की व्यापार एवं वाणिज्य समिति के साथ बातचीत की
प्रविष्टि तिथि:
18 MAR 2026 9:50PM by PIB Delhi
वाणिज्य संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति ने 18 मार्च, 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर में राइट ऑनरेबल लियाम बर्न की अध्यक्षता वाले यूनाइटेड किंगडम(यूके) की संसद की व्यापार एवं वाणिज्य समिति के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की।
इस बातचीत के दौरान, समिति ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच एक विशिष्ट आधुनिक संबंध है, जो ऐतिहासिक जुड़ावों और संस्थागत ढांचों से विकसित हुआ है तथा लोकतंत्र और कानून के शासन के साझा आदर्शों पर आधारित है।
समिति ने प्रधानमंत्री की यूनाइटेड किंगडम यात्रा के दौरान ऐतिहासिक भारत–यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते(सीईटीए) पर हस्ताक्षर किए जाने का भी उल्लेख किया। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्दि करेगा, जिससे वर्तमान व्यापार मात्रा के दोगुना होने की संभावना है, तथा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और गहरा करने में एक सशक्त उत्प्रेरक के रूप में कार्य करेगा।
समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत, यूनाइटेड किंगडम का 11वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि यूनाइटेड किंगडम, भारत का 14वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। आगे यह भी उल्लेख किया गया कि यूनाइटेड किंगडम, भारत में छठा सबसे बड़ा निवेशक है। इसके अलावा, भारत ने वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान यूनाइटेड किंगडम में 106 परियोजनाओं में निवेश किया और 6,067 नए रोजगार सृजित किए, इस तरह भारत ने संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(एफडीआई) के दूसरा सबसे बड़े स्रोत की अपनी स्थिति बनाकर रखे हुए है।
यह बैठक व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में परस्पर हितों से जुड़े मुद्दों पर संवाद को सुदृढ़ करने, ज्ञान साझा करने तथा विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान के प्रति भारत और यूनाइटेड किंगडम दोनों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वाणिज्य संबंधी विभागीय संसदीय स्थायी समिति(डीआरपीएससी) की अध्यक्षा सुश्री डोला सेन ने आयातकों और निर्यातकों के लिए समान अवसर की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि कई बार शुल्क दरें भारतीय व्यापारियों के पक्ष में नहीं होती हैं। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और घरेलू तथा निर्यात बाजार के लिए पारंपरिक, श्रम-प्रधान, पर्यावरण-अनुकूल तथा कृषि-आधारित उद्योगों की आवश्यकता है।
अध्यक्षा सुश्री डोला सेन ने इस बात पर भी जोर दिया कि 150 करोड़ की विशाल आबादी के कारण भारत, यूके के निर्यातकों के लिए एक बड़ा बाज़ार है। श्रम, भूमि तथा अन्य अवसंरचनात्मक सुविधाओं की उपलब्धता के कारण भारत उद्योग स्थापित करने के लिए एक अनुकूल गंतव्य भी है। हालांक, समिति का मानना है कि देश के कानूनों का हमारी संविधान के अनुसार कार्यान्वयन होना चाहिए तथा लागू श्रम एवं वैधानिक नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर बोलते हुए, यूके संसद की व्यापार और वाणिज्य समिति के अध्यक्ष श्री लियाम बर्न ने कहा कि हाउस ऑफ कॉमन्स के प्रतिनिधिमंडल के लिए “इस महान संसद” का दौरा करना एक सम्मान की बात है। उन्होंने आगे कहा कि भारत और यूनाइटेड किंगडम ने हाल के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों में से एक पर हस्ताक्षर किए हैं और यह साझा संकल्प व्यक्त किया कि यह संधि लोगों के हित में परिणाम दे तथा लोगों की समृद्धि सुनिश्चित करे।
यह बातचीत एक सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें दोनों पक्षों ने साझा आर्थिक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर संवाद और रचनात्मक सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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पीके/केसी/पीकेपी
(रिलीज़ आईडी: 2242252)
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