प्रविष्टि तिथि:
17 MAR 2026 4:40PM by PIB Delhi
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम जो सहकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन में कार्यरत एक सांविधिक संगठन है, ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में पूंजी निर्माण के लिए बढ़ी हुई और निर्बाध ऋण प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए 'दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना' लॉन्च की है । 'दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना' के अधीन प्रस्तावों का मूल्यांकन करने के लिए पात्रता शर्तें और मूल्यांकन मानदंड निम्नानुसार हैं:-
- सहकारी समिति को न्यूनतम 3 वर्ष प्रचालनरत होना चाहिए ।
- सहकारी समिति की निवल परिसंपत्ति (नेट-वर्थ) सकारात्मक होनी चाहिए, 100% चुकता शेयर पूंजी से कम नहीं होनी चाहिए, अर्थात् चुकता शेयर पूंजी में कोई क्षरण नहीं होना चाहिए ।
- सहकारी समिति को पिछले तीन वर्षों के दौरान कोई नकद हानि नहीं होनी चाहिए और पिछले तीन वर्षों में से कम से कम दो वर्षों में उसे शुद्ध लाभ होना चाहिए ।
एनसीडीसी सहकारी समिति के वित्तीय स्वास्थ्य, प्रदर्शन और विश्वसनीयता का मूल्यांकन करता है और मूल्यांकन एवं और सम्यक तत्परता की अपने मानक प्रथाओं को अपनाते हुए पर्याप्त सुरक्षा के आधार पर किसी परियोजना के लिए ऋण स्वीकृत करता है ।
एनसीडीसी अपने 19 क्षेत्रीय कार्यालयों और 9 उप-कार्यालयों के माध्यम से योजनाओं के कार्यान्वयन की सक्रियतापूर्वक निगरानी करता है और सहकारी समितियों को समयबद्ध ऋण प्रवाह तक पहुंच सुनिश्चित करता है । इस योजना के अधीन संवितरित ऋण की उचित निगरानी के लिए समय-समय पर फील्ड दौरे/ निरीक्षण किए जाते हैं ।
ऋण लेने वाली सहकारी समिति द्वारा ऋण चुकौती में चूक की स्थिति में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार एक संरचित वसूली प्रणाली का अनुपालन करता है ।
प्रारंभ में, चूक होने पर, उधारकर्ता को एक कानूनी रिकॉल नोटिस जारी किया जाता है जिसमें उसे निर्धारित अवधि के भीतर लागू ब्याज और प्रभारों के साथ बकाया ऋण राशि का पुनर्भुगतान करने के लिए कहा जाता है ।
जहां उधारकर्ता से प्रतिभूति के रूप में पोस्ट-डेटेड चेक (पीडीसी) प्राप्त किए जाते हैं, उन्हें वसूली के लिए प्रस्तुत किया जाता है । अनादर के मामले में परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 के अधीन वैधानिक नोटिस जारी किया जाता है और यदि उधारकर्ता नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर भुगतान करने में विफल रहता है तो सक्षम न्यायालय के समक्ष उक्त प्रावधान के अंतर्गत उचित कार्यवाही शुरू की जाती है ।
इसके अलावा, एक बार जब ऋण खाते को लागू मानदंडों के अनुसार अनर्जक आस्ति (एनपीए) के रूप में वर्गीकृत कर दिया जाता है तो वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्रचना एवं प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (एसएआरएफएईएसआई) अधिनियम, 2002 के तहत वसूली की कार्यवाही शुरू की जाती है । इस प्रक्रिया में, सरफेसी अधिनियम की धारा 13(2) के अधीन उधारकर्ता को एक मांग नोटिस जारी किया जाता है जिसमें उसे 60 दिनों के भीतर संपूर्ण बकाया देयता को चुकाने के लिए कहा जाता है ।
यदि उधारकर्ता निर्धारित अवधि के भीतर मांग नोटिस का अनुपालन करने में विफल रहता है तो निगम प्रासंगिक नियमों के अनुसार सरफेसी अधिनियम की धारा 13(4) के तहत आगे की कार्रवाई करता है ।
इसके अतिरिक्त, जहां कहीं भी आवश्यक समझा जाता है, बकाया देय राशियों की वसूली के लिए ऋण वसूली एवं दिवालियापन अधिनियम, 1993 के उपबंधों के अंतर्गत ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) के समक्ष मूल आवेदन (ओए) भी दायर किए जाते हैं । सरफेसी अधिनियम के अधीन कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी कार्यवाही भी की जा सकती है ।
पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान उक्त योजना के अधीन स्वीकृत और जारी की गई धनराशि का ब्योरा निम्नानुसार है:
(करोड़ रुपये)
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वित्तीय वर्ष
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स्वीकृत धनराशि
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संवितरित धनराशि
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2022-23
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400.00
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0.00
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2023-24
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0.00
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60.00
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2024-25
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5000.76
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2077.00
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कुल
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5400.76
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2137.00
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"दीर्घावधि कृषक पूंजी सहकार योजना" ने कृषि ऋण सहकारी समितियों को आगे ऋण देने के लिए उनके संसाधनों के साथ दीर्घकालिक वित्तीय सहायता को पूरक करके सशक्त किया है । इसने बढ़ी हुई और निर्बाध ऋण प्रवाह सक्षम किया है, कृषि और संबद्ध कार्यकलापों में पूंजी निर्माण को बढ़ावा दिया है और गैर-कृषि क्षेत्र के उद्यमों में विविधीकरण का समर्थन किया है । कुल मिलाकर इस योजना ने संस्थागत क्षमता में वृद्धि की है, पहुंच को व्यापक बनाया है और संधारणीय दीर्घकालिक ऋण प्रदान करने एवं ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में सहकारी क्षेत्र की भूमिका को मजबूत किया है ।
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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AK/AP