वित्त मंत्रालय
सरकार और आरबीआई ने धोखाधड़ी वाले लोन आवेदनों के खिलाफ पैमाने को मजबूत किया
नियामक फ्रेमवर्क, डिजिटल लेंडिंग ऐप (डीएलए) निर्देशिका और साइबर अपराध रिपोर्टिंग तंत्र डिजिटल लेंडिंग में उपभोक्ताओं के संरक्षण को मजबूत करते हैं
प्रविष्टि तिथि:
17 MAR 2026 4:44PM by PIB Delhi
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप के माध्यम से दिए जाने वाले लेंडिंग सहित डिजिटल लेंडिंग पर एक काम करने वाले समूह का गठन किया था। इसकी सिफारिशों को आधार बनाकर, आरबीआई ने डिजिटल लेंडिंग पर नियामक दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य मोबाइल ऐप के माध्यम से दिए जाने वाले लेंडिंग सहित डिजिटल लेंडिंग के लिए नियामक ढांचे को सुदृढ़ करना, ग्राहक सुरक्षा को बढ़ाना और डिजिटल लेंडिंग प्रणाली को सुरक्षित और मजबूत बनाना है।
सभी विनियमित संस्थाओं (आरई) को डिजिटल लेंडिंग संबंधी उक्त दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। पर्यवेक्षी मूल्यांकन के दौरान नमूना आधार पर इन दिशानिर्देशों के अनुपालन की जांच की जाती है और अनुपालन न पाए जाने पर सुधार के लिए कार्रवाई की जाती है, साथ ही जरूरत के आधार पर निरीक्षणात्मक/ प्रवर्तन कार्रवाई भी शुरू की जाती है।
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 69ए के अंतर्गत तैयार किए गए धोखाधड़ी वाले लोन ऐप सहित सूचनाओं को रोकने के लिए निर्देश जारी करता है, जो सूचना प्रौद्योगिकी (सार्वजनिक सूचना तक पहुंच को रोकने की प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 में प्रदान की गई उचित प्रक्रिया का पालन करने के बाद जारी किए जाते हैं।
इसके साथ ही, सरकार और आरबीआई समय-समय पर अनधिकृत मोबाइल लोन ऐप से नागरिकों के शोषण को बचाने के लिए कई पहल करते रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- आरबीआई ने 01.07.2025 से अपनी वेबसाइट पर 'डिजिटल लेंडिंग ऐप (डीएलए)' नामक एक निर्देशिका शुरू की, जिसमें आरबीआई के पंजीकृत एजेंटों के माध्यम से संचालित सभी डीएलए शामिल हैं। इस निर्देशिका का उद्देश्य ग्राहकों को किसी पंजीकृत एजेंट के साथ डिजिटल लेंडिंग ऐप (डीएलए) के जुड़ाव के दावे को सत्यापित करने में मदद करना है।
- अनधिकृत लोन ऐप के संचालन की समीक्षा करने के लिए प्रमुख इंटरनेट मध्यस्थों और मैसेजिंग प्लेटफॉर्मों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क किया जा रहा है। इसके साथ ही, धोखाधड़ी वाले डिजिटल लोन ऐप के तंत्र को बाधित करने के लिए, इंटरनेट मध्यस्थों को निर्देश दिया गया है कि वे विदेशी संस्थाओं से पैदा होने वाले अवैध लोन ऐप्स के दुर्भावनापूर्ण विज्ञापन का पता लगाने और उसे रोकने के लिए कड़ी प्रौद्योगिकी आधारित जांच और त्वरित समय वाला प्रवर्तन तंत्र स्थापित करें।
- गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के माध्यम से डिजिटल लेंडिंग देने वाले ऐप्स का सक्रिय रूप से विश्लेषण किया जा रहा है। नागरिकों को अवैध ऋण ऐप्स सहित साइबर घटनाओं की रिपोर्ट करने में सुविधा प्रदान करने के लिए, गृह मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) और एक राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर "1930" शुरू किया है।
- बैंक अपने सार्वजनिक प्लेटफॉर्म ‘एसएसीएचईटी' पोर्टल और अंतर-नियामक राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) के माध्यम से नागरिकों को अवैध रूप से धन जमा/ संग्रह से जुड़ी किसी भी संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
- आरबीआई और बैंक साइबर अपराध की रोकथाम के लिए छोटे एसएमएस, रेडियो अभियान और प्रचार के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रहे हैं, जिनमें अवैध लोन ऐप भी शामिल हैं। इसके साथ ही, आरबीआई धोखाधड़ी और जोखिम कम करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग जागरूकता और प्रशिक्षण (ई-बीएएटी) कार्यक्रम भी आयोजित कर रहा है।
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, 'पुलिस' और 'सार्वजनिक व्यवस्था' राज्य के विषय हैं। राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वे अपनी विधि प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) के माध्यम से अवैध मोबाइल एप्लिकेशन सहित अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और कार्यवाही करें। केंद्र सरकार, एलईए की क्षमता निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत सलाह और वित्तीय मदद प्रदान करके राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की पहलों का सहयोग करती है।
यह जानकारी वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में दी।
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पीके/केसी/एमएम/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2241395)
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