विद्युत मंत्रालय
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विद्युत उत्पादन और मांग-आपूर्ति का अंतर

प्रविष्टि तिथि: 16 MAR 2026 4:46PM by PIB Delhi

देश में 31.01.2026 तक कुल 'स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता' 5,20,511 मेगा वॉट है।

देश में बिजली पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। देश की वर्तमान स्थापित उत्पादन क्षमता 520.51 गीगा वॉट है (जनवरी, 2026 तक)। भारत सरकार ने अप्रैल, 2014 से अब तक 296.388 गीगा वॉट की नई उत्पादन क्षमता जोड़कर बिजली की कमी के गंभीर मुद्दे को हल किया है, जिससे देश बिजली की कमी वाले देश से बिजली के मामले में आत्मनिर्भर देश में बदल गया है।

पिछले तीन वित्तीय वर्ष और वर्तमान वित्तीय वर्ष, यानी 2025-26 (फरवरी, 2026 तक) के लिए 'बिजली आपूर्ति की स्थिति' अनुलग्नक में दी गई है। 'आपूर्ति की गई ऊर्जा' 'ऊर्जा की आवश्यकता' के अनुरूप रही है, जिसमें केवल मामूली अंतर है; यह अंतर आमतौर पर राज्य के पारेषण/वितरण नेटवर्क में आने वाली बाधाओं के कारण होता है।

पीक आवर्स (अधिकतम मांग के समय) के दौरान इस अंतर को पाटने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं: -

i. जल-विद्युत (Hydro-based) उत्पादन को इस तरह से निर्धारित किया जा रहा है ताकि पीक अवधि के दौरान मांग को पूरा करने के लिए पानी का संरक्षण किया जा सके।

ii. अधिक मांग की अवधि के दौरान उत्पादन इकाइयों के नियोजित रखरखाव को न्यूनतम रखा जाता है।

iii. ईंधन की कमी को दूर करने के लिए सभी तापीय विद्युत संयंत्रों को कोयले की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।

iv. IPPs और केंद्रीय उत्पादन केंद्र सहित सभी विद्युत उत्पादन कंपनियों (GENCOs) को सलाह दी गई है कि वे नियोजित रखरखाव या अचानक खराबी (forced outage) की अवधि को छोड़कर, दैनिक आधार पर पूर्ण उत्पादन करें और पूर्ण उपलब्धता बनाए रखें।

v. बिजली अधिशेष वाले क्षेत्रों से बिजली की कमी वाले क्षेत्रों में बिजली के अंतरण को सुगम बनाने के लिए सुदृढ़ राष्ट्रीय ग्रिड स्थापित की गई है। राष्ट्रीय ग्रिड की क्षमता का विस्तार निरंतर आधार पर किया जा रहा है, जो बिजली उत्पादन और बिजली की मांग में वृद्धि के अनुरूप है।

vi. निर्माणाधीन उत्पादन परियोजनाओं की सक्रिय निगरानी की जा रही है ताकि क्षमता में अनुरूप वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

vii. विद्युत बाजारों में सुधार किया गया है, जिसके तहत पावर एक्सचेंजों में 'रियल टाइम मार्केट' (आरटीएम), 'ग्रीन डे अहेड मार्केट' (जीडीएएम), 'ग्रीन टर्म अहेड मार्केट' (जीटीएएम) और 'हाई प्राइस डे अहेड मार्केट' (एचपी-डीएएम) को शामिल किया गया है।  इसके अलावा, डीआईएससीओएम (DISCOMs) द्वारा अल्पकालिक बिजली की खरीद के लिए -बोली और -रिवर्स हेतु DEEP Portal (Discovery of Efficient Electricity Price यानी बिजली के दक्ष मूल्य की खोज) भी शुरू किया गया।

इसके अलावा, सरकार ने सभी क्षेत्रों को बिना किसी रुकावट के बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ये कदम उठाए हैं:

1.उत्पादन और स्टोरेज की योजना:

i. नेशनल इलेक्ट्रिसिटी प्लान (एनईपी) के अनुसार, 2031-32 तक स्थापित उत्पादन क्षमता 874 गीगा वॉट होने की संभावना है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उत्पादन क्षमता अनुमानित पीक डिमांड से ज़्यादा रहे, सभी राज्यों ने सीईए के साथ सलाह-मशविरा करके अपने "रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान (आरएपी)" तैयार किए हैं। ये 10 वर्ष के डायनामिक रोलिंग प्लान हैं, जिनमें बिजली उत्पादन के साथ-साथ बिजली खरीदने की योजना भी शामिल है।

ii. सभी राज्यों को सलाह दी गई थी कि वे अपने रिसोर्स एडिक्वेसी प्लान के अनुसार, सभी उत्पादन स्रोतों से उत्पादन क्षमताएं बनाने/अनुबंध करने की प्रक्रिया शुरू करें।

iii. बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए, भारत सरकार ने क्षमता विस्तार का यह कार्यक्रम शुरू किया है:

A. वर्ष 2034–35 तक अनुमानित थर्मल (कोयला और लिग्नाइट) क्षमता की ज़रूरत लगभग 3,07,000 मेगा वॉट होने का अनुमान है, जबकि 31.03.2023 तक स्थापित क्षमता 2,11,855 मेगा वॉट थी। इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए, बिजली मंत्रालय ने कम से कम अतिरिक्त 97,000 मेगा वॉट कोयला और लिग्नाइट-आधारित थर्मल क्षमता स्थापित करने की योजना बनाई है।

इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए, कई कार्यक्रम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। अप्रैल 2023 से 31.01.2026 तक लगभग 18,160 मेगा वॉट की थर्मल क्षमता पहले ही चालू की जा चुकी है। इसके अलावा, 38,745 मेगा वॉट की थर्मल क्षमता (जिसमें 4,845 मेगा वॉट के संकटग्रस्त थर्मल पावर प्रोजेक्ट शामिल हैं) पर अभी काम चल रहा है। 22,920 मेगा वॉट के अनुबंध दिए जा चुके हैं और उन पर काम शुरू होना बाकी है। इसके अलावा, कोयला और लिग्नाइट-आधारित संभावित 24,020 मेगा वॉट क्षमता की पहचान की गई है, जो देश में योजना के अलग-अलग चरणों में है।

B. 12,723.50 मेगा वॉट की जलविद्युत परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, 4,274 मेगा वॉट की जलविद्युत परियोजनाएँ योजना के विभिन्न चरणों में हैं और इन्हें 2031-32 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

C. 6,600 मेगा वॉट की परमाणु क्षमता निर्माणाधीन है और इसे 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 7,000 मेगा वॉट की परमाणु क्षमता योजना और अनुमोदन के विभिन्न चरणों में है।

D. 1,57,800 मेगा वॉट की नवीकरणीय क्षमता (जिसमें 67,280 मेगा वॉट सौर, 6,500 मेगा वॉट पवन और 60,040 मेगा वॉट हाइब्रिड बिजली शामिल है) निर्माणाधीन है; जबकि 48,720 मेगा वॉट की नवीकरणीय क्षमता (जिसमें 35,440 मेगा वॉट सौर और 11,480 मेगा वॉट हाइब्रिड बिजली शामिल है) योजना के विभिन्न चरणों में है और इसे 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

E. ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के क्षेत्र में, 11,620 मेगा वॉट/69,720 MWh की पंप भंडारण परियोजनाएँ (PSPs) निर्माणाधीन हैं। इसके अलावा, कुल 6,580 मेगा वॉट/39,480 MWh क्षमता की पंप भंडारण परियोजनाओं (PSPs) को सहमति मिल चुकी है, लेकिन उनका निर्माण कार्य अभी शुरू होना बाकी है। वर्तमान में, 9,653.94 मेगा वॉट/26,729.32 MWh की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) क्षमता निर्माणाधीन है, और 19,797.65 मेगा वॉट/61,013.40 MWh की बीईएसएस क्षमता निविदा के चरण में है।

2. पारेषण (Transmission) योजना: अंतर-राज्यीय और राज्य के भीतर (Intra-State) पारेषण प्रणाली की योजना तैयार कर ली गई है, और इसके कार्यान्वयन का कार्य बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि के अनुरूप ही समय-सीमा के भीतर किया जा रहा है।  राष्ट्रीय बिजली योजना के अनुसार, 2022-23 से 2031-32 तक के दस वर्ष की अवधि के दौरान, लगभग 1,91,474 ckm ट्रांसमिशन लाइनें और 1,274 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता (220 kV और उससे ऊपर के वोल्टेज स्तर पर) जोड़ने की योजना है।

उपर्युक्त के अलावा, बिजली मंत्रालय ने ट्रांसमिशन लाइनों के लिए 'राइट ऑफ़ वे' (RoW) के मुआवज़े के भुगतान के संबंध में 14.06.2024, 21.03.2025 और 15.12.2025 को दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें ज़मीन की दर को मौजूदा बाज़ार दर से जोड़ा गया है। ये दिशानिर्देश RoW से जुड़ी उन मुख्य चुनौतियों का समाधान करते हैं, जो ज़मीन मालिकों द्वारा राज्य सरकार द्वारा तय दरों से ज़्यादा मुआवज़े की मांग करने से पैदा होती हैं।

3.नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा:

i. सौर और पवन ऊर्जा की अंतर-राज्य बिक्री के लिए, 30 जून 2025 तक चालू होने वाली परियोजनाओं (जिसमें छूट जून 2028 तक हर वर्ष 25% कम होती जाएगी), जून 2028 तक चालू होने वाली सह-स्थित बीईएसएस परियोजनाओं, जून 2028 तक निर्माण कार्य सौंपे गए हाइड्रो पीएसपी परियोजनाओं, दिसंबर 2030 तक चालू होने वाली ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं और दिसंबर 2032 तक चालू होने वाली ऑफशोर पवन परियोजनाओं के लिए, 100% अंतर-राज्य ट्रांसमिशन सिस्टम (आईएसटीएस) शुल्क माफ कर दिए गए हैं।

ii. ग्रिड से जुड़ी सौर, पवन, पवन-सौर हाइब्रिड और फर्म डिस्पैचेबल आरई  (एफडीआरई) परियोजनाओं से बिजली खरीदने के लिए, टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया हेतु मानक बोली दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।

iii. नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसियां (REIAs) नियमित रूप से आरई बिजली खरीदने के लिए बोलियां आमंत्रित कर रही हैं।

iv. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को स्वचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक की अनुमति दी गई है।

v. आरई की तीव्र वृद्धि दर के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे को बढ़ाने हेतु, 2032 तक की ट्रांसमिशन योजना तैयार की गई है।

vi. नवीकरणीय बिजली के निकास (evacuation) के लिए, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत नई अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने और नई सब-स्टेशन क्षमता बनाने का समर्थन किया गया है।

vii. बड़े पैमाने पर आरई परियोजनाएं स्थापित करने के लिए आरई डेवलपर्स को ज़मीन और ट्रांसमिशन सुविधा प्रदान करने हेतु, सोलर पार्क और अल्ट्रा मेगा सोलर पावर परियोजनाओं की स्थापना की योजना लागू की जा रही है।

viii. प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम), पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, उच्च दक्षता वाले सोलर पीवी  मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जन मन) के तहत नई सौर ऊर्जा योजना (आदिवासी और पीवीटीजी बस्तियों/गांवों के लिए) और धरती आभा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए जेजीयूए), राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) योजना जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं।

ix. आरई की खपत को प्रोत्साहित करने के लिए, नवीकरणीय खरीद दायित्व (आरपीओ) और उसके बाद नवीकरणीय खपत दायित्व (आरसीओ) की रूपरेखा 2029-30 तक अधिसूचित की गई है।  आरसीओ ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत सभी नामित उपभोक्ताओं पर लागू होता है, उसका पालन करने पर जुर्माना लगेगा।

x. “ऑफशोर पवन ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए रणनीतिजारी की गई है।

xi. एक्सचेंजों के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा बिजली की बिक्री को आसान बनाने के लिए ग्रीन टर्म अहेड मार्केट (जीटीएएम) शुरू किया गया है।

xii. सोलर पीवी मॉड्यूल के लिए आपूर्ति श्रृंखला के स्थानीयकरण का लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की गई है।

अनुलग्नक

पिछले तीन वित्तीय वर्ष और मौजूदा वित्तीय वर्ष यानी 2025-26 (फरवरी, 2026 तक) के लिए देश की वास्तविक बिजली आपूर्ति स्थिति का विवरण:

वित्तीय वर्ष

ऊर्जा की आवश्यकता

आपूर्ति की गई ऊर्जा

आपूर्ति की गई ऊर्जा

पीक मांग

पूरी की गई पीक मांग

पूरी की गई मांग

(MU)

(MU)

(MU)

(%)

(MW)

(MW)

(MW)

(%)

2022-23

15,13,497

15,05,914

7,583

0.5

2,15,888

2,07,231

8,657

4.0

2023-24

16,26,132

16,22,020

4,112

0.3

2,43,271

2,39,931

3,340

1.4

2024-25

16,93,959

16,92,369

1,590

0.1

2,49,856

2,49,854

2

0.0

2025-26 (फरवरी, 2026 तक)

15,59,936

15,59,482

454

0.0

2,45,444

2,45,416

28

0.0

 

यह जानकारी विद्युत मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री श्रीपाद नाइक ने आज राज्यसभा में  लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/पीके/डीके


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