जल शक्ति मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

नदियों का पुनर्जीवन

प्रविष्टि तिथि: 16 MAR 2026 6:23PM by PIB Delhi

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), विभिन्न राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों (यूटी) के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/समितियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के अंतर्गत निगरानी स्टेशनों के एक नेटवर्क के माध्यम से नदियों और अन्य जल निकायों की जल गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है ।

तदनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) समय-समय पर प्रदूषित नदी खंडों (पीआरएस) के संबंध में रिपोर्ट प्रकाशित करता है। वर्ष 2022 और 2023 के जल गुणवत्ता डेटा के आधार पर सीपीसीबी द्वारा वर्ष 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार 271 नदियों में 296 प्रदूषित खंडों की पहचान की गई जिसमें देश में मुख्य नदी और उसकी सहायक नदी शामिल हैं। प्रदूषित नदी स्थलों और पहचाने गए प्रदूषित नदी खंडों की राज्य-वार संख्या अनुलग्नक-I में दी गई है।

वर्ष 2018 में 351 पीआरएस की संख्या घटकर वर्ष 2025 में 296 रह गई है। इसके अतिरिक्त, 149 प्रदूषित नदी खंडों को सूची से हटाया (डीलिस्ट) गया है तथा वर्ष 2018 में प्रकाशित रिपोर्ट की तुलना में वर्ष 2025 में 71 प्रदूषित नदी खंडों के जल गुणवत्ता में सुधार देखा  गया है। सूची से हटाए गए पीआरएस की राज्य-वार संख्या तथा सुधार हुए खंडों की संख्या अनुलग्नक-II में दी गई है।

सीपीसीबी वर्तमान में देशभर में 4922 स्थलों पर जलीय संसाधनों की जल गुणवत्ता की निगरानी करता है, जिनमें 2260 स्थल नदियों से संबंधित हैं, जिनमें मुख्य नदियाँ तथा सहायक नदियाँ शामिल हैं।

नदियों की सफाई/पुनर्जीवन एक सतत प्रक्रिया है। ‘जल’ राज्य का विषय है। तथापि, जल शक्ति मंत्रालय राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के प्रयासों में सहायता के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के माध्यम से गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण नियंत्रण हेतु तथा राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना एनआरसीपी के माध्यम से अन्य सभी नदियों के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की योजनाओं जैसे कायाकल्प और शहरी परिवर्तन हेतु अटल मिशन (अमृत) और स्मार्ट सिटीज मिशन के तहत सीवरेज अवसंरचना का निर्माण किया जाता है। विकसित भारत – रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना भी गाद निकालना, वनीकरण, चेक-डैम का निर्माण, जल निकायों की सफाई एवं पुनर्स्थापन आदि जैसी अनुमत गतिविधियों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से नदियों की सफाई में योगदान देती हैं।

नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा बेसिन के कुछ क्षेत्रों में एलआईडीएआर, यूएवी और ड्रोन आधारित सर्वेक्षण इत्यादि जैसी उन्नत सर्वेक्षण प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया गया है। गंगा की मुख्य धारा पर गिरने वाले आउटफॉल का प्रामाणिक वीडियोग्राफिक, विज़ुअलाइज़ेशन और मैपिंग प्रदान करने के लिए एक 'ड्रेन डैशबोर्ड' भी विकसित किया गया है। यह डैशबोर्ड जियो-टैग्ड जानकारी प्रदान करता है और राज्य तथा जिला-स्तरीय प्राधिकारियों को प्रदूषण के स्रोतों की निगरानी करने, हस्तक्षेपों को प्राथमिकता देने और प्रभावी ढंग से कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है।

यह सूचना केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी आर पाटिल द्वारा राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

*****

एनडी

 

अनुलग्नक-I

प्रदूषित नदी स्थलों और पहचाने गए प्रदूषित नदी खंडों की राज्य-वार संख्या

क्र. सं.​

राज्य

कुल

1

आंध्र प्रदेश

4

2

अरूणाचल प्रदेश

4

3

असम

6

4

बिहार

12

5

छत्तीसगढ

6

6

दमन-दीव और दादर नगर हवेली

1

7

दिल्ली

1

8

गोवा

2

9

गुजरात

10

10

हरियाणा

4

11

हिमाचल प्रदेश

10

12

जम्मू और कश्मीर

7

13

झारखंड

10

14

कर्नाटक

14

15

केरल

32

16

मध्य प्रदेश

18

17

महाराष्ट्र

54

18

मणिपुर

18

19

मेघालय

2

20

मिजोरम

4

21

नागालैंड

2

22

ओडिशा

6

23

पुदुचेरी

2

24

पंजाब

2

25

राजस्थान

8

26

सिक्किम

3

27

तमिलनाडु

9

28

तेलंगाना

5

29

त्रिपुरा

1

30

उत्तर प्रदेश

16

31

उत्तराखंड

12

32

पश्चिम बंगाल

11

कुल

296

 

अनुलग्नक-II

सूची से हटाए गए पीआरएस की राज्य-वार संख्या

क्र. सं.

राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र

पीआरएस की संख्या

1.

आंध्र प्रदेश

03

2.

असम

41

3.

बिहार

01

4.

गोवा

10

5.

गुजरात

10

6.

हिमाचल प्रदेश

02

7.

जम्मू और कश्मीर

03

8.

झारखंड

02

9.

कर्नाटक

04

10.

केरल

09

11.

मध्य प्रदेश

11

12.

मेघालय

05

13.

मिजोरम

06

14.

नागालैंड

04

15.

ओडिशा

14

16.

पुदुचेरी

01

17.

पंजाब

02

18.

सिक्किम

02

19.

तेलंगाना

04

20.

त्रिपुरा

05

21.

उत्तराखंड

01

22.

पश्चिम बंगाल

09

कुल

149

 

(ख) पीआरएस की राज्य-वार संख्या, जहाँ जल की गुणवत्ता में सुधार देखा गया।

क्र. सं.

राज्य/ संघ राज्य क्षेत्र

पीआरएस की संख्या

1.

आंध्र प्रदेश

02

2.

असम

01

3.

दमन दीव और दादर नगर

हवेली

01

4.

गुजरात

02

5.

जम्मू और कश्मीर

02

6.

झारखंड

01

7.

कर्नाटक

05

8.

केरल

04

9.

मध्य प्रदेश

03

10.

महाराष्ट्र

29

11.

मेघालय

01

12.

मिजोरम

01

13.

नागालैंड

01

14.

ओडिशा

03

15.

राजस्थान

01

16.

तमिलनाडु

02

17.

तेलंगाना

03

18.

उत्तर प्रदेश

03

19.

उत्तराखंड

02

20.

पश्चिम बंगाल

04

कुल

71

*****


(रिलीज़ आईडी: 2240881) आगंतुक पटल : 301
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu