जल शक्ति मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

जल शक्ति अभियान के अंतर्गत सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय अभिशासन

प्रविष्टि तिथि: 16 MAR 2026 6:20PM by PIB Delhi

'जल' के राज्य का विषय होने के कारण, जल संसाधनों के संरक्षण सहित, इससे संबंधित पहलुओं का अध्ययन, आयोजना, वित्तपोषण और कार्य-निष्‍पादन राज्य सरकारों द्वारा अपने संसाधनों और प्राथमिकताओं के अनुसार स्वयं किया जाता है। केंद्र सरकार राज्य सरकारों द्वारा किए जा रहे उपायों और प्रयासों में सहायता की जाती है।

जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2019 में देश के 256 जल की कमी वाले जिलों में समयबद्ध, मिशन-आधारित जल संरक्षण अभियान के रूप में जल शक्ति अभियान (जेएसए) का शुभारंभ किया। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा पूर्वोत्तर राज्यों सहित पूरे देश में वर्ष 2021 में "कैच द रेन – व्‍येर इट फाल्‍सॅ, वेन इट फाल्‍सॅ’’ टैगलाइन के साथ "जल शक्ति अभियान: कैच द रेन" (जेएसए: सीटीआर) का शुभारंभ किया गया। जेएसए: सीटीआर 2025 का शुभारंभ सामुदायिक भागीदारी और जल संरक्षण जागरूकता पर जोर देते हुए "जल संचय जन भागीदारी: जन जागरूकता की ओर" विषय के साथ किया गया।  यह अभियान जल संरक्षण कार्यों की चयन, कार्यान्‍वयन और रखरखाव में स्थानीय समुदायों को शामिल करते हुए जन भागीदारी पर बल देता है।

यह अभियान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत), पर ड्रॉप मोर क्रॉप, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) े अतर्गत मरम्मत, नवीकरण और पुनरूद्धार घटक, प्रतिपूर्ति वनीकरण निधि प्रबंधन और आयोजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) और वित्त आयोग अनुदान जैसी केंद्र, राज्य और स्थानीय निकायों की विभिन्न योजनाओं से समन्वित वित्तपोषण पर बल देता है।

जागरूकता बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम) ने युवा कार्य विभाग के साथ सहयोग किया और नेहरू युवा केंद्र संगठन (एनवाईकेएस) और उसके युवा क्लबों के व्यापक नेटवर्क का लाभ उठाते हुए जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (जेएसए: सीटीआर) अभियान के तहत जल संरक्षण प्रयासों में जमीनी स्तर पर भागीदारी को बढ़ावा दिया।

जल शक्ति मंत्रालय, स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान पहल के माध्यम से, जल संरक्षण, सतत स्वच्छता और स्वच्छता प्रथाओं को बढ़ावा देने में महिलाओं के अनुकरणीय योगदान को स्‍वीकार करता है और प्रोत्साहन देता है। यह मान्यता जल संरक्षण और इसके सतत उपयोग की दिशा में सामुदाय-आधारित प्रयास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है। मार्च 2019 से एक मासिक "वॉटर टॉक" श्रृंखला चल रही है, जिसमें महिलाओं, जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, विशेषज्ञों, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों सहित विभिन्न भागीदारों को जल संरक्षण के अपने सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

इसके अलावा, चल रहे जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (जेएसए: सीटीआर) के तहत, विभिन्न क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के कई नए मॉडल देखे जा रहे हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और समुदाय-आधारित समाधानों की विविधता को प्रदर्शित करते हैं। अगस्त 2020 से एक अलग जागरूकता अभियान, "जिला मजिस्ट्रेटों के साथ संवाद", भी आयोजित किया गया है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट/ कलेक्टर/ उपायुक्त जल संरक्षण में अपने जमीनी स्तर के नवाचारों और अनुभवों को साझा करते हैं, जिससे आपसी ज्ञानवर्धन को बढ़ावा मिलता है और सफल प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरणा मिलती है।

जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (जेएसए: सीटीआर) को और मजबूत बनाने के लिए 6 सितंबर 2024 को सूरत, गुजरात में "जल संचय जन भागीदारी" (जेएसजेबी) पहल शुरू की गई। जेएसजेबी पहल का उद्देश्य कम लागत और अधिकतम क्षमता के साथ वर्षा जल संचयन संरचनाओं के निर्माण हेतु सामुदायिक भागीदारी को तीव्र करना है। यह पहल सामुदायिक निधियों, व्यक्तिगत दान, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व निधियों और अन्य स्रोतों का उपयोग करते हुए स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री से बोरवेल, रिचार्ज शाफ्ट, रिचार्ज पिट जैसी कम लागत वाली संरचनाओं का निर्माण करती है, जिससे वर्षा जल का संचयन करके भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके और जल संबंधी समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान प्रदान किया जा सके। इसका उद्देश्य समाज और सरकार के समग्र सहयोग से सामूहिक प्रयासों के माध्यम से पानी की हर बूंद का संरक्षण सुनिश्चित करना है। सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देकर, यह पहल जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए सूक्ष्म स्तर पर लागत प्रभावी, स्थानीय समाधान विकसित करने का प्रयास करती है। जेएसजेबी पहल तीन सी-क्‍म्‍यूनिटी, सीएसआर और कॉस्‍ट के सिद्धांत द्वारा निर्देशित है, जो प्रभावी समन्वय और अधिकतम परिणामों को सुनिश्चित करती है। सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय अधिकारियों के साथ साझेदारी में जेएसजेबी पहल को बढ़ावा देती है जिससे इसकी व्यापक पहुंच और जागरूकता सुनिश्चित हो सके। इस पहल का उद्देश्य गैर सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, नागरिक समाजों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे हितधारकों के साथ साझेदारी स्थापित करना है ताकि व्यापक रूप से समुदाय को प्रभावी ढंग से शामिल किया जा सके।

जेएसजेबी पहल के अंतर्गत, विभिन्न क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के कई नए मॉडल देखे जा रहे हैं, जो स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल और समुदाय-आधारित समाधानों की विविधता को दर्शाते हैं। इनमें से कुछ नीचे दिए गए हैं।

  1. “कर्मभूमि से मातृभूमि” मॉडल गुजरात में कार्यरत व्यक्तियों द्वारा अपने गृह राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार में भूजल पुनर्भरण परियोजनाओं में किए गए योगदान को दर्शाता है। इस स्वैच्छिक और भावनात्मक निवेश ने सतत भूजल पुनर्भरण के लिए अंतरराज्यीय समर्थन को संभव बनाया है।
  2. गुजरात में गिर गंगा ट्रस्ट मॉडल जल संरक्षण के लिए परोपकारी और समुदाय-आधारित दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। स्थानीय समुदायों ने पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण, संचालन और रखरखाव में श्रम और संसाधनों के माध्यम से सक्रिय योगदान दिया है, जिससे स्वामित्व की भावना और दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ावा मिला है। यह मॉडल दर्शाता है कि नागरिक समाज की भागीदारी भूजल पुनर्भरण प्रयासों को व्यापक स्तर पर बढ़ाने में किस प्रकार परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है।
  3. महाराष्ट्र में जल तारा मॉडल के अंतर्गत किसान कृषि भूमि पर व्यवस्थित रूप से 4 फीट×4 फीट×6 फीट आकार के मानकीकृत जल पुनर्भरण पिट बनाते हैं। यह सरल तकनीक किन्‍तु प्रभावशाली हस्‍तक्षेप जल के रिसाव को काफी हद तक बढ़ाता है और उथले जलभृतों के पुनर्भरण में सहायक होता है, जिससे फसल उत्पादकता और भूजल स्थिरता दोनों को लाभ होता है।
  4. छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का 5% मॉडल दर्शाता है कि कृषि योग्य भूमि के 5% हिस्से पर सीढ़ीदार पुनर्भरण पिट बनाकर स्थानीय जलभृत पुनर्भरण को कैसे बेहतर बनाया जा सकता है। यह मॉडल जल संरक्षण को भूमि उपयोग नियोजन और कृषि पद्धतियों में सीधे एकीकृत करता है, जिसके परिणामस्वरूप मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ती है और भूजल स्तर में सुधार होता है। प्रत्येक खेत में, "पिट के भीतर पिट" डिजाइन में एक उथला सीढ़ीदार जलभृत पिट बनाया जाता है, जिसमें किसान स्वेच्छा से अपनी कृषि योग्य भूमि का 5% हिस्सा देते हैं।
  5. गुजरात के बनासकांठा में, शुष्क क्षेत्रों में कम लागत वाली कृत्रिम जल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण पर केंद्रित एक व्यापक पहल की गई है। यह पहल कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि और किसान सहकारी समितियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से संभव हो पाई है। यह मॉडल दर्शाता है कि कैसे सार्वजनिक-निजी सहयोग क्षेत्रीय जल संकट को प्रभावी ढंग से दूर कर सकता है और जल की कमी वाले क्षेत्रों के लिए एक व्यापक और अनुकरणीय समाधान प्रदान करता है।

 

पंचायती राज संस्थाएं (पीआरआई) समुदायों को एकजुट करने, स्थानीय स्तर पर योजना बनाने और जल संरक्षण कार्यों के सहभागी कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं। महिला स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), युवा, छात्र और स्थानीय सामुदायिक समूह जागरूकता पैदा करने, व्यवहार परिवर्तन संचार और सामाजिक एकजुटता में सक्रिय रूप से शामिल होते हैं, जिससे जमीनी स्तर पर भागीदारी और स्वामित्व मजबूत होता है। जमीनी स्तर पर जागरूकता, तकनीकी समझ और सहभागी कार्यान्वयन को बढ़ाने के लिए आईईसी गतिविधियां, सामुदायिक बैठकें और जमीनी स्तर पर संपर्क आयोजित किए जाते हैं।

इस मंत्रालय द्वारा तैयार की गई और उत्तर पूर्वी राज्यों सहित सभी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकारों को भेजी गई राष्ट्रीय जल नीति (2012) में अन्य बातों के अलावा जल के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा का समर्थन किया गया है और वर्षा जल संचयन, वर्षा जल के प्रत्यक्ष उपयोग और अन्य प्रबंधन उपायों के माध्यम से जल की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। जल की कमी के प्रभाव को कम करने के लिए, यह अन्य बातों के अलावा, समुदाय आधारित जल प्रबंधन के संस्थागत और सुदृढ़ीकरण, सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से नदियों, नदी गलियारों, जल निकायों और बुनियादी अवसंरचना के वैज्ञानिक रूप से नियोजित संरक्षण, जल के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग, जिसमें वापसी प्रवाह भी शामिल है, सिंचाई में जल-बचत विधियों को प्रोत्साहन और बढ़ावा देने का समर्थन करता है, जैसे कि प्राकृतिक संसाधन संपदा के साथ फसल पैटर्न का संरेखण, सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप, स्प्रिंकलर), स्वचालित सिंचाई संचालन, वाष्पीकरण-वाष्पोत्सर्जन में कमी।

यह सूचना जल शक्ति राज्यमंत्री श्री राज भूषण चौधरी द्वारा राज्यसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

*****

एनडी


(रिलीज़ आईडी: 2240878) आगंतुक पटल : 141
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English , Urdu