राज्यसभा सचिवालय
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विभाग-संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति की 161वीं रिपोर्ट पर प्रेस विज्ञप्ति

प्रविष्टि तिथि: 16 MAR 2026 6:07PM by PIB Delhi

श्री बृज लाल, सदस्य, राज्य सभा की अध्यक्षता में विभाग-संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग तथा पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय) की अनुदान मांगों (2026-27) के सम्बन्ध में अपना 161वां प्रतिवेदन          16 मार्च, 2026 को राज्य सभा में प्रस्तुत किया और 16 मार्च, 2026 को लोक सभा के सभा पटल पर रखा गया

     अनुदान मांगों की जांच करते हुए,  समिति ने 18 फरवरी, 2026 को आयोजित बैठक के दौरान चालू वित्तीय वर्ष में भारत की संचित निधि से किए गए व्यय की तुलना में राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) के साथ-साथ प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग और पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के कार्यनिष्पादन, कार्यक्रमों और नीतियों का मूल्यांकन भी किया

समिति ने सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग तथा पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के साथ अपनी बैठक में अनुदान मांगों की विस्तृत समीक्षा की। समिति द्वारा 12  मार्च, 2026  को प्रतिवेदन पर विचार किया गया और उसे स्वीकार किया गया । समिति द्वारा इस प्रतिवेदन में की गई सिफारिशें/समुक्तियां संलग्न हैं। संदर्भ के उद्देश्य से प्रत्येक सिफारिश/समुक्ति के अंत में प्रतिवेदन के पैरा संख्या का उल्लेख किया गया है। संपूर्ण प्रतिवेदन  https://sansad.in/rs/hi पर उपलब्ध है।
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग तथा पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग की अनुदान मांगों (2026-27) से संबंधित 161वां वें प्रतिवेदन की मुख्य सिफारिशें/समुक्तियां

 

डीएआरपीजी का बजट विश्लेषण

  1. बजट उपयोगिता में सुधार करने तथा अनुमानों की विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से समिति सिफारिश करती है कि विभाग को पिछले तीन वर्षों की अपनी योजनाओं और गतिविधियों की कड़ी आंतरिक समीक्षा करनी चाहिए, उन विशिष्ट शीर्षों और परियोजनाओं की पहचान करनी चाहिए जहां चूक हुई है। साथ ही, गतिविधि के अनुसार यथार्थवादी समय-सीमाएँ तैयार की जानी चाहिए ताकि भविष्य के बजट अनुमान व्यापक समग्र अनुमानों के स्थान पर स्पष्ट रूप से चरणबद्ध कार्यान्वयन योजनाओं पर आधारित हों।

(पैरा 2.11)

 

  1. समिति यह भी सिफारिश करती है कि विभाग अपने तिमाही निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ करे, जिसमें भौतिक तथा वित्तीय उपलब्धियों स्पष्टत: निर्धारित हों तथा समय-समय पर वर्ष के बीच में समीक्षाएँ हों ताकि संभावित अल्प-व्यय  की पहचान प्रारंभिक चरण में ही हो जाए और आवश्यक सुधारात्मक कदम, जैसे विभिन्न शीर्षों में पुनर्विनियोजन, समय पर पुनः आवंटन अथवा लंबित अनुमोदनों में तेजी, उठाए जा सकें, ताकि बीई, आरई और वास्तविक व्यय के बीच के अंतर को न्यूनतम किया जा सके।

(पैरा 2.12)

 

  1. समिति यह भी सिफारिश करती है कि वित्त मंत्रालय को प्रस्तुत किए जाने वाले अनुमान तैयार करते समय विभाग को अपने प्रस्ताव पहले के इस्तेमाल, कार्यान्वयन क्षमता के यथार्थवादी आकलन तथा स्पष्ट रूप से तैयार परियोजना-पाइपलाइन के आधार पर तैयार करने चाहिए ताकि अनुमानों और अंततः स्वीकृत बजट अनुमान के बीच के अंतर, तथा बाद में किए जाने वाले संशोधनों को कम किया जा सके और विभाग की बजटीय मांगों की विश्वसनीयता भी सुदृढ़ हो।

(पैरा 2.13)

  1. समिति के मत में, वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नकद प्रबंधन प्रावधानों (परिशिष्ट-I) के बावजूद 28 शीर्षों में उच्च स्तर की अव्ययता का बने रहना इस तथ्य की ओर संकेत करता है कि विभाग के प्रारंभिक एमईपी / क्यूईपी तथा बजटीय अनुमान यथार्थवादी कार्यान्वयन क्षमता के साथ पर्याप्त रूप से संरेखित नहीं थे, और यह भी कि वर्ष के मध्य में आवश्यक समायोजन तथा पुनर्विनियोजन  प्रभावी रूप से नहीं किए गए।

(पैरा 2.17)

 

  1. समिति सिफारिश करती है कि विभाग को शीर्ष-वार विस्तृत समीक्षा करनी चाहिए, प्रशासनिक, प्रक्रियात्मक अथवा क्रियान्वयन संबंधी विशिष्ट अवरोधों की पहचान करनी चाहिए तथा प्रत्येक मामले में अव्यय के कारणों का तथ्यात्मक विवरण और प्रस्तावित सुधारात्मक उपायों सहित एक नोट समिति को प्रस्तुत करना चाहिए।

(पैरा 2.18)

 

  1. समिति आगे यह भी सिफारिश करती है कि आगामी वर्षों से विभाग अपने बजट अनुमान तथा मासिक/तिमाही व्यय योजनाएँ प्रत्येक योजना के विस्तृत आकलन के आधार पर तैयार करे, जिसमें योजना की तैयारी की अवस्था, निविदा कार्यक्रम तथा पिछले वर्षों के वास्तविक व्यय पैटर्न को ध्यान में रखा जाए जिससे व्यय सभी तिमाहियों में अधिक संतुलित रूप से वितरित किया जा सकेगा, वित्तीय वर्ष के अंत में व्यय की जल्दबाजी  से बचा जा सकेगा, और विभाग के बजटीय प्रस्ताव तथा नकद प्रवाह अनुमान वर्तमान नकद प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत अधिक यथार्थवादी और विश्वसनीय बन सकेंगे।

(पैरा 2.19)

 

  1. समिति सिफारिश करती है कि विभाग अपनी आंतरिक परियोजना योजना और प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करे, विशेष रूप से लोक शिकायतों के निवारण के लिए व्यापक प्रणाली के घटकों के लिए, ताकि बजटीय प्रावधान समय पर लागू हो सकें और संशोधित अनुमान  चरण में आवर्ती कटौती से बचा जा सके।

(पैरा 2.23)

डीएआरपीजी की नीतियाँ, कार्यक्रम तथा योजनाएँ

  1. समिति, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, जल प्रबंधन, खेल, लोक शिकायत, सेवा वितरण और नवाचार जैसे क्षेत्रों को शामिल करने वाले अलग-अलग और संबंधित थीम्स पर राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार श्रृंखला की संकल्पना करने और उसे आयोजित करने में विभाग की पहल की सराहना करती है। समिति का मानना ​​है कि इन वेबिनार्स ने प्रशासन के अलग-अलग स्तरों के बीच क्रॉस अधिगम और सर्वोत्तम परिपाटियों के विस्तार के लिए एक प्रभावी प्लेटफॉर्म का काम किया है। इस रचनात्मक प्रयास के लिए विभाग की सराहना करते हुए, समिति को लगता है कि गवर्नेंस के कुछ उभरते हुए क्षेत्रों, विशेषकर जिनमें उन्नत प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल है, उन्हें भी सामान्य थीम्स के तौर पर शामिल किया जा सकता है ताकि वेबिनार श्रृंखला की व्यापकता और समकालीन प्रासंगिकता बढ़ सके।

(पैरा 2.38)

 

  1. इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार श्रृंखला के लिए विषयों का चयन करते समय, विभाग को गवर्नेंस और सेवा वितरण में सुधार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग को भी एक आवर्ती विषय के रूप में शामिल करना चाहिए, ताकि राज्य और जिले यह सीख सकें कि पुरस्कार विजेता पहलों द्वारा एआई आधारित उपकरणों को व्यावहारिक रूप से कैसे क्रियान्वित किया जा रहा है और गवर्नेंस को सरल, तीव्र और नागरिकों के लिए अधिक अनुकूल बनाने के लिए इन समाधानों का अनुकरण कर सकें।

(पैरा 2.39)

 

  1. समिति यह भी चाहती है कि एक समेकित विवरण प्रस्तुत किया जाए जिसमें बताया जाए कि इन आयोजनों में दर्शाई गई कितनी सर्वोत्तम परिपाटियों को अन्य राज्यों या मंत्रालयों द्वारा अपनाया गया है, तथा इससे क्या परिणाम मिले हैं।

(पैरा 2.40)

 

  1. समिति प्रस्ताव करती है कि विभाग अपने दायरे में आने वाले उन मंत्रालयों और विभागों/संस्थाओं को पुरस्कृत करें, जो अनुकरणीय बजट नियोजन कर दिखाते हैं, जिसे अन्य बातों के साथ साथ बजट अनुमानों, संशोधित अनुमानों और वास्तविक व्यय के बीच कम से कम अंतर होने से मापा जाता है, ताकि सभी सरकारी संगठनों में लाभकारी प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया जा सके और राजकोषीय अनुगवर्नेंस को सुदृढ़ किया जा सके।

(पैरा 2.41)

 

  1. समिति का मानना ​​है कि पिछले कुछ सालों में पंजीकृत लोक शिकायतों की संख्या बढ़ी है। हालांकि यह दिखाता है कि लोगों में जागरूकता बढ़ रही है और शिकायतों के समाधान तंत्र पर उनका भरोसा बढ़ रहा है, लेकिन समिति का मानना ​​है कि इन शिकायतों के मूल कारण का विश्लेषण करना और उनसे होने वाले ठोस परिणामों का पता लगाना भी उतना ही आवश्यक है।

(पैरा 2.47)

 

  1. इसे देखते हुए, समिति यह सिफारिश करती है कि विभाग बार-बार आने वाली और अधिक प्रभावकारी शिकायतों के व्यापाक मूल कारण का विश्लेषण संस्थागत करे, और नतीजों का तंत्र सुधार हेतु उपयोग करे, ताकि न केवल निपटान संबंधी आंकड़ों को बेहतर बनाया जा सके अपितु शिकायतों के मामलों को कम किया जा सके। समिति इस बात पर भी ज़ोर देती है कि शिकायतों के समाधान को केवल एक सांख्यिकीय कार्य नहीं माना जाना चाहिए और उन मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए जो अनसुलझे हैं और बार-बार फिर से खोले गए हैं, और ध्यान केंद्र शिकायतों को केवल औपचारिक तौर पर बंद करने के बजाय वास्तविकता में नागरिक संतुष्टि और सही समाधान सुनिश्चित करने पर होना चाहिए।

(पैरा 2.48)

  1. समिति समुक्ति करती है कि राष्ट्रीय ई-सेवा वितरण आकलन (एनईएसडीए) 2025 शुरू हो चुका है और इसके जून/जुलाई 2026 तक पूरा होने की अपेक्षा है। विभाग की लिखित प्रस्तुति में, समिति ने नोट किया कि राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के कुछ एकल संपर्क बिंदुओं (एसपीओसी) द्वारा देरी से और अधूरा डेटा प्रस्तुत करने से आकलन प्रक्रिया की दक्षता और निपुणता पर असर पड़ रहा है। समिति ने आगे बताया कि विभाग एसपीओसी के साथ समीक्षा बैठक कर रहा है और डेटा और जानकारी समय पर और सही तरीके से जमा करने के लिए उन्हें जागरूक करने और उनका समर्थन करने के लिए कार्यशाला करने की योजना बना रहा है, जो एक अच्छा कदम है।

(पैरा 2.53)

 

  1. समिति यह सिफारिश करती है कि चूंकि ई-गवर्नेंस पर राष्ट्रीय सम्मेलन में पहले से ही राज्यों के वरिष्ठ आईटी और प्रशासनिक अधिकारी, डीएआरपीजी तथा एमईआईटीवाई एकजुट हो रहे हैं, और यह डिजिटल गवर्नेंस पर केंद्रित है और एनईएसडीए के लिए स्टेट एसपीओसी द्वारा बार-बार गलत डेटा प्रस्तुत किये जाने वाले मुद्दों को देखते हुए, डेटा गैप को दूर करने, कम क्षमता वाले राज्यों को सहायता प्रदान करने और समय पर डेटा गुणवत्ता में सुधार पर सहमत होने के लिए सभी राज्यों /संघ राज्य क्षेत्रों के साथ एनईएसडीए और सीपीजीआरएएमएस एसपीओसी पर एक अतरिक्त बैठक को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन का आवश्यक हिस्सा बनाया जाए।

) पैरा 2.54)

 

  1. समिति, जिला सुशासन सूचकांक (डीजीजीआई) को बनाने और लागू करने में विभाग की प्रयासों की सराहना करती है। यह जिला स्तर पर गवर्नेंस संबंधी कार्य निष्पादन को बेंचमार्क करने की एक प्रगतिशील पहल है। समिति का कहना है कि इस नए तरीके से जिलों के बीच लाभकारी प्रतिस्पर्धा की भावना आई है और कमियों को पहचानने और नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए एक मूल्यवान कार्ययोजना मिली है। समिति सिफारिश करती है कि डीजीजीआई का और अधिक राज्यों तक विस्तार किया जाए, विशेष तौर पर आकांक्षी जिलों और जिन जिलों पर शिकायतों का बोझ ज़्यादा है, पर ध्यान दिया जाए ताकि जिला स्तर पर प्रतिस्पर्धा और डेटा आधारित गवर्नेंस को वहां सुदृढ़ किया जा सके जहां उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।

 (पैरा 2.60)

 

  1. विभाग की लिखित प्रस्तुति की जांच करने पर, समिति ने पाया कि एससीआई परियोजनाओं को लागू करने में बड़ी मुश्किलें आती हैं, जैसे उपयोगिता प्रमाणीकरण, परियोजना प्रतिवेदन और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने में देरी और जिला कलेक्टरों और परियोजना का क्रियान्वयन करने वाले कर्मियों के बार-बार स्थानांतरण, जिससे निरंतरता और संस्थागत स्मृति की हानि होती है। समिति यह सिफारिश करती है कि भविष्य में होने वाली राज्यीय सहयोग पहल एमओयू में निधियों कों माइलस्टोन से जोड़कर चरणबद्ध तरीके से जारी करना और समय पर उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करना शामिल होगा; और खास अधिकारियों के स्थानांतरण पर आवश्यक हैंडओवर नोट्स दिए जाएंगे, ताकि संस्थानगत स्मृति बनी रहे और वित्तीय अनुशासन बना रहे।

(पैरा 2.63)

 

  1. समिति सिफारिश करती है कि हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देते हुए विभाग यह सुनिश्चित करे कि सभी दिशा-निर्देश, सीएसएमओपी के मुख्य भाग तथा ई-ऑफिस प्रयोग सरल व आसानी से समझ में आने वाली हिंदी में उपलब्ध कराए जाएं तथा हिंदी के अत्यधिक तकनीकी या जटिल प्रशासनिक उपयोग से बचा जाए।

(पैरा 2.66)

 

  1. समिति की यह अभिलाषा है कि e‑Office तथा व्यापक रूप से प्रचलित ऑफिस प्रोडक्टिविटी सूट्स के बीच निर्बाध माइग्रेशन एवं अंतःसंचालन सुनिश्चित करने हेतु उपयुक्त तकनीकी सुधार तथा प्लगइन विकसित किए जाएँ, ताकि फ़ाइलें एवं दस्तावेज़ बिना किसी प्रारूपगत समस्या या कार्यात्मकता में कमी के तैयार, संपादित एवं साझा किए जा सकें।

(पैरा 2.73)

 

  1. समिति सिफारिश करती है कि विशेष अभियानों के दौरान रिकॉर्ड हटाए जाने की ड्राइव को जारी रखते हुए, विभाग को सभी मंत्रालयों/विभागों को विस्तृत निर्देश जारी करने चाहिए कि:
  1. छंटनी के दौरान पहचाने गए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण या दुर्लभ दस्तावेज़ों (जिसमें प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों, ऐतिहासिक प्रशासनिक फ़ैसलों और महत्वपूर्ण संस्थागत उपलब्धियों से संबंधित रिकॉर्ड शामिल हैं) को अलग किया जाएगा और नष्ट नहीं किया जाएगा।;
  2. ऐसे अभिलेखों की समीक्षा नामित अधिकारियों द्वारा, जहाँ आवश्यक हो, पेशेवर पुरालेखपालों के परामर्श से की जाएगी; और
  3. समीक्षा के बाद, इन दस्तावेजों को उचित तरीके से  सूचीबद्ध के साथ इन-हाउस संरक्षित किया जाएगा या स्थायी संरक्षण के लिए राष्ट्रीय अभिलेखागार या अन्य अधिकृत अभिलेखीय भंडारों को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

(पैरा 2.82)

 

  1. समिति अगले चार सालों के लिए अतरराष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (आईआईएएस) का अध्यक्ष पद संभालने के लिए भारत की तारीफ़ करती है, जो वैश्विक लोक प्रशासन में देश का नेतृत्व दिखाने में एक अहम उपलब्धि है। समिति विशेष तौर पर 10-14 फरवरी 2025 तक नई दिल्ली में सालाना आईआईएएस-डीएआरपीजी इंडिया कॉन्फ्रेंस 2025 की सफलतापूर्वक मेजबानी करने के लिए विभाग की  सराहना करती है।

(पैरा  2.87)

 

  1. समिति ने सम्मेलन के दौरान 710-पृष्ठ के प्रकाशन विकसित भारत  के विमोचन को संतुष्टि के साथ नोट किया और इस ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के लिए विभाग की सराहना की जिसने अंतरराष्ट्रीय अभिशासन की वैश्विक चर्चा में भारत का कद ऊंचा किया है।   

(पैरा 2.89)

 

  1. समिति लोक शिकायत निवारण तंत्र के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) के ज़रिए सीपीग्राम पोर्टल पर हिंदी और अंग्रेजी में अल्पावधि की फिल्में बनाने के लिए विभाग की कोशिशों की सराहना करती है। तथापि, समिति ने समुक्ति की है कि इन फिल्मों की उपलब्धता और उपयोगिता के बारे में लोगों में जागरूकता बहुत कम है।                                                                                                  (पैरा  2.101)

 

  1. इसलिए, समिति यह सिफारिश करती है कि विभाग इन फिल्मों का, खासकर डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके, बड़े पैमाने पर प्रसार करने के लिए बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान चलाए और यह सुनिश्चित करे कि सीपीग्राम पोर्टल का लाभ आम नागरिक तक पहुंचे, क्योंकि नहीं तो ऐसी फिल्में बनाने का मकसद काफी हद तक अधूरा रह जाएगा।                                                                                           (पैरा 2.102)

 

  1. समिति की यह आशा है कि विभाग नेक्स्टजेन सीपीग्राम के लिए संशोधित क्रियान्वयन समयसीमा का पालन करने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाएगा तथा विभाग द्वारा निर्धारित इस संशोधित समयसीमा के अनुरूप प्रगति की निकटता से निगरानी करेगा।

(पैरा 2.110)

 

  1. समिति यह सिफारिश करती है कि शिकायत दर्ज करने में सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) की बढ़ती भूमिका को देखते हुए, विभाग को सभी सीएससी संचालकों के लिए सीपीग्राम प्रक्रिया, नागरिक इंटरफ़ेस और शिकायत श्रेणी के संबंध में ज़रूरी और समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार से मंज़ूर सीएससी को नागरिक निजी केंद्रों से अलग स्पष्ट रूप से प्रदर्शित साइन बोर्ड के माध्यम से साफ़ तौर पर और एक समान रूप से पहचाने जा सकें।

(पैरा 2.115)

 

  1. समिति यह भी सिफारिश करती है कि सीएससी के ज़रिए शिकायत करने वाले हर शिकायतकर्ता को शिकायत की पूरी प्रति दी जाए जैसी कि सिस्टम में वास्तव में दर्ज की गई, न कि सिर्फ़ एक रसीद, और विभाग उपयुक्त मानक संचालन प्रक्रियाओं और निगरानी के साथ जवाबदेही के स्पष्ट तंत्र बनाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सीएससी संचालकों की गलतियों, चूक या गलत कार्यों से शिकायतकर्ताओं के अधिकारों या हितों को नुकसान न हो।

(पैरा 2.116)

 

  1. समिति का मानना है कि विभाग को नागरिकों को उन शिकायतों को फिर से खोलने का विकल्प देना चाहिए जो गलत तरीके से बंद कर दी गई हैं, कि उन्हें उसी मामले के लिए नई शिकायतें दर्ज करने के लिए मजबूर करना चाहिए। समिति यह भी चाहती है कि मौजूदा बाइनरी फीडबैक प्रणाली को बेहतर बनाया जाए ताकि उसमें पूरी तरह से संतोषजनक, संतोषजनक, असंतोषजनक, खराब और बहुत खराब जैसे ग्रेडेड विकल्प शामिल किए जा सकें, ताकि नागरिकों के अनुभव को ज़्यादा सही तरीके से समझा जा सके और शिकायत सुलझाने की गुणवत्ता का बारीक विश्लेषण किया जा सके।

(पैरा 2.117)

 

  1. समिति सिफारिश करती है कि विभाग विकास, सुरक्षा लेखापरीक्षा, चयनित मंत्रालयों/विभागों और राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में पायलट परीक्षण और पूर्ण पैमाने पर तैनाती को कवर करने वाली समयबद्ध कार्यान्वयन योजना तैयार करे, साथ ही प्रतिक्रिया समय, शिकायत वर्गीकरण की सटीकता और अपटाइम के लिए स्पष्ट सेवा स्तर मानदंड निर्धारित करे। यह इस सुविधा के समय पर कार्यान्वयन में मदद करेगा।

(पैरा 2.123)

 

  1. समिति का मानना है कि एआई-संचालित बहु-मोडल बहु-भाषी सहायक और नेक्स्टजेन सीपीग्राम्स को डिज़ाइन करते समय, विभाग को व्यापक पहुँच सुविधाएँ प्रदान करनी चाहिए, जिसमें आवाज़ आधारित बातचीत, कम साक्षरता वाले उपयोगकर्ताओं के लिए सरल इंटरफेस, दिव्यांगजन के अनुकूल डिज़ाइन और फ़ोटो, वीडियो और दस्तावेज़ अपलोड करने की क्षमता शामिल हो, जबकि मजबूत डेटा सुरक्षा और गोपनीयता सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

(पैरा 2.124)

 

  1. समिति सिफारिश करती है कि विभाग राज्य सरकारों और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों )एटीआई) के परामर्श से एक समयबद्ध क्षमता निर्माण कार्य योजना तैयार करे, जिसमें राज्य, जिले और उप-जिला स्तर पर अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए मात्रात्मक वार्षिक लक्ष्य शामिल हों, सभी प्रमुख सेवा-प्रदानी विभागों को कवर किया जाए और नेक्स्टजेन सीपीग्राम्स सुविधाओं पर अनिवार्य अभिमुखीकरण सुनिश्चित किया जाए।

(पैरा 2.136)

*****

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीपीपीडब्ल्यू)

डीपीपीडब्ल्यू का बजट विश्लेषण

  1. समिति यह सिफारिश करती है कि पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय तथा अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय कर, अपने कार्यालय भवन को किराए के स्थान में रखने के बजाय, जहाँ भी व्यावहार्य हो, सरकारी स्वामित्व वाले किसी उपयुक्त परिसर में स्थानांतरित करने के लिए तेज़ी से कदम उठाए। ऐसे स्थानांतरण से बारबार होने वाले किराए के व्यय को समाप्त कर सार्वजनिक कोष में उल्लेखनीय बचत की जा सकेगी।

(पैरा 3.6)

 

  1. शीर्ष मद 05.03.28 – पेशेवर सेवाएं के तहत, समिति वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान आवंटन में तेज़ और अत्यधिक बढ़ोतरी देखती है। वित्तीय वर्ष 2023–24 और 2024–25 के दौरान बजट अनुमान ₹12 लाख रहा, जबकि 2025–26 के दौरान यह तेज़ी से बढ़कर ₹3.00 करोड़ हो गया। हालांकि, 13 जनवरी 2026 तक वास्तविक व्यय केवल ₹1.03 करोड़ था। समिति ने नोट किया कि आवंटन और वास्तविक उपयोग (केवल 34.33 प्रतिशत) के बीच यह बड़ा अंतर आवश्यकताओं के अधिक अनुमान और व्यय के अपर्याप्त नियोजन को दर्शाता है।

(पैरा 3.7)

 

  1. शीर्ष मद 05.03.31 – सहायता अनुदान के अंतर्गत, समिति ने नोट किया कि वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए बजट अनुमान ₹3.00 करोड़ था, जिसे संशोधित अनुमान चरण में घटाकर ₹1.00 करोड़ कर दिया गया, जबकि 13 जनवरी 2026 तक वास्तविक व्यय केवल ₹10.50 लाख था। समिति को चिंता है कि कल्याणसंबंधी गतिविधियों के लिए दी गई निधि (केवल 3.5 प्रतिशत) का इतना कम उपयोग पेंशनभोगियों के कल्याण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।

(पैरा 3.8)

 

  1. उपर्युक्त समुक्तियों को देखते हुए, समिति यह सिफारिश करती है कि विभाग अपने बजट अनुमान और वित्तीय नियोजन प्रक्रिया को सुदृढ़ करे ताकि यथार्थवादी अनुमान सुनिश्चित किए जा सकें और बजट अनुमान, संशोधित अनुमान और वास्तविक व्यय के बीच बड़े अंतर से बचा जा सके, विशेषकर शीर्ष मद 05.03.27 (छोटेमोटे कार्य), 05.03.28 (पेशेवर सेवाएँ), और 05.03.31 (सहायता अनुदान) के अंतर्गत।

(पैरा 3.9)

  1. समिति आंतरिक वित्तीय निगरानी प्रणाली को भी सुदृढ़ करने की सिफारिश करती है ताकि आवंटित निधि का समय पर और इष्टतम उपयोग किया जा सके तथा संसाधनों के परिहार्य अल्पउपयोग से बचा जा सके।

(पैरा 3.10)

डीपीपीडब्ल्यू की नीतियाँ, कार्यक्रम एवं योजनाएँ

  1. इसीलिए, समिति सिफारिश करती है कि विभाग असुरक्षित एवं विशेष श्रेणियों के पेंशनभोगियों, जिसमें सेवानिवृत्त कारीगर, वृद्ध पेंशनभोगी तथा सुदूर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले पेंशनभोगी शामिल हैं, के लिए लक्षित एवं समावेशी जागरूकता अभियान चलाए। ये जागरूकता पहल पेंशनभोगियों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की अनिवार्य आवश्यकता, संबंधित समयसीमाओं तथा चेहरे का प्रमाणीकरण, मोबाइलआधारित प्रस्तुतिकरण एवं सहायताप्राप्त मोड सहित डीएलसी जमा करने के विभिन्न उपलब्ध तरीकों के बारे में शिक्षित करने पर केंद्रित हों।

(पैरा 3.14)

 

  1. समिति आगे सुझाव देती है कि ऐसे जागरूकता अभियान पेंशनभोगी कल्याण संघों, सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी), बैंकों, डाकघरों, स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों तथा क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं सहित बहुजनसंपर्क चैनलों के माध्यम से आयोजित किए जाएँ। डिजिटल पहुँच या गतिशीलता संबंधी बाधाओं वाले पेंशनभोगियों के लिए डीएलसी जमा करने की सुविधा प्रदान करने हेतु विशेष सहायता तंत्र भी स्थापित किए जा सकते हैं।

(पैरा 3.15)

 

  1. इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि विभाग सीपेंग्राम्स के माध्यम से प्राप्त होने वाली वार्षिक पेंशनसंबंधी शिकायतों की प्रकृति एवं श्रेणियों का विस्तृत विश्लेषण करे, ताकि शिकायतउत्पत्ति में योगदान देने वाली पुनरावर्ती समस्याओं, प्रक्रियात्मक बाधाओं तथा प्रणालीगत कमियों की पहचान की जा सके। समिति आगे सिफारिश करती है कि विभाग प्रक्रियासरलीकरण, डिजिटल पेंशन संसाधन प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण, प्रबंधन अधिकारियों के क्षमतानिर्माण तथा उन्नत निगरानी तंत्रों सहित उपयुक्त प्रणालीगत सुधारों को कार्यान्वित करे, ताकि मूल स्रोत पर शिकायतउत्पत्ति को न्यूनतम किया जा सके।

(पैरा 3.19)

 

  1. समिति ने नोट किया कि पेंशन अदालतें पेंशनसंबंधी शिकायतों के त्वरित एवं तात्कालिक निवारण हेतु एक महत्वपूर्ण संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करती हैं। तथापि, ऐसी अदालतों की प्रभावशीलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि पेंशनभोगियों को इन अवसरों की अग्रिम जानकारी कितने प्रभावी रूप से उपलब्ध कराई जाती है। समिति का मत है कि समयबद्ध एवं पर्याप्त सूचनाप्रसार के अभाव में अनेक पात्र पेंशनभोगी, विशेष रूप से सुदूर क्षेत्रों में निवास करने वाले या सीमित डिजिटल पहुँच वाले पेंशनभोगी, इस शिकायतनिवारण तंत्र का लाभ उठाने से वंचित रह सकते हैं।

(पैरा 3.22)

 

  1. समिति विभाग द्वारा पेंशन अदालतों के आयोजन से पर्याप्त समय पूर्व उनके आयोजन के बारे में व्यापक एवं समन्वित जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर बल देती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन पेंशनभोगियों की शिकायतें लंबे समय से लंबित हैं, उन्हें समय से सूचित किया जा सके और वे भाग ले सकें। पेंशन अदालतों संबंधी जानकारी पेंशनभोगी कल्याण संघों, पेंशन वितरण बैंकों, डाकघरों तथा संबंधित सरकारी कार्यालयों सहित बहुचैनलों के माध्यम से, तथा आधिकारिक वेबसाइटों, पेंशन पोर्टल, एसएमएस अलर्ट और सोशल मीडिया जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से भी प्रसारित की जानी चाहिए।

(पैरा 3.23)

 

  1. समिति ने सिफारिश की है कि विभाग सभी मंत्रालयों /विभागों में व्यापक प्रचार करके और अनुभव पुरस्कार विजेताओं एवं चयनित योगदानकर्ताओं को मौद्रिक प्रोत्साहन या बढ़ी हुई नकद राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान करने की साध्यता का परीक्षण करके अनुभव पुरस्कार योजना को और सुदृढ़ बनाए।

(पैरा 3.26)

 

  1. समिति पुरजोर सिफारिश करती है कि विभाग एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से, जो मौजूदा पेंशन संसाधन प्रणाली के साथ एकीकृत हो, एक केंद्रीकृत डिजिटल मंजूरीतंत्र विकसित और कार्यान्वित करे, ताकि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सभी आवश्यक एनओसी इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त हो सकें। पोर्टल को सभी संबंधित कार्यालयों को स्वचालित रूप से अनुमोदनअनुरोध भेजना चाहिए, वास्तविक समय में स्थिति देखने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए और समयबद्ध ढंग से एनओसी के इलेक्ट्रॉनिक निर्गमन को सुनिश्चित करना चाहिए।

(पैरा 3.31)

 

  1. समिति का मत है कि ऐसी डिजिटल और केंद्रीकृत प्रणाली पारदर्शिता बढ़ाएगी, प्रशासनिक दक्षता में सुधार करेगी, सेवानिवृत्ति लाभों के निपटान में देरी को रोकेगी और सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की कठिनाइयों को काफी हद तक कम करेगी, साथ ही सरकार के डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य के अनुरूप होगी।

(पैरा 3.32)

 

 

  1. समिति सिफारिश करती है कि विभाग शेष बैंकों को यथाशीघ्र जोड़कर 100 प्रतिशत एकीकरण प्राप्त करने के प्रयासों में तीव्रता लाए, ताकि सभी लाभार्थियों के लिए पेंशन सेवाओं तक व्यापक डिजिटल पहुँच सुनिश्चित हो सके।

(पैरा 3.34)

 

  1. समिति की सिफारिश है कि साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन वित्तीय घोटालों में इस चिंताजनक वृद्धि को देखते हुए, पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग को बैंकों, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, सामान्य सेवा केंद्रों और पेंशनभोगी कल्याण संघों के साथ समन्वय करके सरकारी पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए लक्षित साइबर सुरक्षा एवं धोखाधड़ीनिवारक जागरूकता अभियान तैयार और कार्यान्वित करने चाहिए, ताकि उन्हें ओटीपी/पासवर्ड साझा करने से बचने, नकली पेंशन सत्यापन कॉल या लिंक की पहचान और प्रतिक्रिया देने के तरीकों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके और उन्हें ऐसे मामलों की रिपोर्टिंग के लिए उपलब्ध तंत्रों के बारे में जानकारी दी जा सके।

(पैरा 3.37)

 

 

  1. इसीलिए, समिति सिफारिश करती है कि विभाग रेल विभाग में कार्यान्वित मॉडल के अनुरूप एक कल्याण निरीक्षक प्रणाली शुरू करने पर विचार करे, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को समर्पित सहायता और सुविधा प्रदान की जा सके। समिति का मत है कि कल्याण निरीक्षकों को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति और पेंशन प्रक्रिया के सभी चरणों में मार्गदर्शन करने के लिए प्रमुख सुविधाप्रदाता के रूप में नामित किया जा सकता है।

(पैरा 3.41)

 

  1. इसलिए, समिति सिफारिश करती है कि विभाग एनपीएस से यूपीएस में माइग्रेशन के प्रति सीमित प्रतिक्रिया के कारणों का पता लगाने के लिए एक व्यापक अध्ययन और विस्तृत मूल्यांकन करे। अध्ययन को प्रमुख बाधाओं, प्रक्रियागत सीमाओं, जागरूकता की कमी, या योजना से जुड़े किसी भी प्रत्यक्ष नुकसान या हतोत्साहित करने वाले कारकों की पहचान करनी चाहिए।

(पैरा 3.46)

 

  1. समिति इन पहलों का स्वागत करती है और इस संबंध में विभाग द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करती है।

(पैरा 3.56)

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आरकेके


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